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	<title>Bhikhari Thakur &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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	<title>Bhikhari Thakur &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>पुण्यतिथि पर याद किए गए भिखारी ठाकुर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Jul 2025 04:01:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
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					<description><![CDATA[सूत्रधार के कलाकारों ने मनाई भिखारी ठाकुर की 54वीं पुण्यतिथि भोजपुरी के जीवंत पुरोधा थे भिखारी ठाकुर खगौल।। पटना में लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की 54 वीं पुण्यतिथि पर नाट्य संस्था सूत्रधार, खगौल द्वारा राधा कृष्ण हॉल, खगौल में &#8220;भिखारी ठाकुर के नाटकों में स्त्री विमर्श&#8221; विषय पर आधारित एक परिचर्चा एवं लोकगायन कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत भिखारी ठाकुर की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हाल ही दिवंगत हुए संस्था के लिए सदैव समर्पित रंगकर्मी एवं पत्रकार राम नारायण पाठक एवं कला प्रेमी राजकिशोर गुप्ता(बब्लू) के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देते हुए की गई। आरंभ में भिखारी ठाकुर रचित गीतों गायक लवकुश के स्वर में हुआ. तबले पर उनका साथ अभिजीत, नाल पर राजीव रंजन त्रिपाठी एवं हारमोनियम पर भोला सिंह उनका साथ दिया. इसके उपरांत भिखारी ठाकुर की रचनाओं मे स्त्री विमर्श विषय पर परिचर्चा आरंभ हुई. कार्यक्रम आरम्भ करते हुए संस्था के महासचिव नवाब आलम ने कहा कि भिखारी ठाकुर द्वारा उनके नाटकों में वर्णित कालखंड में व्याप्त सामाजिक कुरीतियों एवं स्त्री जाति के शोषण तथा उनकी दुर्दशा की चर्चा करते हुए स्त्रियों को उनके अस्तित्व और अधिकार के प्रति जागरूक करने में उनका योगदान अविस्मरणीय है और सदा रहेगा. भिखारी ठाकुर का कार्य सिर्फ स्त्री विमर्श तक सीमित नहीं किया जा सकता. उन्होंने समाज के हर वर्ग, हर व्यक्ति से जुड़ें पहलूओं को बहुत बारीकी से सामने रखा है.नवाब आलम ने कहा कि भिखारी ठाकुर ने औपचारिक विद्यालय का दरवाजा नहीं देखा गांव में शिक्षा का कोई साधन नहीं था परंतु कालांतर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सूत्रधार के कलाकारों ने मनाई भिखारी ठाकुर की 54वीं पुण्यतिथि</strong></p>



<p><strong>भोजपुरी के जीवंत पुरोधा थे भिखारी ठाकुर</strong></p>



<p>खगौल।। पटना में लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की 54 वीं पुण्यतिथि पर नाट्य संस्था सूत्रधार, खगौल द्वारा राधा कृष्ण हॉल, खगौल में &#8220;भिखारी ठाकुर के नाटकों में स्त्री विमर्श&#8221; विषय पर आधारित एक परिचर्चा एवं लोकगायन कार्यक्रम आयोजित किया गया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="684" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/07/1000267343-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-91056" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/07/1000267343-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/07/1000267343-650x434.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>कार्यक्रम की शुरुआत भिखारी ठाकुर की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हाल ही दिवंगत हुए संस्था के लिए सदैव समर्पित रंगकर्मी एवं पत्रकार राम नारायण पाठक एवं कला प्रेमी राजकिशोर गुप्ता(बब्लू) के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देते हुए की गई। आरंभ में भिखारी ठाकुर रचित गीतों गायक लवकुश के स्वर में हुआ. तबले पर उनका साथ अभिजीत, नाल पर राजीव रंजन त्रिपाठी एवं हारमोनियम पर भोला सिंह उनका साथ दिया. इसके उपरांत भिखारी ठाकुर की रचनाओं मे स्त्री विमर्श विषय पर परिचर्चा आरंभ हुई.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1024" height="460" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/07/1000267342-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-91057" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/07/1000267342-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/07/1000267342-650x292.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2025/07/1000267342-1536x690.jpg 1536w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>कार्यक्रम आरम्भ करते हुए संस्था के महासचिव नवाब आलम ने कहा कि भिखारी ठाकुर द्वारा उनके नाटकों में वर्णित कालखंड में व्याप्त सामाजिक कुरीतियों एवं स्त्री जाति के शोषण तथा उनकी दुर्दशा की चर्चा करते हुए स्त्रियों को उनके अस्तित्व और अधिकार के प्रति जागरूक करने में उनका योगदान अविस्मरणीय है और सदा रहेगा. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1024" height="460" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/07/1000267340-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-91058" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/07/1000267340-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/07/1000267340-650x292.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2025/07/1000267340-1536x690.jpg 1536w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>भिखारी ठाकुर का कार्य सिर्फ स्त्री विमर्श तक सीमित नहीं किया जा सकता. उन्होंने समाज के हर वर्ग, हर व्यक्ति से जुड़ें पहलूओं को बहुत बारीकी से सामने रखा है.नवाब आलम ने कहा कि भिखारी ठाकुर ने औपचारिक विद्यालय का दरवाजा नहीं देखा गांव में शिक्षा का कोई साधन नहीं था परंतु कालांतर में भोजपुरी रंगमंच का सम्राट बन गए.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="460" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/07/1000267339-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-91059" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/07/1000267339-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/07/1000267339-650x292.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2025/07/1000267339-1536x690.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>अपने जीवन के अनुभवों को ही अपना विश्वविद्यालय बना लिया.वरिष्ठ फिल्म एवं रंगमंच अभिनेता पंकज मिश्रा ने कहा कि महिला सशक्तिकरण और महिलाओं की मुक्ति की बात की शुरूआत अगर हम करेंगे तो उसकी शुरूआत हमें भिखारी ठाकुर की रचनाओं से करना होगा. वरिष्ठ संस्कृतिकर्मी विनोद शंकर मिश्र ने कहा कि बिदेशिया के माध्यम से उन्होंने स्त्री के दर्द, उसके वियोग और दुख को समाज के सामने रखा. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="684" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/07/pnc-bhikhari-thakur-punyatithi-sutradhar-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-91061" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/07/pnc-bhikhari-thakur-punyatithi-sutradhar-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2025/07/pnc-bhikhari-thakur-punyatithi-sutradhar-650x434.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>अरुण सिंह ने कहा कि वो स्त्री के मन के मर्म को जिस तरह से समझ कर अपने नाटकों के माध्यम से सामने रखते थे. वो उनकी विशिष्टता थी. अरुण सिंह पिंटू ने बेटी बेचवा के गीत का उदाहरण देते हुआ कहा कि जितनी सरल भाषा में उन्होंने लिखा है उतना सरल और प्रभावी तरीके से किसी ने नहीं लिखा. दीनानाथ प्रसाद यादव ने कहा भिखारी ठाकुर को शेक्सपियर से भी बड़ी चीज़ थे, भोजपुरी के जीवंत पुरोधा थे. संबोधित करने वालों में जय प्रकाश मिश्र, प्रीतम कुमार, अशोक कुणाल आदि शामिल थे भिखारी ठाकुर जी जुड़ी यादों को साझा किया. इस मौके पर चंदू प्रिंस मोहन पासवान, अनीता देवी, अमरजीत शर्मा, अमन कुमार समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे.</p>



