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		<title>आजादी की दीवानी ‘दुर्गा भाभी’ नाटक ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध</title>
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		<pubDate>Sat, 18 Mar 2023 17:08:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अनिल मुखर्जी शताब्दी नाट्योत्सव के दूसरे दिन दुर्गा ने दिखाई अपनी देशभक्ति दुर्गा भाभी ने बेहतरीन अभिनय से किया मंत्रमुग्ध गुमनाम क्रांतिकारियों को प्रकाश में लाने की मुहिम में दुर्गा भाभी नाटक बना मील का पत्थर इस नाटक के पचास शो करने का है लक्ष्य : आर के सिन्हा भारत में. चीन में और &#160;त्रिनिनाद एवं टोबैगो के राजदूत चंद्रदत सिंह एवं भोजपुरी.हिंदी और अंग्रेजी फिल्मों की प्रोड्यूसर अनिता चंद्रदत सिंह के साथ भोजपुरी फिल्मों के सुपर स्टार कुणाल सिंह.पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय भी नाटक की प्रस्तुति के दौरान उपस्थित रहे. वीरांगना दुर्गा भाभी के जीवन की उन्होंने साढ़े तीन साल तक गहन पड़ताल की. अनेक तथ्य जुटाये. उनके परिजनों से सम्पर्क किया. फिर इसे लिखा और इसका निर्देशन किया-अक्षयवर नाथ श्रीवास्तव निर्देशक एवं लेखक अनिल मुखर्जी शताब्दी नाट्योत्सव के दूसरे दिन हुआ नाटक का मंचन वीरांगना दुर्गा भाभी के जीवन पर आधारित नाटक का मंचन किया.राजधानी के रबिन्द्र भवन में आयोजित नाट्योत्सव के दूसरे दिन राजधानी के लोगों को गुमनाम क्रांतिकारियों में से एक दुर्गा भाभी के जीवन पर आधारित नाटक की प्रस्तुति XIII स्कूल ऑफ़ टैलेंट डेवलेपमेंट गाजियाबाद की प्रस्तुति देखने को मिली. दूसरे दिन के कार्यक्रम में भारत में. चीन में और &#160;त्रिनिनाद एवं टोबैगो के राजदूत चंद्रदत सिंह एवं भोजपुरी.हिंदी और अंग्रेजी फिल्मों की प्रोड्यूसर अनिता चंद्रदत सिंह के साथ भोजपुरी फिल्मों के सुपर स्टार कुणाल सिंह.पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय भी नाटक की प्रस्तुति के दौरान उपस्थित रहे. इस मौके पर भाजपा के पूर्व सांसद और कार्यक्रम के अध्यक्ष आर के सिन्हा [&#8230;]]]></description>
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<ul class="wp-block-list"><li><strong>अनिल मुखर्जी शताब्दी नाट्योत्सव के दूसरे दिन दुर्गा ने दिखाई अपनी देशभक्ति</strong></li><li><strong>दुर्गा भाभी ने बेहतरीन अभिनय से किया मंत्रमुग्ध </strong></li><li><strong>गुमनाम क्रांतिकारियों को प्रकाश में लाने की मुहिम में दुर्गा भाभी नाटक बना मील का पत्थर</strong></li><li><strong>इस नाटक के पचास शो करने का है लक्ष्य : आर के सिन्हा </strong></li><li></li></ul>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="500" height="333" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/durgabhabhi.gif" alt="" class="wp-image-72415"/><figcaption><strong>दुर्गा भाभी नाटक से   छाया :दीपक कुमार / नागेन्द्र कुमार सिंह </strong></figcaption></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/4be22046-e015-4d73-9846-76ad7eb22dac.jpg" alt="" class="wp-image-72411" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/4be22046-e015-4d73-9846-76ad7eb22dac.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/4be22046-e015-4d73-9846-76ad7eb22dac-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p class="has-luminous-vivid-orange-color has-text-color"><strong>भारत में. चीन में और &nbsp;त्रिनिनाद एवं टोबैगो के राजदूत चंद्रदत सिंह एवं भोजपुरी.हिंदी और अंग्रेजी फिल्मों की प्रोड्यूसर अनिता चंद्रदत सिंह के साथ भोजपुरी फिल्मों के सुपर स्टार कुणाल सिंह.पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय भी नाटक की प्रस्तुति के दौरान उपस्थित रहे</strong>.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/6add3985-9169-4efc-b7a4-2e9e81b36b86.jpg" alt="" class="wp-image-72412" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/6add3985-9169-4efc-b7a4-2e9e81b36b86.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/6add3985-9169-4efc-b7a4-2e9e81b36b86-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p class="has-black-color has-light-green-cyan-background-color has-text-color has-background"><strong> वीरांगना दुर्गा भाभी के जीवन की उन्होंने साढ़े तीन साल तक गहन पड़ताल की. अनेक तथ्य जुटाये. उनके परिजनों से सम्पर्क किया. फिर इसे लिखा और इसका निर्देशन किया-अक्षयवर नाथ श्रीवास्तव निर्देशक एवं लेखक</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="450" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/a3bd569c-2919-49cf-8af5-6a185020eea1.jpg" alt="" class="wp-image-72417" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/a3bd569c-2919-49cf-8af5-6a185020eea1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/a3bd569c-2919-49cf-8af5-6a185020eea1-350x242.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/a3bd569c-2919-49cf-8af5-6a185020eea1-130x90.jpg 130w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>अनिल मुखर्जी शताब्दी नाट्योत्सव के दूसरे दिन हुआ नाटक का मंचन वीरांगना दुर्गा भाभी के जीवन पर आधारित नाटक का मंचन किया.