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	<title>Bhojpurifolksong &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>प्रस्तुति के पहले दिन ही दर्शकों से खचाखच रही ओपन थियेटर गैलरी</title>
		<link>https://www.patnanow.com/ganga-snan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 28 May 2022 04:16:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
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					<description><![CDATA[लगभग 2 घंटे देरी से शुरू हुई प्रस्तुति, नही हिले दर्शक नाटक के सकरात्मक संदेश ने अंत तक दर्शकों को जोड़े रखा रंगमंच के मंजे कलाकारों ने दिखाया अभिनय का जलवा, नवोदित कलाकारों में दिखी गजब की ऊर्जा आरा,28 मई. प्रभाव क्रियेटिव सोसाइटी द्वारा तैयार भिखारी ठाकुर रचित सुप्रसिद्ध नाटक &#8216;गंगा स्नान&#8217; का मंचन शुक्रवार की शाम वीर कुंवर सिंह स्टेडियम में कलाकारों द्वारा बनाए गए बाबू ललन सिंह मुक्ताकाश मंच पर किया गया. नाटक का शुभारंभ मुख्य अतिथि के रूप में भावी मेयर प्रत्याशी विष्णु सिंह दीप प्रज्जवलित कर किया, जिसमें पूर्व पार्षद व भावी मेयर प्रत्याशी जितेंद्र शुक्ला, समाजसेवी अभय विश्वास भट्ट और संस्था के सचिव कमलेश कुंदन भी संयुक्त रूप से शामिल हुए. मुख्य अतिथि ने कम शब्दों में आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कला से उनका पुराना नाता है. कला न सिर्फ मनोरंजन बल्कि जीवन जीना भी सिखाता है. दो दिवसीय इस कार्यक्रम के पहले दिन कार्यक्रम लगभग दो घंटे विलंब से शुरू हुआ. बावजूद इसके दर्शकों ने नाटक के अंत तक अपनी उपस्थिति दर्ज करा यह जरूर साबित कर दिया कि न सिर्फ वे नाट्य प्रेमी हैं बल्कि नाटक ने उन्हें अपने रस से बांधे रखा. ग्रामीण समाज में गंगा स्नान करने के महत्व पर आधारित इस नाटक में एक घर की कहानी है जिसमें मलेछु बहु और अटपट बहु गंगा स्नान करने के लिए जाना चाहती है लेकिन उनके पति तैयार नहीं होते हैं. इसी बीच उनकी बुढ़ी मां भी गंगा स्नान के लिए चलने को कहती है. बेटा मां [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>लगभग 2 घंटे देरी से शुरू हुई प्रस्तुति, नही हिले दर्शक</strong></p>



<p><strong>नाटक के सकरात्मक संदेश ने अंत तक दर्शकों को जोड़े रखा </strong></p>



<p>रं<strong>गमंच के मंजे कलाकारों ने दिखाया अभिनय का जलवा, नवोदित कलाकारों में दिखी गजब की ऊर्जा</strong></p>



<p>आरा,28 मई. प्रभाव क्रियेटिव सोसाइटी द्वारा तैयार भिखारी ठाकुर रचित सुप्रसिद्ध नाटक &#8216;गंगा स्नान&#8217; का मंचन शुक्रवार की शाम वीर कुंवर सिंह स्टेडियम में कलाकारों द्वारा बनाए गए बाबू ललन सिंह मुक्ताकाश मंच पर किया गया. नाटक का शुभारंभ मुख्य अतिथि के रूप में भावी मेयर प्रत्याशी विष्णु सिंह दीप प्रज्जवलित कर किया, जिसमें पूर्व पार्षद व भावी मेयर प्रत्याशी जितेंद्र शुक्ला, समाजसेवी अभय विश्वास भट्ट और संस्था के सचिव कमलेश कुंदन भी संयुक्त रूप से शामिल हुए. मुख्य अतिथि ने कम शब्दों में आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कला से उनका पुराना नाता है. कला न सिर्फ मनोरंजन बल्कि जीवन जीना भी सिखाता है.</p>



