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	<item>
		<title>&#8220;भोजपुर में खौफ का जखीरा! एसटीएफ ने दबोचा एके-47 समेत 7 हथियार&#8221;</title>
		<link>https://www.patnanow.com/bhojpur-me-ak47-baramad/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 13 Sep 2025 16:38:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[एसटीएफ की छापेमारी में बरामद हुई एके-47 और सात घातक हथियार, दो अपराधी दबोचे गए आरा,13 सितम्बर। शुक्रवार की रात भोजपुर जिले के शाहपुर में पटना से आई एसटीएफ की टीम और जिला पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन चलाकर दो अलग-अलग मोहल्लों में छापेमारी की। नतीजा—एके-47 समेत सात खतरनाक हथियार, 76 जिंदा कारतूस, पांच मैगजीन और तीन मोबाइल बरामद हुए। पुलिस ने इस संबंध में दो लोगों को गिरफ्तार भी किया है। गिरफ्तार बदमाशों की पहचान शाहपुर नगर वार्ड 5 निवासी पंकज राय उर्फ सत्यजीत राय और वार्ड 10 निवासी अंकित यादव के रूप में हुई है। एसपी राज ने खुलासा किया कि बरामद हथियारों मेंएक लोडेड एके-47,एक नाली बंदूक, दो लोडेड देसी पिस्तौल,एक देसी कट्टा,कार्बाइन जैसी बनावटी थार्नेट और एक रिवॉल्वर शामिल हैं. भोजपुर में पांच महीने में दूसरी बार मिला एके-47 भोजपुर जिले में एके &#8211; 47 मिलने का यह पहला मौका नहीं है। इसके पहले भी कई बार इस प्रतिबंधित हथियार की बरामदगी ने जिले को सुर्खियों में रखा है।ज्यार दिन नहीं अभी इसी साल पांच महीने पहले, 6 अप्रैल को उदवंतनगर के बेलाउर गांव में कुख्यात इनामी बुटन चौधरी के घर पर भी पुलिस और एसटीएफ ने छापेमारी कर एके-47, दो हैंड ग्रेनेड और कई कारतूस बरामद किए थे। उस वक्त बुटन चौधरी महाराष्ट्र से दबोचा गया था। लगातार हथियार बरामदगी से साफ है कि भोजपुर जिले में कोई बड़ा खेल चल रहा है, जिस पर पुलिस अब शिकंजा कस रही है। अब देखना यह होगा कि इस खेल के पीछे का सच पुलिस कबतक साफ करती [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>एसटीएफ की छापेमारी में बरामद हुई एके-47 और सात घातक हथियार, दो अपराधी दबोचे गए</strong><br><br>आरा,13 सितम्बर। शुक्रवार की रात भोजपुर जिले के शाहपुर में पटना से आई एसटीएफ की टीम और जिला पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन चलाकर दो अलग-अलग मोहल्लों में छापेमारी की। नतीजा—एके-47 समेत सात खतरनाक हथियार, 76 जिंदा कारतूस, पांच मैगजीन और तीन मोबाइल बरामद हुए। </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="768" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/09/1000347566-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-91957" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/09/1000347566-scaled.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2025/09/1000347566-488x650.jpg 488w, https://www.patnanow.com/assets/2025/09/1000347566-1153x1536.jpg 1153w" sizes="(max-width: 768px) 100vw, 768px" /></figure>



<p>पुलिस ने इस संबंध में दो लोगों को गिरफ्तार भी किया है। गिरफ्तार बदमाशों की पहचान शाहपुर नगर वार्ड 5 निवासी पंकज राय उर्फ सत्यजीत राय और वार्ड 10 निवासी अंकित यादव के रूप में हुई है।<br><br>एसपी राज ने खुलासा किया कि बरामद हथियारों में<br>एक लोडेड एके-47,एक नाली बंदूक, दो लोडेड देसी पिस्तौल,एक देसी कट्टा,कार्बाइन जैसी बनावटी थार्नेट और एक रिवॉल्वर शामिल हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="682" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/09/pnc-amba-dandiya-ad-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-91987" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/09/pnc-amba-dandiya-ad-scaled.jpg 682w, https://www.patnanow.com/assets/2025/09/pnc-amba-dandiya-ad-433x650.jpg 433w" sizes="(max-width: 682px) 100vw, 682px" /></figure>



<p><br><strong>भोजपुर में पांच महीने में दूसरी बार मिला एके-47</strong><br><br>भोजपुर जिले में एके &#8211; 47 मिलने का यह पहला मौका नहीं है। इसके पहले भी कई बार इस प्रतिबंधित हथियार की बरामदगी ने जिले को सुर्खियों में रखा है।ज्यार दिन नहीं अभी इसी साल पांच महीने पहले, 6 अप्रैल को उदवंतनगर के बेलाउर गांव में कुख्यात इनामी बुटन चौधरी के घर पर भी पुलिस और एसटीएफ ने छापेमारी कर एके-47, दो हैंड ग्रेनेड और कई कारतूस बरामद किए थे। उस वक्त बुटन चौधरी महाराष्ट्र से दबोचा गया था।<br><br>लगातार हथियार बरामदगी से साफ है कि भोजपुर जिले में कोई बड़ा खेल चल रहा है, जिस पर पुलिस अब शिकंजा कस रही है। अब देखना यह होगा कि इस खेल के पीछे का सच पुलिस कबतक साफ करती है।</p>



<p><strong>PNCB</strong> </p>



<p><br><br><br></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>प्रधानमंत्री मोदी की शाहाबाद यात्रा से पूर्व भोजपुरी की मान्यता की उठी मांग</title>
		<link>https://www.patnanow.com/phir-uthi-bhojpuri-ki-mang/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 30 May 2025 15:59:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[मोदी से शाहाबाद की धरती से भोजपुरी को मान्यता की अपील वीकेएसयू को मेडिकल कॉलेज के बदले स्काडा की भूमि देने की मांग आरा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 30 मई को विक्रमगंज यात्रा के पूर्व भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग तेज हो गई है। इस सिलसिले में भोजपुरी छात्र संघ और अन्य संगठनों से जुड़े बुद्धिजीवियों की एक बैठक और प्रेस वार्ता विश्वविद्यालय के भोजपुरी विभाग सभागार में हुई। बैठक में सीनेटर प्रो बलिराज ठाकुर ने कहा कि साहित्य,क्षेत्रफल और बोलनेवालों की दृष्टि से भोजपुरी एक वृहद और समृद्ध भाषा है, अबतक मान्यता ना मिलना भोजपुरिया लोगों के साथ अन्याय है. भोजपुरिया जनमोर्चा के बिनोद सिंह ने कहा कि राष्ट्रनिर्माण में भोजपुरी लोगों को भूमिका को नकारा नहीं जा सकता मगर अब तक मान्यता ना मिलने से भोजपुरी क्षेत्र सामाजिक, आर्थिक दृष्टि से पिछड़ा हुआ है. पूर्व विभागाध्यक्ष और कथाकार नीरज सिंह ने कहा कि दशकों पुराने भोजपुरी आंदोलन की मांग को अब सरकार अनसुना नहीं कर सकती. भोजपुरी छात्र संघ सह संयोजक सोहित सिन्हा ने कहा कि विश्वविद्यालय की जमीन मेडिकल कॉलेज को दी गई और उसके बदले अबतक भूमि नहीं देने से शाहाबाद के एकमात्र विश्वविद्यालय के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लग गया है. अध्यक्षता करते हुए प्रो दिवाकर पाण्डेय ने कहा कि विश्वविद्यालय को स्काडा परिसर की भूमि देने की मांग को शीघ्र पूरा होना चाहिए और भोजपुरी को मान्यता देने से शिक्षा और शोध के नए आयाम खुलेंगे. बैठक को संबोधित करने वाले वक्ताओं में भोजपुरी छात्र संघ के संयोजक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>मोदी से शाहाबाद की धरती से भोजपुरी को मान्यता की अपील</strong></p>



