<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>anita kumari &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
	<atom:link href="https://www.patnanow.com/tag/anita-kumari/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.patnanow.com</link>
	<description>Patna News Portal - हर ख़बर पर नज़र</description>
	<lastBuildDate>Sun, 22 Dec 2024 07:30:53 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.6.2</generator>

<image>
	<url>https://www.patnanow.com/assets/2022/08/cropped-PatnaNow_Logo_2022-32x32.png</url>
	<title>anita kumari &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
	<link>https://www.patnanow.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>मुंबई के जहांगीर आर्ट गैलरी में &#8220;सेलेब्रेटिंग वोमेनहुड&#8221;</title>
		<link>https://www.patnanow.com/celebrating-womanhood-at-jahan-jagir-art-gallery-mumbai/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 22 Dec 2024 07:30:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA["Celebrating Womanhood" at Jahan Jagir Art Gallery]]></category>
		<category><![CDATA[anita kumari]]></category>
		<category><![CDATA[bihar folk art]]></category>
		<category><![CDATA[jahangeer art galelry]]></category>
		<category><![CDATA[meenakshi jha banerjee]]></category>
		<category><![CDATA[Mumbai]]></category>
		<category><![CDATA[rakhee kumari]]></category>
		<category><![CDATA[sabharwal]]></category>
		<category><![CDATA[sanjudas]]></category>
		<category><![CDATA[sonali caouhan]]></category>
		<category><![CDATA[sonali rodrigues]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.patnanow.com/?p=88246</guid>

					<description><![CDATA[“नारीत्व का उत्सव” में बिहार के लोककलाओं की मिलेगी झलक : अनीता 24 से 30 दिसम्बर तक है आयोजित 24 से 30 दिसम्बर तक मुंबई के जहांगीर आर्ट गैलरी में &#8220;सेलेब्रेटिंग वोमेनहुड&#8217; नामक बिहार के वरिष्ठ कलाकारों की समूह प्रदर्शनी आयोजित हो रही है.  इस प्रदर्शनी में कुल छह महिला कलाकार शामिल हैं जिनमे राखी कुमारी , अनीता कुमारी, मीनाक्षी झा बनर्जी और संजू दास ये चार बिहार की हैं और शेष दो सोनिया और सोनाली गोवा और मध्यप्रदेश की हैं. कलाप्रेमियों को इस प्रदर्शनी में शामिल चारों कलाकारों के काम में बिहार के लोककलाओं की झलक देखने को मिलेगी.  पटना आर्ट कालेज की वर्तमान प्रिंसिपल राखी कुमारी और अनीता कुमारी आर्ट कालेज की प्रशिक्षित कलाकार हैं वहीँ संजू और मीनाक्षी झा बनर्जी पहले मिथिला पेंटिंग की चर्चित कलाकार रही हैं. इन चारों कलाकारों की आधुनिक शैली में रचित कलाकृतियों में स्त्रियों की मनोदशा और जीवन का चित्रण किया गया है .  बिहार की लोककलाओं को देश भर में गौरवान्वित करनेवाली ये महत्वपूर्ण प्रदर्शनी कही जा सकती है. प्रदर्शनी में सभी कलाकारों की तकरीबन दस दस कलाकृतियां प्रदर्शित होंगी . इस समूह प्रदर्शनी में  सोनाली चौहान मूर्तिकार हैं और शेष सभी चित्रकार हैं. PNCDESK]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p></p>



<p><strong>“नारीत्व का उत्सव” में बिहार के लोककलाओं की मिलेगी झलक : अनीता</strong></p>



<p><strong>24 से 30 दिसम्बर तक है आयोजित</strong></p>



<p>24 से 30 दिसम्बर तक मुंबई के जहांगीर आर्ट गैलरी में &#8220;सेलेब्रेटिंग वोमेनहुड&#8217; नामक बिहार के वरिष्ठ कलाकारों की समूह प्रदर्शनी आयोजित हो रही है.  इस प्रदर्शनी में कुल छह महिला कलाकार शामिल हैं जिनमे राखी कुमारी , अनीता कुमारी, मीनाक्षी झा बनर्जी और संजू दास ये चार बिहार की हैं और शेष दो सोनिया और सोनाली गोवा और मध्यप्रदेश की हैं. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="684" height="505" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/0.png" alt="" class="wp-image-88247" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/0.png 684w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/0-650x480.png 650w" sizes="(max-width: 684px) 100vw, 684px" /></figure>



