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		<title>गर्भावस्था में एनीमिया से बचने के लिए नियमित कराइए ANC जांच</title>
		<link>https://www.patnanow.com/anc-check-is-necessary-for-pregnant-women/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 Jun 2022 04:55:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गर्भावस्था में एनीमिया प्रबंधन के लिये नियमित ANC जांच बेहद जरूरी प्रत्येक माह की 9वीं तिथि को जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में होती है गर्भवती महिलाओं की जांच प्रसव पूर्व जांच के प्रति महिलाओं की जागरूकता एनीमिया रोकथाम में सहायकआरा, 04 जून. गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को खानपान का विशेष ध्यान रखना होता है, लेकिन सबसे जरूरी बात यह रहती है कि इस दौरान गर्भवती महिलाएं किसी गंभीर रोग की चपेट में न आ जाएं. इन्हीं बीमारियों में से एक है एनीमिया. जिसके कारण न केवल गर्भवती महिलाओं को बल्कि उनके गर्भ में पल रहे बच्चों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. वहीं, कई मामलों में एनीमिया के कारण प्रसव के दौरान जटिलतायें भी बढ़ जाती है, जिसके कारण अधिक रक्त स्राव से गर्भवतियों की मौत की भी संभावना होती है. इसलिए गर्भावस्था में बेहतर शिशु विकास एवं प्रसव के दौरान होने वाली रक्त स्राव प्रबंधन के लिए महिलाओं में पर्याप्त मात्रा में खून होना आवश्यक होता है. एनीमिया प्रबंधन के लिए प्रसव पूर्व जांच के प्रति महिलाओं की जागरूकता ना सिर्फ एनीमिया रोकथाम में सहायक होती है बल्कि सुरक्षित मातृत्व की आधारशिला भी तैयार करती है. पूर्व जांच नहीं कराना एनीमिया का प्रमुख कारण : राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के आंकड़ों के अनुसार जिले में 15 से 49 वर्ष के मध्य आयु की 68.3 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं. गर्भावस्था में 4 प्रसव पूर्व जांच नहीं कराना एनीमिया का प्रमुख कारण है. आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 33.5 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं ही 4 [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गर्भावस्था में एनीमिया प्रबंधन के लिये नियमित ANC जांच बेहद जरूरी</strong></p>



<p><strong>प्रत्येक माह की 9वीं तिथि को जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में होती है गर्भवती महिलाओं की जांच</strong></p>



<p><strong>प्रसव पूर्व जांच के प्रति महिलाओं की जागरूकता एनीमिया रोकथाम में सहायक</strong><br>आरा, 04 जून. गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को खानपान का विशेष ध्यान रखना होता है, लेकिन सबसे जरूरी बात यह रहती है कि इस दौरान गर्भवती महिलाएं किसी गंभीर रोग की चपेट में न आ जाएं. इन्हीं बीमारियों में से एक है एनीमिया. जिसके कारण न केवल गर्भवती महिलाओं को बल्कि उनके गर्भ में पल रहे बच्चों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. वहीं, कई मामलों में एनीमिया के कारण प्रसव के दौरान जटिलतायें भी बढ़ जाती है, जिसके कारण अधिक रक्त स्राव से गर्भवतियों की मौत की भी संभावना होती है. इसलिए गर्भावस्था में बेहतर शिशु विकास एवं प्रसव के दौरान होने वाली रक्त स्राव प्रबंधन के लिए महिलाओं में पर्याप्त मात्रा में खून होना आवश्यक होता है. एनीमिया प्रबंधन के लिए प्रसव पूर्व जांच के प्रति महिलाओं की जागरूकता ना सिर्फ एनीमिया रोकथाम में सहायक होती है बल्कि सुरक्षित मातृत्व की आधारशिला भी तैयार करती है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="608" height="505" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/06/IMG-20220603-WA0020.jpg" alt="" class="wp-image-63088" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/06/IMG-20220603-WA0020.jpg 608w, https://www.patnanow.com/assets/2022/06/IMG-20220603-WA0020-350x291.jpg 350w" sizes="(max-width: 608px) 100vw, 608px" /></figure>



<p><strong>पूर्व जांच नहीं कराना एनीमिया का प्रमुख कारण :</strong></p>





<p>राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के आंकड़ों के अनुसार जिले में 15 से 49 वर्ष के मध्य आयु की 68.3 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं. गर्भावस्था में 4 प्रसव पूर्व जांच नहीं कराना एनीमिया का प्रमुख कारण है. आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 33.5 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं ही 4 प्रसव पूर्व जांच कराती हैं। जो वर्ष 2015-16 में 16.1 प्रतिशत थी. विभागीय प्रयासों और लोगों में जागरूकता के कारण प्रसव पूर्व चार एएनसी जांच में 17.4 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है.</p>