राजधानी के रबिन्द्र भवन में आयोजित नाट्योत्सव के दूसरे दिन राजधानी के लोगों को गुमनाम क्रांतिकारियों में से एक दुर्गा भाभी के जीवन पर आधारित नाटक की प्रस्तुति XIII स्कूल ऑफ़ टैलेंट डेवलेपमेंट गाजियाबाद की प्रस्तुति देखने को मिली. दूसरे दिन के कार्यक्रम में भारत में. चीन में और &nbsp;त्रिनिनाद एवं टोबैगो के राजदूत चंद्रदत सिंह एवं भोजपुरी.हिंदी और अंग्रेजी फिल्मों की प्रोड्यूसर अनिता चंद्रदत सिंह के साथ भोजपुरी फिल्मों के सुपर स्टार कुणाल सिंह.पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय भी नाटक की प्रस्तुति के दौरान उपस्थित रहे.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/ee05ea70-f9d6-49ec-8fe8-9c3b88e5ead3.jpg" alt="" class="wp-image-72414" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/ee05ea70-f9d6-49ec-8fe8-9c3b88e5ead3.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/ee05ea70-f9d6-49ec-8fe8-9c3b88e5ead3-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>इस मौके पर भाजपा के पूर्व सांसद और कार्यक्रम के अध्यक्ष आर के सिन्हा ने कहा कि इस नाटक को मैंने जब से देखा है तब से ही मेरे मन में था कि इस नाटक का मंचन पटना में भी हो और आज वह दिन आपके सामने है. श्री सिन्हा ने दुर्गा भाभी गुमनाम क्रांतिकारियों में से एक हैं जिन्होंने आजादी की लड़ाई में तन मन से भाग लिया.आजादी के दिनों में दुर्गा भाभी क्रांतिकारियों को अपने घर में पनाह देने के अलावे उनके खाने पीने के अलावा सभी आर्थिक जरूरतों को पूरा करती थी. पूर्व राज्यसभा सदस्य,वरिष्ठ पत्रकार एवं भाजपा के संस्थापक सदस्य रवीन्द्र किशोर सिन्हा ने कहा कि इस नाटक के देशभर में 50 से अधिक मंचन होंगे. पूर्व सांसद आर. के. सिन्हा ने बताया कि अनेकों क्रांतिकारियों समेत शहीद चंद्रशेखर आजाद को माउजर पिस्टल उपलब्ध कराने से लेकर शहीद भगत सिंह और राजगुरु को अपने तीन वर्षीय पुत्र के साथ लाहौर से निकालने का कार्य दुर्गा भाभी ने ही अंजाम तक पहुंचाया था.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/c9110a5d-9f1a-46d1-b705-777b871f794a.jpg" alt="" class="wp-image-72416" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/c9110a5d-9f1a-46d1-b705-777b871f794a.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/c9110a5d-9f1a-46d1-b705-777b871f794a-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>भारत सरकार के गुमनाम क्रांतिकारियों को प्रकाश में लाने के अभियान में ‘आजादी की दीवानी दुर्गा भाभी’ नाटक मील का पत्थर साबित हुआ है. नाटक के निर्देशक एवं लेखक अक्षयवर नाथ श्रीवास्तव ने कहा कि वीरांगना दुर्गा भाभी के जीवन की उन्होंने साढ़े तीन साल तक गहन पड़ताल की. अनेक तथ्य जुटाये. उनके परिजनों से सम्पर्क किया.फिर इसे लिखा और इसका निर्देशन किया. उन्हें गर्व है कि आजादी की यह दीवानी वीरांगना दुर्गा भाभी अपने अंतिम समय तक गाजियाबाद में भी रहीं.अभी तक इस नाटक के चार मंचन हो चुके है. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/ff23cbcd-e3d4-46b4-a63b-ca21bdf59821.jpg" alt="" class="wp-image-72418" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/ff23cbcd-e3d4-46b4-a63b-ca21bdf59821.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/ff23cbcd-e3d4-46b4-a63b-ca21bdf59821-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/b57eb96e-789d-4e4c-89cd-b181c9358eba.jpg" alt="" class="wp-image-72421" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/b57eb96e-789d-4e4c-89cd-b181c9358eba.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/b57eb96e-789d-4e4c-89cd-b181c9358eba-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/2-2.jpg" alt="" class="wp-image-72420" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/2-2.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/2-2-350x233.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>दुर्गा भाभी की भूमिका में तनुपाल ने अपने बेहतरीन अभिनय कर सभी को मन्त्र मुग्ध कर दिया.भगवती चरण की भूमिका में विनय कुमार,लॉर्ड हेली की भूमिका में श्रेयष अग्निहोत्री ऋषभ सहगल -लॉर्ड पीटर,कल्याणी मिश्रा -कृष्णा बुआ,मंजू मन- श्रीमति भातवेडकर,आभास सिंह -चंद्रशेखर आजाद ने भी अपने अभिनय से लोगों की वाहवाही लूटी. इंप्रीत सिंह- इंस्पेक्टर सूरत सिंह,प्रमोद शिशोदिया- शास्त्री जीअदित श्रीवास्वत- जतिन दास अभिषेक त्यागी- लाला लाजपत राय ,ऋतिका यादव-सुशीला दीदी,नेहा पाल- स्वदेश,शौर्य केसरवानी सब इंस्पेक्टर सुखी ,अमन- गांधी जी,गुरुमीत चावला- केवल कृष्ण और बापट,शिवम शर्मा- मुंशी,शिवम सिंघल भगत सिंह और सीआईडी इंस्पेक्टर शिवानंद,राजीव वैद- राजगुरु और बट्टू सिंह,केशव साधना- सुखदेव और यशपाल,अनिरुद्ध शर्मा,विश्वनाथ और स्कॉट नीरज शर्मा -टीटीई और पड़ोसी ,तरुण शर्मा -किशन सिंह और संपूर्ण सिंह टंडन,मनु वर्मा-बांके बिहारी लाल भट्ट और डॉक्टर केसरवानी,निशांत शर्मा सुखदेव राज और अखबार बेचने वाला, साक्षी देशवाल-छोटी दुर्गा और जमुना,जतिन शर्मा -गया प्रसाद और अर्दली,निखिल धोबी और पूड़ी बेचने वालादेव उज्जवल सिंह-हवलदार और जमुना का पति, राहुल सिंह गवाह और तांगेवाला,बिगुल गुल वादक विष्णु, आशु नागर, सौरभ आर्या, प्रिन्स, ऋतिक त्यागी,सार्थक सिरोही, मोनू कुमार, शिवम शर्मा ने अपनी अपनी भूमिका के साथ न्याय करते हुए दर्शकों का दिल जीता.</p>