<p>कलाप्रेमियों को इस प्रदर्शनी में शामिल चारों कलाकारों के काम में बिहार के लोककलाओं की झलक देखने को मिलेगी.  पटना आर्ट कालेज की वर्तमान प्रिंसिपल राखी कुमारी और अनीता कुमारी आर्ट कालेज की प्रशिक्षित कलाकार हैं वहीँ संजू और मीनाक्षी झा बनर्जी पहले मिथिला पेंटिंग की चर्चित कलाकार रही हैं. इन चारों कलाकारों की आधुनिक शैली में रचित कलाकृतियों में स्त्रियों की मनोदशा और जीवन का चित्रण किया गया है . </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="511" height="716" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/89444465-b6ce-43fe-9d7c-476f6c546380.jpg" alt="" class="wp-image-88248" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/89444465-b6ce-43fe-9d7c-476f6c546380.jpg 511w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/89444465-b6ce-43fe-9d7c-476f6c546380-464x650.jpg 464w" sizes="(max-width: 511px) 100vw, 511px" /></figure>



<p> बिहार की लोककलाओं को देश भर में गौरवान्वित करनेवाली ये महत्वपूर्ण प्रदर्शनी कही जा सकती है. प्रदर्शनी में सभी कलाकारों की तकरीबन दस दस कलाकृतियां प्रदर्शित होंगी . इस समूह प्रदर्शनी में  सोनाली चौहान मूर्तिकार हैं और शेष सभी चित्रकार हैं.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>चार दिवसीय सामुहिक कला- प्रदर्शनी &#8216;तू.. झूम! का आयोजन दिल्ली में</title>
		<link>https://www.patnanow.com/four-day-group-art-exhibition-tu-jhoom-organized-in-delhi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 Nov 2023 04:43:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[anita kumari]]></category>
		<category><![CDATA[dhananjay singh]]></category>
		<category><![CDATA[priyanka srivastav]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.patnanow.com/?p=79973</guid>

					<description><![CDATA[&#8216;अनुपमा&#8217; बैनर के अंतर्गत &#8221; सम्मानित पत्रकार, राजनयिक और पूर्व राज्यसभा सदस्य एच.के. दुआ करेंगे उद्घाटन अनीता कुमारी की कलाकृतियां हमें अपनी जड़ों से, अस्मिता से जुड़ने का संकेत देती हैं&#8211;धनंजय सिंह यह कला-प्रदर्शनी मूर्त अमूर्त के मध्य एक संकल्पित झूले में झूलने का आमंत्रण हैं कवि मूर्त और अमूर्त उन रंग-आकृतियों की लहरों में झूमने की बात करते हैं जिसमें तीनों युवा कलाकार अपनी कलाकृतियों के माध्यम से मनुष्य को भौतिक सीमाओं तथा सांसारिक व्यामोहों से छुटकारा पाने में सहायता करते हुए अपने सहज संयोजन के साथ कल्पनाशीलता के मनोरम संगम में झूमने को बीकानेर हाउस में आमंत्रित कर रहे हैं प्रदर्शनी में शामिल चित्रकारों में प्रमुख अमूर्त कलाकार प्रियंका सिन्हा उक्त कला-प्रदर्शनी के क्यूरेटर का दायित्व भी निभाते हुए अपने साथ मूर्त चित्रकार अनीता कुमारी और सुधीर पंडित आदि कलाकारों के साथ कुछ मूर्त कुछ अमूर्त कलाकृतियों के माध्यम से जीवन की उन जटिल अनुभूतियों को अपनी अभिव्यक्तियों में व्यक्त करने का एक सतत सकारात्मक पक्ष प्रस्तुत कर प्रेक्षक के सम्मुख उपस्थित हैं.चार दिवसीय संभावना शील परम्परा की पीढ़ी में चित्रकार प्रियंका सिन्हा अग्रणी कलाकार है जिन्होंने अपनी अमूर्त अभिव्यक्ति में एक लयात्मक गति और अद्भुत संयोजन के बल पर अपने व्यापक अनुभवों को बड़ी सहजता से समेटकर अभिव्यक्त करती है. मेरा उनसे और उनके सृजन कर्म से विगत चार-पाँच बरस का गहरा ताल्लुक़ और एक जिज्ञासु मनोमय विचारों का आदान-प्रदान होता रहता है. यह सत्य है कि पूरे ब्रह्मांड में अस्सी प्रतिशत अमूर्तन व्याप्त है और मात्र बीस प्रतिशत मूर्तनता… बावजूद विडंबना देखिए कल्पना यथार्थ से बड़ी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p></p>



<p><strong>&#8216;अनुपमा&#8217; बैनर के अंतर्गत &#8221; सम्मानित पत्रकार, राजनयिक और पूर्व राज्यसभा सदस्य  एच.के. दुआ करेंगे  उद्घाटन </strong></p>



<p><strong>अनीता कुमारी की कलाकृतियां हमें अपनी जड़ों से, अस्मिता से जुड़ने का संकेत देती हैं</strong>&#8211;<strong>धनंजय सिंह</strong> </p>



