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	<title>Bhumi vivad &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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	<title>Bhumi vivad &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>सक्षम न्यायालय और “लंबित” की स्पष्ट परिभाषा से दाखिल-खारिज मामलों में नहीं होगा अनावश्यक विलंब</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 16:39:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 की धारा 6(12) को लेकर विभाग ने जारी किया है स्पष्ट दिशा निर्देश, वास्तविक खरीदारों को मिलेगी राहत, सभी अंचल अधिकारियों को त्वरित निष्पादन का निर्देश पटना। बिहार विधानसभा में मंगलवार को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न के उत्तर में उपमुख्यमंत्री सह मंत्री, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया कि दाखिल-खारिज वादों एवं अन्य राजस्व मामलों में अनावश्यक विलंब की समस्या को दूर करने के लिए विभाग ने “सक्षम न्यायालय” एवं “लंबित” शब्द की स्पष्ट व्याख्या कर दी है. उन्होंने सदन को अवगत कराया कि बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 की धारा-6 (12) में प्रयुक्त शब्द “सक्षम न्यायालय में लंबित” की विभिन्न अंचलों में अलग-अलग व्याख्या किये जाने के कारण दाखिल-खारिज वादों के निष्पादन में विलंब हो रहा था. इस स्थिति को देखते हुए विभागीय स्तर पर विस्तृत समीक्षा की गई. उपमुख्यमंत्री ने बताया कि विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल द्वारा सभी स्तर के राजस्व अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं. पत्र के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि “सक्षम न्यायालय” से अभिप्रेत दिवानी/व्यवहार न्यायालय (Civil Court), पटना उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय हैं. साथ ही, राजस्व न्यायालय जैसे डीसीएलआर, एडीएम, डीएम, कमिशनर कोर्ट, विधि विभाग द्वारा अधिकृत न्यायालय एवं बिहार भूमि न्यायाधिकरण (BLT) भी सक्षम न्यायालय की श्रेणी में आयेंगे. “लंबित” का अभिप्राय केवल विधिवत दायर एवं प्रक्रियाधीन वाद से होगा, जिसमें न्यायालय द्वारा संज्ञान (Admission), नोटिस निर्गत, या स्थगन/अंतरिम आदेश (Stay Order, Temporary/Permanent Injunction, Status Quo) प्रभावी हो.उन्होंने [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 की धारा 6(12) को लेकर विभाग ने जारी किया है स्पष्ट दिशा निर्देश, वास्तविक खरीदारों को मिलेगी राहत, सभी अंचल अधिकारियों को त्वरित निष्पादन का निर्देश</strong></p>



<p>पटना। बिहार विधानसभा में मंगलवार को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न के उत्तर में उपमुख्यमंत्री सह मंत्री, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया कि दाखिल-खारिज वादों एवं अन्य राजस्व मामलों में अनावश्यक विलंब की समस्या को दूर करने के लिए विभाग ने “सक्षम न्यायालय” एवं “लंबित” शब्द की स्पष्ट व्याख्या कर दी है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="721" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-assembly-vijay-sinha-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-94959" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-assembly-vijay-sinha-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-assembly-vijay-sinha-650x458.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>उन्होंने सदन को अवगत कराया कि बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 की धारा-6 (12) में प्रयुक्त शब्द “सक्षम न्यायालय में लंबित” की विभिन्न अंचलों में अलग-अलग व्याख्या किये जाने के कारण दाखिल-खारिज वादों के निष्पादन में विलंब हो रहा था. इस स्थिति को देखते हुए विभागीय स्तर पर विस्तृत समीक्षा की गई.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="792" height="523" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-vijay-sinha-in-assembly.jpg" alt="" class="wp-image-94957" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-vijay-sinha-in-assembly.jpg 792w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-vijay-sinha-in-assembly-650x429.jpg 650w" sizes="(max-width: 792px) 100vw, 792px" /></figure>



<p>उपमुख्यमंत्री ने बताया कि विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल द्वारा सभी स्तर के राजस्व अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं. पत्र के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि “सक्षम न्यायालय” से अभिप्रेत दिवानी/व्यवहार न्यायालय (Civil Court), पटना उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय हैं. साथ ही, राजस्व न्यायालय जैसे डीसीएलआर, एडीएम, डीएम, कमिशनर कोर्ट, विधि विभाग द्वारा अधिकृत न्यायालय एवं बिहार भूमि न्यायाधिकरण (BLT) भी सक्षम न्यायालय की श्रेणी में आयेंगे.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="740" height="260" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/01/pnc-revenue-and-land-reforms-department-Bihar.jpg" alt="" class="wp-image-94380" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/01/pnc-revenue-and-land-reforms-department-Bihar.jpg 740w, https://www.patnanow.com/assets/2026/01/pnc-revenue-and-land-reforms-department-Bihar-650x228.jpg 650w" sizes="(max-width: 740px) 100vw, 740px" /></figure>