<p></p>



<p>नाटक में निर्देशक का शोध और घटनाओं को एक अच्छे प्लानिंग के तहत सभी कलाकारों से उम्दा अभिनय करवाना नाटक में चार चाँद लगाता दिखता है. नाटक का सह-लेखन एवं सह-निर्देशन अदित श्रीवास्तव ने किया. नाटक का वस्त्र परिकल्पना रोजी श्रीवास्तव की थी जिन्होंने आजादी के दौर के वस्त्र सज्जा को बखूबी दिखाया है. नाटक में गीतों का इस्तेमाल भी कहानी को आगे बढ़ाने में अहम् भूमिका अदा किया कवि डॉ. चेतन आनंद ने वहीँ संगीत में उनका साथ दिया संकल्प श्रीवास्तव ने. नाटक में मंच सज्जा और प्रकाश ने महत्वपूर्ण अदा की जिसमें राघव प्रकाश एवं दिव्यांग श्रीवास्तव ने अच्छा प्रयास किया . कला निर्देशन साहेब श्रीवास्तव व प्रखर श्रीवास्तव का था. रूप सज्जा हरि सिंह खोलिया ने आन्दोलन के काल कों जीवंत बनाया, वहीँ .डॉ. माला कपूर ‘गौहर’ के विशेष सहयोग से नाटक को गति मिलती रहीं. नाटक के 35 कलाकारों के सहयोग से डेढ़ घंटे में प्रस्तुत किये गए इस नाटक में नौजवानों की संख्या सबसे ज्यादा दिखी. इस नाटक को दर्शकों को बहुत सराहा.</p>



<p class="has-black-color has-text-color"><strong>-रवीन्द्र भारती </strong></p>



<p></p>
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		<title>संजय मिश्र जैसे अभिनेता संघर्ष, लक्ष्य और कामयाबी की मिसाल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Mar 2023 04:19:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ओह डार्लिंग ये है इंडिया.. जिंदगी के सफर में बिखरने का नहीं.. संघर्ष के बीच आनंद के पल चुराएं फिर तो ऑल द बेस्ट है संजय मिश्रा अभिनीत फिल्मों का आंकड़ा 150 के पार … का बे मिश्रा.. एके जिला जबार आ सहर के हो .. तब हू नहीं लिखा बे.. साधारण से दिखने वाले और अपनी कला से आम आदमी के मन के उहापोह की जीवंत पैन इंडिया छवि गढ़ने वाले शख्सियत के इस ट्रेडमार्क डायलॉग की कोमल झिड़की के बाद कागज के पन्ने पर पेन वैसे ही फिसलने लगे ..नोट्स आकार लेने लगे.. जैसे सामने वाले के मुख से निकलते एक एक वचन.. कभी निर्झर होते तो कभी चुप्पी को चीर निकलते एक आध शब्द.. आलम गंभीर हुआ नहीं कि हल्की ठिठोली से सराबोर होते पल. मानो जीवन यात्रा की गाथा दिव्य बहाव के संग कानों में गूंजती. कभी तो इतना रम गए कि पॉइंट्स नोट करना भूल जाते. अब.. ये बॉस कोई आदि गुदी तो नहीं.. संघर्ष.. लक्ष्य और कामयाबी की मिसाल हैं. आप ही के सांस्कृतिक नगरी दरिभंगा के हैं. एक फिल्म की सूटिंग के सेट पर बिलमते हुए अनौपचारिक बातचीत का मौका दिया. कहा.. गुरु सफलता ही सब कुछ नहीं.. जीवन यात्रा में संघर्ष के साथ आनंद के पल चुराएं. नहीं तो अधूरापन सताएगा. तड़पने को मजबूर होना पड़ेगा.अब हम आपको तरसाएंगे नहीं. खुलकर बता देते हैं. इस नाचीज़ संजय मिश्र की.. मशहूर फिल्म कलाकार संजय मिश्रा से बात हो रही थी. जी हां! वही संजय मिश्रा जिनका हर किरदार इंडिया के मामूली जमीनी आदमी [&#8230;]]]></description>
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<p class="has-vivid-red-color has-text-color"><strong>ओह डार्लिंग ये है इंडिया.. जिंदगी के सफर में बिखरने का नहीं.. संघर्ष के बीच आनंद के पल चुराएं फिर तो ऑल द बेस्ट है</strong></p>