<p><strong>हर माह सरकारी अस्पतालों में होती गर्भवतियों की जांच :</strong></p>



<p>प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत प्रत्येक माह की 9वीं तिथि को सभी सरकारी अस्पातलों में शिविर का आयोजन किया जाता है. जिसमें गर्भवती महिलाओं में प्रसव पूर्व नियमित रूप से विभिन्न जांच की जाती है. जिसके आधार पर गर्भवतियों को एनेमिक या गंभीर एनेमिक होने की जानकारी भी जाती है. एनेमिक महिलाओं को तीन श्रेणी में रखा जाता है. 10 ग्राम से 10.9 ग्राम खून होने पर माइल्ड एनीमिया, 7 ग्राम से 9.9 ग्राम खून होने पर मॉडरेट एनीमिया एवं 7 ग्राम से कम खून होने पर सीवियर एनीमिया होता है. गंभीर एनेमिक की श्रेणी की गर्भवतियों को प्रथम रेफरल यूनिट में ही प्रसव कराने की सलाह दी जाती है ताकि, प्रसव की जटिलताओं से आसानी से निपटारा पाया जा सके.</p>



<p><strong>जागरूकता से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी संभव:</strong></p>



<pre class="wp-block-preformatted"></pre>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="585" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/06/IMG-20220603-WA0023.jpg" alt="" class="wp-image-63089" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/06/IMG-20220603-WA0023.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/06/IMG-20220603-WA0023-350x315.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>गर्भवती महिलाओं को सामान्य से अधिक आयरन की जरूरत होती है ताकि बढ़ते शिशु के लिए शरीर में खून बनता रहे. इसलिये आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविकाओं और आशा दीदियों के द्वारा सामुदायिक स्तर पर गर्भवती महिलाओं को बेहतर खान-पान की जानकारी दी जाती है. ताकि, एनीमिया के विषय में संपूर्ण जानकारी से प्रसव के दौरान होने वाली मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लायी जा सके. गर्भवती महिलाओं को अपने आहार में आयरन युक्त खाद्य पदार्थों के अलावा, मौसमी फल, स्किनलेश चिकन, मछली, अच्छी तरह से पके अंडे, दाल, हरे पत्तीदार सब्जियां, फलियां, मेवा और अनाज का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है.</p>



<p></p>



<p><strong>PNCB</strong></p>
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		<title>सावधान! कीड़े भी हो सकते हैं एनीमिया के मुख्य कारक!</title>
		<link>https://www.patnanow.com/kide-bhi-ho-sakte-hain-animiya-ke-lakshan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 27 Apr 2022 03:56:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
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					<description><![CDATA[पेट में कीड़ों के इंफेक्शन के कारण एनिमिया रोग के शिकार हो जाते हैं बच्चे : एसीएमओ • राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान के तहत मॉपअप राउंड संपन्न, छूटे हुए बच्चों को खिलाई गई अल्बेंडाजोल की दवा• शिक्षकों और सेविकाओं की मौजूदगी में खिलाई गई दवा आरा, 27 अप्रैल. राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान के तहत मंगलवार को जिले में मॉपअप राउंड चलाया गया. इस क्रम में बीते दिन 22 अप्रैल राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर जिले में संचालित अभियान में छूटे हुए बच्चों को अल्बेंडाजोल की दवा खिलाई गई, ताकि, एक से 19 साल तक के सभी बच्चे अल्बेंडाजोल की दवा का लाभ ले सकें. वहीं, विभाग के निर्देशानुसार अल्बेंडाजोल दवा का सेवन शिक्षक तथा आंगनबाड़ी सेविका के साथ आशा कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में कराया गया. ताकि, विषम परिस्थिति के मौके पर चिकित्सकों से कोऑर्डिनेट किया जा सके। अभियान के दौरान न केवल कोविड के सामान्य नियमों का पालन किया गया, बल्कि बच्चों को निर्धारित डोज के अनुसार दवा दी गई. जिसमें एक से दो वर्ष के बच्चों के अल्बेंडाजोल 400 एमजी टैबलेट को आधा कर उसका चूर्ण पानी के साथ खिलाना गया. वहीं, दो से तीन वर्ष के बच्चों को अल्बेंडाजोल 400 एमजी का एक टैबलेट चूर्ण कर पानी के साथ तथा तीन से 19 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों और किशोरों को एक पूरा टैबलेट चबाकर खिलाया गया. डायरिया की समस्या भी हो जाती है : अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. केएन सिन्हा ने बताया, कि कृमि आंतों की दीवारों को नुकसान पहुंचाते हैं. इनके कारण आंत [&#8230;]]]></description>
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<p></p>



<p><strong>पेट में कीड़ों के इंफेक्शन के कारण एनिमिया रोग के शिकार हो जाते हैं बच्चे : एसीएमओ</strong></p>