<p>“लंबित” का अभिप्राय केवल विधिवत दायर एवं प्रक्रियाधीन वाद से होगा, जिसमें न्यायालय द्वारा संज्ञान (Admission), नोटिस निर्गत, या स्थगन/अंतरिम आदेश (Stay Order, Temporary/Permanent Injunction, Status Quo) प्रभावी हो.<br>उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल आवेदन, आपत्ति या अभ्यावेदन का किसी न्यायालय में दायर होना “सक्षम न्यायालय में लंबित” नहीं माना जाएगा। यदि किसी सक्षम न्यायालय द्वारा स्पष्ट स्थगनादेश या अंतरिम आदेश प्रभावी नहीं है, तो राजस्व अधिकारी नियमानुसार अपनी कार्यवाही जारी रखेंगे.<br>उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह भी निर्देशित किया गया है कि सक्षम न्यायालय में दायर वाद की अभिप्रमाणित प्रति में यदि स्पष्ट रूप से स्वीकारण (Admission) अंकित नहीं है, तो उसे “लंबित” नहीं माना जाएगा.<br>उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा है कि वास्तविक क्रेताओं (Bonafide Purchasers) को अनावश्यक परेशानी से बचाया जाए तथा दाखिल-खारिज वादों और भूमि विवादों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब सभी अंचल अधिकारी इन स्पष्ट दिशा-निर्देशों के आलोक में कार्य करेंगे और किसी भी वाद को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाएगा.<br>उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और त्वरित सेवा सुनिश्चित करना डबल इंजन की सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.</p>



<p>pncb</p>
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		<title>समयबद्ध सेवा और पारदर्शिता भूमिसुधार विभाग की प्राथमिकता</title>
		<link>https://www.patnanow.com/vijay-sinha-on-revenue/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Feb 2026 14:22:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता और समयबद्धता का नया अध्याय: बिहार ने तय किया ‘पत्थर पर लकीर’ का लक्ष्य : उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा स्पष्ट भू-सम्पदा, सुशासन समृद्धि से शांति सर्वदा राजस्व-भूमिसुधार विभाग की प्राथमिकता : उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा लंबित से लक्षित कार्यसंस्कृति की ओर अग्रसर है राजस्व-भूमिसुधार विभाग : विजय कुमार सिन्हा जनसंवाद, डिजिटल व्यवस्था और सख्ती से घटे लंबित मामले, बढ़ी सेवा की रफ्तार पटना : “मक्खन पर लकीर तो सब खींचते हैं, खींचनी है तो पत्थर पर लकीर खींचो” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इसी सूत्र को ध्येय बनाकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में 24 नवंबर से दायित्व संभालने के बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने आमजन से जुड़े प्रशासन को सरल, सुलभ, पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं. बिहार विधानसभा में 2026-2027 के बजट भाषण में उपमुख्यमंत्री सह मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विभागीय पहलों और उपलब्धियों का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया. उन्होंने कहा कि भूमि से जुड़ी प्रक्रियाएँ कानून की जटिलता, प्रक्रियात्मक अपेक्षाओं और समाज के भावनात्मक जुड़ाव से प्रभावित होती हैं. इसलिए वरीय पदाधिकारियों के साथ शुरुआती बैठकों में ही स्पष्ट कर दिया गया कि राजस्व प्रशासन को जनकेंद्रित और विश्वसनीय बनाना सर्वोच्च प्राथमिकता होगी. बिचौलियों और भूमाफियाओं के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति लागू की गई है. साथ ही डिजिटल और फिजिकल तकनीक से व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है. ‘भूमिसुधार जनकल्याण संवाद’ से जमीनी समाधान 12 दिसंबर से प्रमंडलवार शुरू हुआ ‘भूमिसुधार जनकल्याण संवाद’ जिलावार भी आयोजित किया जाएगा. कार्यक्रम को सोशल मीडिया पर लाइव [&#8230;]]]></description>
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<p>राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता और समयबद्धता का नया अध्याय: बिहार ने तय किया ‘पत्थर पर लकीर’ का लक्ष्य : उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा</p>



<p>स्पष्ट भू-सम्पदा, सुशासन समृद्धि से शांति सर्वदा राजस्व-भूमिसुधार विभाग की प्राथमिकता : उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा</p>



<p>लंबित से लक्षित कार्यसंस्कृति की ओर अग्रसर है राजस्व-भूमिसुधार विभाग : विजय कुमार सिन्हा</p>



<p>जनसंवाद, डिजिटल व्यवस्था और सख्ती से घटे लंबित मामले, बढ़ी सेवा की रफ्तार</p>



<p>पटना : “मक्खन पर लकीर तो सब खींचते हैं, खींचनी है तो पत्थर पर लकीर खींचो” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इसी सूत्र को ध्येय बनाकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में 24 नवंबर से दायित्व संभालने के बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने आमजन से जुड़े प्रशासन को सरल, सुलभ, पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं. बिहार विधानसभा में 2026-2027 के बजट भाषण में उपमुख्यमंत्री सह मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विभागीय पहलों और उपलब्धियों का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="792" height="523" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-vijay-sinha-in-assembly.jpg" alt="" class="wp-image-94957" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-vijay-sinha-in-assembly.jpg 792w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-vijay-sinha-in-assembly-650x429.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 792px) 100vw, 792px" /></figure>