<p><strong><em>अजीत</em></strong></p>
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		<title>भिखारी ठाकुर लोकोत्सव 2024 में हुआ भोजपुरी संयुक्त संघर्ष मोर्चा का गठन</title>
		<link>https://www.patnanow.com/bhikhari-lokotsav-me-hua-sngharsh-morcha-kaa-gathan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Dec 2024 23:49:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सांसद सुदामा प्रसाद को भिखारी ठाकुर स्मृति सम्मान आरा, 19 दिसम्बर. भिखारी ठाकुर सांस्कृतिक मंच पर विगत तीन दिनों से चल रहे भिखारी ठाकुर लोकोत्सव के 24वें संस्करण का भव्य समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि मातृभाषा भोजपुरी के सम्मान और संवर्धन के उद्देश्य से निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी. इसके लिए भोजपुरी संयुक्त संघर्ष मोर्चा का गठन किया गया जिसकी कोर कमिटी में विभिन्न क्षेत्रों के भोजपुरीसेवियों को शामिल किया गया. जिनमें रांची से नवीन सिंह, डॉ अजय ओझा, गोरखपुर से नंदलाल मणि त्रिपाठी, देवरिया से जनार्दन सिंह, छपरा से उमाशंकर साहू, बक्सर से राजेश कुमार, रोहतास से स्यंदन सुमन, आरा से पत्रकार नरेंद्र सिंह, सोहित सिन्हा, पप्पू सिंह प्रमुख हैं. समापन दिवस के उद्घाटन सत्र की शुरुआत महापौर इंदु देवी, साहित्यकार एवं संस्कृतिकर्मियों नवीन सिंह, प्रीति सिंह, जनार्दन मिश्र, अंकिता पंडित, देवीदयाल राम, श्याम नारायण शर्मा, प्रो किरण कुमारी, वाल्मीकि शर्मा कयामुद्दीन अंसारी तथा सांसद प्रतिनिधि दिलराज प्रीतम एवं अन्य द्वारा दीप जलाकर हुई. भोजपुरी की संवैधानिक मान्यता के सवाल पर अतिथियों ने विचार रखे. सांसद प्रतिनिधि ने सांसद सुदामा प्रसाद का शुभकामना संदेश पढ़ा तथा संसद के सत्र में भोजपुरी से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की. अध्यक्ष नरेंद्र सिंह के आग्रह पर दिलराज प्रीतम ने कहा कि भोजपुरी में पत्र व्यवहार करने के लिए राजधानी दिल्ली में एक बॉक्स लगाया जाएगा. भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान का भिखारी ठाकुर स्मृति सम्मान सांसद सुदामा प्रसाद को भोजपुरी के लिए किए जा रहे संकल्प के लिए दिया गया. अन्य वार्षिक सम्मानों में भिखारी ठाकुर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>सांसद सुदामा प्रसाद को भिखारी ठाकुर स्मृति सम्मान</strong></p>



<p>आरा, 19 दिसम्बर. भिखारी ठाकुर सांस्कृतिक मंच पर विगत तीन दिनों से चल रहे भिखारी ठाकुर लोकोत्सव के 24वें संस्करण का भव्य समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि मातृभाषा भोजपुरी के सम्मान और संवर्धन के उद्देश्य से निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी. इसके लिए भोजपुरी संयुक्त संघर्ष मोर्चा का गठन किया गया जिसकी कोर कमिटी में विभिन्न क्षेत्रों के भोजपुरीसेवियों को शामिल किया गया. जिनमें रांची से नवीन सिंह, डॉ अजय ओझा, गोरखपुर से नंदलाल मणि त्रिपाठी, देवरिया से जनार्दन सिंह, छपरा से उमाशंकर साहू, बक्सर से राजेश कुमार, रोहतास से स्यंदन सुमन, आरा से पत्रकार नरेंद्र सिंह, सोहित सिन्हा, पप्पू सिंह प्रमुख हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001074569-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88204" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001074569-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001074569-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001074569-1536x1152.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001074569-2048x1536.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>समापन दिवस के उद्घाटन सत्र की शुरुआत महापौर इंदु देवी, साहित्यकार एवं संस्कृतिकर्मियों नवीन सिंह, प्रीति सिंह, जनार्दन मिश्र, अंकिता पंडित, देवीदयाल राम, श्याम नारायण शर्मा, प्रो किरण कुमारी, वाल्मीकि शर्मा कयामुद्दीन अंसारी तथा सांसद प्रतिनिधि दिलराज प्रीतम एवं अन्य द्वारा दीप जलाकर हुई. भोजपुरी की संवैधानिक मान्यता के सवाल पर अतिथियों ने विचार रखे. सांसद प्रतिनिधि ने सांसद सुदामा प्रसाद का शुभकामना संदेश पढ़ा तथा संसद के सत्र में भोजपुरी से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001074575-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88205" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001074575-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001074575-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001074575-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>अध्यक्ष नरेंद्र सिंह के आग्रह पर दिलराज प्रीतम ने कहा कि भोजपुरी में पत्र व्यवहार करने के लिए राजधानी दिल्ली में एक बॉक्स लगाया जाएगा. भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान का भिखारी ठाकुर स्मृति सम्मान सांसद सुदामा प्रसाद को भोजपुरी के लिए किए जा रहे संकल्प के लिए दिया गया. अन्य वार्षिक सम्मानों में भिखारी ठाकुर सांस्कृतिक मंच का विशेष सम्मान गोरखपुर की लोकगायिका अंकिता पंडित को, रंगकर्मी शशिनाथ त्रिवेदी सम्मान रंगकर्मी अंबुज कुमार को, समकालीन तापमान पत्रकारिता सम्मान युवा पत्रकार बंटी भारद्वाज को, साहित्यकार मधुकर सिंह स्मृति सम्मान कवि जनार्दन मिश्र को, पद्मश्री उस्ताद बिस्मिल्ला खां स्मृति सम्मान नवीन सिंह को , कवयित्री उर्मिला कौल स्मृति सम्मान डॉ रेणु मिश्र को, बाबू शत्रुंजय प्रसाद सिंह स्मृति सम्मान डॉ जया जैन को तथा, भोजपुरी सेवक सम्मान गीतकार कवि राज कवि, रंगकर्मी रंजन यादव, समाजसेवी कृष्ण प्रताप सिंह, फिल्म अभिनेता रामेश्वर, भोजपुरी शोधछात्र सोहित सिन्हा तथा व्यास कमलेश व्यास और उनकी टीम को दिया गया.</p>



<p><strong>अंकिता पंडित के शिव भजन और कमलेश व्यास के भिखारी ठाकुर गीत पर झूमे लोग</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="419" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001074580-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88216" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001074580-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001074580-650x266.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="631" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001074578-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88206" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001074578-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001074578-650x401.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>बुधवार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भोजपुरी लोकगायकी के सत्र में गोरखपुर से आई अंकिता पंडित ने शिव भजन और अलचारी सुनाया तथा कमलेश व्यास ने भिखारी ठाकुर रचित गीत और देवी पचरा गाकर सुनाया। दर्शकों और आगंतुक अतिथियों की विशेष फरमाइश पर भी कलाकारों ने भावविभोर करने वाले गीत प्रस्तुत किए.</p>



<p><strong>अगले साल लोकोत्सव की रजत जयंती, कवि शैलेन्द्र स्मारक के लिए मिला आश्वासन</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001074571-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88207" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001074571-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001074571-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001074571-1536x864.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001074571-2048x1152.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>कार्यक्रम के अंत आयोजन सचिव रवि कुमार सूरज ने कहा कि अगले साल लोकोत्सव का 25 वां रजत जयंती भव्य तरीके से होगा जिसमें विदेशों से भी अतिथि आयेंगे, इसके अलावा स्मारिका का पुनर्प्रकाशन भी होगा. मंच से सांसद प्रतिनिधि दिलराज प्रीतम ने अध्यक्ष नरेंद्र सिंह के आग्रह पर कवि शैलेन्द्र की स्मृति में स्मारक के लिए सांसद द्वारा हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया जिसके लिए भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान प्रस्ताव भेजेगा. युवा पत्रकार बंटी भारद्वाज ने अपने पिताजी और लोककलाकार मुक्तेश्वर उपाध्याय की स्मृति में स्थानीय बस पड़ाव पर भिखारी ठाकुर स्मृति द्वार बनवाने की घोषणा की.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001074573-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88208" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001074573-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001074573-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001074573-1536x1152.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001074573-2048x1536.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>अंत में आरा नगर निगम में भिखारी ठाकुर की भव्य पेंटिंग लगवाने के लिए महापौर इंदु देवी को धन्यवाद देते हुए सम्मानित किया गया. धन्यवाद ज्ञापन अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र सिंह ने किया.</p>