<p><strong> यह कला-प्रदर्शनी मूर्त अमूर्त के मध्य एक संकल्पित झूले में झूलने का आमंत्रण हैं</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="650" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/11/fd62566f-53de-46ea-b21b-8fb1caf71f58-650x650.jpg" alt="" class="wp-image-79974" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/11/fd62566f-53de-46ea-b21b-8fb1caf71f58-650x650.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/11/fd62566f-53de-46ea-b21b-8fb1caf71f58-350x350.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/11/fd62566f-53de-46ea-b21b-8fb1caf71f58-250x250.jpg 250w, https://www.patnanow.com/assets/2023/11/fd62566f-53de-46ea-b21b-8fb1caf71f58-768x768.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/11/fd62566f-53de-46ea-b21b-8fb1caf71f58-1536x1536.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2023/11/fd62566f-53de-46ea-b21b-8fb1caf71f58.jpg 1600w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><br>कवि मूर्त और अमूर्त उन रंग-आकृतियों की लहरों में झूमने की बात करते हैं जिसमें तीनों युवा कलाकार अपनी कलाकृतियों के माध्यम से मनुष्य को भौतिक सीमाओं तथा सांसारिक व्यामोहों से छुटकारा पाने में सहायता करते हुए अपने सहज संयोजन के साथ कल्पनाशीलता के मनोरम संगम में झूमने को बीकानेर हाउस में आमंत्रित कर रहे हैं प्रदर्शनी में शामिल चित्रकारों में प्रमुख अमूर्त कलाकार प्रियंका सिन्हा उक्त कला-प्रदर्शनी के क्यूरेटर का दायित्व भी निभाते हुए अपने साथ मूर्त चित्रकार अनीता कुमारी और सुधीर पंडित आदि कलाकारों के साथ कुछ मूर्त कुछ अमूर्त कलाकृतियों के माध्यम से जीवन की उन जटिल अनुभूतियों को अपनी अभिव्यक्तियों में व्यक्त करने का एक सतत सकारात्मक पक्ष प्रस्तुत कर प्रेक्षक के सम्मुख उपस्थित हैं.चार दिवसीय संभावना शील परम्परा की पीढ़ी में चित्रकार प्रियंका सिन्हा अग्रणी कलाकार है जिन्होंने अपनी अमूर्त अभिव्यक्ति में एक लयात्मक गति और अद्भुत संयोजन के बल पर अपने व्यापक अनुभवों को बड़ी सहजता से समेटकर अभिव्यक्त करती है. मेरा उनसे और उनके सृजन कर्म से विगत चार-पाँच बरस का गहरा ताल्लुक़ और एक जिज्ञासु मनोमय विचारों का आदान-प्रदान होता रहता है. यह सत्य है कि पूरे ब्रह्मांड में अस्सी प्रतिशत अमूर्तन व्याप्त है और मात्र बीस प्रतिशत मूर्तनता… बावजूद विडंबना देखिए कल्पना यथार्थ से बड़ी नही हो सकी.. इसीलिए चर- चराचर जगत में मूर्त के बिना अमूर्त और अमूर्त के बिना मूर्त की कल्पना करना व्यर्थ है. .. इस कला- प्रदर्शनी में एक तरफ जहां प्रियंका सिन्हा के अमूर्त चित्रों के अलावा उनकी सहपाठी कलाकार अनीता कुमारी की मूर्त कलाकृतियों के साथ भी आपको झूमने का अवसर मिलेगा.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="525" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/03/anita.jpg" alt="" class="wp-image-59458" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/03/anita.jpg 525w, https://www.patnanow.com/assets/2022/03/anita-306x350.jpg 306w" sizes="(max-width: 525px) 100vw, 525px" /></figure>



<p> अनीता कुमारी की कलाकृतियों में आधुनिकता के साथ-साथ पारंपरिक अनुष्ठानों के पौराणिक वातावरण से अनुप्राणित और नवीन कथ्य के अनुरूप अपनी बानगी प्रस्तुत करती है… यद्यपि विषय में चित्रकार अनीता अपने भाव अनुकूल अभिव्यक्ति के लिए प्रयासरत हैं और कुछ हद तक सफल भी.. सौंदर्यबोध उनके चित्त में और चित्र दोनों में साफ साफ नजर आता है… चित्रकार सुधीर कुमार पंडित जी व्यावसायिक कलाकारों में एक सुपरिचित नाम हैं कला जगत में इनके प्रयास और योगदान उल्लेखनीय रहे हैं. आप तीनों कलाकारों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों पर और विस्तार से बात करने के लिए न सिर्फ मुझे अपितु समस्त कला-प्रेमीयों को एक बार कला-वीथिका में घूमने या यूँ कहें कि कलाकारों के बहुरंगी भावों के संग झूमने अवश्य आना चाहिए और संवेदनशील कलाकारों के कला संस्कार की रंगीन पट्टियों में अवश्य गोते लगाना चाहिए.क्यूंकि यहां मौजूद हैं कलाकारों की समझ, संवेदना और सौंदर्य दृष्टि से उपजी कृतियाँ.</p>