<p><strong>वीकेएसयू को मेडिकल कॉलेज के बदले स्काडा की भूमि देने की मांग</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/05/1001417901-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-90459" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/05/1001417901-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/05/1001417901-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2025/05/1001417901-1536x864.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2025/05/1001417901-2048x1152.jpg 2048w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>आरा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 30 मई को विक्रमगंज यात्रा के पूर्व भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग तेज हो गई है। इस सिलसिले में भोजपुरी छात्र संघ और अन्य संगठनों से जुड़े बुद्धिजीवियों की एक बैठक और प्रेस वार्ता विश्वविद्यालय के भोजपुरी विभाग सभागार में हुई। बैठक में सीनेटर प्रो बलिराज ठाकुर ने कहा कि साहित्य,क्षेत्रफल और बोलनेवालों की दृष्टि से भोजपुरी एक वृहद और समृद्ध भाषा है, अबतक मान्यता ना मिलना भोजपुरिया लोगों के साथ अन्याय है. भोजपुरिया जनमोर्चा के बिनोद सिंह ने कहा कि राष्ट्रनिर्माण में भोजपुरी लोगों को भूमिका को नकारा नहीं जा सकता मगर अब तक मान्यता ना मिलने से भोजपुरी क्षेत्र सामाजिक, आर्थिक दृष्टि से पिछड़ा हुआ है. पूर्व विभागाध्यक्ष और कथाकार नीरज सिंह ने कहा कि दशकों पुराने भोजपुरी आंदोलन की मांग को अब सरकार अनसुना नहीं कर सकती. भोजपुरी छात्र संघ सह संयोजक सोहित सिन्हा ने कहा कि विश्वविद्यालय की जमीन मेडिकल कॉलेज को दी गई और उसके बदले अबतक भूमि नहीं देने से शाहाबाद के एकमात्र विश्वविद्यालय के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लग गया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/05/1001417902-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-90458" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/05/1001417902-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/05/1001417902-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2025/05/1001417902-1536x864.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2025/05/1001417902-2048x1152.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p> अध्यक्षता करते हुए प्रो दिवाकर पाण्डेय ने कहा कि विश्वविद्यालय को स्काडा परिसर की भूमि देने की मांग को शीघ्र पूरा होना चाहिए और भोजपुरी को मान्यता देने से शिक्षा और शोध के नए आयाम खुलेंगे. बैठक को संबोधित करने वाले वक्ताओं में भोजपुरी छात्र संघ के संयोजक स्यंदन सुमन, पूर्व सदस्य, भोजपुरी अकादमी दिल्ली सरकार के रवि प्रकाश सूरज प्रमुख थे. सभी वक्ताओं ने शाहाबाद की धरती से प्रधानमंत्री से भोजपुरी को मान्यता देने की घोषणा करने की अपील की. भोजपुरी जनजागरण अभियान, भोजपुरी छात्र संघ, शाहाबाद महोत्सव आयोजन समिति, बिक्रमगंज कॉलिंग, भोजपुरी समागम, रोहतास डिस्ट्रिक्ट फेसबुक पोर्टल आदि संगठनों के सदस्यों ने दोपहर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स से पीएम और गृहमंत्री को टैग करते हुए ट्वीट अभियान में भाग लिया. ज्ञात हो कि भोजपुरी आंदोलन से जुड़े कई संगठन भोजपुरी की मान्यता को लेकर मुखर हुए हैं.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ढूंढिये अपनी भोजपुरियत.</title>
		<link>https://www.patnanow.com/dhundhiye-apni-bhojouriyat/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Jan 2025 13:35:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[ARA]]></category>
		<category><![CDATA[BHOJPUR]]></category>
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		<category><![CDATA[Bhojpuri bat kahi]]></category>
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		<category><![CDATA[Dr. Ram Narayan Tiwari]]></category>
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		<category><![CDATA[PATNA NOW]]></category>
		<category><![CDATA[पटना नाउ]]></category>
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					<description><![CDATA[भोजपुरी संस्कृति और समाज का आधारस्तम्भ है सद्भाव, सहकार और समर्पण : प्रो. तिवारी भोजपुरी लोक में गाली भी सम्मान के साथ परोसा जाता है भोजपुरियत को भूल रहा भोजपुरिया समाज आरा,18 जनवरी. भोजपुरिया समाज आज भोजपुरियत को भूलकर पाश्चात्य प्रभाव में अपनी भाषा और साहित्य से दूर हो रहा है जिसकी वजह से भोजपुरी भाषा की संवैधानिक मान्यता को भी बल नहीं मिल रहा. भोजपुरी समाज और संस्कृति की बुनियाद में सद्भाव, सहकार और समर्पण की भावना अंतर्निहित है. उक्त बातें बात-बतकही संवाद कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता पीजी कॉलेज, गाजीपुर के प्राध्यापक और भोजपुरी के चर्चित विद्वान डॉ राम नारायण तिवारी ने कही. उन्होंने आगे कहा कि भोजपुरी संस्कृति सदैव से समृद्ध रही है और नारी विमर्श, अधिकारों के प्रति सजगता, पर्यावरण चिंतन हमेशा से इसका अंग रहा है जो भोजपुरी लोकगीतों में प्रत्यक्षतः दिखता है. भोजपुरी लोक की संस्कृति शास्त्रीय पद्धति से अलग रही है. वैदिक पद्धति पुरुष प्रधान है जबकि लोक स्त्री प्रधान. उन्होंने इसका उदाहरण भी गीतों के माध्यम से ही दिया. उन्होंने कहा कि वेद में अग्नि को पुरुष जबकि लोक में स्त्री कहा जाता है. भोजपुरी गीत &#8220;सविता कोखे जमले आदित&#8221; इस बात का उदाहरण है. लोक में देवों या देवियों को जगाया जाता है.उन्होंने भोजपुरी में बातें की और कहा कि &#8220;हमनी के भोजपुरिया समाज मे माटी जगवल जाला, माटी के कोड़ाई होला आ मर गईला के बाद माटी दियाला.&#8221; धरती को माँ माना जाता है. लोक मदर ओरिएंटेड है. उन्होंने कहा कि पश्चिम देशों का फेमिनिज़्म अपने अधिकार के लिए लड़ता [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>भोजपुरी संस्कृति और समाज का आधारस्तम्भ है सद्भाव, सहकार और समर्पण : प्रो. तिवारी</strong></p>



<p><strong>भोजपुरी लोक में गाली भी सम्मान के साथ परोसा जाता है</strong></p>



<p><strong>भोजपुरियत को भूल रहा भोजपुरिया समाज</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="575" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001134585-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88755" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001134585-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001134585-650x365.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>आरा,18 जनवरी. भोजपुरिया समाज आज भोजपुरियत को भूलकर पाश्चात्य प्रभाव में अपनी भाषा और साहित्य से दूर हो रहा है जिसकी वजह से भोजपुरी भाषा की संवैधानिक मान्यता को भी बल नहीं मिल रहा. भोजपुरी समाज और संस्कृति की बुनियाद में सद्भाव, सहकार और समर्पण की भावना अंतर्निहित है. उक्त बातें बात-बतकही संवाद कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता पीजी कॉलेज, गाजीपुर के प्राध्यापक और भोजपुरी के चर्चित विद्वान डॉ राम नारायण तिवारी ने कही. उन्होंने आगे कहा कि भोजपुरी संस्कृति सदैव से समृद्ध रही है और नारी विमर्श, अधिकारों के प्रति सजगता, पर्यावरण चिंतन हमेशा से इसका अंग रहा है जो भोजपुरी लोकगीतों में प्रत्यक्षतः दिखता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="466" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001136668-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88751" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001136668-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001136668-650x296.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>भोजपुरी लोक की संस्कृति शास्त्रीय पद्धति से अलग रही है. वैदिक पद्धति पुरुष प्रधान है जबकि लोक स्त्री प्रधान. उन्होंने इसका उदाहरण भी गीतों के माध्यम से ही दिया. उन्होंने कहा कि वेद में अग्नि को पुरुष जबकि लोक में स्त्री कहा जाता है. भोजपुरी गीत &#8220;सविता कोखे जमले आदित&#8221; इस बात का उदाहरण है. लोक में देवों या देवियों को जगाया जाता है.उन्होंने भोजपुरी में बातें की और कहा कि &#8220;हमनी के भोजपुरिया समाज मे माटी जगवल जाला, माटी के कोड़ाई होला आ मर गईला के बाद माटी दियाला.&#8221; धरती को माँ माना जाता है. लोक मदर ओरिएंटेड है. उन्होंने कहा कि पश्चिम देशों का फेमिनिज़्म अपने अधिकार के लिए लड़ता है लेकिन भारत का फेमिनिज़्म सोशलाइस्ट है. यही नही उन्होंने कहा कि भोजपुरी लोकगीतों में गारी(गाली) देने की एक परम्परा है जो विभिन्न अवसरों पर लोग बड़े प्यार से महिलाओं के इस लोकसंस्कृति को सुनते हैं लेकिन भोजपुरी के इन गीतों में भाषा की इतनी संयम है कि सुनने वाला भी कायल हो जाय. उदाहरण के लिए इस गीत को समझिये….<br>&#8221; रस बास सुभाष के गारी<br>चूरा दही से आँगन गमकत<br>रस बास सुभाष के गारी<br>जेवन्ही बइठेले कृष्ण कन्हैया<br>रस बास सुभाष के गारी<br>बहिनी राउरि द्रोपदी महारानी<br>चढ़ी गइली जुआरी जी<br>फुआ ररुरी कुंती महारानी<br>बिना बियाहे के भईली महतारी जी<br>रस सुभाष….<br>माता राउरि यशोदा महतारी<br>दु गो कुल के महतारी जी<br>रस सुभाष….&#8221;</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001136651-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88752" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001136651-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001136651-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001136651-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>उन्होंने जोर देकर कहा कि आज का भोजपुरिया समाज हीन भावना से ग्रसित है और अपनी मूल भाषा को अपना नहीं रहा है. डॉ. तिवारी भोजपुरी लोक संस्कृति के मर्मज्ञ माने जाते हैं और भोजपुरी श्रम गीत जंतसार, बारहमासा, गारी गीतों का संकलन उन्होंने पूरे भोजपुरी प्रदेश में घूम-घूम कर किया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="455" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001136667-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88753" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001136667-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001136667-650x289.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>अध्यक्षता करते हुए प्रो नीरज सिंह ने कहा कि भोजपुरिया समाज पूंजीवाद के प्रभाव में आ गया है जिसके फलस्वरूप भोजपुरी संस्कृति संक्रमण के दौर से गुजर रही है. अध्यक्षीय वक्तव्य में आलोचक जितेंद्र कुमार ने कहा कि भोजपुरी भाषा, संस्कृति और समाज पर व्यापक नजरिए से अकादमिक शोध की जरूरत है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="469" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001136669-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88754" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001136669-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/01/1001136669-650x298.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>धन्यवाद ज्ञापन देते हुए प्रो दिवाकर पांडेय ने भोजपुरी लोक संस्कृति की विशेषताओं को रेखांकित किया. संचालन रवि प्रकाश ने किया. उपस्थित लोगों में प्रो बलिराज ठाकुर, जनार्दन मिश्र, कृष्ण कुमार, रामयश अविकल, जनमेजय जी, कुमार अजय सिंह, कौशल्या शर्मा, नरेंद्र सिंह, आशुतोष पांडेय, रवि शंकर सिंह, सुमन कुमार सिंह, अमरजीत, रौशन कुशवाहा, रवि कुमार के अलावा भोजपुरी आंदोलन से जुड़े कई साहित्यकार, पत्रकार, मीडियाकर्मी और छात्र उपस्थित थे. बात-बतकही संवाद कार्यक्रम का आयोजन भोजपुरी छात्र संघ ने किया था.</p>



<p></p>
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			</item>
		<item>
		<title>ग्लोबल नहीं हैं भिखारी ठाकुर !</title>
		<link>https://www.patnanow.com/bhikhari-was-not-global-he-was-glocal-was-glocal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Jul 2024 17:23:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA]]></category>
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		<category><![CDATA[Hardeep kaur]]></category>
		<category><![CDATA[Journalist O P Pandey]]></category>
		<category><![CDATA[Manisha Srivastava]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA NOW]]></category>
		<category><![CDATA[Piya nisaeel]]></category>
		<category><![CDATA[Ruby President Art culture and youth department]]></category>
		<category><![CDATA[Santosh Patel]]></category>
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					<description><![CDATA[स्त्री विमर्श के पहले व्यक्ति थे हिंदुस्तान के सोशल इंफ्लुएंसर थे भिखारी ठाकुर पटना,11 जुलाई(ओ पी पांडेय). राय बहादुर, अनगढ़ हीरा, ठाकुर जी और भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर की पुण्यतिथि के अवसर पर बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग ने नाच, नाट्य प्रस्तुति एवं परिचर्चा का कार्यक्रम आयोजित किया. कार्यक्रम का शुभारंभ कला संस्कृति एवं युवा विभाग के अपर मुख्य सचिव हरदीप कौल, निदेशक रूबी के साथ मुख्य वक्ता के रूप मे आये आगत अतिथियों में डॉ. नीतू प्रसाद नूतन वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार, लोक गायिका, मनीषा श्रीवास्तव,सन्तोष पटेल और डॉक्टर जैनेन्द्र कुमार दोस्त एवं प्रो. वीरेंद्र नारायण यादव(पूर्व राजभाधा अध्यक्ष) ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया. इस अवसर पर कला एवं सँस्कृति विभाग की अपर मुख्य सचिव हरदीप कॉल ने विभाग की ओर से सभी आगत अतिथियों और दर्शकों का स्वागत और आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि कला विभाग का यह कार्य इसलिए है कि आज की पीढ़ी हमारे पीढ़ी को जान सके. अगर हमें अपनी सुनहरी विरासत का दम्भ भरना है तो यह हमारा दायित्व है कि हम इनके बारे में बताएं. आज वैश्विक दुनिया है जब हर देश अपने विचारों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाता है तो उसको ही दुनिया अपनाने लगती है. उन्होंने कहा कि&#8220;हम ही हम है तो क्या तुम होतुम ही तुम हो तो क्या तुम होबात होगी तब जब हम तुम दोनों हों.&#8221; उन्होंने भिखारी ठाकुर पर प्रकाश डालते हए कहा कि रामायण देखने के बाद उन्हें लगा कि जो वेदना से छुआ जा सकता [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>स्त्री विमर्श के पहले व्यक्ति थे हिंदुस्तान के</strong></p>