<p><strong>दूसरा दिन</strong></p>



<p><strong>पारंपरिक धोबिया नाच और नाटक के मंचन में जुटे हजारों दर्शक</strong></p>



<p><strong>स्कूली बच्चों की प्रस्तुति में भोजपुरी की वर्तमान दशा पर हुई चर्चा</strong></p>



<p>भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय भिखारी ठाकुर लोकोत्सव के दूसरे दिन देर शाम तक हजारों दर्शक जुटे रहे. जिसके उदघाट्न सत्र की शुरुआत चिकित्सकों डॉ पी सिंह, डॉ प्रतीक, डॉ जया जैन, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक डॉ योगेन्द्र सिंह, अधिवक्ता एवं पू शिक्षक देवीदयाल राम नंदलाल मणि त्रिपाठी, जनार्दन सिंह, जनार्दन मिश्र, प्रो किरण कुमारी, दुखन पासवान, जमीरा कोठी की लीला सिंह, पत्रकार अजय ओझा द्वारा दीप प्रज्वलित तथा संक्षिप्त संबोधन के साथ हुई.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="419" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001072895-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88209" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001072895-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001072895-650x266.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>उदघाटन के बाद संभावना उच्च विद्यालय की छात्राओं शिक्षक धर्मेंद्र जी के नेतृत्व में स्वागत गीत और कौशल जी के भिखारी ठाकुर रचित गीतों के गायन के साथ हुई. भोजपुरी की वर्तमान दशा विषय पर संभावना विद्यालय के आदित्य, आराध्या, अनुष्का, कृति, जैन बाला विश्राम की अंजलि, शिवानी, उर्सुला इन विद्यालय के निखिल, आर्यन तथा क्षत्रिय स्कूल के अमरजीत ने भाषण प्रतियोगिता में भाग लिया जिन्हें अतिथियों ने पुरस्कृत किया. आर एन एस डी पी एस स्कूल की छात्राओं ने शिक्षक अमित शंकर के मार्गदर्शन में पारंपरिक कजरी गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया. दूसरे दिन के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत बक्शी विकास के नेतृत्व में स्नेहा पांडेय और टीम द्वारा भिखारी ठाकुर कृत बिदेसिया पर शास्त्रीय कथक नृत्य प्रस्तुति के साथ हुई. इस अनूठी प्रस्तुति को दर्शकों की वाहवाही मिली. कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण गाजीपुर से आए सल्टू राम और उनकी टीम द्वारा पारंपरिक धोबिया गीत और कठघोड़वा नृत्य रहा. स्थानीय पटेल बस पड़ाव के प्रांगण में इस अदभुत और विलुप्त हो रही कला के प्रदर्शन पर तालियां बजती रही. देर शाम तक सुरेश जी की टीम द्वारा भिखारी ठाकुर रचित पुत्र वध उर्फ सौतेली मां नाटक का मंचन हो रहा था और दर्शक लगातार जमे हुए थे.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001075202-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88210" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001075202-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001075202-650x366.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>वार्षिक सम्मानों में कवि अजब दयाल सिंह भोजपुरिया सम्मान गोरखपुर के नंदलाल मणि त्रिपाठी और शारदा प्रसाद सिंह स्मृति संभावना सम्मान देवरिया के साहित्यकार जनार्दन सिंह को दिया गया. कार्यक्रम के मंच संचालन तथा व्यवस्था में अध्यक्ष नरेंद्र सिंह, कोषाध्यक्ष रामजी यादव, रंगकर्मी रंजन यादव, अमरदीप कुमार जय, पप्पू सिंह, कवि राज कवि, राजू रंजन, चंद्रभूषण पांडेय, सोहित सिन्हा, डॉ बीरेंद्र कुमार शर्मा, बंटी भारद्वाज, रवि प्रकाश सूरज का योगदान रहा.</p>



<p><strong>पहला दिन</strong></p>



<p><strong>भिखारी ठाकुर लोकोत्सव की पारंपरिक शुरुआत</strong></p>



<p><strong>आठवीं अनुसूची के मुद्दे पर निर्णायक शंखनाद का आह्वान</strong></p>



<p><strong>गोंड नाच की प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोहा</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="769" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001075205-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88212" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001075205-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001075205-650x488.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान के बैनर तले तीन दिवसीय भिखारी ठाकुर लोकोत्सव की शुरुआत पारंपरिक ढंग से हुई. पहले दिन जनप्रतिनिधियों, साहित्यकारों, पत्रकारों और संस्कृतिकर्मियों द्वारा भिखारी ठाकुर,बाबू ललन सिंह तथा उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की प्रतिमा पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्वलित कर हुई. उदघाटन सत्र को प्रो. डॉ धर्मेंद्र तिवारी, पूर्व कुलपति, इंदु देवी,महापौर,आरा नगर निगम, डॉ जया जैन, प्रो किरण कुमारी, मधु मिश्रा,धीरेन्द्र सिंह सीनियर सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन, साहित्यकार जनार्दन मिश्रा, प्रो रेणु मिश्र, बी डी सिंह,जीएम होटल मौर्य, प्रो दिनेश प्रसाद सिन्हा तथा अन्य साहित्यकारों ने संबोधित किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="419" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001075219-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88211" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001075219-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001075219-650x266.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>कमलेश व्यास द्वारा भिखारी रचित गंगा स्नान और अन्य गीतों की मधुर प्रस्तुति हुई. इसके बाद भोजपुरी की संवैधानिक मान्यता तथा अस्मिता की पहचान के सवाल विषय पर परिचर्चा आयोजित हुई. परिचर्चा में अन्य लोगों के अलावा डॉ रंजन विकास, रंजन प्रकाश, गोरखपुर के नन्दमणि लाल त्रिपाठी, मीडिया विशेषज्ञ डॉ अजय ओझा, देवरिया के जनार्दन सिंह, वीर कुंवर सिंह विवि भोजपुरी विभागाध्यक्ष प्रो दिवाकर पांडेय, डॉ कुमार शीलभद्र, डॉ बीरेंद्र कुमार शर्मा, आचार्य धर्मेंद्र तिवारी ने भाग लिया तथा भोजपुरी की संवैधानिक मान्यता के लिए भोजपुरी जनता को जागरूक होने तथा जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस ओर आकर्षित करने का आह्वान किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="768" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001075208-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88213" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001075208-scaled.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001075208-488x650.jpg 488w" sizes="auto, (max-width: 768px) 100vw, 768px" /></figure>



<p>वक्ताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि अब निर्णायक संघर्ष का समय है, सभी आंदोलनरत संगठनों को एक बैनर के नीचे आने की जरूरत है जिसका आगाज़ भिखारी ठाकुर लोकोत्सव के इसी मंच से होगा. संस्थान के अध्यक्ष तथा वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र सिंह ने एक कमिटी गठित करने का प्रस्ताव दिया जिसमें सभी संगठनों के लोग सहभागी होंगे. इसके बाद जोगीबीर के दरोगा गोंड, टुनटुन गोंड और उनकी टीम द्वारा गोंड नाच की भव्य प्रस्तुति हुई जिसे दर्शक एकटक देखकर भावविभोर हो गए.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="540" height="313" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001075213.jpg" alt="" class="wp-image-88215" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="462" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001075216-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88214" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001075216-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1001075216-650x293.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>अंत में संस्थान की स्मारिका के आवरण पेज की मुंहदिखाई हुई. भिखारी ठाकुर और भोजपुरी लोकसंस्कृति पर केंद्रित स्मारिका का प्रकाशन फरवरी तक किया जाएगा. आज के कार्यक्रम का संचालन नरेंद्र सिंह, रवि प्रकाश सूरज, बंटी भारद्वाज ने किया. कार्यक्रम में चंद्रभूषण पांडेय, कवि राज कवि, रंजन यादव, सोहित सिन्हा, रंगकर्मी राजू रंजन, आदित्य, रवि कुमार, शंकर जी आदि सदस्यों की भूमिका महत्वपूर्ण रही.</p>