<p><br>इस प्रदर्शनी में चित्रकार प्रियंका की कलाकृतियों में मौजूद अमूर्त चित्र दर्शकों के मन में एक उत्सुक भाव भरते हैं,उनका अमूर्तन किसी चित्र-धारा विशेष में ठहरा हुआ अमूर्तन नही है यद्यपि उसकी रचना &#8211; विधि में प्रकट होने वाले बिम्बों-आकारों में, उसके रंग प्रयोग में, एक विविधता के साथ चित्रकार की उपस्थिति भी एक मौलिकता का सत्यापन है,उनके रंगों की धारीयों-लकीरों को एक प्रबल व लयात्मक संवेग के साथ स्वाभाविक रूप से हरे,नीले, सफेद, पीले आदि मनःस्थितियों की जो रंगते फलक पर फैली हुई हैं उनमें एक गहरी इंद्रियता निहित है और वे प्रकृति की ओर झुके हुए रंग हैं यानी प्राकृतिक दृश्यों के निकट के रंग हैं जिसमें एक अलग ही उजास मौजूद है . </p>



<p>दरअसल यह प्रदर्शनी एक काम तो यही करती है कि वे कई तरह के सन्दर्भ बनाती है या कई तरह के सन्दर्भों की ओर हमें ले जाती है और स्वयं किसी चित्रकार विशेष के कार्यों को हमें कई तरह के सन्दर्भों में रखने-परखने के लिए उकसाती हैं या यूँ कहें कि स्वयं ही उस चित्रकार के संसार के कुछ या कई पहलुओं की ओर एकाग्र भाव से इशारा करती हैं. चित्रकार प्रियंका के अभिव्यक्ति का यह स्वरुप मुझे विशेष रूप से आकर्षित करता रहा है अर्थात मैं कह सकता हूं कि प्रियंका के केनवास पर तैरते रंगों की अंतरंगता,आंखों और मन को जिस तरह से तरंगित करती है, उसका अपना ही एक आस्वाद है…उनके काम अपने दर्शक को अनुप्राणित करने की क्षमता रखते हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="338" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/03/anita-1.jpg" alt="" class="wp-image-59526" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/03/anita-1.jpg 338w, https://www.patnanow.com/assets/2022/03/anita-1-197x350.jpg 197w" sizes="(max-width: 338px) 100vw, 338px" /></figure>



<p>दूसरी ओर चित्रकार अनीता कुमारी हैं जो कि एक कला अध्यापक भी हैं जो अपने भाव अभिव्यक्ति में मूर्त और जाने-पहचाने आकृतियों के साथ एक पौराणिक संकल्पना लिए हुए श्रंगारिक सौंदर्यबोध का सूत्रपात करते हुए जीवन और कला के दायित्वों का निर्वहन बड़ी संलग्नता के साथ निभाते हुए प्रतीत जान पड़ती हैं.एक तरफ जहां प्रियंका के अमूर्त चित्र तात्विक अन्वेषण करते हुए धैर्य तथा बहुत अधिक समय की माँग करती हैं क्यूंकि अमूर्त कला एक संवेदनशील तथा मनोवैज्ञानिक स्तर पर अवस्थित एक ऐसा क्षेत्र है, जहाँ भौतिक संपन्नता कोई प्रभाव नहीं डाल पाती क्यूंकि जब सारे प्रयास भौतिक साधनों की ओर उन्मुख हों तो शांति और आत्मतोष की कमी हो जाती है ऐसी स्थिति में नैतिकता और विवेक तथा मनुष्य की छठी इंद्रिय के रूप में व्याप्त &#8220;धर्म &#8221; ही एकमात्र उपचार बचता है जिसके लिए हमें चित्रकार अनिता कुमारी की कलाकृतियों पर एक नजर अवश्य ही डाल लेनी चाहिए.अनीता कुमारी की कलाकृतियां हमें अपनी जड़ों से, अस्मिता से जुड़ने का संकेत देती हैं. .. मैं एक कला मीमांसक के नाते फिर से यही कहना चाहूँगा कि यह कला-प्रदर्शनी मूर्त अमूर्त के मध्य एक संकल्पित झूले में झूलने का आमंत्रण हैं, दो भिन्न कलात्मक रंगीन पट्टियों के साथ झूमने का एक सकारात्मक प्रयोजन है जिसके पीछे नेपथ्य में कलाकारों के लंबे संघर्ष और जीवन में आए उतार-चढाव का एक मानवोचित दर्पण हैं.</p>



<p>रवींद्र भारती </p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>नारी समाज की पवित्र प्रतीक है ‘योगिनी’ : अनीता कुमारी</title>
		<link>https://www.patnanow.com/yogini-is-the-holy-symbol-of-womens-society-anita-kumari/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Nov 2022 12:18:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[गांव -शहर]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[anita kumari]]></category>
		<category><![CDATA[lallit kala academy patna]]></category>
		<category><![CDATA[yogini]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.patnanow.com/?p=68680</guid>