<p class="has-vivid-purple-color has-text-color"><strong>संजय मिश्रा अभिनीत फिल्मों का आंकड़ा 150 के पार</strong></p>



<p class="has-vivid-cyan-blue-color has-text-color">… का बे मिश्रा.. एके जिला जबार आ सहर के हो .. तब हू नहीं लिखा बे..</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="473" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/b036f776-0c29-11ec-9f5a-6ec3df6f49ec_1630771833453.jpg" alt="" class="wp-image-72327" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/b036f776-0c29-11ec-9f5a-6ec3df6f49ec_1630771833453.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/b036f776-0c29-11ec-9f5a-6ec3df6f49ec_1630771833453-350x255.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>साधारण से दिखने वाले और अपनी कला से आम आदमी के मन के उहापोह की जीवंत पैन इंडिया छवि गढ़ने वाले शख्सियत के इस ट्रेडमार्क डायलॉग की कोमल झिड़की के बाद कागज के पन्ने पर पेन वैसे ही फिसलने लगे ..नोट्स आकार लेने लगे.. जैसे सामने वाले के मुख से निकलते एक एक वचन.. कभी निर्झर होते तो कभी चुप्पी को चीर निकलते एक आध शब्द.. आलम गंभीर हुआ नहीं कि हल्की ठिठोली से सराबोर होते पल. मानो जीवन यात्रा की गाथा दिव्य बहाव के संग कानों में गूंजती. कभी तो इतना रम गए कि पॉइंट्स नोट करना भूल जाते.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="531" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/1317118801493511.jpg" alt="" class="wp-image-72328" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/1317118801493511.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/1317118801493511-350x286.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>अब.. ये बॉस कोई आदि गुदी तो नहीं.. संघर्ष.. लक्ष्य और कामयाबी की मिसाल हैं. आप ही के सांस्कृतिक नगरी दरिभंगा के हैं. एक फिल्म की सूटिंग के सेट पर बिलमते हुए अनौपचारिक बातचीत का मौका दिया. कहा.. गुरु सफलता ही सब कुछ नहीं.. जीवन यात्रा में संघर्ष के साथ आनंद के पल चुराएं. नहीं तो अधूरापन सताएगा. तड़पने को मजबूर होना पड़ेगा.अब हम आपको तरसाएंगे नहीं. खुलकर बता देते हैं. इस नाचीज़ संजय मिश्र की.. मशहूर फिल्म कलाकार संजय मिश्रा से बात हो रही थी.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/download-1.jpg" alt="" class="wp-image-72329" width="417" height="417"/></figure>



<p>जी हां! वही संजय मिश्रा जिनका हर किरदार इंडिया के मामूली जमीनी आदमी के समस्त मनोभाव को अभिव्यक्त करता. सतही का लेस नहीं.. फूहड़पन नहीं.. हां मनोरंजन के पुट का साथ. समझ आने वाले लब्ज़. ऐसा लगता उसकी जिंदगी आपके सामने जीवंत हो चल रही है. ऐसा लगेगा चरित्र के मन के उथल पुथल को संजय मिश्रा ने अनुभूत हो अंगीकार किया है और अभिव्यक्त कर उड़ेल दिया है. निःसृत होता चला जा रहा है.आपकी तंद्रा तब टूटती जब पात्र गहरे संकट में आता. आम इंसान मुसीबतें झेलते कभी टूट जाता है. यकीन करेंगे.. अदना से व्यक्ति की तरह उसकी आवाज बनने वाले संजय मिश्रा के जीवन में ऐसा मोड़ आया जब हालातों से तंग आकर वे एक ढाबे पर काम करने लगे थे.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/sanjay-mishra.jpg" alt="" class="wp-image-72330" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/sanjay-mishra.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/sanjay-mishra-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>अचानक सेट पर हलचल सी हुई. अभिनेता संजय मिश्रा ने उस ओर देखा कुछ इशारा किया और फिर सामान्य हो बात करने लगे. ढाबे वाली बात कुरेदने पर वो यादों में खो गए. कुछ पलों बाद कहा हां ये कड़वी हकीकत है..तब तक हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में मेरी धमक सुनाई दे चुकी थी. साल 1991 में एनएसडी में दाखिला लिया. उसके बाद एक्टिंग की शुरुआत धारावाहिकों से की. फिल्मों में छोटे छोटे रोल मिलने लगे. कुछ समय बाद अमिताभ बच्चन के साथ एक विज्ञापन में भी काम किया. यह पहला अवसर था जब किसी बड़े एक्टर के साथ पर्दे पर अभिनय किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="640" height="480" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/2017_10image_19_13_3621400001006930-sanjaymishraco.jpg" alt="" class="wp-image-72331" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/2017_10image_19_13_3621400001006930-sanjaymishraco.jpg 640w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/2017_10image_19_13_3621400001006930-sanjaymishraco-350x263.jpg 350w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /></figure>