<p><strong>सोशल इंफ्लुएंसर थे भिखारी ठाकुर</strong></p>



<p>पटना,11 जुलाई(<strong>ओ पी पांडेय</strong>). राय बहादुर, अनगढ़ हीरा, ठाकुर जी और भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर की पुण्यतिथि के अवसर पर बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग ने नाच, नाट्य प्रस्तुति एवं परिचर्चा का कार्यक्रम आयोजित किया. कार्यक्रम का शुभारंभ कला संस्कृति एवं युवा विभाग के अपर मुख्य सचिव हरदीप कौल, निदेशक रूबी के साथ मुख्य वक्ता के रूप मे आये आगत अतिथियों में डॉ. नीतू प्रसाद नूतन वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार, लोक गायिका, मनीषा श्रीवास्तव,सन्तोष पटेल और डॉक्टर जैनेन्द्र कुमार दोस्त एवं प्रो. वीरेंद्र नारायण यादव(पूर्व राजभाधा अध्यक्ष) ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="506" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689928-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85456" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689928-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689928-650x320.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>इस अवसर पर कला एवं सँस्कृति विभाग की अपर मुख्य सचिव हरदीप कॉल ने विभाग की ओर से सभी आगत अतिथियों और दर्शकों का स्वागत और आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि कला विभाग का यह कार्य इसलिए है कि आज की पीढ़ी हमारे पीढ़ी को जान सके. अगर हमें अपनी सुनहरी विरासत का दम्भ भरना है तो यह हमारा दायित्व है कि हम इनके बारे में बताएं. आज वैश्विक दुनिया है जब हर देश अपने विचारों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाता है तो उसको ही दुनिया अपनाने लगती है. उन्होंने कहा कि<br>&#8220;हम ही हम है तो क्या तुम हो<br>तुम ही तुम हो तो क्या तुम हो<br>बात होगी तब जब हम तुम दोनों हों.&#8221;</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="498" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689929-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85457" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689929-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689929-650x316.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>उन्होंने भिखारी ठाकुर पर प्रकाश डालते हए कहा कि रामायण देखने के बाद उन्हें लगा कि जो वेदना से छुआ जा सकता है वह किसी और से नही छुआ जा सकता है. वनवास की बात हो या सीता की अग्निपरीक्षा तो वह सबको छू जाती है. वे सिर्फ स्त्री वेदना ही नहीं बल्कि पुरुष वेदना को भी बड़ी सहजता से अपने नाटकों में रखते हैं. साथ ही कई कुरूतियों को, घर की लड़ाई को, समाज के सामने प्रस्तुत करते थे. आजादी की लड़ाई में पति पत्नियों को छोड़कर चले गए उन्होंने नही सोचा की पत्नी भी स्वतंत्रता की लड़ाई में जा सकती है. उन्होंने कहा कि भिखारी ठाकुर की जयंती इस साल पूरे बिहार में मनाया जाएगा और स्तरीय प्रस्तुति परक दलों को उन्होंने मंच से ही आमंत्रित भी किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="503" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689930-1-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85477" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689930-1-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689930-1-650x320.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>कार्यक्रम में परिचर्चा का संचालन वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार ने किया. परिचर्चा का विषय भिखारी ठाकुर के नाटकों में स्त्री विमर्श था जिसमें वक्ताओं के रूप में डॉ. नीतू प्रसाद नूतन, लोकगायिका मनीषा श्रीवास्तव, सन्तोष पटेल, डॉक्टर जैनेन्द्र कुमार दोस्त प्रो. वीरेंद्र नारायण यादव (पूर्व राजभाधा अध्यक्ष) और अमरजीत शामिल थे. सभी ने विभाग को इस चर्चा के लिए धन्यवाद व आभार प्रगट किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="503" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689931-1-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85478" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689931-1-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689931-1-650x320.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>भिखरी ठाकुर ने महिलाओं के हर रूप को छूने की कोशिश की है लेकिन उनकी रचना कितना रिलेवेंट है के जवाब में जैनेन्द्र कुमार दोस्त ने कहा कि स्त्री विमर्श क्या है? जेंडर में जो डिस्क्रिमिनेशन था उसके बारे में बात करना. डिबेट भी बाहर से आता है कि वे कैसे सोचे इनके बारे में. आपको बाहर के स्कॉलर की किताब पढ़ना पड़ता है स्त्री विमर्श पर. उन्होंने कहा कि स्त्री को दोयम दर्जे का माना गया है. जब संवाद की बात नाटकों में आती थी तो पुरुष संस्कृत में बोलेंगे लेकिन महिलाएं प्राकृत और लोक भाषा मे. उन्होंने लेखक हेनरिक होल्सन की बुक डॉल्स हाउस का जिक्र करते हुए कहा कि एक स्त्री के घर तलाशने की कहानी की पहली बुक है दुनिया की लेकिन उस बीच भिखरी ठाकुर पर नजर नही गया. किसी का ध्यान नही गया. समाज,पॉलिटिक्स और समाज शास्त्र पर वे पहले भारत के व्यक्ति थे जिन्होंने स्त्री विमर्श पर बात किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="497" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689932-1-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85479" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689932-1-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689932-1-650x315.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>उन्होंने कहा कि दूरदर्शन के सहयोग से एक कार्यक्रम बनने में जब 6 महीना लगा तब पता चला कि कितना कठिन है रचना. जिसका टाइटल बनाने में इतना समय लगा. पिया नीसइल भिखारी ठाकुर का 60 साल पुराना नाटक है जिसे विभाग के प्रयास से प्रस्तुति का प्रस्ताव आया. सरकार चूंकि शराबबंदी और नशामुक्ति पर भी कम कर रही है. भिखारी ठाकुर ग्लोबल नही ग्लोकल हैं. वे स्त्री विमर्श का बीज रोपने वाले पहले व्यक्ति हैं. उन्होंने 1917 में नाच शुरू किया और 1957 तक काम किया. वे अंग्रेजो के साथ लड़ाई में नही थे लेकिन उन्होंने कितना आगे का सोचा कि देश को आजादी तो मिल जाएगी लेकिन स्त्री की ये समस्याएं आजादी के बाद भी रह जाएंगी.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="497" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689933-1-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85480" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689933-1-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689933-1-650x315.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>गायिका नीतू कुमारी नूतन ने भिखारी ठाकुर की रचनाओं में अपने आप को कहाँ पाती हैं के सवाल पर कहा कि मैंने रेडियो में सुनकर मंचो पर गाना शुरू किया. माँ के गीतों को सुना और गया. उन्होंने गीतों में महिला के दर्द को दर्शाया..<br>&#8220;हम त खेलत रहनी हम त सुपनी मोरिया से<br>कर लेइले तब ही बियाह रे विदेसिया<br>गवना कराई पिया घरे बइठले<br>अपने बसले बिदेस रे बिदेसिया&#8221; पक्तियों नारी के बेबसी को साफ बयां करती है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="875" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689934-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85481" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689934-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689934-650x556.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689934-350x300.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>भोजपुरी के लिए कई अंदोलन में सक्रिय सन्तोष पटेल ने कहा कि नारी विमर्श,फेमीनिजम जैसे कई पैरामीटर मौजूद है भिखरी ठाकुर के प्रस्तुतियों में. 1940-66 तक के समय को याद करते हुए कहा कि 1940-46 में हिन्दू कोर्ट बिल और बारबरा सीमेन की बात की. स्त्री मुक्ति का धेरी गाथा नारी का पहला साहित्य था. हमारे यहां सारे पैरामीटर हैं बिधवा विवाह,बेटिबेचवा और गबरघिचोर जैसे नाटकों में.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="818" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689935-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85482" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689935-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689935-650x519.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>हार्नेस नीनास मिलना नॉश जैसे तमाम लोग 1920 में लिख रहे थे. मुक्ति ने लिखा था चेरी गाथा. गबर घिचोर नाटक की बात करते हुए उन्होंने कहा कि गलीज बो( गलीज बहु) नाटक में अपने कोख के अधिकार की लड़ाई लड़ती है. 15 साल से आया नही है उसका पति और उसका 13 साल का बेटा हो गया है. गड़बड़ी, गोबर जैसे कैरक्टर हैं जो उनके चरित्र को प्रस्तुत करता है. ब्रेख्त ने लिखा है<br>ब्रेख्त से तुलना करना गलत है क्योंकि दोनों एक ही समय पर लिखते हैं और उन्होंने ब्रेख्त को कभी पढा नही होगा इसलिए तुलना गलत है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="816" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689936-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85483" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689936-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689936-650x518.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>वही प्रो. वीरेंद्र नारायण यादव, पूर्व राजभाधा अध्यक्ष ने भोजपुरी में बोलते हुआ कहा कि छपरा में बने प्रेक्षागृह के नाम का भिखारी ठाकुर के नाम पर रखने का अनुरोध किया और उपस्थित हरदीप कौर से पूछ लिया. फिर उन्होने नाच के बारे में अपने पुराने संस्मरण को गाड़ करते हुए कहा कि उदित बाबू से सुनने का अवसर मिला, वह अद्भुत था. जब वे मिरजई पहन कर मंच पर आते थे तो पिन ड्राप शांति हो जाती थी. उस जमाने मे हार्डिंग पार्क में कार्यक्रम होता था और कानून व्यवस्था की जब बात हुई तो ठाकुर जी ने कहा कि हमारे कार्यक्रम में कोई कानून की जरूरत नही हम खुद इसे ठीक कर देते हैं. जब राहुल सांस्कृयायान ने उनका नाटक देखा तो उन्होंने कहा कि भोजपुरी में किताब और पत्रिका निकलना चाहिए. विश्व भारती विवि के कुलपति को एक कार्यक्रम में जब विदेसिया की प्रस्तुति के समय उछलते देखा तो पता चला कि एक कलाकार के कला की पहुंच कैसे पहुंचती है. 1947 में राहुल सांकृत्यायन ने कहा उसपर अभी तक काम नही हुआ है उसपर काम होना चाहिए. उन्होंने कहा कि मैं ये नही मानता हूं कि वे अंग्रेजी नही समझते थे या वे आजादी की लड़ाई नही समझते थे उनकी लड़ाई आजदी के समक्ष समाजिक कुरीतियों की लड़ाई थी जो आजदी की लड़ाई से कम नही थी.</p>



<p>वही अमरजीत ने अपने अभिभाषण में कहा कि पटना का दियारा क्षेत्र सबसे ज्यादा अत्याचार का शिकार बना उस काल मे जिसे भिखारी ने देखा और उसकी पीड़ा को अपने नाटकों में स्थान दिया. बाप के प्रति आदर और शिकायत भी है जैसे-</p>