<p><strong>PNCB</strong></p>



<p></p>
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			</item>
		<item>
		<title>ग्लोबल नहीं हैं भिखारी ठाकुर !</title>
		<link>https://www.patnanow.com/bhikhari-was-not-global-he-was-glocal-was-glocal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Jul 2024 17:23:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[स्त्री विमर्श के पहले व्यक्ति थे हिंदुस्तान के सोशल इंफ्लुएंसर थे भिखारी ठाकुर पटना,11 जुलाई(ओ पी पांडेय). राय बहादुर, अनगढ़ हीरा, ठाकुर जी और भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर की पुण्यतिथि के अवसर पर बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग ने नाच, नाट्य प्रस्तुति एवं परिचर्चा का कार्यक्रम आयोजित किया. कार्यक्रम का शुभारंभ कला संस्कृति एवं युवा विभाग के अपर मुख्य सचिव हरदीप कौल, निदेशक रूबी के साथ मुख्य वक्ता के रूप मे आये आगत अतिथियों में डॉ. नीतू प्रसाद नूतन वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार, लोक गायिका, मनीषा श्रीवास्तव,सन्तोष पटेल और डॉक्टर जैनेन्द्र कुमार दोस्त एवं प्रो. वीरेंद्र नारायण यादव(पूर्व राजभाधा अध्यक्ष) ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया. इस अवसर पर कला एवं सँस्कृति विभाग की अपर मुख्य सचिव हरदीप कॉल ने विभाग की ओर से सभी आगत अतिथियों और दर्शकों का स्वागत और आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि कला विभाग का यह कार्य इसलिए है कि आज की पीढ़ी हमारे पीढ़ी को जान सके. अगर हमें अपनी सुनहरी विरासत का दम्भ भरना है तो यह हमारा दायित्व है कि हम इनके बारे में बताएं. आज वैश्विक दुनिया है जब हर देश अपने विचारों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाता है तो उसको ही दुनिया अपनाने लगती है. उन्होंने कहा कि&#8220;हम ही हम है तो क्या तुम होतुम ही तुम हो तो क्या तुम होबात होगी तब जब हम तुम दोनों हों.&#8221; उन्होंने भिखारी ठाकुर पर प्रकाश डालते हए कहा कि रामायण देखने के बाद उन्हें लगा कि जो वेदना से छुआ जा सकता [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>स्त्री विमर्श के पहले व्यक्ति थे हिंदुस्तान के</strong></p>



<p><strong>सोशल इंफ्लुएंसर थे भिखारी ठाकुर</strong></p>



<p>पटना,11 जुलाई(<strong>ओ पी पांडेय</strong>). राय बहादुर, अनगढ़ हीरा, ठाकुर जी और भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर की पुण्यतिथि के अवसर पर बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग ने नाच, नाट्य प्रस्तुति एवं परिचर्चा का कार्यक्रम आयोजित किया. कार्यक्रम का शुभारंभ कला संस्कृति एवं युवा विभाग के अपर मुख्य सचिव हरदीप कौल, निदेशक रूबी के साथ मुख्य वक्ता के रूप मे आये आगत अतिथियों में डॉ. नीतू प्रसाद नूतन वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार, लोक गायिका, मनीषा श्रीवास्तव,सन्तोष पटेल और डॉक्टर जैनेन्द्र कुमार दोस्त एवं प्रो. वीरेंद्र नारायण यादव(पूर्व राजभाधा अध्यक्ष) ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="506" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689928-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85456" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689928-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689928-650x320.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>इस अवसर पर कला एवं सँस्कृति विभाग की अपर मुख्य सचिव हरदीप कॉल ने विभाग की ओर से सभी आगत अतिथियों और दर्शकों का स्वागत और आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि कला विभाग का यह कार्य इसलिए है कि आज की पीढ़ी हमारे पीढ़ी को जान सके. अगर हमें अपनी सुनहरी विरासत का दम्भ भरना है तो यह हमारा दायित्व है कि हम इनके बारे में बताएं. आज वैश्विक दुनिया है जब हर देश अपने विचारों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाता है तो उसको ही दुनिया अपनाने लगती है. उन्होंने कहा कि<br>&#8220;हम ही हम है तो क्या तुम हो<br>तुम ही तुम हो तो क्या तुम हो<br>बात होगी तब जब हम तुम दोनों हों.&#8221;</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="498" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689929-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85457" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689929-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689929-650x316.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>उन्होंने भिखारी ठाकुर पर प्रकाश डालते हए कहा कि रामायण देखने के बाद उन्हें लगा कि जो वेदना से छुआ जा सकता है वह किसी और से नही छुआ जा सकता है. वनवास की बात हो या सीता की अग्निपरीक्षा तो वह सबको छू जाती है. वे सिर्फ स्त्री वेदना ही नहीं बल्कि पुरुष वेदना को भी बड़ी सहजता से अपने नाटकों में रखते हैं. साथ ही कई कुरूतियों को, घर की लड़ाई को, समाज के सामने प्रस्तुत करते थे. आजादी की लड़ाई में पति पत्नियों को छोड़कर चले गए उन्होंने नही सोचा की पत्नी भी स्वतंत्रता की लड़ाई में जा सकती है. उन्होंने कहा कि भिखारी ठाकुर की जयंती इस साल पूरे बिहार में मनाया जाएगा और स्तरीय प्रस्तुति परक दलों को उन्होंने मंच से ही आमंत्रित भी किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="503" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689930-1-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85477" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689930-1-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689930-1-650x320.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>कार्यक्रम में परिचर्चा का संचालन वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार ने किया. परिचर्चा का विषय भिखारी ठाकुर के नाटकों में स्त्री विमर्श था जिसमें वक्ताओं के रूप में डॉ. नीतू प्रसाद नूतन, लोकगायिका मनीषा श्रीवास्तव, सन्तोष पटेल, डॉक्टर जैनेन्द्र कुमार दोस्त प्रो. वीरेंद्र नारायण यादव (पूर्व राजभाधा अध्यक्ष) और अमरजीत शामिल थे. सभी ने विभाग को इस चर्चा के लिए धन्यवाद व आभार प्रगट किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="503" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689931-1-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85478" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689931-1-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689931-1-650x320.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>भिखरी ठाकुर ने महिलाओं के हर रूप को छूने की कोशिश की है लेकिन उनकी रचना कितना रिलेवेंट है के जवाब में जैनेन्द्र कुमार दोस्त ने कहा कि स्त्री विमर्श क्या है? जेंडर में जो डिस्क्रिमिनेशन था उसके बारे में बात करना. डिबेट भी बाहर से आता है कि वे कैसे सोचे इनके बारे में. आपको बाहर के स्कॉलर की किताब पढ़ना पड़ता है स्त्री विमर्श पर. उन्होंने कहा कि स्त्री को दोयम दर्जे का माना गया है. जब संवाद की बात नाटकों में आती थी तो पुरुष संस्कृत में बोलेंगे लेकिन महिलाएं प्राकृत और लोक भाषा मे. उन्होंने लेखक हेनरिक होल्सन की बुक डॉल्स हाउस का जिक्र करते हुए कहा कि एक स्त्री के घर तलाशने की कहानी की पहली बुक है दुनिया की लेकिन उस बीच भिखरी ठाकुर पर नजर नही गया. किसी का ध्यान नही गया. समाज,पॉलिटिक्स और समाज शास्त्र पर वे पहले भारत के व्यक्ति थे जिन्होंने स्त्री विमर्श पर बात किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="497" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689932-1-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85479" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689932-1-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689932-1-650x315.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>उन्होंने कहा कि दूरदर्शन के सहयोग से एक कार्यक्रम बनने में जब 6 महीना लगा तब पता चला कि कितना कठिन है रचना. जिसका टाइटल बनाने में इतना समय लगा. पिया नीसइल भिखारी ठाकुर का 60 साल पुराना नाटक है जिसे विभाग के प्रयास से प्रस्तुति का प्रस्ताव आया. सरकार चूंकि शराबबंदी और नशामुक्ति पर भी कम कर रही है. भिखारी ठाकुर ग्लोबल नही ग्लोकल हैं. वे स्त्री विमर्श का बीज रोपने वाले पहले व्यक्ति हैं. उन्होंने 1917 में नाच शुरू किया और 1957 तक काम किया. वे अंग्रेजो के साथ लड़ाई में नही थे लेकिन उन्होंने कितना आगे का सोचा कि देश को आजादी तो मिल जाएगी लेकिन स्त्री की ये समस्याएं आजादी के बाद भी रह जाएंगी.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="497" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689933-1-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85480" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689933-1-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689933-1-650x315.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>गायिका नीतू कुमारी नूतन ने भिखारी ठाकुर की रचनाओं में अपने आप को कहाँ पाती हैं के सवाल पर कहा कि मैंने रेडियो में सुनकर मंचो पर गाना शुरू किया. माँ के गीतों को सुना और गया. उन्होंने गीतों में महिला के दर्द को दर्शाया..<br>&#8220;हम त खेलत रहनी हम त सुपनी मोरिया से<br>कर लेइले तब ही बियाह रे विदेसिया<br>गवना कराई पिया घरे बइठले<br>अपने बसले बिदेस रे बिदेसिया&#8221; पक्तियों नारी के बेबसी को साफ बयां करती है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="875" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689934-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85481" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689934-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689934-650x556.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689934-350x300.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>भोजपुरी के लिए कई अंदोलन में सक्रिय सन्तोष पटेल ने कहा कि नारी विमर्श,फेमीनिजम जैसे कई पैरामीटर मौजूद है भिखरी ठाकुर के प्रस्तुतियों में. 1940-66 तक के समय को याद करते हुए कहा कि 1940-46 में हिन्दू कोर्ट बिल और बारबरा सीमेन की बात की. स्त्री मुक्ति का धेरी गाथा नारी का पहला साहित्य था. हमारे यहां सारे पैरामीटर हैं बिधवा विवाह,बेटिबेचवा और गबरघिचोर जैसे नाटकों में.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="818" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689935-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85482" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689935-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689935-650x519.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>हार्नेस नीनास मिलना नॉश जैसे तमाम लोग 1920 में लिख रहे थे. मुक्ति ने लिखा था चेरी गाथा. गबर घिचोर नाटक की बात करते हुए उन्होंने कहा कि गलीज बो( गलीज बहु) नाटक में अपने कोख के अधिकार की लड़ाई लड़ती है. 15 साल से आया नही है उसका पति और उसका 13 साल का बेटा हो गया है. गड़बड़ी, गोबर जैसे कैरक्टर हैं जो उनके चरित्र को प्रस्तुत करता है. ब्रेख्त ने लिखा है<br>ब्रेख्त से तुलना करना गलत है क्योंकि दोनों एक ही समय पर लिखते हैं और उन्होंने ब्रेख्त को कभी पढा नही होगा इसलिए तुलना गलत है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="816" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689936-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85483" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689936-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689936-650x518.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>वही प्रो. वीरेंद्र नारायण यादव, पूर्व राजभाधा अध्यक्ष ने भोजपुरी में बोलते हुआ कहा कि छपरा में बने प्रेक्षागृह के नाम का भिखारी ठाकुर के नाम पर रखने का अनुरोध किया और उपस्थित हरदीप कौर से पूछ लिया. फिर उन्होने नाच के बारे में अपने पुराने संस्मरण को गाड़ करते हुए कहा कि उदित बाबू से सुनने का अवसर मिला, वह अद्भुत था. जब वे मिरजई पहन कर मंच पर आते थे तो पिन ड्राप शांति हो जाती थी. उस जमाने मे हार्डिंग पार्क में कार्यक्रम होता था और कानून व्यवस्था की जब बात हुई तो ठाकुर जी ने कहा कि हमारे कार्यक्रम में कोई कानून की जरूरत नही हम खुद इसे ठीक कर देते हैं. जब राहुल सांस्कृयायान ने उनका नाटक देखा तो उन्होंने कहा कि भोजपुरी में किताब और पत्रिका निकलना चाहिए. विश्व भारती विवि के कुलपति को एक कार्यक्रम में जब विदेसिया की प्रस्तुति के समय उछलते देखा तो पता चला कि एक कलाकार के कला की पहुंच कैसे पहुंचती है. 1947 में राहुल सांकृत्यायन ने कहा उसपर अभी तक काम नही हुआ है उसपर काम होना चाहिए. उन्होंने कहा कि मैं ये नही मानता हूं कि वे अंग्रेजी नही समझते थे या वे आजादी की लड़ाई नही समझते थे उनकी लड़ाई आजदी के समक्ष समाजिक कुरीतियों की लड़ाई थी जो आजदी की लड़ाई से कम नही थी.</p>