<p>उन्होंने कहा कि भूमि से जुड़ी प्रक्रियाएँ कानून की जटिलता, प्रक्रियात्मक अपेक्षाओं और समाज के भावनात्मक जुड़ाव से प्रभावित होती हैं. इसलिए वरीय पदाधिकारियों के साथ शुरुआती बैठकों में ही स्पष्ट कर दिया गया कि राजस्व प्रशासन को जनकेंद्रित और विश्वसनीय बनाना सर्वोच्च प्राथमिकता होगी. बिचौलियों और भूमाफियाओं के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति लागू की गई है. साथ ही डिजिटल और फिजिकल तकनीक से व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="719" height="498" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-mantri-vijay-sinha-revenue-department.jpg" alt="" class="wp-image-94958" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-mantri-vijay-sinha-revenue-department.jpg 719w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-mantri-vijay-sinha-revenue-department-650x450.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 719px) 100vw, 719px" /></figure>



<p>‘<strong>भूमिसुधार जनकल्याण संवाद’ से जमीनी समाधान</strong></p>



<p>12 दिसंबर से प्रमंडलवार शुरू हुआ ‘भूमिसुधार जनकल्याण संवाद’ जिलावार भी आयोजित किया जाएगा. कार्यक्रम को सोशल मीडिया पर लाइव कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है. इसमें तीन मूल समस्याओं दाखिल-खारिज, परिमार्जन और जमीन मापी को लक्षित कर मौके पर समाधान कराया जा रहा है और समान प्रकृति की समस्याओं के लिए गाइडलाइन तय की जा रही है.</p>



<p>इस पहल का असर आँकड़ों में दिखा:</p>



<p>ऑनलाइन दाखिल-खारिज निष्पादन 75% से बढ़कर 84% हो गया है. लंबित मामलों का अनुपात 25% से घटकर 16% पर आ गया है.<br>‘परिमार्जन प्लस’ निष्पादन 10% से बढ़कर 75% पर पहुंच गया है.<br>विवाद-रहित दाखिल-खारिज के लिए 14 दिन की समय-सीमा निर्धारित कर कार्यों में तेजी लाई जा रही है.</p>



<p><strong>ई-मापी और समयबद्ध सेवा</strong></p>



<p>भूमि मापी के लिए ई मापी व्यवस्था लागू की गई है। निर्विवाद मापी 7 दिन में, विवादित मापी 11 दिन में और रिपोर्ट अपलोड करने की सीमा 14 दिन तय की गई है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="740" height="260" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/01/pnc-revenue-and-land-reforms-department-Bihar.jpg" alt="" class="wp-image-94380" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/01/pnc-revenue-and-land-reforms-department-Bihar.jpg 740w, https://www.patnanow.com/assets/2026/01/pnc-revenue-and-land-reforms-department-Bihar-650x228.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 740px) 100vw, 740px" /></figure>



<p><strong>एग्रीस्टैक और फार्मर रजिस्ट्री को गति</strong></p>



<p>इन सुधारों से राज्य में चल रहे एग्रीस्टैक महाभियान को भी गति मिली. मात्र 35 दिनों में 40 लाख किसानों की फार्मर रजिस्ट्री संभव हुई. दिसंबर से जनवरी अंत तक दाखिल-खारिज और परिमार्जन के 40 लाख लंबित आवेदनों में से 11.50 लाख का निष्पादन किया गया.</p>



<p><strong>जाली दस्तावेजों पर सख्ती, शहरी वंशावली की नई व्यवस्था</strong></p>



<p>भूमि विवाद का बड़ा कारण जाली दस्तावेजों पर अब अनिवार्य प्राथमिकी का निर्देश दिया गया है. शहरी क्षेत्रों में वंशावली निर्गत करने की जिम्मेदारी अंचलाधिकारियों को सौंपी गई है.</p>



<p><strong>पुराने अभिलेखों से आधुनिक सर्वे की ओर</strong></p>



<p>अधिकांश भूमि अभिलेख 1890–1920 के कैडेस्ट्रल सर्वे काल के हैं। 1958 में शुरू रीविजनल सर्वे 1975 में रुक गया था. अब सटीक, सहज और समयबद्ध भूमि सर्वे की दिशा में राजस्व महाभियान को गति दी गई है. 31 मार्च 2026 तक 46 लाख लंबित आवेदनों के निष्पादन का लक्ष्य है। अब तक 34 लाख से अधिक दस्तावेज स्कैन किए जा चुके हैं. </p>