<p>बकौल संजय मिश्रा उनकी पहली फिल्&#x200d;म ‘ओह डार्लिंग ये है इंडिया’ रही, जिसमें उन्&#x200d;होंने हारमोनियम बजाने वाले की छोटी सी भूमिका अदा की. इसके बाद संजय ने ‘सत्&#x200d;या’ और ‘दिल से’ जैसी फिल्&#x200d;मों में काम किया. कई फिल्मों में काम करने के बाद भी उन्हें वह मुकाम हासिल नहीं हो रहा था जिसकी चाहत थी.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/images-1.jpg" alt="" class="wp-image-72332" width="559" height="372"/></figure>



<p>संजय मिश्रा को अपने पिता से बहुत लगाव था. लेकिन जब उनके पिता का देहांत हुआ तो वे भीतर से टूट गए और उन्होंने फिल्मों में काम करना छोड़ दिया. फिल्मों की दुनिया छोड़ वे ऋषिकेश चले गए और वहां एक ढाबे में काम करना शुरू कर दिया. संजय मिश्रा वहां सब्जियां काटते, खाना बनाते और लोगों को खिलाते. उनका समय धीरे-धीरे सामान्य होने लगा और वे फिल्मों से काफी दूर हो चुके थे. जिंदगी से निराश. दरअसल संजय मिश्रा ने निश्चय कर लिया था कि बाकि जिंदगी उसी ढाबे पर बिता देंगे.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="506" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/sanjay.png" alt="" class="wp-image-72333" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/sanjay.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/sanjay-350x272.png 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. संयोग से जाने माने निर्देशक रोहित शेट्टी एक दिन अचानक उस ढाबे पर जा पहुंचे. संजय ने रोहित शेट्टी की फिल्म ‘गोलमाल’ में काम किया था और इसलिए उन्होंने संजय मिश्रा को पहचान लिया. उस समय रोहित शेट्टी ‘आल द बेस्ट’ फिल्म पर काम कर रहे थे. रोहित ने संजय को अपनी फिल्म में काम करने के लिए मना लिया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/IMG_1325.jpg" alt="" class="wp-image-72334" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/IMG_1325.jpg 400w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/IMG_1325-233x350.jpg 233w" sizes="(max-width: 400px) 100vw, 400px" /></figure>



<p>फिल्म हिट हुई और संजय मिश्रा की एक्टिंग की तारीफ हुई. फिर तो सफल फिल्मों का सिलसिला शुरू हो गया. वे फिल्म इंडस्ट्री की शान बन गए. संजय मिश्रा अभिनीत फिल्मों का आंकड़ा 150 के पार जा चुका है. संजय मिश्रा ने साल 2006 में लगातार एक के बाद एक कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया. जिनमें गोलमाल: फन अनलिमिटेड और धमाल जैसे नाम शामिल है. इसके साथ ही एक्टर ने साल 2015 में हिट फिल्म ‘प्रेम रतन धन पायो’ में काम किया. इसके बाद उन्होंने ‘बादशाहों’ और ‘गोलमाल अगेन’ में काम किया. संजय मिश्रा को ‘आँखों-देखी’ फिल्म के लिए फिल्मफेयर का बेस्ट एक्टर अवार्ड भी मिल चुका है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="414" height="232" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/sanjaymishra.png" alt="" class="wp-image-72335" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/sanjaymishra.png 414w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/sanjaymishra-350x196.png 350w" sizes="(max-width: 414px) 100vw, 414px" /></figure>