<p>• <em><strong>राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान के तहत मॉपअप राउंड संपन्न, छूटे हुए बच्चों को खिलाई गई अल्बेंडाजोल की दवा<br>• शिक्षकों और सेविकाओं की मौजूदगी में खिलाई गई दवा</strong></em><div><b><i><br></i></b>आरा, 27 अप्रैल. राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान के तहत </div></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="593" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/IMG-20220427-WA0005.jpg" alt="" class="wp-image-61325" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/IMG-20220427-WA0005.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/04/IMG-20220427-WA0005-350x319.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>मंगलवार को जिले में मॉपअप राउंड चलाया गया. इस क्रम में बीते दिन 22 अप्रैल राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर जिले में संचालित अभियान में छूटे हुए बच्चों को अल्बेंडाजोल की दवा खिलाई गई, ताकि, एक से 19 साल तक के सभी बच्चे अल्बेंडाजोल की दवा का लाभ ले सकें. वहीं, विभाग के निर्देशानुसार अल्बेंडाजोल दवा का सेवन शिक्षक तथा आंगनबाड़ी सेविका के साथ आशा कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में कराया गया. ताकि, विषम परिस्थिति के मौके पर चिकित्सकों से कोऑर्डिनेट किया जा सके। अभियान के दौरान न केवल कोविड के सामान्य नियमों का पालन किया गया, बल्कि बच्चों को निर्धारित डोज के अनुसार दवा दी गई. जिसमें एक से दो वर्ष के बच्चों के अल्बेंडाजोल 400 एमजी टैबलेट को आधा कर उसका चूर्ण पानी के साथ खिलाना गया. वहीं, दो से तीन वर्ष के बच्चों को अल्बेंडाजोल 400 एमजी का एक टैबलेट चूर्ण कर पानी के साथ तथा तीन से 19 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों और किशोरों को एक पूरा टैबलेट चबाकर खिलाया गया.</p>



<p><strong>डायरिया की समस्या भी हो जाती है :</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="290" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/IMG-20220427-WA0001.jpg" alt="" class="wp-image-61326" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/IMG-20220427-WA0001.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/04/IMG-20220427-WA0001-350x156.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. केएन सिन्हा ने बताया, कि कृमि आंतों की दीवारों को नुकसान पहुंचाते हैं. इनके कारण आंत में पोषक तत्वों का ठीक से अवशोषण नहीं होता है, भूख कम हो जाती है और डायरिया की समस्या भी हो जाती है. इसका ही नतीजा होता है कि जिन बच्चों के पेट में कीड़ों का इंफेक्शन होता है वे रक्त की कमी वाले एनिमिया रोग का शिकार हो जाते हैं. वे थकान और कमजोरी का भी अनुभव करते हैं. पेट में कृमि के इंफेक्शन का प्रभाव बढ़ते बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर भी होता है. बच्चे नई चीजों को याद रखने में मुश्किल का अनुभव करते हैं. इसका नतीजा होता है कि वे स्कूल जाने से बचने लगते हैं. जिससे शिक्षा का नुकसान होता है और उनके जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है.</p>



<p><strong>किसी बच्चे के बीमार होने की सूचना नहीं मिली :</strong><br>अभियान के तहत सरकारी विद्यालयों, नवोदय, कस्तूरबा, मदरसा, संस्कृत एवं निजी विद्यालयों सहित सभी तकनीकी संस्थानों के माध्यम से और 6 से 19 आयु वर्ग के बालक एवं बालिकाओं को कृमि नाश के लिए अल्बेंडाजोल गोली शिक्षक की उपस्थिति में खिलाई गई. वहीं, सभी एक से छह वर्ष तक के पंजीकृत एवं अपंजीकृत बालक और बालिकाओं को आंगनबाड़ी केंद्रों में अल्बेंडाजोल की गोली का सेवन कराया गया. किसी भी स्थिति में गोली घर ले जाने के लिए नहीं दी गई. अभियान के दौरान दोनों निर्धारित तिथियों को कहीं से भी किसी बच्चे के बीमार होने की सूचना नहीं मिली. राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान को सफल बनाने के लिए त्रिस्तरीय माइक्रो प्लान बनाकर संचालित किया गया था. जिसमें आशा, आंगनबाड़ी केंद्र व स्कूलों को शामिल किया गया.</p>



<p><strong>बचाव के लिए सुरक्षात्मक कदम :</strong></p>



<ul class="wp-block-list"><li>स्वच्छता का ध्यान रखें</li><li>स्वच्छ टॉयलेट का उपयोग करें और खुले में शौच न करें<br>*हर बार टॉयलेट का उपयोग करने के बाद हाथ धोएं<br>*हमेशा जूते या चप्पल पहने<br>*फल और सब्जियों को खाने से पहले धोएं<br>*भोजन को ढक कर रखें<br>*स्वच्छ पेयजल का उपयोग करें</li></ul>



<p>आरा से<strong> ओ पी पांडेय</strong> की रिपोर्ट</p>
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