<p><strong>डिजिटल, पेपरलेस और AI-सक्षम राजस्व न्याय</strong></p>



<p>आवेदन से आदेश तक पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पेपरलेस बनाया गया है, जिसमें AI तकनीक का उपयोग भी शामिल है. इससे न्याय देने की गति बढ़ी है. नियमित सुनवाई, समय पर अपील और आधुनिक प्रणाली से राजस्व न्याय व्यवस्था में सुधार हुआ है. DCLR/ADM स्तर पर निष्पादन दर 51.7% से बढ़कर 55.9% हुई है। इसको लगातार बढ़ाना उद्देश्य है.</p>



<p><strong>मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण : नए पद, नई नियमावली</strong></p>



<p>राज्य में राजस्व कर्मचारी के 3303 नए पद सृजित किए गए हैं। पहले स्वीकृत 8472 पदों की तुलना में अब कुल पदों की संख्या बढ़कर 11,775 हो गई है. वर्तमान में लगभग 3767 कर्मी कार्यरत हैं. रिक्तियों को भरने के लिए वर्ष 2023 में 3559 पदों पर बहाली हेतु अधियाचना बिहार कर्मचारी चयन आयोग को भेजी गई.<br>शेष रिक्त पदों के रोस्टर क्लियरेंस के बाद वर्ष 2025 में 4492 पदों के लिए प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग को प्रेषित की गई है.<br>इससे अंचल स्तर पर लंबित मामलों के निष्पादन, अभिलेख संधारण और जनसेवा की गति में प्रत्यक्ष सुधार की अपेक्षा है.</p>



<p><strong>अमीन संवर्ग: नई नियमावली, तीन-स्तरीय पद सोपान</strong></p>



<p>भूमि मापी व्यवस्था को समयबद्ध और तकनीक-संपुष्ट बनाने के लिए अमीन संवर्ग को भी राज्य स्तरीय दर्जा दिया गया है. इसके तहत बिहार अमीन संवर्ग नियमावली, 2025 लागू की गई है. अब अमीन संवर्ग में तीन-स्तरीय पद सोपान निर्धारित है, अमीन, अमीन ग्रेड-1 और प्रधान अमीन.<br>राज्य में अमीन के कुल 2502 स्वीकृत पद हैं, जिनमें लगभग 1199 कार्यरत हैं। शेष रिक्तियों के रोस्टर क्लियरेंस के बाद 765 पदों पर नियमित नियुक्ति हेतु प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा गया है.<br>आगे उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व अभिलेखों को अब ऑनलाइन उपलब्ध कराया जा रहा है. एक जनवरी से चिरकुट से दस्तावेज निकालने की व्यवस्था बंद कर दी गई है. लोगों को इसमें परेशानी न हो इसके लिए प्रत्येक अंचल में अंचल अभिलेखागार भवन स्थापित किये गए हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="721" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-assembly-vijay-sinha-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-94959" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-assembly-vijay-sinha-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-assembly-vijay-sinha-650x458.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>बजट भाषण में उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विभाग “लंबित” से “लक्षित” कार्यसंस्कृति की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है, जहाँ जनविश्वास, पारदर्शिता और समयबद्ध सेवा ही राजस्व प्रशासन की पहचान बनेगी. इसलिए विभाग ने अपना ध्येय वाक्य स्पष्ट भू-सम्पदा, सुशासन, समृद्धि से शांति सर्वदा को बनाया है.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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			</item>
		<item>
		<title>थानों की मनमानी पर लगाम: भूमि विवाद में पुलिस की भूमिका आज से सीमित, कानून के दायरे में ही होगा हस्तक्षेप</title>
		<link>https://www.patnanow.com/thana-ki-manmani-per-lagam/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 01 Feb 2026 05:54:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[CITY/OFFICE]]></category>
		<category><![CDATA[Crime]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
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		<category><![CDATA[Land reforms]]></category>
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		<category><![CDATA[VIJAY SINHA]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.patnanow.com/?p=94652</guid>