<p>कईसे कहीं कहे नईखे आवत बाबूजी,<br>मुह में दांत नईखे लार चुवत बा हो बाबूजी, </p>



<p>मन करे कि जहर खा के मर जाईं ए बाबूजी.&#8221; </p>



<p>उन्होंने कहा कि मैं कुल्हड़िया से आता हूँ और मैने देखा है उनके नाटकों को अपने गांवों में. समय के हिसाब से वे संवाद गढने के माहिर थे. कुल्हड़िया में एक नाटक के दौरान उन्होंने अपने पात्र से ख्वा दिया देरी से आने के कारण की देर से आओगे तो कुल्हड़िया के जमींदार के यहाँ रखवा देंगे देर करोगे तो और कोड़ा से मार कहोगे तो दिमाग सही आ जायेगा. भिखरी ठाकुर एक सोशल एन्फ्लुएंर थे उस काल मे जब कोई सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म नही था।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="795" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689937-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85484" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689937-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689937-650x504.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>लोकचर्चित युवा लोकगायिका मनीषा ने कहा कि बहुत से लिखने वाले है जो स्त्री सौंदये और कोई उनके मन की बात पर कलम चलाया है लेकिन ठाकुर जी रचनाओं में नारी के लोक की बात होती थी जिसमे हर रस का वर्णन होता था. एक स्त्री शादी कर के घर मे रहती है जो घर से लेकर समाज तक के कई समस्याओं से लड़ती है. भिखारी ठाकुर ने समाज मे, परिवार में जो महसूस किया उसे गांव-गांव तक अपनी रचनाओं के जरिये पहुंचाते थे.</p>



<p>रोपिया गिनाई देहली पगहा धराई देहल<br>चेरिया के छेरिया बनाई दिहलs</p>



<p>इतना किसी और ने नही लिखा जितनी मार्मिक उन्होंने लिखा. बेटी बेचवा का एक्सटेंशन विधवा-बिलाप नाटक है जहां बड़ी उम्र के पति से शादी होने के बाद यह विधवा हो जाती है और उसका जीवन बदल जाता है. लोक धुनों को,लोक संस्कृति को उन्होंने अपनी रचनाओं में पिरोया था.</p>



<p>डगरिया जोहत ना हो<br>बीतत बाटे आठों पहरिया हो<br>डगरिया जोहत ना जैसे<br>परोसी कर थरिया डाल भात तरकरिया हो..<br>जैसे पंक्तियों को जँतसार धुन के जरिये प्रस्तुत किया है जो जाँता पर काम करते हुए अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ती है.</p>



<p>परिचर्चा के बाद जैनेन्द्र कुमार दोस्त द्वारा निर्देशित भिखारी ठाकुर के नाटक पिया नीसइल का शानदार मंचन हुआ. नशे की वजह से परिवार के तबाही की कहानी को भिखरी ठाकुर ने बड़ी ही सहजता से नाटक में ढ़ाला जिसे कलाकारों ने भरसक करने का प्रयास किया.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>देश की राजधानी में बढ़ाया भोजपुरी का मान</title>
		<link>https://www.patnanow.com/desh-ki-rajdhani-me-badhaa-bhojpuri-ka-man/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 24 Feb 2024 23:33:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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		<category><![CDATA[Ravi prakash suraj]]></category>
		<category><![CDATA[Research submitted in Bhojpuri]]></category>
		<category><![CDATA[VKSU ARA]]></category>
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					<description><![CDATA[JNU के अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में भोजपुरी भाषा मे शामिल किया अपना शोध पत्र आरा,25 फरवरी(ओ पी पांडेय). अक्सर ऐसा देखा जाता है कि भोजपुरी भाषी लोग अपनी मातृभाषा को बोलने या लिखने में शर्माते या हिचकिचाहते हैं. घर और गाँव तक तो उनकी खूब फर्राटेदार भोजपुरी चलती है लेकिन बाहर निकलते हैं उनकी मातृभाषा हिंदी या कोई और भाषा बन जाती है. लगभग 30 करोड़ की आबादी में बोली जाने वाली भोजपुरी की यही सच्चाई है. लेकिन इन हिचकिचाहट के बीच भोजपुर मुख्यालय आरा के VKSU के भोजपुरी विभाग के ही एक छात्र ने भोजपुरी भाषा में JNU जैसे प्रसिद्ध शिक्षण संस्थान में भोजपुरी भाषा में ही शोध पत्र प्रस्तुत कर अपनी मातृभाषा ही नही बल्कि 30 करोड़ भोजपुरिया का मान गर्व से ऊंचा किया है. भारतीय सामाजिक अनुसंधान परिषद और मैथिली भोजपुरी अकादमी, दिल्ली सरकार के संयुक्त तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर भारतीय भाषा केंद्र, JNU में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया. इस सेमिनार में भोजपुरी साहित्य व संस्कृति पर केंद्रित शोधपत्र भोजपुरी विभाग के शोधछात्र और मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली सरकार के सदस्य रवि प्रकाश सूरज ने प्रस्तुत किया. रवि प्रकाश का शोधपत्र लोकगाथाओं के संकलन संरक्षण में किये गये योगदान पर आधारित था. इस शोधपत्र ने भोजपुरी लोकगाथाओं के संकलनकर्ता प्रसिद्ध विद्वान डॉ अर्जुनदास केसरी की ओर से भोजपुरी लोकगाथाओं के संकलन संरक्षण में किये गये योगदान को रेखांकित किया. रवि प्रकाश ने अपना शोधपत्र भोजपुरी में ही प्रस्तुत किया. बात दें कि इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में नेपाल सहित कई देशों के विद्वान शामिल हुए [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>JNU के अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में भोजपुरी भाषा मे शामिल किया अपना शोध पत्र</strong></p>



<p>आरा,25 फरवरी(<strong>ओ पी पांडेय</strong>). अक्सर ऐसा देखा जाता है कि भोजपुरी भाषी लोग अपनी मातृभाषा को बोलने या लिखने में शर्माते या हिचकिचाहते हैं. घर और गाँव तक तो उनकी खूब फर्राटेदार भोजपुरी चलती है लेकिन बाहर निकलते हैं उनकी मातृभाषा हिंदी या कोई और भाषा बन जाती है. लगभग 30 करोड़ की आबादी में बोली जाने वाली भोजपुरी की यही सच्चाई है. लेकिन इन हिचकिचाहट के बीच भोजपुर मुख्यालय आरा के VKSU के भोजपुरी विभाग के ही एक छात्र ने भोजपुरी भाषा में JNU जैसे प्रसिद्ध शिक्षण संस्थान में भोजपुरी भाषा में ही शोध पत्र प्रस्तुत कर अपनी मातृभाषा ही नही बल्कि 30 करोड़ भोजपुरिया का मान गर्व से ऊंचा किया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="790" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/04/PNC-advertising-sambhavna-school-7042024-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-83574" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/04/PNC-advertising-sambhavna-school-7042024-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/04/PNC-advertising-sambhavna-school-7042024-650x501.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="516" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000486804-650x516.jpg" alt="" class="wp-image-82774" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000486804.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000486804-350x278.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000486804-768x610.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>भारतीय सामाजिक अनुसंधान परिषद और मैथिली भोजपुरी अकादमी, दिल्ली सरकार के संयुक्त तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर भारतीय भाषा केंद्र, JNU में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया. इस सेमिनार में भोजपुरी साहित्य व संस्कृति पर केंद्रित शोधपत्र भोजपुरी विभाग के शोधछात्र और मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली सरकार के सदस्य रवि प्रकाश सूरज ने प्रस्तुत किया. रवि प्रकाश का शोधपत्र लोकगाथाओं के संकलन संरक्षण में किये गये योगदान पर आधारित था. इस शोधपत्र ने भोजपुरी लोकगाथाओं के संकलनकर्ता प्रसिद्ध विद्वान डॉ अर्जुनदास केसरी की ओर से भोजपुरी लोकगाथाओं के संकलन संरक्षण में किये गये योगदान को रेखांकित किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="468" height="650" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000486806-468x650.jpg" alt="" class="wp-image-82777" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000486806.jpg 468w, https://www.patnanow.com/assets/2024/02/1000486806-252x350.jpg 252w" sizes="auto, (max-width: 468px) 100vw, 468px" /></figure>



<p>रवि प्रकाश ने अपना शोधपत्र भोजपुरी में ही प्रस्तुत किया. बात दें कि इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में नेपाल सहित कई देशों के विद्वान शामिल हुए थे.</p>



<p>इस सेमिनार की खास बात यह रही कि संगोष्ठी में कई मातृभाषाओं पर केंद्रीय शोध पत्र प्रस्तुत किये गये, जिन्हें संविधान की 8वीं अनुसूची में अबतक शामिल नहीं किया गया है.</p>



<p>भोजपुरी छात्र संघ ने संगोष्ठी में शोधपत्र प्रस्तुति के लिए विभाग के शोधछात्र रवि प्रकाश सूरज के साथ यशवंत कुमार सिंह, संजय कुमार और अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक JNU के डॉ राजेश पासवान को बधाई दी है. रवि प्रकाश के इस प्रस्तुति से न सिर्फ विवि परिवार बल्कि पूरा भोजपुरिया बेल्ट गदगद है. जगह-जगह से लोग उन्हें बधाई संदेश दे रहे हैं. नव युवकों में इस प्रयास के बाद भोजपुरी को लेकर एक नई उम्मीद जग गयी है.</p>



<p></p>
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		<title>भोजपुरी सिलेबस विश्वविद्यालय की वेबसाइट से गायब, भोजपुरी समाज में व्यापक आक्रोश</title>
		<link>https://www.patnanow.com/bhojpuri-is-disappeared-from-vish-sylabus/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Oct 2023 09:49:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ACADEMIC]]></category>
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					<description><![CDATA[भोजपुरी समाज मे व्यापक आक्रोश विगत कई दिनों से वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय की वेबसाइट बंद पड़ने के बाद एक बार फिर से पोर्टल खुलने लगा है. जिस पर छात्रों ने हर्ष व्यक्त किया है वहीँ दूसरी ओर भोजपुरी विषय के सिलेबसको वेबसाइट से हटाये जाने पर भोजपुरी के छात्रों और भोजपुरी के विद्वत जगत में नाराजगी भी है. ज्ञात हो कि वेबसाइट बंद होने की सूचना सबसे पहले भोजपुरी छात्र संघ ने ही विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपी थी तथा इसे चालू करने के साथ ही वेबसाइट पर सभी विषयों के चार वर्षीय स्नातक डिग्री के पाठ्यक्रम और प्रॉस्पेक्टस को अपलोड करने की मांग की थी. वेबसाइट भी चालू हुई और सिलेबस भी अपलोड हुआ मगर कुल 29 विषयों की सूची में म्यूजिक और मैथिलि जैसे विषय शामिल हैं जिनकी पढ़ाई यहाँ नहीं होती लेकिन भोजपुरी में पूरे विश्व के एकमात्र उच्च शिक्षा संस्थान जहाँ बी ए से पीएचडी तक की पढ़ाई होती है उस विषय का सिलेबस तो दूर विषयों की सूची तक में उसका नाम शामिल नहीं किया गया है. भोजपुरी छात्र संघ के सह संयोजक सोहित सिन्हा और अभिषेक प्रीतम ने बताया कि इस बाबत भोजपुरी विभागाध्यक्ष दिवाकर पाण्डेय और डी एस डब्लू रणविजय कुमार को सूचना भेजी जा रही है और सुधर नहीं होने की दिशा में आगे की रणनीति तय की जाएगी. इधर भोजपुरी बचाओ मोर्चा के अध्यक्ष रंगकर्मी ओ पी पाण्डेय, भोजपुरी गायक राजू कुमार, साहित्यकार आलोचक राजेश, सुनील कुमार ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर शुरू से ही भोजपुरी की उपेक्षा का आरोप लगाया है. [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भोजपुरी समाज मे व्यापक आक्रोश</strong></p>