<p>वही अमरजीत ने अपने अभिभाषण में कहा कि पटना का दियारा क्षेत्र सबसे ज्यादा अत्याचार का शिकार बना उस काल मे जिसे भिखारी ने देखा और उसकी पीड़ा को अपने नाटकों में स्थान दिया. बाप के प्रति आदर और शिकायत भी है जैसे-</p>



<p>कईसे कहीं कहे नईखे आवत बाबूजी,<br>मुह में दांत नईखे लार चुवत बा हो बाबूजी, </p>



<p>मन करे कि जहर खा के मर जाईं ए बाबूजी.&#8221; </p>



<p>उन्होंने कहा कि मैं कुल्हड़िया से आता हूँ और मैने देखा है उनके नाटकों को अपने गांवों में. समय के हिसाब से वे संवाद गढने के माहिर थे. कुल्हड़िया में एक नाटक के दौरान उन्होंने अपने पात्र से ख्वा दिया देरी से आने के कारण की देर से आओगे तो कुल्हड़िया के जमींदार के यहाँ रखवा देंगे देर करोगे तो और कोड़ा से मार कहोगे तो दिमाग सही आ जायेगा. भिखरी ठाकुर एक सोशल एन्फ्लुएंर थे उस काल मे जब कोई सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म नही था।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="795" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689937-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85484" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689937-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/1000689937-650x504.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>लोकचर्चित युवा लोकगायिका मनीषा ने कहा कि बहुत से लिखने वाले है जो स्त्री सौंदये और कोई उनके मन की बात पर कलम चलाया है लेकिन ठाकुर जी रचनाओं में नारी के लोक की बात होती थी जिसमे हर रस का वर्णन होता था. एक स्त्री शादी कर के घर मे रहती है जो घर से लेकर समाज तक के कई समस्याओं से लड़ती है. भिखारी ठाकुर ने समाज मे, परिवार में जो महसूस किया उसे गांव-गांव तक अपनी रचनाओं के जरिये पहुंचाते थे.</p>



<p>रोपिया गिनाई देहली पगहा धराई देहल<br>चेरिया के छेरिया बनाई दिहलs</p>



<p>इतना किसी और ने नही लिखा जितनी मार्मिक उन्होंने लिखा. बेटी बेचवा का एक्सटेंशन विधवा-बिलाप नाटक है जहां बड़ी उम्र के पति से शादी होने के बाद यह विधवा हो जाती है और उसका जीवन बदल जाता है. लोक धुनों को,लोक संस्कृति को उन्होंने अपनी रचनाओं में पिरोया था.</p>



<p>डगरिया जोहत ना हो<br>बीतत बाटे आठों पहरिया हो<br>डगरिया जोहत ना जैसे<br>परोसी कर थरिया डाल भात तरकरिया हो..<br>जैसे पंक्तियों को जँतसार धुन के जरिये प्रस्तुत किया है जो जाँता पर काम करते हुए अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ती है.</p>