					<description><![CDATA[पटना : 1 फरवरी 2026 से राज्यभर में भूमि विवाद से जुड़े मामलों में पुलिस की भूमिका को लेकर जारी नए दिशा-निर्देश प्रभावी हो गए हैं. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा जारी इन स्पष्ट प्रावधानों का उद्देश्य भूमि विवादों के समाधान को पूरी तरह राजस्व एवं न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में सुनिश्चित करना है, ताकि आमजन को अनावश्यक पुलिस हस्तक्षेप, दबाव या भ्रम की स्थिति का सामना न करना पड़े. उपमुख्यमंत्री सह मंत्री, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि आज से भूमि विवाद राजस्व और न्यायिक प्रक्रिया का विषय है. पुलिस का दायित्व केवल शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है. बिना सक्षम प्राधिकार के आदेश के किसी भी स्तर पर दखल-कब्जा दिलाने, चहारदीवारी कराने या निर्माण कराने की शिकायत मिली, तो संबंधित पुलिस पदाधिकारी पर कड़ी कार्रवाई तय है. नई व्यवस्था के मुख्य बिंदु भूमि विवाद की सूचना मिलते ही थाना में स्टेशन डायरी में अलग एवं विस्तृत प्रविष्टि अनिवार्य होगी. दोनों पक्षों का नाम-पता, विवाद का स्वरूप (राजस्व/सिविल/आपसी), भूमि का पूरा विवरण (थाना, खाता, खेसरा, रकबा, किस्म) दर्ज करना होगा. यह भी उल्लेख करना होगा कि मामला प्रथम दृष्टया किस राजस्व न्यायालय के क्षेत्राधिकार में आता है. प्रत्येक मामले की लिखित सूचना संबंधित अंचलाधिकारी को देना अनिवार्य होगा सूचना ई-मेल/पोर्टल के माध्यम से भी दी जा सकती है. भूमि विवाद के त्वरित समाधान के लिए अब प्रत्येक शनिवार को अंचलाधिकारी और थाना प्रभारी की संयुक्त बैठक होगी, जिसमें मामलों की समीक्षा कर प्रगति विभागीय पोर्टल पर अपलोड की जाएगी. धारा 107/116 दंप्रसं (BNSS [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पटना : 1 फरवरी 2026 से राज्यभर में भूमि विवाद से जुड़े मामलों में पुलिस की भूमिका को लेकर जारी नए दिशा-निर्देश प्रभावी हो गए हैं. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा जारी इन स्पष्ट प्रावधानों का उद्देश्य भूमि विवादों के समाधान को पूरी तरह राजस्व एवं न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में सुनिश्चित करना है, ताकि आमजन को अनावश्यक पुलिस हस्तक्षेप, दबाव या भ्रम की स्थिति का सामना न करना पड़े.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="682" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-dbg-vijay-sinha-jan-sunwai-revenue-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-94636" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-dbg-vijay-sinha-jan-sunwai-revenue-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/02/pnc-dbg-vijay-sinha-jan-sunwai-revenue-650x433.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>उपमुख्यमंत्री सह मंत्री, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि आज से भूमि विवाद राजस्व और न्यायिक प्रक्रिया का विषय है. पुलिस का दायित्व केवल शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है. बिना सक्षम प्राधिकार के आदेश के किसी भी स्तर पर दखल-कब्जा दिलाने, चहारदीवारी कराने या निर्माण कराने की शिकायत मिली, तो संबंधित पुलिस पदाधिकारी पर कड़ी कार्रवाई तय है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="740" height="260" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/01/pnc-revenue-and-land-reforms-department-Bihar.jpg" alt="" class="wp-image-94380" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/01/pnc-revenue-and-land-reforms-department-Bihar.jpg 740w, https://www.patnanow.com/assets/2026/01/pnc-revenue-and-land-reforms-department-Bihar-650x228.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 740px) 100vw, 740px" /></figure>



<p><strong>नई व्यवस्था के मुख्य बिंदु</strong></p>



<p>भूमि विवाद की सूचना मिलते ही थाना में स्टेशन डायरी में अलग एवं विस्तृत प्रविष्टि अनिवार्य होगी.</p>



<p>दोनों पक्षों का नाम-पता, विवाद का स्वरूप (राजस्व/सिविल/आपसी), भूमि का पूरा विवरण (थाना, खाता, खेसरा, रकबा, किस्म) दर्ज करना होगा.</p>



<p>यह भी उल्लेख करना होगा कि मामला प्रथम दृष्टया किस राजस्व न्यायालय के क्षेत्राधिकार में आता है.</p>



<p>प्रत्येक मामले की लिखित सूचना संबंधित अंचलाधिकारी को देना अनिवार्य होगा सूचना ई-मेल/पोर्टल के माध्यम से भी दी जा सकती है.</p>



<p>भूमि विवाद के त्वरित समाधान के लिए अब प्रत्येक शनिवार को अंचलाधिकारी और थाना प्रभारी की संयुक्त बैठक होगी, जिसमें मामलों की समीक्षा कर प्रगति विभागीय पोर्टल पर अपलोड की जाएगी.</p>



<p>धारा 107/116 दंप्रसं (BNSS समकक्ष प्रावधान) के तहत पुलिस की भूमिका यथावत रहेगी, लेकिन इसका उपयोग केवल शांति व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित होगा.</p>