					<description><![CDATA[योगिनी चित्र शिल्प एक कहानी कहता है : पद्मश्री श्याम शर्मा सामाजिक संस्कृति की बहुस्तरीय भावना को दर्शाती एकल चित्र प्रदर्शनी का आयोजन नारी समाज की पवित्र प्रतीक है पूरा समाज नारी के इर्द-गिर्द है घूमती दुनिया को अपने कैनवस पर समेटना चाहती हूं मैं एकल प्रदर्शनी -15 नवम्बर से 20 नवम्बर 2022  का आयोजन पटना में आये दिन कोई न कोई चित्र प्रदर्शनी का आयोजन होता ही रहता है कभी समूह में तो कभी एकल. देश में अपना स्थान ख़ास बनाने वाली अनीता कुमारी की एकल चित्र प्रदर्शनी में योगिनी को प्रस्तुत किया है.ललित कला अकादमी में आयोजित इस एकल चित्रकला प्रदर्शनी का उद्घाटन देश दुनिया के प्रख्यात चित्रकार श्याम शर्मा किया.उन्होंने कहा कि अनीता कुमारी के चित्र ने सृजन से लेकर कई अवस्थाओं का चित्रण किया है जिसमें कला के प्रति उनका नजरिया स्पष्ट दिखता है.  उन्होंने कहा कि अनीता कुमारी के चित्र ने सृजन से लेकर कई अवस्थाओं का चित्रण किया है जिसमें कला के प्रति उनका नजरिया स्पष्ट दिखता है। योगिनी एक योग है मतलब जोड़ना मतलब योगी। षोडशमातृकाएं या 64 योगिनियों की कल्पना है। ये सभी भारतीय चित्र परंपरा के अनुसार है। इनके चित्रों में कथात्मक का गुण है जो अपनी कहानी कहती है। योगिनी को आज के संदर्भ में प्रस्तुत करना ही कलात्मकता है। अनीता ने बताया कि योगिनी एक प्रतीकात्मक चिन्ह है जिस पर काम करते हुए मैं अपने कामों में आन्नद की प्राप्ति करती हूँ. नारी समाज की पवित्र प्रतीक है क्योंकि पूरा समाज नारी के इर्द-गिर्द घूमती है. मेरी कला 21वीं [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>योगिनी चित्र शिल्प एक कहानी कहता है : पद्मश्री श्याम शर्मा</strong></p>



<p><strong>सामाजिक संस्कृति की बहुस्तरीय भावना को दर्शाती एकल चित्र प्रदर्शनी का आयोजन</strong></p>



<p><strong>नारी समाज की पवित्र प्रतीक है पूरा समाज नारी के इर्द-गिर्द है घूमती</strong></p>



<p><strong>दुनिया को अपने कैनवस पर समेटना चाहती हूं मैं</strong></p>



<p><strong>एकल प्रदर्शनी -15 नवम्बर से 20 नवम्बर 2022  का आयोजन</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/IMG_20221115_162847.jpg" alt="" class="wp-image-68690" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/IMG_20221115_162847.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/11/IMG_20221115_162847-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption>पद्मश्री श्याम शर्मा और अनीता कुमारी </figcaption></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/anita-1.jpg" alt="" class="wp-image-68681" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/anita-1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/11/anita-1-350x263.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>पटना में आये दिन कोई न कोई चित्र प्रदर्शनी का आयोजन होता ही रहता है कभी समूह में तो कभी एकल. देश में अपना स्थान ख़ास बनाने वाली अनीता कुमारी की एकल चित्र प्रदर्शनी में योगिनी को प्रस्तुत किया है.ललित कला अकादमी में आयोजित इस एकल चित्रकला प्रदर्शनी का उद्घाटन देश दुनिया के प्रख्यात चित्रकार श्याम शर्मा किया.उन्होंने कहा कि अनीता कुमारी के चित्र ने सृजन से लेकर कई अवस्थाओं का चित्रण किया है जिसमें कला के प्रति उनका नजरिया स्पष्ट दिखता है.  उन्होंने कहा कि अनीता कुमारी के चित्र ने सृजन से लेकर कई अवस्थाओं का चित्रण किया है जिसमें कला के प्रति उनका नजरिया स्पष्ट दिखता है। योगिनी एक योग है मतलब जोड़ना मतलब योगी। षोडशमातृकाएं या 64 योगिनियों की कल्पना है। ये सभी भारतीय चित्र परंपरा के अनुसार है। इनके चित्रों में कथात्मक का गुण है जो अपनी कहानी कहती है। योगिनी को आज के संदर्भ में प्रस्तुत करना ही कलात्मकता है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/IMG_20221115_163207.jpg" alt="" class="wp-image-68688" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/IMG_20221115_163207.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/11/IMG_20221115_163207-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>अनीता ने बताया कि योगिनी एक प्रतीकात्मक चिन्ह है जिस पर काम करते हुए मैं अपने कामों में आन्नद की प्राप्ति करती हूँ. नारी समाज की पवित्र प्रतीक है क्योंकि पूरा समाज नारी के इर्द-गिर्द घूमती है. मेरी कला 21वीं सदी के समाज की महिलाओं की व्याख्या है जो महिलाओं और समाज के बीच अतीत से लेकर वर्तमान तक का संवाद व्यक्त करती है. एक महिला होने के नाते मैं समाज के सुचारू संचालन में मेरी कला का स्रोत प्रकृति और वह वस्तुएं हैं जिनमें हम रहते हैं और जिनके साथ हम रहते हैं. मैं अपनी संस्कृति के स्वदेशी तत्व का दर्शकों को अनुभूति कराती हूं. तथ्यों और अनुभव में विश्वास करते हुए मैं दुनिया को अपने कैनवस पर समेटना चाहती हूं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="617" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/anita2.jpg" alt="" class="wp-image-68682" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/anita2.jpg 617w, https://www.patnanow.com/assets/2022/11/anita2-350x340.jpg 350w" sizes="(max-width: 617px) 100vw, 617px" /></figure>