<p>विगत कई दिनों से वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय की वेबसाइट बंद पड़ने के बाद एक बार फिर से पोर्टल खुलने लगा है. जिस पर छात्रों ने हर्ष व्यक्त किया है वहीँ दूसरी ओर भोजपुरी विषय के सिलेबसको वेबसाइट से हटाये जाने पर भोजपुरी के छात्रों और भोजपुरी के विद्वत जगत में नाराजगी भी है. ज्ञात हो कि वेबसाइट बंद होने की सूचना सबसे पहले भोजपुरी छात्र संघ ने ही विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपी थी तथा इसे चालू करने के साथ ही वेबसाइट पर सभी विषयों के चार वर्षीय स्नातक डिग्री के पाठ्यक्रम और प्रॉस्पेक्टस को अपलोड करने की मांग की थी. </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="428" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/PNC_VKSU-se-out-bhojpuri-650x428.jpg" alt="" class="wp-image-79711" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/PNC_VKSU-se-out-bhojpuri-650x428.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/PNC_VKSU-se-out-bhojpuri-350x230.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/PNC_VKSU-se-out-bhojpuri-768x506.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/PNC_VKSU-se-out-bhojpuri-1536x1012.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/PNC_VKSU-se-out-bhojpuri.jpg 1558w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>वेबसाइट भी चालू हुई और सिलेबस भी अपलोड हुआ मगर कुल 29 विषयों की सूची में म्यूजिक और मैथिलि जैसे विषय शामिल हैं जिनकी पढ़ाई यहाँ नहीं होती लेकिन भोजपुरी में पूरे विश्व के एकमात्र उच्च शिक्षा संस्थान जहाँ बी ए से पीएचडी तक की पढ़ाई होती है उस विषय का सिलेबस तो दूर विषयों की सूची तक में उसका नाम शामिल नहीं किया गया है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="428" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/PNC_VKSU-se-out-bhojpuri-1-650x428.jpg" alt="" class="wp-image-79712" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/10/PNC_VKSU-se-out-bhojpuri-1-650x428.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/PNC_VKSU-se-out-bhojpuri-1-350x230.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/PNC_VKSU-se-out-bhojpuri-1-768x506.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/PNC_VKSU-se-out-bhojpuri-1-1536x1012.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2023/10/PNC_VKSU-se-out-bhojpuri-1.jpg 1558w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><br>भोजपुरी छात्र संघ के सह संयोजक सोहित सिन्हा और अभिषेक प्रीतम ने बताया कि इस बाबत भोजपुरी विभागाध्यक्ष दिवाकर पाण्डेय और डी एस डब्लू रणविजय कुमार को सूचना भेजी जा रही है और सुधर नहीं होने की दिशा में आगे की रणनीति तय की जाएगी. इधर भोजपुरी बचाओ मोर्चा के अध्यक्ष रंगकर्मी ओ पी पाण्डेय, भोजपुरी गायक राजू कुमार, साहित्यकार आलोचक राजेश, सुनील कुमार ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर शुरू से ही भोजपुरी की उपेक्षा का आरोप लगाया है. ज्ञात हो कि पहले भी एक बार भोजपुरी की पढ़ाई बंद हुई थी जिसका तीव्र विरोध और आन्दोलन हुआ था.</p>



<p>आरा से <strong>सत्य प्रकाश सिंह</strong> की रिपोर्ट</p>
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		<title>&#8216;कलयुग के राम&#8217; को देखने पहुंची सीता !</title>
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		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 Aug 2023 05:30:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[&#8216;कलयुग के राम&#8217; से होगा भोजपुरी फ़िल्मों के नए युग की शुरुआत फिल्म &#8216;कलयुग के राम&#8217; का मुंबई में हुआ स्क्रीनिंग श्यामली को जन्मदिन पर मिला डबल उपहार मुंबई, 22 अगस्त. राम का नाम आये और सीता का नाम न हो ये कैसे हो सकता है!कलयुग के राम को देखने के लिए सीता माँ के आगमन की खबर कोई चौकाने वाली नही बल्कि हक़ीक़त है. लेकिन यह खबर रील लाइफ से जुड़ी है. जी हाँ सही समझा आपने यानि कि फिल्मों से जुड़ी यह खबर सोलह आने सत्य है. दरअसल अंधेरी के इम्पा प्रिव्यू सेंटर में रविवार को भोजपुरी फ़िल्म &#8220;कलयुग के राम&#8221; की स्क्रीनिंग रखी गई थी जिसे देखने के लिए धारावाहिक रामायण की सीता माता यानि दीपिका चिखलीया पहुँची थी. अपने टाइटल के अनुरूप यह फ़िल्म भोजपुरी इंडस्ट्री के आम फिल्मों से भी अलग दिखी जिसका स्क्रीनिंग भी फ़िल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री श्यामली के जन्मदिन को खास बनाते हुए रखा गया था. इस मौके पर फ़िल्म को देखने के लिए इंडस्ट्री के कई दिग्गजों में टेलीविजन के चर्चित कलाकार परितोष त्रिपाठी, भोजपुरी फिल्मों के निर्माता व निर्देशक आर. राजकुमार पांडे, आयुष राज गुप्ता, जी गंगा चैनल के लिए कई सीरियल बनाने वाले प्रोड्यूसर प्रवीण झा और अभिनेत्री पुष्पा वर्मा को देखा गया. इस मौके पर फिल्म की बारीकियों को देखने और समझने के लिए टीवी चैनल के अधिकारी भी बतौर गेस्ट उपस्थित थे, जिसमें फिलमची भोजपुरी चैनल के वाइस प्रेसिडेंट राजीव मिश्रा और जी गंगा के क्रिएटिव हेड जयंत शर्मा शामिल थे. भोजपुरी की बदलेगी [&#8230;]]]></description>
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<p>&#8216;<strong>कलयुग के राम&#8217; से होगा भोजपुरी फ़िल्मों के नए युग की शुरुआत</strong></p>



<p><strong>फिल्म &#8216;कलयुग के राम&#8217; का मुंबई में हुआ स्क्रीनिंग</strong></p>



<p><strong>श्यामली को जन्मदिन पर मिला डबल उपहार</strong></p>



<p>मुंबई, 22 अगस्त. राम का नाम आये और सीता का नाम न हो ये कैसे हो सकता है!कलयुग के राम को देखने के लिए सीता माँ के आगमन की खबर कोई चौकाने वाली नही बल्कि हक़ीक़त है. लेकिन यह खबर रील लाइफ से जुड़ी है. जी हाँ सही समझा आपने यानि कि फिल्मों से जुड़ी यह खबर सोलह आने सत्य है. दरअसल अंधेरी के इम्पा प्रिव्यू सेंटर में रविवार को भोजपुरी फ़िल्म &#8220;कलयुग के राम&#8221; की स्क्रीनिंग रखी गई थी जिसे देखने के लिए धारावाहिक रामायण की सीता माता यानि दीपिका चिखलीया पहुँची थी.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="354" height="592" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_Dipika-Chikhliya.png" alt="" class="wp-image-77446" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_Dipika-Chikhliya.png 354w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_Dipika-Chikhliya-209x350.png 209w" sizes="auto, (max-width: 354px) 100vw, 354px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-07-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-77435" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-07-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-07-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-07-768x432.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-07-1536x864.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-07-2048x1152.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>अपने टाइटल के अनुरूप यह फ़िल्म भोजपुरी इंडस्ट्री के आम फिल्मों से भी अलग दिखी जिसका स्क्रीनिंग भी फ़िल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री श्यामली के जन्मदिन को खास बनाते हुए रखा गया था. इस मौके पर फ़िल्म को देखने के लिए इंडस्ट्री के कई दिग्गजों में टेलीविजन के चर्चित कलाकार परितोष त्रिपाठी, भोजपुरी फिल्मों के निर्माता व निर्देशक आर. राजकुमार पांडे, आयुष राज गुप्ता, जी गंगा चैनल के लिए कई सीरियल बनाने वाले प्रोड्यूसर प्रवीण झा और अभिनेत्री पुष्पा वर्मा को देखा गया. इस मौके पर फिल्म की बारीकियों को देखने और समझने के लिए टीवी चैनल के अधिकारी भी बतौर गेस्ट उपस्थित थे, जिसमें फिलमची भोजपुरी चैनल के वाइस प्रेसिडेंट राजीव मिश्रा और जी गंगा के क्रिएटिव हेड जयंत शर्मा शामिल थे.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-03-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-77437" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-03-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-03-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-03-768x346.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-03-1536x693.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-03-2048x924.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-06-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-77436" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-06-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-06-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-06-768x346.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-06-1536x691.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-06-2048x922.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><strong>भोजपुरी की बदलेगी इमेज</strong><br>भोजपुरी फिल्मों में अधिकांशतः द्विअर्थी और फ़ूहड़ फिल्मों की भरमार ने भोजपुरी फिल्मों से पारिवारिक दर्शकों को विमुख कर दिया है. लोग जब भी भोजपुरी फिल्मों की बात होती है तो गंगा मईया तोहे चुनरी चढ़इबो, नदिया के पार, गंगा किनारे मोरा गांव, गठबंधन प्यार के और देसवा जैसी फिल्मों को याद करते हैं. क्योंकि भोजपुरी की इन फिल्मों ने पारिवारिक दर्शकों को जोड़ा है. लेकिन विगत कुछ दशक में भोजपुरी फिल्मों की मेकिंग ने इस भाषा के प्रति लोगों ने एक परशेप्शन बन गया है कि इस भाषा मे अच्छी फिल्में बन ही नही सकती. लेकिन इस परशेप्शन को तोड़ेगा फ़िल्म कलयुग के राम.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-002-650x488.jpg" alt="" class="wp-image-77444" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-002-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-002-350x263.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-002-768x576.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-002.jpg 1024w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-04-650x293.jpg" alt="" class="wp-image-77438" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-04-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-04-350x158.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-04-768x346.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-04-1536x691.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-04-2048x922.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>&#8216;कलयुग के राम&#8217; फ़िल्म का कथानक,संवाद, मेकिंग, संगीत, फिल्माकंन, बैकग्राउंड स्कोर और अभिनेताओं के अभिनय लाजवाब है. अभिनेता जहाँ अपने एंट्री और एग्जिट से एक अलग तरह का प्रभाव बनाते हैं वही उनके आंखों के एक्सप्रेशन कई बातों को कह जाते हैं. ऐसे अभिनय में पार्श्व से आने वाली संगीत और बैकग्राउंड स्कोर के साथ को-स्टार की जबरदस्त ट्यूनिग ऐसा माहौल बनाता है कि दर्शक उन किरदारों और दृश्यों में किरदारों के एक अंग बन जाते हैं. निर्देशक सुजीत वर्मा ने अपने निर्देशन से फ़िल्म के किरदारों के संबंधो को बहुत ही बारीकी से बुन कहानी के संवेदना को अंत तक जिवित रखा है. समाज के अंतिम पायदान पर खड़े इंसान की बात को रखने की संवेदना सुदीप जैसे निर्देशक ही कर सकते हैं. निर्देशन कमाल का है फ़िल्म में एक भी दृश्य थोपा हुआ या जोड़ा हुआ प्रतीत नही होता है और संवादों से ज्यादा किरदारों के साथ निर्देशक का ट्रीटमेंट दर्शकों को इस कला का कायल बना जाता है. सुजीत एक तीर से कई निशाने साधने में माहिर मालूम पड़ते हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="644" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-01-650x644.jpg" alt="" class="wp-image-77439" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-01-650x644.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-01-350x347.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-01-768x761.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-01.jpg 1024w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>फ़िल्म में राम विलास के मुख्य पात्र को चंदन सिंह राजपूत और उनकी पत्नी किरण की भूमिका निभाने वाली मुख्य अभिनेत्री श्यामली ने बखूबी निभाया है. किरदारों की केमेस्ट्री ऐसी है कि देखने वाले दांतो तले उंगलियां दबाने पर मजबूर हो जाएंगे. भोजपुर की बेटी श्यामली इस फ़िल्म में देखने के बाद भोजपुर के लोग फ़क्र महसूस करेंगे. वही सहायक किरदारों में अंधी माँ के रोल में किरण यादव ने अलग कमाल किया है निगेटिव रोल में देव ने कम समय में ही अपनी उपस्थिति का एहसास कराया है. वेब सीरीज पंचायत में दिखे बुल्लू कुमार भी चरित्र अभिनेता में रूप मे दर्शकों के बीच छाए रहते हैं. अन्य किरदारों में दीपक सिंह, सतीश वर्मा ,अजीत सिंह मुखिया, रितेश कुमार सिंह, आशुतोष पांडे ,अर्णव, राम विनय सिंह और दिलीप वर्मा भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रहे हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="488" height="650" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-488x650.jpg" alt="" class="wp-image-77440" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-488x650.jpg 488w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-263x350.jpg 263w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 488px) 100vw, 488px" /></figure>