<p>परिचर्चा के बाद जैनेन्द्र कुमार दोस्त द्वारा निर्देशित भिखारी ठाकुर के नाटक पिया नीसइल का शानदार मंचन हुआ. नशे की वजह से परिवार के तबाही की कहानी को भिखरी ठाकुर ने बड़ी ही सहजता से नाटक में ढ़ाला जिसे कलाकारों ने भरसक करने का प्रयास किया.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आरा के कलाकारों ने &#8220;गंगा-स्नान&#8221; नाटक में दिखाई अपनी प्रतिभा</title>
		<link>https://www.patnanow.com/aras-artists-showed-their-talent-in-the-play-ganga-snan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 27 Dec 2022 02:39:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[गांव -शहर]]></category>
		<category><![CDATA[Bhikhari Thakur]]></category>
		<category><![CDATA[GANGA SNAN]]></category>
		<category><![CDATA[manoj singh]]></category>
		<category><![CDATA[manoj srivastav]]></category>
		<category><![CDATA[op pandey]]></category>
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					<description><![CDATA[डिवाईन सोशल डेवलपमेंट आर्गनाईजेशन पटना व निर्माण रंगमंच,हाजीपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित &#8216;नटलीला 2022&#8217;  नाटक गंगा स्नान में कहानी के माध्यम से कलाकारों ने प्रदर्शित किया. कहानी में मलेछू की मां की इच्छा है कि वो गंगा स्नान करें। मलेछू मां को साथ ले चलता है। लेकिन अपनी पत्नी के कहने पर मां को पांच लात मारता है और सारा मोटरी ढोने की शर्त पर साथ ले चलता है। गंगा स्नान के मेला में मलेछू अपनी मां को अकेला छोड़ देता है। मेले में ही मलेछू बहू से एक ठग धर्माचार्य उसके सारे गहने लूट लेता है। तब मलेछू बहू और मलेछू को अपने मां के साथ किये गलती का एहसास होता है। दोनों मिलकर अपनी मां को ढूंढते है। माफ़ी मांगते है फिर गंगा स्नान करते हैं। नाटक में भिखारी ठाकुर ने आज के परिवार में उपेक्षित बुजुर्गो और ठग धर्मचार्यो को मुद्दा बनाया है। नाटक &#8220;गंगा-स्नान&#8221; जिसके लेखक है भिखारी ठाकुर . इस नाटक की परिकल्पना व निर्देशन : मनोज कुमार सिंह,संगीत : लोक संगीतकार श्याम शर्मिला,गायन : श्याम शर्मिला,हरिशंकर निरालावादन : सुरजकांत पांडेय, अभय ओझा, लक्ष्मण दुबे,,कलाकार : रागिनी कश्यप, ऋतु पांडेय,आशा पाण्डेय,लवकुश सिंह,नीतीश पांडेय,साहेब लाल यादव,, मुकेश कुमार,लड्डू भोपाली,रोहन पाठक,ओम जी पाठक, राजा व डॉ पंकज भट्ट मेकअप व कॉस्ट्यूम &#8211; ओम प्रकाश पांडेय व मनोज श्रीवास्तवमंच सज्जा : कमलेश कुंदन,प्रकाश : जफर आलम(पटना),दल संयोजक : मनोज श्रीवास्तव थे . हाजीपुर से ओ पी पांडेय]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
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<p></p>



<p><strong>डिवाईन सोशल डेवलपमेंट आर्गनाईजेशन पटना व निर्माण रंगमंच,हाजीपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित &#8216;नटलीला 2022&#8217; </strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/12/0d532fe1-ead8-4fd7-80af-142473dcce6f.jpg" alt="" class="wp-image-70162" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/12/0d532fe1-ead8-4fd7-80af-142473dcce6f.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/12/0d532fe1-ead8-4fd7-80af-142473dcce6f-350x158.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/12/6caf7c95-bb81-4e5e-b371-84c26a0bf338.jpg" alt="" class="wp-image-70163" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/12/6caf7c95-bb81-4e5e-b371-84c26a0bf338.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/12/6caf7c95-bb81-4e5e-b371-84c26a0bf338-350x158.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>नाटक गंगा स्नान में कहानी के माध्यम से कलाकारों ने प्रदर्शित किया. कहानी  में  मलेछू की मां की इच्छा है कि वो गंगा स्नान करें। मलेछू मां को साथ ले चलता है। लेकिन अपनी पत्नी के कहने पर मां को पांच लात मारता है और सारा मोटरी ढोने की शर्त पर साथ ले चलता है। गंगा स्नान के मेला में मलेछू अपनी मां को अकेला छोड़ देता है। मेले में ही मलेछू बहू से एक ठग धर्माचार्य उसके सारे गहने लूट लेता है। तब मलेछू बहू और मलेछू को अपने मां के साथ किये गलती का एहसास होता है। दोनों मिलकर अपनी मां को ढूंढते है। माफ़ी मांगते है फिर गंगा स्नान करते हैं। नाटक में भिखारी ठाकुर ने आज के परिवार में उपेक्षित बुजुर्गो और ठग धर्मचार्यो को मुद्दा बनाया है। नाटक  &#8220;गंगा-स्नान&#8221; जिसके लेखक है भिखारी ठाकुर .</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="382" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/12/e0a447dd-78e0-4d16-a4c5-74112a2d554f-650x382.jpg" alt="" class="wp-image-70164" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/12/e0a447dd-78e0-4d16-a4c5-74112a2d554f-650x382.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/12/e0a447dd-78e0-4d16-a4c5-74112a2d554f-350x206.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2022/12/e0a447dd-78e0-4d16-a4c5-74112a2d554f-768x452.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2022/12/e0a447dd-78e0-4d16-a4c5-74112a2d554f.jpg 845w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/12/67078063-058b-4038-a48c-5ca191ad7255.jpg" alt="" class="wp-image-70165" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/12/67078063-058b-4038-a48c-5ca191ad7255.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/12/67078063-058b-4038-a48c-5ca191ad7255-350x158.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>इस नाटक की परिकल्पना व निर्देशन : मनोज कुमार सिंह,संगीत : लोक संगीतकार श्याम शर्मिला,गायन : श्याम शर्मिला,हरिशंकर निरालावादन : सुरजकांत पांडेय, अभय ओझा, लक्ष्मण दुबे,,कलाकार : रागिनी कश्यप, ऋतु पांडेय,आशा पाण्डेय,लवकुश सिंह,नीतीश पांडेय,साहेब लाल यादव,, मुकेश कुमार,लड्डू भोपाली,रोहन पाठक,ओम जी पाठक, राजा व डॉ पंकज भट्ट मेकअप व कॉस्ट्यूम &#8211; ओम प्रकाश पांडेय व मनोज श्रीवास्तवमंच सज्जा : कमलेश कुंदन,प्रकाश : जफर आलम(पटना),दल संयोजक : मनोज श्रीवास्तव थे .</p>