<p>प्रकृति और समाज के संयोजन के माध्यम से विभिन्न प्रकार के अनुभव व्यक्त करने का प्रयास करती हूं. मेरा विषय सामाजिक संस्कृति की बहुस्तरीय भावना को दर्शाता है जो समय के साथ विकसित हो रही है और समाजिक संस्कृति की एक प्रमुख भूमिका रहती है कि कैसे चीजें बदल रही है और हमारे अतीत को भविष्य से जोड़ता है. योगिनी एक प्रतीकात्मक चिन्ह है. नारी समाज की पवित्र प्रतीक है क्योंकि पूरा समाज नारी के इर्द-गिर्द घूमती है. मेरी कला 21 वीं सदी के समाज की महिलाओं की व्याख्या है जो महिलाओं और समाज के बीच अतीत से लेकर वर्तमान तक का संवाद व्यक्त करती है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="444" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/anita4.jpg" alt="" class="wp-image-68684" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/anita4.jpg 444w, https://www.patnanow.com/assets/2022/11/anita4-259x350.jpg 259w" sizes="(max-width: 444px) 100vw, 444px" /></figure>



<p></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/IMG_20221115_154739.jpg" alt="" class="wp-image-68691" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/IMG_20221115_154739.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/11/IMG_20221115_154739-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>एक महिला होने के नाते मैं समाज के सुचारू संचालन में महिलाओं की भूमिका और महत्व को समझती हूं. वह एक स्तंभ है जो समाज को मातृत्व कामा प्रेम और करुणा और कभी कभी विनाश की शक्ति के साथ मजबूत करती रहती है. एक महिला हमेशा सद्भावना को पीढ़ियों तक स्थानांतरित करती है और समाज को समृद्ध करती है. मेरी कला में समाज की एक मजबूत और साहसी महिला को योगिनी के रूप में दर्शाया गया है जिसकी स्वतंत्रता है देखने में सामान्य है. योगिनी एक देवी हो सकती हैं और एक इंसान भी हो सकती है इसके कई आयाम है जिसको मैं अपने आर्ट प्रैक्टिस के द्वारा दर्शाने की कोशिश की है, भूमिका और महत्व को समझती हूं. वह एक स्तंभ है जो समाज को मातृत्व कामा प्रेम और करुणा और कभी कभी विनाश की शक्ति के साथ मजबूत करती रहती है. एक महिला हमेशा सद्भावना को पीढ़ियों तक स्थानांतरित करती है और समाज को समृद्ध करती है. इस अवसर पर राज्य के कई चित्रकार और कलाकार उपस्थित थे.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>विस्तार-2 चित्रकला प्रदर्शनी में दिखी मानवीय मूल्यों का ह्रास,दर्द और खुशियां</title>
		<link>https://www.patnanow.com/vistar-2-the-loss-of-human-values-pain-and-happiness-seen-in-the-painting-exhibition/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Mar 2022 14:01:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[anita kumari]]></category>
		<category><![CDATA[archana kumar]]></category>
		<category><![CDATA[sangeeta patna]]></category>
		<category><![CDATA[satya sarth]]></category>
		<category><![CDATA[vistar-2]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.patnanow.com/?p=59524</guid>