<p>फिल्म इंडस्ट्री के चुनिंदा एक्टर्स में वे शुमार हैं जिन्होंने अपने अभिनय के दम पर अपनी अलग पहचान कायम की है. संजय मिश्रा जब किसी किरदार को पर्दे पर निभाते हैं तो लोगों को इस बात को सोचने में वक्त लग जाता है कि वे उस किरदार को निभा रहे हैं या फिर उस किरदार में सजीव हो जी रहे हैं. उनकी एक्टिंग में ऐसा आकर्षण है कि जो भी उन्हें एक बार पर्दे पर देख लेता है, उनकी एक्टिंग का दीवाना हो जाता है. खूबसूरत चेहरे को अहमियत देने वाली इंडस्टी में संजय मिश्रा ने जो मुकाम हासिल किया है और जो छाप छोड़ी है वह पाना काफी लोगों का सपना होता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="388" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/Sanjay-Mishra-Net-Worth.jpeg" alt="" class="wp-image-72336" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/Sanjay-Mishra-Net-Worth.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/Sanjay-Mishra-Net-Worth-350x209.jpeg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>सहज और निर्बोध व्यवहार वाले इस अदाकार से विदा लेने का समय हो रहा था. सेट फाइनल कर चुके कई अनजान लोगों की आंखें हमारी तरफ निहार रही थीं. एक सीधे.. सरल इनसान के कहे आवाज की कानों में अनुगुंज और आंखों में बीते पल के दृश्यों को मुश्किल से समेटते हम निकल आए. ये सोचते कि संजय मिश्रा फिर किसी किरदार के उद्वेग को जेहन में उतार चुके होंगे.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/Sikandar-Official-Song-Har-Kisse-Ke-Hisse-Kaamyaab-Sanjay-Mishra.jpg" alt="" class="wp-image-72337" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/03/Sikandar-Official-Song-Har-Kisse-Ke-Hisse-Kaamyaab-Sanjay-Mishra.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/03/Sikandar-Official-Song-Har-Kisse-Ke-Hisse-Kaamyaab-Sanjay-Mishra-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>आपको बता दें कि संजय मिश्रा का जन्म 6 अक्टूबर 1963 को बिहार के दरभंगा में हुआ था. उनकी पढ़ाई वाराणसी के बीएचयू कैम्पस स्थित केंद्रीय विद्यालय से हुई. उनके पिता का नाम शम्भुनाथ मिश्रा है. पेशे से वे पत्रकार थे. संजय मिश्रा की पत्नी का नाम किरण मिश्रा है. संजय और किरण की शादी 28 सितम्बर 2009 को हुई थी. इस कपल के दो बेटियां हैं जिनके नाम पल मिश्रा और लम्हा मिश्रा हैं. अक्सर ही संजय मिश्रा अपने बच्चों के बारे में बात करते नजर आते हैं. संजय मिश्रा की उम्र महज 9 साल थी जब उनका परिवार रहने के लिए दरभंगा से वाराणसी शिफ्ट हो गया.</p>



<p><strong>संजय मिश्र,शूटिंग के सेट से</strong></p>
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		<title>क्या आप कर सकते हैं बॉडी ऐक्ट !</title>
		<link>https://www.patnanow.com/kya-aap-kar-sakte-hain-body-act/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Jul 2021 16:13:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नाट्य कार्यशाला : 4th Day यूज ऑफ प्रॉप्स के साथ किया बॉडी एक्ट आरा, 20 जुलाई. अभिनय एवं ऐक्ट द्वारा आयोजित 20 दिवसीय नाट्य कार्यशाला के चौथे दिन बच्चों ने वरिष्ठ रंगकर्मी व नाट्य गुरु चन्द्रभूषण पांडेय से तालीम लिया. रमना मैदान के दक्षिणी रोड में स्थित मंगलम दी वेन्यू में बच्चों को कार्यशाला में प्रशिक्षक चंद्रभूषण पांडेय ने बॉडी ऐक्ट की बारीकियों को बताया. उन्होंने बच्चों को बड़ी सहजता के साथ बतलाया कि वे भी उनसे सीखने आये हैं. ये सहजता बच्चों में आत्मबल को बढ़ाने और उनकी झिझकता को दूर करने के लिए उन्होंने अपनायी. उन्होंने बताया कि फेस एक्सप्रेशन से पहले बॉडी के एक्सप्रेशन की जरूरत होती है और इसके लिए पूरे बॉडी पर एक्टर का कमांड रहना बेहद जरूरी है. उन्होंने कई शारीरिक चाल को प्रैक्टिकल के रूप में कर के दिखाया और फिर यूज ऑफ प्रॉप्स के बारे में बताया. उन्होंने इसके साथ ही तुरन्त 8 तरह के प्रॉप्स का उपयोग करने को बच्चों को दे दिया. सभी ने प्रॉप्स का उपयोग तरह-तरह से अपनी कल्पना के चरित्रों के साथ उसे फिट कर दिखाया. चंद्रभूषण पांडेय: चंद्रभूषण पांडेय जिले के ऐसे चर्चित रंगकर्मी हैं जिन्होंने इस शहर को कई अच्छे अभिनेता और निर्देशक दिए हैं. स्कूल के जमाने मे वे राष्ट्रीय हॉकी प्लेयर भी रह चुके हैं. 4 दर्जन से उपर नाट्य कार्यशालाओं में जहाँ वे हजारों बच्चों को प्रशिक्षण दे चुके हैं वही रश्मि-रथी जैसे काव्य के नाट्य रूपांतरण के लिए भी देश मे प्रचलित हैं. वे बेहद सादे और सहज व्यक्तित्व के धनी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नाट्य कार्यशाला : 4th Day</strong><br> <strong>यूज ऑफ प्रॉप्स के साथ किया बॉडी एक्ट </strong></p>