<p><strong>हाजीपुर से ओ पी पांडेय </strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>प्रस्तुति के पहले दिन ही दर्शकों से खचाखच रही ओपन थियेटर गैलरी</title>
		<link>https://www.patnanow.com/ganga-snan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 28 May 2022 04:16:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[ARA]]></category>
		<category><![CDATA[Bhikhari Thakur]]></category>
		<category><![CDATA[BHOJPUR]]></category>
		<category><![CDATA[Bhojpurifolksong]]></category>
		<category><![CDATA[Folk Theatre]]></category>
		<category><![CDATA[GANGA SNAN]]></category>
		<category><![CDATA[Theatre]]></category>
		<category><![CDATA[Veer kunwar singh Stedium]]></category>
		<category><![CDATA[भोजपुरी]]></category>
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					<description><![CDATA[लगभग 2 घंटे देरी से शुरू हुई प्रस्तुति, नही हिले दर्शक नाटक के सकरात्मक संदेश ने अंत तक दर्शकों को जोड़े रखा रंगमंच के मंजे कलाकारों ने दिखाया अभिनय का जलवा, नवोदित कलाकारों में दिखी गजब की ऊर्जा आरा,28 मई. प्रभाव क्रियेटिव सोसाइटी द्वारा तैयार भिखारी ठाकुर रचित सुप्रसिद्ध नाटक &#8216;गंगा स्नान&#8217; का मंचन शुक्रवार की शाम वीर कुंवर सिंह स्टेडियम में कलाकारों द्वारा बनाए गए बाबू ललन सिंह मुक्ताकाश मंच पर किया गया. नाटक का शुभारंभ मुख्य अतिथि के रूप में भावी मेयर प्रत्याशी विष्णु सिंह दीप प्रज्जवलित कर किया, जिसमें पूर्व पार्षद व भावी मेयर प्रत्याशी जितेंद्र शुक्ला, समाजसेवी अभय विश्वास भट्ट और संस्था के सचिव कमलेश कुंदन भी संयुक्त रूप से शामिल हुए. मुख्य अतिथि ने कम शब्दों में आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कला से उनका पुराना नाता है. कला न सिर्फ मनोरंजन बल्कि जीवन जीना भी सिखाता है. दो दिवसीय इस कार्यक्रम के पहले दिन कार्यक्रम लगभग दो घंटे विलंब से शुरू हुआ. बावजूद इसके दर्शकों ने नाटक के अंत तक अपनी उपस्थिति दर्ज करा यह जरूर साबित कर दिया कि न सिर्फ वे नाट्य प्रेमी हैं बल्कि नाटक ने उन्हें अपने रस से बांधे रखा. ग्रामीण समाज में गंगा स्नान करने के महत्व पर आधारित इस नाटक में एक घर की कहानी है जिसमें मलेछु बहु और अटपट बहु गंगा स्नान करने के लिए जाना चाहती है लेकिन उनके पति तैयार नहीं होते हैं. इसी बीच उनकी बुढ़ी मां भी गंगा स्नान के लिए चलने को कहती है. बेटा मां [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>लगभग 2 घंटे देरी से शुरू हुई प्रस्तुति, नही हिले दर्शक</strong></p>



<p><strong>नाटक के सकरात्मक संदेश ने अंत तक दर्शकों को जोड़े रखा </strong></p>



<p>रं<strong>गमंच के मंजे कलाकारों ने दिखाया अभिनय का जलवा, नवोदित कलाकारों में दिखी गजब की ऊर्जा</strong></p>



<p>आरा,28 मई. प्रभाव क्रियेटिव सोसाइटी द्वारा तैयार भिखारी ठाकुर रचित सुप्रसिद्ध नाटक &#8216;गंगा स्नान&#8217; का मंचन शुक्रवार की शाम वीर कुंवर सिंह स्टेडियम में कलाकारों द्वारा बनाए गए बाबू ललन सिंह मुक्ताकाश मंच पर किया गया. नाटक का शुभारंभ मुख्य अतिथि के रूप में भावी मेयर प्रत्याशी विष्णु सिंह दीप प्रज्जवलित कर किया, जिसमें पूर्व पार्षद व भावी मेयर प्रत्याशी जितेंद्र शुक्ला, समाजसेवी अभय विश्वास भट्ट और संस्था के सचिव कमलेश कुंदन भी संयुक्त रूप से शामिल हुए. मुख्य अतिथि ने कम शब्दों में आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कला से उनका पुराना नाता है. कला न सिर्फ मनोरंजन बल्कि जीवन जीना भी सिखाता है.</p>



<p>दो दिवसीय इस कार्यक्रम के पहले दिन कार्यक्रम लगभग दो घंटे विलंब से शुरू हुआ. बावजूद इसके दर्शकों ने नाटक के अंत तक अपनी उपस्थिति दर्ज करा यह जरूर साबित कर दिया कि न सिर्फ वे नाट्य प्रेमी हैं बल्कि नाटक ने उन्हें अपने रस से बांधे रखा.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="355" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220528-094015.jpg" alt="" class="wp-image-62805" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220528-094015.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220528-094015-350x191.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>ग्रामीण समाज में गंगा स्नान करने के महत्व पर आधारित इस नाटक में एक घर की कहानी है जिसमें मलेछु बहु और अटपट बहु गंगा स्नान करने के लिए जाना चाहती है लेकिन उनके पति तैयार नहीं होते हैं. इसी बीच उनकी बुढ़ी मां भी गंगा स्नान के लिए चलने को कहती है. बेटा मां को ले जाने के लिए तैयार हो जाता है लेकिन उसकी पत्नी उसे ले जाने से मना करती है वह कहती है कि अगर वह बुढ़िया को ले जाएगा तो जहर खा कर मर जायेगी. पत्नी के इस हठ के कारण वह अपनी बूढ़ी मां को मारता पीटता और अंत में वह इस बात पर तैयार होता है कि समान बूढ़ी मां को ढोना पड़ेगा. बेचारी बूढ़ी मां तैयार हो जाती है. सभी गंगा स्नान के लिए जाते हैं. गंगा किनारे मेला लगा है बूढ़ी माता से समान गिर जाने के कारण वे उसे वही छोड़ कर चले जाते हैं. मेले में मलेछू को एक बाबा मिलते हैं. वह उनके जाल में फंस जाता है. पुत्र की प्राप्ति के चक्कर में अपनी पत्नी को बाबा के हवाले कर देता है. बाबा उसकी पत्नी के सारे गहने लूट लेता है. अब मलेछु अपनी पत्नी को भटकता मेले में खोजता है. जब उसकी पत्नी मिलती है तब उन्हें अपने किए पर पछतावा होता है और दोनो मिलकर फिर अपनी बूढ़ी मां को खोज घर वापस आते हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="351" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220528-094024.jpg" alt="" class="wp-image-62806" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220528-094024.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220528-094024-350x189.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>भिखारी ठाकुर ने गंगा स्नान के माध्यम से परिवार में बुज़ुर्गों की जिस उपेक्षा को दिखाया था प्रभाव क्रियेटिव सोसाइटी की प्रस्तुति ने उसे बेहद ही प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया,जिसके लिए युवा निर्देशक व रंगकर्मी मनोज सिंह बधाई के पात्र हैं.<br>वहीं गीत संगीत को अपने सुरों में पिरोकर नाटक में ठेठ देसीपन का जो आनंद लोकगीतों के माध्यम से श्याम शर्मिला ने दिया कि दर्शक अभिनय और लोकसंगीत के इस जादू में अंत तक फंसे रहे.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="441" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220528-094742.jpg" alt="" class="wp-image-62808" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220528-094742.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220528-094742-350x237.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>मलेछु की भूमिका में डॉ पंकज भट्ट, मलेछु बहु की भूमिका में खुशबू स्पृहा, मां की भूमिका में आशा पाण्डेय, अटपट की भूमिका में युवा रंगकर्मी शुभम दूबे, अटपट बहु की भूमिका में ऋतु पांडेय, ढोंगी बाबा की भूमिका में हर्ष जैन ने जहां नाटक में अपनी जीवंत अभिनय से दर्शकों के बीच अपनी जादूगरी कायम की, वही विभिन्न भूमिकाओं में प्रिंस शर्मा , दीपक तिवारी ट्रेन,कुणाल, रितेश टाइगर, मुकेश ओझा,अभिषेक, राजू कुमार सिंह,सुन्दरम बाबा ने अपनी ऊर्जा का परिचय उपस्थित दर्शकों को दिया.</p>