<p><strong>स्क्रीनिंग में आये गेस्ट भी हुए कायल</strong></p>



<p>फ़िल्म की स्क्रीनिंग में पहुँचे इंडस्ट्री के कई बड़े नाम व गेस्ट ने भी फिल्म देखने के बाद उसकी जमकर तारीफ की. रामायण की सीता यानि दीपिका चिखलीया ने पटना नाउ से बात करते हुए कहा कि फ़िल्म की मेकिंग और सभी पात्रों के अभिनय की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि भोजपुरी इंडस्ट्री में इतने सधे हुए कलाकार हैं देखकर बहुत खुशी हुई. स्क्रीनिंग में बतौर गेस्ट पहुंची दीपिका ने कहा कि फ़िल्म के अंत की उत्सुकता इतनी बनी हुई थी कि मध्यांतर में टी ब्रेक उन्हें पसंद नही आ रहा था. वही टेलीविजन के चर्चित कलाकार परितोष त्रिपाठी भी फ़िल्म के कायल हो गए उन्होंने निर्देशक सुदीप के साथ सभी कलाकारों को बधाई देते हुए कहा कि खुशी हो रही है इस तरह की उम्दा फ़िल्म के लिए ऐसी टीम का जुटान हुआ है. यह फ़िल्म एक नया इतिहास बनाएगी ऐसी उम्मीद है.</p>



<p><strong>बर्थडे गिफ्ट में राजकुमार पांडेय ने श्यामली को दिया एक फ़िल्म</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="572" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-001-650x572.jpg" alt="" class="wp-image-77443" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-001-650x572.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-001-350x308.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-001-768x676.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/PNC_kalyug-ke-ram-screening-001.jpg 1023w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>फ़िल्म की अभिनेत्री श्यामली को इस फ़िल्म के थियेटर में आने से पहले ही डबल धमाका जैसा उपहार मिल गया. पहला उपहार तो श्यामली को उनके जन्मदिन पर उनकी फ़िल्म के स्क्रीनिंग का यादगार उपहार मिला वही इस मौके पर उन्हें एक फ़िल्म का ऑफर भी इंडस्ट्री के बड़े निर्देशक ने दे दिया.</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/20230820_184103-650x540.jpg" alt="" class="wp-image-77441" width="365" height="303" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/08/20230820_184103-650x540.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/20230820_184103-350x291.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/20230820_184103-768x638.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/20230820_184103-1536x1276.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2023/08/20230820_184103-2048x1702.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 365px) 100vw, 365px" /></figure>



<p>स्क्रीनिंग के इस मौके पर भोजपुरी के जाने-माने निर्माता निर्देशक आर. राजकुमार पांडेय ने भी पटना नाउ से बात करते हुए फ़िल्म की भरपूर तारीफ़ की. फ़िल्म के निर्देशन, क्राफ्ट और अभिनेताओं के अभिनय के वे कायल हो गए. उन्होंने इस मौके पर फ़िल्म की मुख्य किरदार निभा रही अभिनेत्री शयमली श्रीवास्तव को जन्मदिन के गिफ्ट के तौर पर एक फ़िल्म में बतौर नायिका के रूप में चयनित किया और इसकी सार्वजनिक घोषणा भी कर डाली. वही निर्देशक उज्ज्वल पांडेय ने भी अपनी फिल्म के लिए श्यामली का चयन किया है जिसकी घोषणा जन्मदिन के दिन की गई.</p>



<p><strong>इन जगहों पर हुई है फ़िल्म की शूटिंग</strong></p>



<p>देसी लोटा इंटरटेनमेंट एवं आरवीएस फिल्म्स के बैनर तले बनी इस फिल्म की शूटिंग बिहार के सिवान और छपरा जिले में हुई है. सिवान जिले के सोन्धानी भगवानपुर और छपरा जिले के बहरौली, मशरक, डुमर्सन, दूमदूमा मंदिर चांद बरवा सहित आसपास के गांव में इस फिल्म की शूटिंग के दौरान उत्सव का माहौल था. भोजपुरी फिल्मों के जाने-माने निर्देशक सुजीत वर्मा के निर्देशन में बनी इस फिल्म का संगीत साजन मिश्र ने दिया है जबकि छायांकन इमरान ने किया है. फिल्म के निर्माता राम विनय सिंह और राकेश तिवारी है.</p>



<p>शूटिंग में बहरौली(सिवान जिला)पंचायत के मुखिया अजीत कुमार सिंह और बनियापुर के कृष्ण मोहन सिंह का मह्त्वपूर्ण सहयोग हैं. फिल्म के निर्माता राकेश तिवारी ने बताया कि हमने एक साफ-सुथरी कहानी और कंटेंट प्रधान फिल्म बनाने की पूरी कोशिश की है. उम्मीद है कि यह दर्शकों को जरूर प्रभावित करेगी. यह फिल्म भोजपुरी फिल्मों के लिए नया दौर भी पैदा कर सकती हैं.</p>



<p>अब इंतजार है इस फ़िल्म के सिंगल सिनेमाघरों में लगने का जहाँ दर्शकों का प्यार इसपर भरपूर बरसेगा. फ़िल्म के स्क्रीनिंग के बाद उससे मन मे उत्पन्न प्रभाव ने तो फिलहाल यही झलक दी है.</p>



<p>मुंबई से <strong>ओ पी पांडेय</strong> की रिपोर्ट</p>
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		<title>भोजपुरी साहित्य की समृद्ध परम्परा के प्रतिनिधि हैँ महेन्दर मिसिर : कुलपति</title>
		<link>https://www.patnanow.com/bhojpuri-literature-is-enrich/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 13 Jul 2023 13:03:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
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					<description><![CDATA[महेन्द्र मिसिर के काव्य संग्रह का हुआ लोकार्पण आरा, 13 जुलाई. वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर भोजपुरी विभाग के समारोह में भोजपुरी के चर्चित कवि गीतकार महेन्दर मिसिर की प्रतिनिधि कविताओं का लोकार्पण समारोह आयोजित हुआ. समारोह की शुरुआत में भोजपुरी विभाग के छात्र अविनाश पाण्डेय और प्रीति पाण्डेय ने महेंदर मिसिर के गीतों को मधुर आवाज़ में सुनाया. चर्चित लोकगायिका और विभाग की छात्रा अंकिता पंडित ने महेन्दर मिसिर रचित शिव विवाह गीत को सुनाया और कवि की रचनाओं में स्त्री विमर्श की चर्चा की. समारोह में मुख्य अतिथि कुलपति शैलेन्द्र कुमार चतुर्वेदी ने महेन्दर मिसिर के रचनाकर्म को याद करते हुए उन्हें भोजपुरी की समृद्ध साहित्य परम्परा का प्रतिनिधि रचनाकार बताया. साथ ही उन्होंने भोजपुरी की संवैधानिक मान्यता से जुड़ी बातों की चर्चा की तथा छात्रों से भोजपुरी भाषा के गौरव को आगे बढ़ाने का आह्वान किया. वरिष्ठ पत्रकार गुंजन सिन्हा ने अपने सम्बोधन में भोजपुरी साहित्य के अन्य भाषाओं में अनुवाद करने का आग्रह किया जिससे भोजपुरी साहित्य की पहचान वैश्विक स्तर पर और मज़बूत हुआ. पूर्व विभागाध्य्क्ष रविन्द्र नाथ राय ने महेन्दर मिसिर की कविताओं में रागात्मकता, आध्यमिकता क्व तत्त्वों पर प्रकाश डाला. संग्रह के प्रकाशक सारव प्रकाशन के अध्यक्ष और जे पी विवि छपरा के पूर्व प्राध्यापक पी राज सिंह ने महेन्दर मिसिर के गीतों के संकलन और प्रकाशन से जुड़े अनुभवों को साझा किया. साथ ही उन्होंने संग्रह के संपादक सुरेश कुमार मिश्र के रिकॉर्डेड संदेश को सुनाया. अपने अध्यक्षीय संबोधन में हिंदी भोजपुरी के विभागाध्यक्ष ने महेन्दर मिसिर के गीतों में भक्ति, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>महेन्द्र मिसिर के काव्य संग्रह का हुआ लोकार्पण</strong></p>