<p>दो दिवसीय इस कार्यक्रम के पहले दिन कार्यक्रम लगभग दो घंटे विलंब से शुरू हुआ. बावजूद इसके दर्शकों ने नाटक के अंत तक अपनी उपस्थिति दर्ज करा यह जरूर साबित कर दिया कि न सिर्फ वे नाट्य प्रेमी हैं बल्कि नाटक ने उन्हें अपने रस से बांधे रखा.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="355" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220528-094015.jpg" alt="" class="wp-image-62805" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220528-094015.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220528-094015-350x191.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>ग्रामीण समाज में गंगा स्नान करने के महत्व पर आधारित इस नाटक में एक घर की कहानी है जिसमें मलेछु बहु और अटपट बहु गंगा स्नान करने के लिए जाना चाहती है लेकिन उनके पति तैयार नहीं होते हैं. इसी बीच उनकी बुढ़ी मां भी गंगा स्नान के लिए चलने को कहती है. बेटा मां को ले जाने के लिए तैयार हो जाता है लेकिन उसकी पत्नी उसे ले जाने से मना करती है वह कहती है कि अगर वह बुढ़िया को ले जाएगा तो जहर खा कर मर जायेगी. पत्नी के इस हठ के कारण वह अपनी बूढ़ी मां को मारता पीटता और अंत में वह इस बात पर तैयार होता है कि समान बूढ़ी मां को ढोना पड़ेगा. बेचारी बूढ़ी मां तैयार हो जाती है. सभी गंगा स्नान के लिए जाते हैं. गंगा किनारे मेला लगा है बूढ़ी माता से समान गिर जाने के कारण वे उसे वही छोड़ कर चले जाते हैं. मेले में मलेछू को एक बाबा मिलते हैं. वह उनके जाल में फंस जाता है. पुत्र की प्राप्ति के चक्कर में अपनी पत्नी को बाबा के हवाले कर देता है. बाबा उसकी पत्नी के सारे गहने लूट लेता है. अब मलेछु अपनी पत्नी को भटकता मेले में खोजता है. जब उसकी पत्नी मिलती है तब उन्हें अपने किए पर पछतावा होता है और दोनो मिलकर फिर अपनी बूढ़ी मां को खोज घर वापस आते हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="351" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220528-094024.jpg" alt="" class="wp-image-62806" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220528-094024.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220528-094024-350x189.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>भिखारी ठाकुर ने गंगा स्नान के माध्यम से परिवार में बुज़ुर्गों की जिस उपेक्षा को दिखाया था प्रभाव क्रियेटिव सोसाइटी की प्रस्तुति ने उसे बेहद ही प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया,जिसके लिए युवा निर्देशक व रंगकर्मी मनोज सिंह बधाई के पात्र हैं.<br>वहीं गीत संगीत को अपने सुरों में पिरोकर नाटक में ठेठ देसीपन का जो आनंद लोकगीतों के माध्यम से श्याम शर्मिला ने दिया कि दर्शक अभिनय और लोकसंगीत के इस जादू में अंत तक फंसे रहे.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="441" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220528-094742.jpg" alt="" class="wp-image-62808" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220528-094742.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220528-094742-350x237.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>मलेछु की भूमिका में डॉ पंकज भट्ट, मलेछु बहु की भूमिका में खुशबू स्पृहा, मां की भूमिका में आशा पाण्डेय, अटपट की भूमिका में युवा रंगकर्मी शुभम दूबे, अटपट बहु की भूमिका में ऋतु पांडेय, ढोंगी बाबा की भूमिका में हर्ष जैन ने जहां नाटक में अपनी जीवंत अभिनय से दर्शकों के बीच अपनी जादूगरी कायम की, वही विभिन्न भूमिकाओं में प्रिंस शर्मा , दीपक तिवारी ट्रेन,कुणाल, रितेश टाइगर, मुकेश ओझा,अभिषेक, राजू कुमार सिंह,सुन्दरम बाबा ने अपनी ऊर्जा का परिचय उपस्थित दर्शकों को दिया.</p>