<p><strong>‘सबका सम्मान, जीवन आसान’ की दिशा में बड़ा कदम</strong></p>



<p>पत्र में उल्लेख है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सात निश्चय-3 (2025-2030) के अंतर्गत “सबका सम्मान, जीवन आसान (Ease of Living)” के लक्ष्य को धरातल पर उतारने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है. राज्य के लगभग 4.5 करोड़ जमाबंदी धारकों को भूमि विवादों में पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध समाधान मिल सके, यही इस नई प्रणाली का उद्देश्य है.<br>यह व्यवस्था स्पष्ट करती है कि अब भूमि विवाद में न तो थानों की मनमानी चलेगी और न ही पुलिस हस्तक्षेप की आड़ में किसी को डराया-धमकाया जा सकेगा. हर विवाद का समाधान अब कानून के दायरे में, राजस्व न्यायालयों की प्रक्रिया के अनुसार ही सुनिश्चित किया जाएगा.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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		<item>
		<title>सरकारी भूमि और कोर्ट ऑर्डर से संबंधित मामले भी अब होंगे ऑनलाइन</title>
		<link>https://www.patnanow.com/revenue-department-on-e-mapi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 30 Nov 2024 10:23:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[CITY/OFFICE]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना।। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने ई-मापी से संबंधित महत्वपूर्ण निर्देश दिया है. दरअसल राज्य के रैयतों को मापी हेतु ऑनलाइन आवेदन देने की सुविधा दी गई है. किन्तु सरकारी भूमि, न्यायालय द्वारा पारित आदेश, विधि व्यवस्था से संबंधित मामले एवं लोक शिकायत निवारण में पारित आदेश के मामले में मापी शुरू करने के बारे में स्पष्ट दिशा निदेश का अभाव था. निदेश दिया गया कि ई-मापी पोर्टल के ड्रॉप डाउन में उक्त चारों मामलों को जोड़ा जाए. बैठक में यह निदेश भी दिया गया कि ई-मापी को भू-अभिलेख पोर्टल से अविलंब जोड़ दिया जाए. इससे रैयतों की अपनी जमीन की मापी की सत्यापित प्रति पाने में सहूलियत होगी. इसके संबंध में रैयतों को समाचार पत्रों के माध्यम से भी जानकारी देने का निदेश अपर मुख्य सचिव द्वारा दिया गया ताकि आमलोग इसका फायदा उठा सकें. कुछ महीने पहले विभाग द्वारा परिमार्जन प्लस पोर्टल के जरिए जमाबंदी में सुधार की सुविधा दी गई थी. इनमें वैसी जमाबंदियों के डिजिटाइजेशन का भी प्रावधान है जो शुरूआती दौर में छूट गई थीं. निर्णय लेने के लिए भूमि की मापी आवश्यक होती है. अपर मुख्य सचिव ने निदेश दिया कि बिना जमाबंदी के भी नापी का प्रावधान किया जा सके इसका प्रावधान किया जाए.बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि राज्य में प्रति अमीन प्रति दिन औसतन 3 मापी का कार्य किया जा रहा है. ये सभी रैयती भूमि से संबंधित मामले हैं. इनमें सरकारी भूमि की मापी का मामला शामिल नहीं है. इसलिए [&#8230;]]]></description>
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<p>पटना।। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने ई-मापी से संबंधित महत्वपूर्ण निर्देश दिया है. दरअसल राज्य के रैयतों को मापी हेतु ऑनलाइन आवेदन देने की सुविधा दी गई है. किन्तु सरकारी भूमि, न्यायालय द्वारा पारित आदेश, विधि व्यवस्था से संबंधित मामले एवं लोक शिकायत निवारण में पारित आदेश के मामले में मापी शुरू करने के बारे में स्पष्ट दिशा निदेश का अभाव था. निदेश दिया गया कि ई-मापी पोर्टल के ड्रॉप डाउन में उक्त चारों मामलों को जोड़ा जाए.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="360" height="364" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/pnc-acs-education-ias-deepak-kumar-singh.jpg" alt="" class="wp-image-72519" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/pnc-acs-education-ias-deepak-kumar-singh.jpg 360w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/pnc-acs-education-ias-deepak-kumar-singh-346x350.jpg 346w" sizes="auto, (max-width: 360px) 100vw, 360px" /></figure>