<p>आरा, 13 जुलाई. वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर भोजपुरी विभाग के समारोह में भोजपुरी के चर्चित कवि गीतकार महेन्दर मिसिर की प्रतिनिधि कविताओं का लोकार्पण समारोह आयोजित हुआ. समारोह की शुरुआत में भोजपुरी विभाग के छात्र अविनाश पाण्डेय और प्रीति पाण्डेय ने महेंदर मिसिर के गीतों को मधुर आवाज़ में सुनाया. चर्चित लोकगायिका और विभाग की छात्रा अंकिता पंडित ने महेन्दर मिसिर रचित शिव विवाह गीत को सुनाया और कवि की रचनाओं में स्त्री विमर्श की चर्चा की.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/PNC_Mahaendra-misir-lokarpan-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-76375" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/PNC_Mahaendra-misir-lokarpan-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/PNC_Mahaendra-misir-lokarpan-350x197.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/PNC_Mahaendra-misir-lokarpan-768x432.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/PNC_Mahaendra-misir-lokarpan-1536x864.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/PNC_Mahaendra-misir-lokarpan.jpg 1600w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>समारोह में मुख्य अतिथि कुलपति शैलेन्द्र कुमार चतुर्वेदी ने महेन्दर मिसिर के रचनाकर्म को याद करते हुए उन्हें भोजपुरी की समृद्ध साहित्य परम्परा का प्रतिनिधि रचनाकार बताया. साथ ही उन्होंने भोजपुरी की संवैधानिक मान्यता से जुड़ी बातों की चर्चा की तथा छात्रों से भोजपुरी भाषा के गौरव को आगे बढ़ाने का आह्वान किया. वरिष्ठ पत्रकार गुंजन सिन्हा ने अपने सम्बोधन में भोजपुरी साहित्य के अन्य भाषाओं में अनुवाद करने का आग्रह किया जिससे भोजपुरी साहित्य की पहचान वैश्विक स्तर पर और मज़बूत हुआ.</p>



<p>पूर्व विभागाध्य्क्ष रविन्द्र नाथ राय ने महेन्दर मिसिर की कविताओं में रागात्मकता, आध्यमिकता क्व तत्त्वों पर प्रकाश डाला. संग्रह के प्रकाशक सारव प्रकाशन के अध्यक्ष और जे पी विवि छपरा के पूर्व प्राध्यापक पी राज सिंह ने महेन्दर मिसिर के गीतों के संकलन और प्रकाशन से जुड़े अनुभवों को साझा किया. साथ ही उन्होंने संग्रह के संपादक सुरेश कुमार मिश्र के रिकॉर्डेड संदेश को सुनाया.</p>



<p>अपने अध्यक्षीय संबोधन में हिंदी भोजपुरी के विभागाध्यक्ष ने महेन्दर मिसिर के गीतों में भक्ति, प्रेम और निर्गुण तीनों धाराओं की चर्चा की और गायकों संगीतकारों से महेन्दर मिसिर के गीतों को महेंद्र संगीत कहकर चिन्हित करने का आग्रह किया.</p>



<p>कार्यक्रम में भोजपुरी आंदोलन से जुड़े कई गणमान्य व्यक्तियों के अलावा अर्थशास्त्र विभाग के नीरज वर्मा, अंग्रेजी विभाग के विजय राज कुमावत, आनंद भूषण पाण्डेय, समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष अवध बिहारी सिंह, हिंदी विभाग के नवनीत राय, मुकेश कुमार, नीलम्बुज सिंह के अलावा सीनेटर और पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष बलिराज ठाकुर, आकाशवानी पटना के प्रदीप भास्कर, भोजपुरिया जनमोर्चा के कुमार शीलभद्र, भोजपुरी विकास एवं शोध संस्थान के कृष्ण कुमार कृष्णेन्दु, वरिष्ठ पत्रकार भीम सिंह भवेश, नरेन्द्र सिंह प्रमुख थे. मंच संचालन विभाग की छात्रा आकृति विज्ञ अर्पण तथा धन्यवाद ज्ञापन शोधछात्र रवि प्रकाश सूरज ने किया. लोकार्पण समारोह के सफल आयोजन में विभाग के शोधार्थियों एवं छात्रों संजय कुमार, यशवंत कुमार, राजेश कुमार, सोहित सिन्हा, शुभम ओझा का उल्लेखनीय योगदान रहा.</p>



<p><strong>PNCB</strong></p>
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		<title>भोजपुरी को 8वीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए जल्द होगा बड़ा आन्दोलन</title>
		<link>https://www.patnanow.com/there-will-be-a-big-movement-soon-to-include-bhojpuri-in-the-8th-schedule/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 07 Jul 2023 05:42:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA]]></category>
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					<description><![CDATA[नीतीश और 4 सांसद केंद्र से कर चुके हैं मांग 7 साल पहले राज्य कैबिनेट का प्रस्ताव भेजा गया था गृह मंत्रालय को मोदी पीएम बनिहे त भोजपुरी के मिली दर्जा ; रविशंकर प्रसाद 9 साल बाद भी भोजपुरी को मान्यता नहीं मिलने नाराज है भोजपुरी के लोग 3 सांसदों ने गृह मंत्री को, 1 ने पीएम को लिखा पत्र 2021 में  सांसद राधा मोहन सिंह व गिरिराज सिंह ने गृह मंत्री को पत्र लिखा 4 अगस्त 2022में  चतरा सांसद सुनील कुमार ने गृह मंत्री शाह को पत्र लिखा 26 जुलाई 2022 में गोरखपुर के सांसद रवि किशन ने पीएम मोदी को पत्र लिखा एक बार फिर सुलगने लगी है भोजपुरी को को 8वीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग .भोजपुर में इसके लिए खास तैयारी की जा रही है,युवा संगठित हो रहे हैं,इस बार सिर्फ युवा ही नहीं पूरा परिवार शामिल होगा जन आन्दोलन में.यह आग कभी भी भड़क सकती हैं. पिछले दो सालों में आरा में इस मांग को लेकर जन आन्दोलन हुए हैं सड़के जाम हो गई ट्रेने रोकी गई और यह आन्दोलन कई दिनों तक चला. आरा के सांसद ने आर के सिंह ने भी बात करने के आश्वासन दिए लेकिन 9 सालों के बाद कुछ नहीं कर पाए. अब भोजपुरी इलाके की जनता का उन पर से विश्वास उठ चूका है लिहाजा अब भोजपुरी भाषी इलाके के लोग आन्दोलन करने को विवश झो गए हैं. देशभर में भोजपुरी भाषियों की संख्या पांच करोड़ से अधिक है। देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में भोजपुरी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p></p>



<p></p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color"><strong> नीतीश और 4 सांसद केंद्र से कर चुके हैं मांग</strong></p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color"><strong>7 साल पहले राज्य कैबिनेट का प्रस्ताव भेजा गया था गृह मंत्रालय को</strong></p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color"><strong>मोदी पीएम बनिहे त भोजपुरी के मिली दर्जा ; रविशंकर प्रसाद </strong></p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color"><strong>9 साल बाद भी भोजपुरी को मान्यता नहीं मिलने नाराज है भोजपुरी के लोग</strong></p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color"><strong>3 सांसदों ने गृह मंत्री को, 1 ने पीएम को लिखा पत्र</strong></p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color"><strong>2021 में  सांसद राधा मोहन सिंह व गिरिराज सिंह ने गृह मंत्री को पत्र लिखा</strong></p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color"><strong>4 अगस्त 2022में  चतरा सांसद सुनील कुमार ने गृह मंत्री शाह को पत्र लिखा</strong></p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color"><strong>26 जुलाई 2022 में गोरखपुर के सांसद रवि किशन ने पीएम मोदी को पत्र लिखा</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/images-1.jpg" alt="" class="wp-image-76132" width="837" height="492"/></figure>



<p class="has-black-color has-text-color">एक बार फिर सुलगने लगी है भोजपुरी को को 8वीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग .भोजपुर में इसके लिए खास तैयारी की जा रही है,युवा संगठित हो रहे हैं,इस बार सिर्फ युवा ही नहीं पूरा परिवार शामिल होगा जन आन्दोलन में.यह आग कभी भी भड़क सकती हैं. पिछले दो सालों में आरा में इस मांग को लेकर जन आन्दोलन हुए हैं सड़के जाम हो गई ट्रेने रोकी गई और यह आन्दोलन कई दिनों तक चला. आरा के सांसद ने आर के सिंह ने भी बात करने के आश्वासन दिए लेकिन 9 सालों के बाद कुछ नहीं कर पाए. अब भोजपुरी इलाके की जनता का उन पर से विश्वास उठ चूका है लिहाजा अब भोजपुरी भाषी इलाके के लोग आन्दोलन करने को विवश झो गए हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/download.jpg" alt="" class="wp-image-76133" width="816" height="614"/></figure>



<p>देशभर में भोजपुरी भाषियों की संख्या पांच करोड़ से अधिक है। देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में भोजपुरी बोली जाती है। सबसे अधिक बिहार में 2.58 करोड़ व यूपी में 2.18 करोड़ लोग भोजपुरी बोलते हैं. जबकि सबसे कम लक्षद्वीप में 10 और पुडुचेरी में 24 लोग भोजपुरी बोलते हैं. भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए 2021 से अब तक चार जनप्रतिनिधियों और राज्य सरकार ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखा है.</p>



<p>भोजपुरी संगठन से जुड़े लोग बताते है कि एक बार फिर से इसे आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए आंदोलन तेज करने की तैयारी है. बिहार-यूपी के बड़े साहित्यकार फिर से इस आंदोलन को तेज करने के लिए लोगों को एकजुट करने में जुटे हैं. भोजपुरी भाषी क्षेत्र के सभी सांसदों को एक मंच पर लाकर बड़े आंदोलन को शुरू करने की तैयारी है. सांसदों को पत्र लिखा जा रहा है.सभी सांसदों को गृह मंत्रालय की ओर से कमोबेश एक ही जवाब उपलब्ध कराया गया कि अभी 22 भाषाएं संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल है। अन्य भाषाओं को शामिल करने से संबंधित भावनाओं और मांगों को लेकर सरकार सचेत है, ऐसे अनुरोधों को ध्यान में रखकर विचार करना होगा. भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए राज्य सरकार ने कैबिनेट से प्रस्ताव पारित कर गृह मंत्रालय को 2017 में ही प्रस्ताव भेजा था.</p>