<p>संगीत में तबला पर अभय ओझा और नाल पर हरिशंकर निराला ने साथ दिया तो झाल व अन्य वाद्य यंत्रों के साथ सह गायन में जागृति कुमारी,तारकेश्वर चौबे,संतोष चौबे और वीरेंद्र ओझा ने संगीत को प्रभावी बनाने में समूह गायन का लोहा मनवाया. प्रस्तुति संयोजक मनोज श्रीवास्तव, प्रस्तुति नियंत्रक ओ पी पांडेय और मंगलेश तिवारी थे. धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ रंगकर्मी अंबुज कुमार ने किया.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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		<title>नही रही भोजपुरी की इनसाइक्लोपीडिया रेखा तिवारी !</title>
		<link>https://www.patnanow.com/nahi-rehi-folk-singer-rekha-tiwari/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Apr 2021 11:24:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[एक हफ्ते से थी सांस में तकलीफ, बुधवार को लिया अंतिम साँस पटना,21 अप्रैल(ओ पी पांडेय). भोजपुरी की इनसाइक्लोपीडिया के नाम से विख्यात 48 वर्षीय लोक गायिका रेखा तिवारी ने आज बोकारो में अंतिम सांस लिया. वे पिछले 14 अप्रैल से अस्पताल में इलाजरत थीं. कोरोना की वजह से साँस लेने में तकलीफ के कारण वे अस्पताल में ऑक्सीजन पर थीं. उनका स्वास्थ्य सुधर भी रहा था लेकिन मंगलवार से उनका बीपी लो होने लगा और लगातार ऑक्सीजन लेवल भी कम होने के कारण बुधवार की अहले सुबह लभगग 5.30 बजे उनका देहावसान हो गया. लोकसंगीत की बात हो और रेखा तिवारी का नाम न आये ये संभव नही है. शायद ही कोई भोजपुरी का लोकोत्सव हो या लोकपर्व जो उनसे अछूता रह गया हो. हमेशा चेहरे पर मुस्कान और आवाज में भोजपुरी की सोंधी खुश्बू के साथ जब उनकी टांस सुनने को जिसे मिकता वो उनका मुरीद हो जाता था. उनकी आवाज का जादू सबके सिर चढ़कर बोलता था. किसी बात की जब चर्चा होती उनके पास उसके लिए गीत मौजूद होता था. ऐसी त्वरित डिमांड पेश करने वाली बहुचर्चित लोकगायिका रेखा तिवारी का निधन बुधवार को कोरोना की वजह से हो गया. उनकी तबियत पिछले एक हफ्ते से खराब चल रही थी. उन्हें साँस लेने में तकलीफ थी. यह सांस की तकलीफ भोजपुरी के सुरों की सांस छीन लेगा ये कोई नही जानता था. रेखा तिवारी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव थीं. उन्होंने अभी हाल के चैत नवरात्रि का पूजन भी लोगों से शेयर किया था इसके पहले [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>एक हफ्ते से थी सांस में तकलीफ, बुधवार को लिया अंतिम साँस</strong></p>



<p>पटना,21 अप्रैल(<strong>ओ पी पांडेय</strong>). भोजपुरी की इनसाइक्लोपीडिया के नाम से विख्यात 48 वर्षीय लोक गायिका रेखा तिवारी ने आज बोकारो में अंतिम सांस लिया. वे पिछले 14 अप्रैल से अस्पताल में इलाजरत थीं. कोरोना की वजह से साँस लेने में तकलीफ के कारण वे अस्पताल में ऑक्सीजन पर थीं. उनका स्वास्थ्य सुधर भी रहा था लेकिन मंगलवार से उनका बीपी लो होने लगा और लगातार ऑक्सीजन लेवल भी कम होने के कारण बुधवार की अहले सुबह लभगग 5.30 बजे उनका देहावसान हो गया.</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="513" height="603" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/04/FB_IMG_1618993552285.jpg" alt="" class="wp-image-51780" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/04/FB_IMG_1618993552285.jpg 513w, https://www.patnanow.com/assets/2021/04/FB_IMG_1618993552285-298x350.jpg 298w" sizes="(max-width: 513px) 100vw, 513px" /></figure>



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<p>लोकसंगीत की बात हो और रेखा तिवारी का नाम न आये ये संभव नही है. शायद ही कोई भोजपुरी का लोकोत्सव हो या लोकपर्व जो उनसे अछूता रह गया हो. हमेशा चेहरे पर मुस्कान और आवाज में भोजपुरी की सोंधी खुश्बू के साथ जब उनकी टांस सुनने को जिसे मिकता वो उनका मुरीद हो जाता था. उनकी आवाज का जादू सबके सिर चढ़कर बोलता था. किसी बात की जब चर्चा होती उनके पास उसके लिए गीत मौजूद होता था. ऐसी त्वरित डिमांड पेश करने वाली बहुचर्चित लोकगायिका रेखा तिवारी का निधन बुधवार को कोरोना की वजह से हो गया. उनकी तबियत पिछले एक हफ्ते से खराब चल रही थी. उन्हें साँस लेने में तकलीफ थी. यह सांस की तकलीफ भोजपुरी के सुरों की सांस छीन लेगा ये कोई नही जानता था.</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="500" height="650" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/04/FB_IMG_1618994378142-500x650.jpg" alt="" class="wp-image-51779" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/04/FB_IMG_1618994378142-500x650.jpg 500w, https://www.patnanow.com/assets/2021/04/FB_IMG_1618994378142-269x350.jpg 269w, https://www.patnanow.com/assets/2021/04/FB_IMG_1618994378142.jpg 584w" sizes="(max-width: 500px) 100vw, 500px" /></figure>