<p>संगीत में तबला पर अभय ओझा और नाल पर हरिशंकर निराला ने साथ दिया तो झाल व अन्य वाद्य यंत्रों के साथ सह गायन में जागृति कुमारी,तारकेश्वर चौबे,संतोष चौबे और वीरेंद्र ओझा ने संगीत को प्रभावी बनाने में समूह गायन का लोहा मनवाया. प्रस्तुति संयोजक मनोज श्रीवास्तव, प्रस्तुति नियंत्रक ओ पी पांडेय और मंगलेश तिवारी थे. धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ रंगकर्मी अंबुज कुमार ने किया.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ओपन थियेटर में होगा आज गंगा-स्नान</title>
		<link>https://www.patnanow.com/aaj-hoga-open-theatre-me-ganga-snan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 May 2022 04:15:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Bhikhari Thakur]]></category>
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		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[Folk Theatre]]></category>
		<category><![CDATA[Prabhav creative society Ara]]></category>
		<category><![CDATA[Ramana Maidan]]></category>
		<category><![CDATA[Thearte Artist]]></category>
		<category><![CDATA[Theatre]]></category>
		<category><![CDATA[Veer kunwar singh Stedium]]></category>
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					<description><![CDATA[आज शाम छह बजे से होगी दो दिवसीय मंचन की शुरुआत, परिवार में उपेक्षित वृद्धजनों पर आधारित है नाटक, देगा सकरात्मक संदेश रंगमंच से जुड़े कलाकारों के साथ नवोदित कलाकार भी दिखाएंगे समाज को आईना आरा,27 मई. वीर कुंवर सिंह स्टेडियम में भिखारी ठाकुर रचित सुप्रसिद्ध नाटक &#8216;गंगा स्नान&#8217; का मंचन आज शाम छह बजे से होने के साथ ही दो दिवसीय मंचन की शुरुआत हो जायेगी. कोरोना काल के समय से जिले वासियों के मन में बने नकारात्मक माहौल को एक मनोरंजक प्रस्तुति के माध्यम से सकारात्मकता में बदलने के प्रयास में नाटक का मंचन किया जा रहा है. प्रभाव क्रिएटिव सोसायटी के बैनर तले हो रहे नाटक के मंचन में ग्रामीण समाज में गंगा स्नान करने के महत्व को दिखाया गया है. गंगा स्नान मन और शरीर के शुद्धिकरण के लिए तो सभी जाते हैं लेकिन कैसे वे जीवन की मैली व्यवस्था में घिरे होते हैं जो स्नान से साफ नहीं हो सकता. गंगा स्नान के समय जगह-जगह गंगा किनारे मेला लगता है धर्म के साथ ठगों का भी किस प्रकार आराजकता मेले में फैले रहता है जो धर्म और दूसरी चीजों पर वहां गए लोगों को लूटते हैं. गंगा स्नान नाटक में एक परिवार को गंगा स्नान के लिए जाते दिखाया गया है, जिसमें एक बूढ़ी मां है जो परिवार द्वारा उपेक्षित है. इस नाटक में भिखारी ठाकुर ने गंगा स्नान के माध्यम से परिवार में बुज़ुर्गों की उपेक्षा को दिखाया है. नाटक का निर्देशन रंगकर्मी मनोज सिंह कर रहे हैं. वहीं गीत संगीत के माध्यम से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आज शाम छह बजे से होगी दो दिवसीय मंचन की शुरुआत</strong>,</p>



<p><strong>परिवार में उपेक्षित वृद्धजनों पर आधारित है नाटक, देगा सकरात्मक संदेश</strong></p>



<p><strong>रंगमंच से जुड़े कलाकारों के साथ नवोदित कलाकार भी दिखाएंगे समाज को आईना</strong></p>



<p>आरा,27 मई. वीर कुंवर सिंह स्टेडियम में भिखारी ठाकुर रचित सुप्रसिद्ध नाटक &#8216;गंगा स्नान&#8217; का मंचन आज शाम छह बजे से होने के साथ ही दो दिवसीय मंचन की शुरुआत हो जायेगी. कोरोना काल के समय से जिले वासियों के मन में बने नकारात्मक माहौल को एक मनोरंजक प्रस्तुति के माध्यम से सकारात्मकता में बदलने के प्रयास में नाटक का मंचन किया जा रहा है.</p>



<p>प्रभाव क्रिएटिव सोसायटी के बैनर तले हो रहे नाटक के मंचन में ग्रामीण समाज में गंगा स्नान करने के महत्व को दिखाया गया है. गंगा स्नान मन और शरीर के शुद्धिकरण के लिए तो सभी जाते हैं लेकिन कैसे वे जीवन की मैली व्यवस्था में घिरे होते हैं जो स्नान से साफ नहीं हो सकता.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="424" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220527-093541.jpg" alt="" class="wp-image-62756" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220527-093541.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220527-093541-350x228.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>गंगा स्नान के समय जगह-जगह गंगा किनारे मेला लगता है धर्म के साथ ठगों का भी किस प्रकार आराजकता मेले में फैले रहता है जो धर्म और दूसरी चीजों पर वहां गए लोगों को लूटते हैं.</p>



<p>गंगा स्नान नाटक में एक परिवार को गंगा स्नान के लिए जाते दिखाया गया है, जिसमें एक बूढ़ी मां है जो परिवार द्वारा उपेक्षित है. इस नाटक में भिखारी ठाकुर ने गंगा स्नान के माध्यम से परिवार में बुज़ुर्गों की उपेक्षा को दिखाया है. नाटक का निर्देशन रंगकर्मी मनोज सिंह कर रहे हैं. वहीं गीत संगीत के माध्यम से इस नाटक को सजाया है श्याम शर्मिला ने.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220527-093552.jpg" alt="" class="wp-image-62757" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220527-093552.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/05/Screenshot_20220527-093552-350x233.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>पिछले 15 दिनों से चले नाटक कार्यशाला का समापन बुधवार को होने के बाद गुरुवार को देर शाम तक अंतिम रिहर्सल<br>नेशनल साइंटिफिक रिसर्च एंड एनालिसिस सेंटर, बड़ी मठिया के सभागार में कलाकारों ने किया.</p>



<p>अपनी प्रस्तुति के अंतिम चरण में तैयार नाटक &#8221; गंगा स्नान &#8221; के पूर्वाभ्यास में कलाकारों ने जम के पसीना बहाया. कलाकार आज होने वाली प्रस्तुति को लेकर काफी उत्साहित और ऊर्जायुक्त दिखे. कई बार नाटक के दृश्यों और म्यूजिक का सही इंट्री टाइमिंग के साथ पूर्वाभ्यास किया गया. कलाकारो ने कल शाम में प्रस्तुति स्थल वीर कुंवर सिंह स्टेडियम का भी जायजा भी लिया. कलाकार अपनी एंट्री और एग्जिट को लेकर प्रस्तुति से पहले कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं. कोरोना काल में सांस्कृतिक कार्यक्रम नही होने के बाद यह पहला मौका होगा जब नाटक की प्रस्तुति की जाएगी हालांकि इसके पूर्व पिछले साल अभिनव एवम एक्ट ने 20 दिवसीय कार्यशाला के बाद एक प्रस्तुति दी थी. लेकिन उसके बाद यह पहला मौका होगा जब किसी लोक नाटक की प्रस्तुति शहर में होगी. नाटक प्रेमी भी इस नाटक को देखने के लिए समय का बड़ी बेसब्री से इंतजार में हैं. नाटक में कई मंजे हुए कलाकार अपने अभिनय से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करेंगे।</p>



<p>पूर्वाभ्यास में वरिष्ठ रंगकर्मी अम्बुज कुमार,कार्यशाला व प्रस्तुति संयोजक मनोज श्रीवास्तव, नाट्य निर्देशक मनोज सिंह, संस्था के सचिव कमलेश कुंदन, लोक संगीतकार श्याम शर्मीला,खुशबू s स्पृहा, आशा पाण्डेय,राजन जी, युवा रंगकर्मी शुभम दूबे, प्रिंस शर्मा , दीपक तिवारी ट्रेन,कुणाल, रितेश टाइगर, मुकेश ओझा, रितु पाण्डेय,अभिषेक, राजू कुमार सिंह,सुन्दरम बाबा,अभय ओझा, हरिशंकर निराला डॉ पंकज भट्ट आदि उपस्थित थे. गुरुवार को पूर्वाभ्यास के दौरान प्रस्तुति में लगे बैक स्टेज के कलाकर भी नजर आए. अब देखना जबरदस्त होगा कि कलाकारों की मेहनत 27 और 28 मई को होने वाली प्रस्तुति में अपना कितना प्रभाव दर्शको पर छोड़ते हैं.</p>



<p>आरा से <strong>ओ पी पांडेय</strong> की रिपोर्ट</p>
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