<p>आरा, 20 जुलाई. अभिनय एवं ऐक्ट द्वारा आयोजित 20 दिवसीय नाट्य कार्यशाला के चौथे दिन बच्चों ने वरिष्ठ रंगकर्मी व नाट्य गुरु चन्द्रभूषण पांडेय से तालीम लिया. रमना मैदान के दक्षिणी रोड में स्थित मंगलम दी वेन्यू में बच्चों को कार्यशाला में प्रशिक्षक चंद्रभूषण पांडेय ने बॉडी ऐक्ट की बारीकियों को बताया. </p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_theatre-workshop-4th-Day-.jpg" alt="" class="wp-image-54369" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_theatre-workshop-4th-Day-.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_theatre-workshop-4th-Day--350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption>बच्चो से बातें करते रँगगुरु चंद्रभूषण पाण्डेय</figcaption></figure>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/IMG-20210721-WA0040.jpg" alt="" class="wp-image-54368" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/IMG-20210721-WA0040.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/IMG-20210721-WA0040-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>उन्होंने बच्चों को बड़ी सहजता के साथ बतलाया कि वे भी उनसे सीखने आये हैं. ये सहजता बच्चों में आत्मबल को बढ़ाने और उनकी झिझकता को दूर करने के लिए उन्होंने अपनायी. उन्होंने बताया कि फेस एक्सप्रेशन से पहले बॉडी के एक्सप्रेशन की जरूरत होती है और इसके लिए पूरे बॉडी पर एक्टर का कमांड रहना बेहद जरूरी है. उन्होंने कई शारीरिक चाल को प्रैक्टिकल के रूप में कर के दिखाया और फिर यूज ऑफ प्रॉप्स के बारे में बताया. उन्होंने इसके साथ ही तुरन्त 8 तरह के प्रॉप्स का उपयोग करने को बच्चों को दे दिया. सभी ने प्रॉप्स का उपयोग तरह-तरह से अपनी कल्पना के चरित्रों के साथ उसे फिट कर दिखाया.</p>



<p class="has-luminous-vivid-amber-background-color has-background">चं<strong>द्रभूषण पांडेय:</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_CB-Pandey.jpg" alt="" class="wp-image-54365" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_CB-Pandey.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_CB-Pandey-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption>नाट्य गुरु चंद्रभूषण पांडेय</figcaption></figure>



<p class="has-luminous-vivid-amber-background-color has-background"><br><em><strong>चंद्रभूषण पांडेय जिले के ऐसे चर्चित रंगकर्मी हैं जिन्होंने इस शहर को कई अच्छे अभिनेता और निर्देशक दिए हैं. स्कूल के जमाने मे वे राष्ट्रीय हॉकी प्लेयर भी रह चुके हैं. 4 दर्जन से उपर नाट्य कार्यशालाओं में जहाँ वे हजारों बच्चों को प्रशिक्षण दे चुके हैं वही रश्मि-रथी जैसे काव्य के नाट्य रूपांतरण के लिए भी देश मे प्रचलित हैं. वे बेहद सादे और सहज व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति हैं. उनका मानना है कि थियेटर एक गेम है और इसे अपनी रचनात्मकता से बेहद सुंदर बना दर्शकों को घन्टो बांधा जा सकता है. बेहद प्रैक्टिकल जीवन जीने वाले चंद्रभूषण पांडेय भोजपुर के फरहदा के रहने वाले है और वर्तमान में आरा में रहते हैं. रविन्द्र भारती, सत्यकाम आनन्द, विष्णु शंकर बेलू,विष्णु प्रसाद,धमेंद्र ठाकुर,आलोक सिंह, शैलेन्द्र सच्चु, और ओ पी पांडेय जैसे कई रंगकर्मी और निर्देशक को इन्होंने प्रशिक्षित किया है.</strong></em><strong><em>वे एक अच्छे लेखक,निर्देशक और परिकल्पक के साथ असाधारण व्यक्तित्व के साधारण ढांचे में रहने वाले व्यक्ति हैं. वे कई वर्षों से आखर के वरीय सदस्य के साथ भोजपुरी कवि भी हैं जिनकी कई रचनाओं को आखर मैगजीन ने जगह भी दी है.</em></strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_theatre-workshop-4th-Day-1.jpg" alt="" class="wp-image-54367" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_theatre-workshop-4th-Day-1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/PNC_theatre-workshop-4th-Day-1-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/IMG-20210721-WA0037.jpg" alt="" class="wp-image-54366" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/IMG-20210721-WA0037.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/IMG-20210721-WA0037-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>आज कार्यशाला में अतिथि कलाकारों में चित्रकार रौशन राय, कमलेश कुंदन और कौशलेश कुमार ने बच्चों के बीच शिरकत किया और उन्हे उनके तत्क्षण तैयार सिचुएशन पर प्रॉप्स के साथ अभिनय के लिए सराहा. साथ ही उनकी गलतियों को भी उनके समक्ष रखा ताकि उसमें सुधार आये और हीरे की चमक की तरह वे चमक जिले का नाम रौशन करे. कार्यशाला के संयोजक ओ पी पांडेय हैं तथा मैनेजमेंट मनोज श्रीवास्तव देख रहे हैं.</p>