<p>रेखा तिवारी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव थीं. उन्होंने अभी हाल के चैत नवरात्रि का पूजन भी लोगों से शेयर किया था इसके पहले मार्च में वे गुप्ताधाम की यात्रा पर गयीं थीं जहां से लाइव वीडियो भी शेयर किया था. लेकिन 14 अप्रैल से तबियत बिगड़ने के बाद वे अस्पताल में भर्ती थी. लेकिन उन्होंने घरवालों से कह दिया कि नवरात्रि का पाठ जारी रखना. उनके पति तब से पाठ पर थे.</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="450" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/04/FB_IMG_1618993592986.jpg" alt="" class="wp-image-51781" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/04/FB_IMG_1618993592986.jpg 450w, https://www.patnanow.com/assets/2021/04/FB_IMG_1618993592986-263x350.jpg 263w" sizes="(max-width: 450px) 100vw, 450px" /></figure>



<p>रेखा तिवारी का जन्म भोजपुर के तरारी प्रखण्ड के बड़का गाँव में 20 जून 1972 को हुआ था. बचपन्न से उन्हें गायक बनने का शौक था लेकिन लड़की होने के कारण उन्हें कभी बाहर निकलने का मौका नही मिलता. लेकिन जब जुनून सर में सवार हो तो उसे पूरा व्यक्ति कर ही डालता है. रेखा तिवारी ने घर मे ही लोकधुनों को गाना शुरू किया. असर यह हुआ कि उनकी सुरीली आवाज ही उनकी पहचान बन गयी और आसपास मुहल्लों में खास मौकों पर महिलाओं के बीच खोजी जाने लगीं. लगभग 13 वर्ष ही शादी भी गयी जिससे सपने अधूरे रह गए. शादी झारखंड के बोकारो निवासी ललन तिवारी से हुई. एक बार तो ऐसा लगा जैसे सुरों से उनका नाता टूट ही जायेगा. लेकिन उन्होंने भले बाहर नही गाया लेकिन गानों का गुनगुनाना नही. शादी के बाद जब चन्दन तिवारी उनके जीवन मे बेटी की रूप में आयी तो उन्होंने अपने सपने को चन्दन में उतार उसे अपने जैसा गढ़ दिया. बड़ी होते ही जब चन्दन की आवाज भोजपुरिया क्षेत्र में सुनाई दिया तो लोगों को विश्वास नही हुआ कि भोजपुरी में अच्छे लोकगीतों को गाने वाला भी कोई है. जब चन्दन से उसके गुरु के बारे में लोगों ने पूछा और पता चला कि उनकी माँ रेखा तिवारी ही उनकी गुरु है तब लोगों को आश्चर्य का ठिकाना न रहा. फिर क्या माँ और बेटी की जोड़ी ने भोजपुरिया क्षेत्र में डंका बजा दिया. लोकधुनों को सहेजने के लिए लोकधुन न्यास की स्थापना की और निरन्तर उसको सहेजते रहीं. लेकिन 21 अप्रैल की सुबह वह मनहूस घड़ी आयी जब उन्होंने सबको अलविदा कह दिया. वे अपने पीछे दो बेटों (शंकर तिवारी और शम्भू तिवारी) और दो बेटियों(चन्दन तिवारी व पुर्णिमा तिवारी) के साथ अपने पति ललन तिवारी को भी छोड़ गई हैं. चन्दन अपने भाई बहनों में सबसे बड़ी है.</p>



<p>उनकी मौत की खबर के बाद पूरा भोजपुरिया समाज सदमे में है. सोशल मीडिया पर हाहाकार मचा हुआ है, जो यह सिद्ध करता है कि वे किसी परिचय का मोहताज नही थीं. उन्होंने जो ठाना उसे अपनी अगली पीढ़ी को समर्पित कर आपके संकल्प को पूरा किया जो शायद किसी के बूते की बात नहीं. लेकिन, उसे संजो कर तो रखा ही जा सकता है. आपने इस धरा को बहुत कुछ दिया है. रेखा तिवारी ने भूमिपुत्री की भूमिका का आपने बखूबी निर्वहन किया. वे सदियों तक याद रखी जायेगी.</p>
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