<p>तत्कालीन मुख्य सचिव त्रिपुरारी शरण ने गृह मंत्रालय को 18 अगस्त 2021 को पत्र लिखकर कार्रवाई का ब्यौरा मांगा, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला.वरिष्ठ साहित्यकार डॉ नीरज सिंह का कहना है कि भोजपुरी के 8वीं अनुसूची में शामिल होते ही यह कार्य और रोजगार से  जुड़ जाएगा। कई तरह की संभावनाएं बढ़ जाएंगी.नीचे से ऊपर स्तर तक विभिन्न पदों पर बहाली हो सकेगी. साथ में प्राइमरी स्तर पर पढ़ाई शुरू करने को भी बल मिलेगा.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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		<title>पुलिस मुख्यालय का फरमान, अश्लील सिंगर सावधान !</title>
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		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Feb 2023 08:12:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अश्लील और जाति सूचक गायकों पर होगी सख्त कार्रवाई ! अश्लील और जाति सूचक शब्दों पर गीतों को ले प्रशासन सजग पकड़े जाए ऐसे गायक व गीतकार, पुलिस मुख्यालय ने जारी किया फरमान आरा, 17 फरवरी. भोजपुरी सिंगर सावधान! अपनी ओछी लोकप्रियता के लिए अश्लील, जाति सूचक और महिला अस्मिता पर प्रहार कर पॉपुलर होने की चाह रखने वाले गायकों के लिए बुरी ख़बर है वही भोजपुरी के लिए अच्छी ख़बर है. जी हाँ भोजपुरी गीतों में अश्लीलता और जाति सूचक शब्दों से गन्ध मचाने वालों पर प्रशासन ने संज्ञान लिया है. इसके तहत ऐसे गायकों, इसे लिखने वालों और सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वालों पर कार्रवाई हो सकती है. ऐसा करने वालों पर प्रशासन ऐसे लोगों या तत्वों पर कानूनी कार्रवाई करने के लिए मूड बना चुकी है. अश्लील, जाति सूचक और महिला अस्मिता पर प्रहार करने वालों पर प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए एक अध्यादेश जारी किया है. यह अध्यादेश पुलिस मुख्यालय ने जारी किया है. जारी अध्यादेश सभी जिला अधिकारियों, पुलिस अधीक्षक और वरीय पुलिस अधीक्षकों को भेजा गया है. साथ ही सभी क्षेत्रीय निरीक्षक और महानिरीक्षकों को भी सूचनार्थ भेजा गया है. जारी अध्यादेश के मिलने के बाद भोजपुर SP ने जिले के सभी लोगों से इस पर ध्यान देने और अक्षरशः इसे पालन करने का अपील किया है. आदेश का उलंघन करने वालों पर कानून का डंडा कभी भी चल सकता है. SP भोजपुर की अपील : सभी को अवगत कराना है कि विशेष शाखा के द्वारा एक पत्र प्राप्त हुआ है जिसमें इस [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><em><strong>अश्लील और जाति सूचक गायकों पर होगी सख्त कार्रवाई !</strong></em></p>



<p><strong>अश्लील और जाति सूचक शब्दों पर गीतों को ले प्रशासन सजग</strong></p>



<p><strong>पकड़े जाए ऐसे गायक व गीतकार, पुलिस मुख्यालय ने जारी किया फरमान</strong></p>



<p>आरा, 17 फरवरी. भोजपुरी सिंगर सावधान! अपनी ओछी लोकप्रियता के लिए अश्लील, जाति सूचक और महिला अस्मिता पर प्रहार कर पॉपुलर होने की चाह रखने वाले गायकों के लिए बुरी ख़बर है वही भोजपुरी के लिए अच्छी ख़बर है. जी हाँ भोजपुरी गीतों में अश्लीलता और जाति सूचक शब्दों से गन्ध मचाने वालों पर प्रशासन ने संज्ञान लिया है. इसके तहत ऐसे गायकों, इसे लिखने वालों और सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वालों पर कार्रवाई हो सकती है. ऐसा करने वालों पर प्रशासन ऐसे लोगों या तत्वों पर कानूनी कार्रवाई करने के लिए मूड बना चुकी है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="420" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC_bhojpuri-singer-savdhan.jpg" alt="" class="wp-image-71587" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC_bhojpuri-singer-savdhan.jpg 420w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC_bhojpuri-singer-savdhan-245x350.jpg 245w" sizes="auto, (max-width: 420px) 100vw, 420px" /><figcaption>मुख्यालय द्वारा वर्तमान में जारी अध्यादेश</figcaption></figure>



<p>अश्लील, जाति सूचक और महिला अस्मिता पर प्रहार करने वालों पर प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए एक अध्यादेश जारी किया है. यह अध्यादेश पुलिस मुख्यालय ने जारी किया है. जारी अध्यादेश सभी जिला अधिकारियों, पुलिस अधीक्षक और वरीय पुलिस अधीक्षकों को भेजा गया है. साथ ही सभी क्षेत्रीय निरीक्षक और महानिरीक्षकों को भी सूचनार्थ भेजा गया है. जारी अध्यादेश के मिलने के बाद भोजपुर SP ने जिले के सभी लोगों से इस पर ध्यान देने और अक्षरशः इसे पालन करने का अपील किया है. आदेश का उलंघन करने वालों पर कानून का डंडा कभी भी चल सकता है.</p>



<p><strong>SP भोजपुर की अपील :</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="351" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/PNC_bhojpur-SP-pramod-kumar.jpg" alt="" class="wp-image-70495" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/PNC_bhojpur-SP-pramod-kumar.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/01/PNC_bhojpur-SP-pramod-kumar-350x189.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="354" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/PNC_Bhojpur-SP-Pramod-kumar-Yadav-1.jpg" alt="" class="wp-image-71020" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/01/PNC_Bhojpur-SP-Pramod-kumar-Yadav-1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/01/PNC_Bhojpur-SP-Pramod-kumar-Yadav-1-350x191.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption>भोजपुर SP : प्रमोद कुमार यादव</figcaption></figure>



<p>सभी को अवगत कराना है कि विशेष शाखा के द्वारा एक पत्र प्राप्त हुआ है जिसमें इस बात का उल्लेख किया गया है कि हाल में कुछ भोजपुरी गाने अश्लील प्रकृति के हैं और इसमें कुछ गानों में जातिसूचक शब्दों का वर्णन है जिसके वजह से कई बार इन गानों के किसी विशेष आयोजन के समय बजाए जाने के उपरांत स्थानीय लोगों में आपस में तनाव उत्पन्न होता है अतः सभी जिला पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को यह निर्देशित किया गया है कि सभी अवर पदाधिकारियों के माध्यम से ऐसे गानों पर सख्ती बरतनी है और ऐसे अश्लील गानों को बजाने वालों और सोशल मीडिया पर अपलोड करने वालों या ऐसे गानों के माध्यम से सामाजिक तनाव उत्पन्न करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ विधि संगत कार्रवाई करने का निर्देश प्राप्त है इस आलोक में सभी अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी और थानाध्यक्ष तथा अन्य पदाधिकारियों को विधि सम्मत कार्यवाही हेतु निर्देशित कर दिया गया है और मीडिया के माध्यम से भी अनुरोध है कि आमजन ऐसे अश्लील और विवाद उत्पन्न करने वाले गानों को बजाने से और किसी भी सोशल मीडिया पर अपलोड करने से बचें.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC_Ashlil-song-poster.jpg" alt="" class="wp-image-71589" width="370" height="208" /><figcaption>कुछ ऐसे अश्लील पोस्टरों और वीडियो से भरा पड़ा है यू ट्यूब</figcaption></figure>



<p>बताते चलें कि इसके लिए पूर्व में भी कई अभियान चला जिसमें अम्बा(amba) (अश्लीलता मुक्त भोजपुरी असोसिएशन) का बहुत बड़ा योगदान रहा है. </p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC_Amba-poster-compaign.jpg" alt="" class="wp-image-71596" width="382" height="253" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC_Amba-poster-compaign.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC_Amba-poster-compaign-350x233.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 382px) 100vw, 382px" /><figcaption>अम्बा द्वारा पोस्टर के जरिये भोजपुरी के लिए जागरूकता (फ़ाइल फ़ोटो)</figcaption></figure>



<figure class="wp-block-embed"><div class="wp-block-embed__wrapper">
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=pfbid0Hf4n1ktHFfpUxNtc18pTzUafotnAxYbAbcREPDDPT1ccaTD29CFPHf1wHCzWKLYgl&#038;id=815635815182249&#038;mibextid=Nif5oz
</div></figure>



<p>2014 में अम्बा ने अश्लीलता मुक्त भोजपुर करने का अभियान चलाया था जिसमें प्रशासन के सहयोग से जिले के सभी थाना क्षेत्रों में 10 बजे बाद रात में डीजे पर रोक लगा दी गयी थी साथ ही अश्लील गीतों पर लगाम लगाने के लिए कई DJ संचालकों को उस समय के तत्कालीन SP नवीन चन्द्र झा ने पकड़ा भी था जिसके बाद भोजपुर में ऑटो में भी अश्लील गाना बजना बन्द हो गया था.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC-amba-poster.jpg" alt="" class="wp-image-71593" width="367" height="186" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC-amba-poster.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC-amba-poster-350x177.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 367px) 100vw, 367px" /><figcaption>अम्बा द्वारा लगाया गया पूर्व में कई जगह जागरूकता के लिए बैनर (फ़ाइल फ़ोटो)</figcaption></figure>



<p>लगातार शिकायत के बाद एक्टिव पुलिस की कार्रवाई ने अश्लील गायकों के मन मे एक डर जरूर पैदा कर रखा था. यहाँ तक कि भोजपुरी के अश्लील गायक खेसारी लाल का प्रोग्राम तक प्रशासन ने रद्द कर दिया था. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="454" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC_Order-of-SDO-for-cancel-khesari-program-1.jpg" alt="" class="wp-image-71592" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC_Order-of-SDO-for-cancel-khesari-program-1.jpg 454w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/PNC_Order-of-SDO-for-cancel-khesari-program-1-265x350.jpg 265w" sizes="auto, (max-width: 454px) 100vw, 454px" /><figcaption>SDO द्वारा अश्लील गायक के प्रोग्राम को रद्द करने का 2018 का आदेश(फ़ाइल फ़ोटो)</figcaption></figure>



<p>इसी कड़ी में हाई कोर्ट का भी जब अश्लील गायकों पर कार्रवाई का आदेश जारी हुआ तो लगा कि अश्लीलता जड़ से समाप्त जो जाएगी लेकिन इस दिशा में प्रशासनिक शिथिलता ने एक बार फिर अश्लीलता के साथ जाति सूचक शब्दों का गीतों में प्रचलन बढ़ा दिया यहां तक कि महिला अस्मिता पर भी गीतों के माध्यम से प्रहार ने सामाजिक विद्वेषता का बीज बो दिया. ऐसे में कई अप्रिय घटनाओं, मारपीट और भोजपुरी को लगातार अश्लीलता का पर्याय बनने के बाद एक बार फिर से प्रशासन ने भोजपुरी को शर्मसार करने वालों के खिलाफ कमर कस लिया है. देखना यह है कि इस बार के इस प्रशासनिक तैयारी में कितने लोगों पर कानून का चाबुक चलता है.</p>





<p>आरा से <strong>ओ पी पांडेय</strong> की रिपोर्ट</p>
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