<p>बैठक में यह निदेश भी दिया गया कि ई-मापी को भू-अभिलेख पोर्टल से अविलंब जोड़ दिया जाए. इससे रैयतों की अपनी जमीन की मापी की सत्यापित प्रति पाने में सहूलियत होगी. इसके संबंध में रैयतों को समाचार पत्रों के माध्यम से भी जानकारी देने का निदेश अपर मुख्य सचिव द्वारा दिया गया ताकि आमलोग इसका फायदा उठा सकें. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="946" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/06/PNC-parimarjan-Bihar-bhumi-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-84648" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/06/PNC-parimarjan-Bihar-bhumi-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/06/PNC-parimarjan-Bihar-bhumi-650x601.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>कुछ महीने पहले विभाग द्वारा परिमार्जन प्लस पोर्टल के जरिए जमाबंदी में सुधार की सुविधा दी गई थी. इनमें वैसी जमाबंदियों के डिजिटाइजेशन का भी प्रावधान है जो शुरूआती दौर में छूट गई थीं. निर्णय लेने के लिए भूमि की मापी आवश्यक होती है. अपर मुख्य सचिव ने निदेश दिया कि बिना जमाबंदी के भी नापी का प्रावधान किया जा सके इसका प्रावधान किया जाए.<br>बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि राज्य में प्रति अमीन प्रति दिन औसतन 3 मापी का कार्य किया जा रहा है. ये सभी रैयती भूमि से संबंधित मामले हैं. इनमें सरकारी भूमि की मापी का मामला शामिल नहीं है. इसलिए सरकारी भूमि की मापी का अभिलेख ऑनलाइन किए जाने की आवश्यकता है. बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि ससमय मापी फीस का भुगतान नहीं करने पर आवेदन को निरस्त कर दिया जाए. इसके लिए 60 दिनों का समय निर्धारित किया गया है. लोगों को इसकी जानकारी हो इसके लिए विज्ञापन देने का निर्णय लिया गया है.<br>बैठक में यह भी निदेश दिया गया कि ऐसी व्यवस्था की जाए कि आमलोग मापी का आवदेन रेवेन्यू कोर्ट मैनेजमेंट के जरिए भी ऑनलाइन कर सकें और ऑनलाइन ही ई-मापी की रिपोर्ट हासिल कर सकें.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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		<title>जानबूझकर आवेदन अस्वीकृत करनेवाले सीओ की होगी पहचान</title>
		<link>https://www.patnanow.com/co-meet-me-chetawani/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Sep 2024 16:30:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[CITY/OFFICE]]></category>
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		<category><![CDATA[Bhumi vivad]]></category>
		<category><![CDATA[Circle officer]]></category>
		<category><![CDATA[Co meeting]]></category>
		<category><![CDATA[Dakhil kharij]]></category>
		<category><![CDATA[Mutation]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना।। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा कई प्रकार की ऑनलाइन सेवाएं दी जा रही हैं. इनमें से कई सेवाओं में अस्वीकृति की दर काफी अधिक है.कई बार अस्वीकृति का यह निर्णय जल्दबाजी में या निहित स्वार्थवश लिया जाता है. इससे निर्दोष लोगों के साथ अन्याय होता है. यह नहीं होना चाहिए. कई बार डीसीएलआर, एडीएम या डीएम के स्तर पर सुनवाई में पता चलता है कि आपका निर्णय गलत था. तबतक नुकसान हो चुका होता है. कई मामलों में वरीय पदाधिकारियों का आदेश लेकर रैयत भटकता रहता है, अंचल अधिकारी ध्यान नहीं देते हैं. लोग सालों तक दौड़ते रहते हैं. ये आपराधिक कृत्य हैं, जिनको नजर अंदाज नहीं किया जा सकता. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री डॉ दिलीप कुमार जायसवाल आज दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन संस्थान में अंचल अधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे. डॉ जायसवाल ने जानबूझकर आवेदनों को अस्वीकृत करनेवाले अंचल अधिकारियों की पहचान करके उनके खिलाफ कार्रवाई करने का निदेश विभाग के अधिकारियों को दिया. आज की बैठक में म्युटेशन के मामलों की विस्तार से समीक्षा की गई. दाखिल-खारिज के सर्वाधिक 47.93 फीसदी अस्वीकृति के मामले सीतामढ़ी के सुप्पी अंचल में पाए गए. 44 फीसदी अस्वीकृति के साथ पटना का पंडारक दूसरे जबकि 39.9 फीसदी अस्वीकृति के साथ बेगूसराय का साम्हो अखा कुरहा तीसरे स्थान पर था.निर्धारित समय सीमा के बाद लंबित आवेदनों की संख्या सर्वाधिक 7018 रोहतास के सदर अंचल में पाई गई जबकि 6748 लंबित आवेदनों के साथ पटना सदर अंचल दूसरे स्थान पर और 6428 लंबित आवेदनों के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पटना।। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा कई प्रकार की ऑनलाइन सेवाएं दी जा रही हैं. इनमें से कई सेवाओं में अस्वीकृति की दर काफी अधिक है.कई बार अस्वीकृति का यह निर्णय जल्दबाजी में या निहित स्वार्थवश लिया जाता है. इससे निर्दोष लोगों के साथ अन्याय होता है. यह नहीं होना चाहिए. कई बार डीसीएलआर, एडीएम या डीएम के स्तर पर सुनवाई में पता चलता है कि आपका निर्णय गलत था. तबतक नुकसान हो चुका होता है. कई मामलों में वरीय पदाधिकारियों का आदेश लेकर रैयत भटकता रहता है, अंचल अधिकारी ध्यान नहीं देते हैं. लोग सालों तक दौड़ते रहते हैं. ये आपराधिक कृत्य हैं, जिनको नजर अंदाज नहीं किया जा सकता. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/09/1000091449-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-87125" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/09/1000091449-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/09/1000091449-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/09/1000091449-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="683" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/09/1000091447-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-87122" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/09/1000091447-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/09/1000091447-650x433.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/09/1000091447-1536x1024.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2024/09/1000091447-2048x1365.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री डॉ दिलीप कुमार जायसवाल आज दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन संस्थान में अंचल अधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे. डॉ जायसवाल ने जानबूझकर आवेदनों को अस्वीकृत करनेवाले अंचल अधिकारियों की पहचान करके उनके खिलाफ कार्रवाई करने का निदेश विभाग के अधिकारियों को दिया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/09/1000091450-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-87126" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/09/1000091450-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/09/1000091450-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/09/1000091450-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>आज की बैठक में म्युटेशन के मामलों की विस्तार से समीक्षा की गई. दाखिल-खारिज के सर्वाधिक 47.93 फीसदी अस्वीकृति के मामले सीतामढ़ी के सुप्पी अंचल में पाए गए. 44 फीसदी अस्वीकृति के साथ पटना का पंडारक दूसरे जबकि 39.9 फीसदी अस्वीकृति के साथ बेगूसराय का साम्हो अखा कुरहा तीसरे स्थान पर था.<br>निर्धारित समय सीमा के बाद लंबित आवेदनों की संख्या सर्वाधिक 7018 रोहतास के सदर अंचल में पाई गई जबकि 6748 लंबित आवेदनों के साथ पटना सदर अंचल दूसरे स्थान पर और 6428 लंबित आवेदनों के साथ पटना का संपतचक अंचल तीसरे स्थान पर रहा.<br>पटना सदर अंचल अधिकांश मापदंडों पर फिसड्डी रहा और अंचल अधिकारियों की मासिक रैंकिंग में पटना सदर को अगस्त माह में सबसे नीचे यानि 534वां स्थान प्राप्त हुआ. सदर अंचल अधिकारी ने मात्र 2 फीसदी दस्तावेजों पर डिजिटल हस्ताक्षर किए जबकि वहां मात्र 25 फीसदी सरकारी जमीन की इंट्री की गई. इन्हीं मामलों में जिला का स्कोर क्रमशः 35 फीसदी एवं 90 फीसदी रहा.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/09/1000091448-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-87127" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/09/1000091448-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/09/1000091448-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/09/1000091448-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>आज की बैठक में म्युटेशन प्लस के अलावे परिमार्जन प्लस की प्रगति की समीक्षा की गई. परिमार्जन प्लस में डिजिटाइज्ड जमाबंदी एवं छूटी हुई जमाबंदी की अलग-अलग समीक्षा की गई. दोनों में प्रगति को असंताषजनक पाया गया. यह तथ्य भी सामने आया कि 86 अंचल अधिकारियों ने जून माह से अबतक परिमार्जन प्लस में आए एक भी आवेदन का निष्पादन नहीं किया था.<br>अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने सभी अंचल अधिकारियों को अक्टूबर तक अपने प्रदर्शन में सुधार करने की चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि परिमार्जन प्लस पोर्टल पर दिए गए आवेदनों में से 50 फीसदी आवेदनों का निष्पादन हर हाल में अक्टूबर माह के आखिर तक हो जाना चांहिए. इसी तरह उन्होंने म्युटेशन के 6 लाख लंबित मामलों को घटाकर 2 लाख लाने की लक्ष्य दिया है.<br>अपर मुख्य सचिव ने विभागीय अधिकारियों को म्युटेशन एवं परिमार्जन के रिजेक्टेड एवं रिवर्टेड मामलों की रैंडमली यानि बेतरतीब ढंग से जांच करने का आदेश विभागीय अधिकारियों को दिया ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अस्वीकृति के पीछे कोई वाजिब कारण है या उसके पीछे अंचल अधिकारियों की मनमानी है.<br>अपर मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि जिन अंचल अधिकारियों की मासिक रैंकिंग लगातार खराब रहेगी, वह उनके खिलाफ कार्रवाई का सबसे मजबूत आधार बनेगी. उन्होंने आईटी मैनेजर को कहा कि अक्टूबर माह से हरेक अंचल अधिकारी का पिछले 6 माह का रैंकिंग भी तैयार करें.<br>सचिव श्री जय सिंह ने कहा कि अंचल अधिकारी दैनिक और साप्ताहिक आधार पर अपने कर्मचारियों के साथ बैठक करें. लंबित मामलों की रोज प्रगति देखें. जिन मामलों में कागजी साक्ष्य कम हैं उनका फील्ड विजिट कर सत्यापन कर लें.<br>आज की बैठक में पूरे बिहार से 170 अंचल अधिकारियों को बुलाया गया था. बाढ़ के कारण बेगूसराय एवं भागलपुर के अंचल अधिकारी बैठक में शामिल नहीं हुए. बैठक का उद्देश्य ऑनलाइन सेवाओं में जोड़ी गई नई विशेषताओं के बारे में अंचल अधिकारियों को जानकारी देना और उनके फीडबैक के आधार पर इन सेवाओं में और सुधार करना है. बैठक में विभाग के अपर सचिव अरूण कुमार सिंह समेत विशेष सचिव, संयुक्त सचिव एवं अन्य सभी पदाधिकारी मौजूद थे.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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