					<description><![CDATA[सात महिलाओं के समूह ‘विस्तार-2’ चित्रकला प्रदर्शनी हुई सम्पन्न   बिहार और अन्य राज्यों की महिला कलाकारों ने दिखाया दम सुतनी कला से लेकर मुखौटे प्रदर्शनी में बने आकर्षण का केंद्र अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हुआ था कार्यक्रम का आयोजन महिला चित्रकारों ने लगाई खुद के पैसे से लगाईं प्रदर्शनी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सात महिलाओं के समूह विस्तार -2 की ओर से चार दिवसीय चित्रकला प्रदर्शनी का आयोजन ललित कला अकादमी कला दीर्घा में किया गया. इस प्रदर्शनी में देश की ख्याति प्राप्त कलाकारों की चित्र प्रदर्शनी लगाई गई जिसमें महिला सशक्तिकरण के साथ प्रदेश की खुशहाली को प्रस्तुत किया गया है. महिला चित्रकारों की पेंटिंग में खालीपन,उमंग उत्साह का समावेश देखने को मिला. इस चित्र प्रदर्शनी में पटना कि अनीता की पेंटिंग प्रदर्शित की गई है जन मानस को अपनी ओर आकर्षित करती है. अनीता कहती है कि आज साउथ में विनाले हो रहा है लेकिन हमारे राज्य में ऐसा कुछ नहीं दिखता है.रोजगार सृजन कला के क्षेत्र में कम हो रहा है इसके लिए निचले स्तर पर काम होना चाहिए. अनीता की पेंटिंग में कल्पना और कलात्मकता का बेजोड़ मेल देखने को मिलता है उनके इस्तेमाल किये गए रंग दर्शक को अपनी ओर खींचते हैं. अनीता की कृतियों में समाज को गढ़ने और बहने की चाहत लिए आशावादी दृष्टिकोण से ओत प्रोत हैं. कार्यक्रम की संयोजिका और कलाकार सत्या सार्थ ने कहा कि इस प्रदर्शनी में लगे चित्र कलाप्रेमियों को जरूर कुछ सोचने पर मजबूर करेगा. हम सभी महिला चित्रकारों का अपने नजरिये से समाज [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p></p>



<div class="wp-block-columns is-layout-flex wp-container-core-columns-is-layout-1 wp-block-columns-is-layout-flex">
<div class="wp-block-column is-layout-flow wp-block-column-is-layout-flow" style="flex-basis:20%">
<p><strong>सात महिलाओं के समूह ‘विस्तार-2’ चित्रकला प्रदर्शनी हुई सम्पन्न  </strong></p>
</div>



<div class="wp-block-column is-layout-flow wp-block-column-is-layout-flow" style="flex-basis:20%">
<p><strong>बिहार और अन्य राज्यों की  महिला कलाकारों ने दिखाया दम</strong></p>
</div>



<div class="wp-block-column is-layout-flow wp-block-column-is-layout-flow" style="flex-basis:20%">
<p><strong>सुतनी कला से लेकर मुखौटे प्रदर्शनी में बने आकर्षण का केंद्र</strong></p>
</div>



<div class="wp-block-column is-layout-flow wp-block-column-is-layout-flow" style="flex-basis:20%">
<p><strong>अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हुआ था कार्यक्रम का आयोजन</strong></p>
</div>



<div class="wp-block-column is-layout-flow wp-block-column-is-layout-flow" style="flex-basis:20%">
<p><strong>महिला चित्रकारों ने लगाई खुद के पैसे से लगाईं प्रदर्शनी</strong></p>
</div>
</div>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="380" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/03/ग्रुप.jpg" alt="" class="wp-image-59525" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/03/ग्रुप.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/03/ग्रुप-350x205.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सात महिलाओं के समूह विस्तार -2 की ओर से चार दिवसीय चित्रकला प्रदर्शनी का आयोजन ललित कला अकादमी कला दीर्घा में किया गया. इस प्रदर्शनी में देश की ख्याति प्राप्त कलाकारों की चित्र प्रदर्शनी लगाई गई जिसमें महिला सशक्तिकरण के साथ प्रदेश की खुशहाली को प्रस्तुत किया गया है. महिला चित्रकारों की पेंटिंग में खालीपन,उमंग उत्साह का समावेश देखने को मिला.</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/03/anita-1.jpg" alt="" class="wp-image-59526" width="380" height="675" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/03/anita-1.jpg 338w, https://www.patnanow.com/assets/2022/03/anita-1-197x350.jpg 197w" sizes="(max-width: 380px) 100vw, 380px" /></figure>



<p>इस चित्र प्रदर्शनी में पटना कि अनीता की पेंटिंग प्रदर्शित की गई है जन मानस को अपनी ओर आकर्षित करती है. अनीता कहती है कि आज साउथ में विनाले हो रहा है लेकिन हमारे राज्य में ऐसा कुछ नहीं दिखता है.रोजगार सृजन कला के क्षेत्र में कम हो रहा है इसके लिए निचले स्तर पर काम होना चाहिए. अनीता की पेंटिंग में कल्पना और कलात्मकता का बेजोड़ मेल देखने को मिलता है उनके इस्तेमाल किये गए रंग दर्शक को अपनी ओर खींचते हैं. अनीता की कृतियों में समाज को गढ़ने और बहने की चाहत लिए आशावादी दृष्टिकोण से ओत प्रोत हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/03/सत्या.jpg" alt="" class="wp-image-59527" width="443" height="676" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/03/सत्या.jpg 393w, https://www.patnanow.com/assets/2022/03/सत्या-229x350.jpg 229w" sizes="(max-width: 443px) 100vw, 443px" /></figure>



<p>कार्यक्रम की संयोजिका और कलाकार सत्या सार्थ ने कहा कि इस प्रदर्शनी में लगे चित्र कलाप्रेमियों को जरूर कुछ सोचने पर मजबूर करेगा. हम सभी महिला चित्रकारों का अपने नजरिये से समाज के देखना और महसूस करना और रंग रेखाओं से कलाकृतियां बना कर लोगों के समक्ष इस प्रदर्शनी के माध्यम से पेश करना ही हमारा मकसद है.लोगों को इस चित्रकला प्रदर्शनी में आधुनिक जीवन में पारम्परिक प्रयोग भी देखने को मिले. सत्या के पेंटिंग में समाज को बांटने ,मनुष्य के बीच मनुष्य के लिए बढ़ती खाई कि ओर इशारा करती हैं.उनका कहना है कि मनुष्य को मनुष्य में बांटने की प्रथा ख़त्म होनी चाहिए.</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/03/sangeeta.jpg" alt="" class="wp-image-59528" width="416" height="655" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/03/sangeeta.jpg 381w, https://www.patnanow.com/assets/2022/03/sangeeta-222x350.jpg 222w" sizes="(max-width: 416px) 100vw, 416px" /></figure>



<p>इस कला प्रदर्शनी में भाग लेने वाले कलाकार संगीता ने ग्रामीण जीवन का प्राकृतिक व मानवीय संवेदनाओं की सार्थकता को पेश किया है. मृगतृष्णा, टूवर्ड्स आवर नेचर जैसी पेंटिंग ने दर्शकों को प्रकृति के वैसे चित्रों को दिखाया जो अमूमन कम देखने को मिलते हैं. संगीता के फूट प्रिंट को भी लोगों ने सराहा. वहीँ कर्नाटक की मीनाक्षी सद्गले ने समाज का झूठ और फरेब से बाहर नहीं निकलने की असमर्थता के आगे नतमस्तक समाज को अपने चित्रों के जरिये व्यक्त किया है.उन्होंने गाँवों में नंदी के साथ जीवन यापन के नजरियों को बखूबी चित्रित किया है. </p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/03/नम्रता.jpg" alt="" class="wp-image-59533" width="413" height="733" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/03/नम्रता.jpg 338w, https://www.patnanow.com/assets/2022/03/नम्रता-197x350.jpg 197w" sizes="(max-width: 413px) 100vw, 413px" /></figure>



<p>नम्रता की पेंटिंग में सांस्कृतिक विरासत को छिन्न भिन्न करने वाले हाथों को रोकने की कोशिश करती नजर आती है. वहीँ सुजनी शिल्प कला अपनी पेंटिंग में स्थान देकर एक नई धारा के रूप में प्रयोग किया है. इनकी पेंटिंग में धागों का इस्तेमाल इनकी पेंटिंग में चार चाँद लगाते हैं साथ ही चित्रकला में शिल्प के प्रयोग को चिह्नित करते हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/03/archan-kumar.jpg" alt="" class="wp-image-59529" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/03/archan-kumar.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/03/archan-kumar-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>अर्चना की पेंटिंग में सामाजिक सरोकार तथा समसामयिक जिज्ञासा दिखती है अर्चना ने किसानों की वर्तमान हालत को अपनी पेंटिंग ‘सोना है उगाया, हाथ कुछ नहीं आया’ है के जरिये व्यक्त करने कि कोशिश की है. अर्चना कुमार की पेंटिंग में बुद्ध की जर्नी के साथ ध्यान,भक्ति को दर्शाता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="490" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/03/हीमा-650x490.jpg" alt="" class="wp-image-59530" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/03/हीमा-650x490.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/03/हीमा-350x264.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2022/03/हीमा.jpg 705w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>लखनऊ की प्रसिद्द चित्रकार हेमा की पेंटिंग समाज को आईना दिखाने का काम करते रहे हैं. हेमा कहती हैं कि उन्हें वैसी घटनाओं पर काम करना अच्छा लगता है जिनका सम्बन्ध जीवन से होता है जो प्रभावित करती हैं वैसे दृश्यों को बस उकेर देती हूँ,वे एक्रेलिक शीट पर ही एक्रेलिक कलर का इस्तेमाल करती हैं. उनका कहना है कि वे मशहूर कलाकार के जी सुब्रह्मण्यम के आर्ट को फॉलो करती हैं.</p>



<p><strong>रवीन्द्र भारती </strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