<p>आरा से <strong>सत्य प्रकाश सिंह</strong> की रिपोर्ट</p>
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		<title>हिन्दी रंगमंच में अभिनेता स्थायी नहीं -परवेज अख्तर</title>
		<link>https://www.patnanow.com/parvez-akhtar/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 17 Jul 2021 05:57:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[दुर्भाग्यवश हिन्दी रंगमंच में अभिनेता स्थायी नहीं है, जबकि यह उसी का माध्यम है चन्द रंगकर्मी ही औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर पाते हैं कितने प्रतिशत कलाकार संस्थानों से प्रशिक्षित होते हैं, 5% या उससे भी कम किसी व्यक्ति द्वारा कला-सृजन, उस व्यक्ति के रचनात्मक रुझान और उसकी नैसर्गिक* कला-प्रतिभा पर निर्भर करता है। कलात्मकता का प्रशिक्षण कदाचित सम्भव नहीं है। रंगमंच में प्रशिक्षण दरअसल शिल्प का ही होता है। फिर भी रंगमंच के क्षेत्र में सक्रिय कितने प्रतिशत कलाकार संस्थानों से प्रशिक्षित होते हैं, 5% या उससे भी कम। लेकिन प्रशिक्षण केन्द्र कुछ इस तरह का माहौल या हाइप बनाते हैं, गोया औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त नाट्यकर्मी ही रंगमंच के वास्तविक नायक हैं। जबकि वस्तुस्थिति यह है कि बहुत बड़ी संख्या में अप्रशिक्षित या अनौपचारिक रूप से प्रशिक्षित कलाकर्मी रचनात्मक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान करते और अति-महत्वपूर्ण रचते हुए दिखते हैं और कला-जगत उनका उच्च-मूल्यांकन भी करता है। हालाँकि सभी कलाओं में शिल्प-के-प्रशिक्षण का अत्यधिक महत्व है; इसका विकल्प नहीं है लेकिन कितने हैं, जिन्हें औपचारिक प्रशिक्षण का अवसर मिल पाता है ? वैसे देखें, तो आप पाएँगे कि अप्रशिक्षित कोई होता नहीं। चन्द रंगकर्मी ही औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर पाते हैं; जबकि अधिकांश हिन्दी-नाट्यकर्मी, नाट्य-दल में अपनी सक्रियता के क्रम में अनौपचारिक रूप से प्रशिक्षित होते रहते हैं।कला प्रशिक्षण केन्द्र, वास्तव में &#8216;शिल्प&#8217; या &#8216;क्राफ़्ट&#8217; तथा &#8216;तकनीक&#8217; का प्रशिक्षण देते हैं, कला अथवा कलात्मकता का नहीं। रंगमंच कला में, अंतर्शिल्पीय दक्षता की आवश्यकता होती है। नाट्य-शिल्प के अन्तर्गत स्टेज-क्राफ़्ट, लाइटिंग, म्यूजिक, मेक-अप, कास्ट्यूम, सीनिक-डिजाईन आदि-इत्यादि रंगमंच-कला के मुख्य-सर्जक अभिनेता और [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><em><strong>दुर्भाग्यवश हिन्दी रंगमंच में अभिनेता स्थायी नहीं है, जबकि यह उसी का माध्यम है</strong></em></p>



<p><strong>चन्द रंगकर्मी ही औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर पाते हैं</strong></p>



<p><strong>कितने प्रतिशत कलाकार संस्थानों से प्रशिक्षित होते हैं, 5% या उससे भी कम</strong></p>



<p>किसी व्यक्ति द्वारा कला-सृजन, उस व्यक्ति के रचनात्मक रुझान और उसकी नैसर्गिक* कला-प्रतिभा पर निर्भर करता है। कलात्मकता का प्रशिक्षण कदाचित सम्भव नहीं है। रंगमंच में प्रशिक्षण दरअसल शिल्प का ही होता है। फिर भी रंगमंच के क्षेत्र में सक्रिय कितने प्रतिशत कलाकार संस्थानों से प्रशिक्षित होते हैं, 5% या उससे भी कम। लेकिन प्रशिक्षण केन्द्र कुछ इस तरह का माहौल या हाइप  बनाते हैं, गोया औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त नाट्यकर्मी ही रंगमंच के वास्तविक नायक हैं। जबकि वस्तुस्थिति यह है कि बहुत बड़ी संख्या में अप्रशिक्षित या अनौपचारिक रूप से प्रशिक्षित कलाकर्मी रचनात्मक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान करते और अति-महत्वपूर्ण रचते हुए दिखते हैं और कला-जगत उनका उच्च-मूल्यांकन भी करता है। हालाँकि सभी कलाओं में शिल्प-के-प्रशिक्षण का अत्यधिक महत्व है; इसका विकल्प नहीं है लेकिन कितने हैं, जिन्हें औपचारिक प्रशिक्षण का अवसर मिल पाता है ?</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/90692943_1068117303564768_2086601734959923200_n.jpg" alt="" class="wp-image-54288" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/90692943_1068117303564768_2086601734959923200_n.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/90692943_1068117303564768_2086601734959923200_n-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p> वैसे देखें, तो आप पाएँगे कि अप्रशिक्षित कोई होता नहीं। चन्द रंगकर्मी ही औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर पाते हैं; जबकि अधिकांश हिन्दी-नाट्यकर्मी, नाट्य-दल में अपनी सक्रियता के क्रम में अनौपचारिक रूप से प्रशिक्षित होते रहते हैं।कला प्रशिक्षण केन्द्र, वास्तव में &#8216;शिल्प&#8217; या &#8216;क्राफ़्ट&#8217; तथा &#8216;तकनीक&#8217; का प्रशिक्षण देते हैं, कला अथवा कलात्मकता का नहीं। रंगमंच कला में, अंतर्शिल्पीय दक्षता की आवश्यकता होती है। <strong>नाट्य-शिल्प के अन्तर्गत स्टेज-क्राफ़्ट, लाइटिंग, म्यूजिक, मेक-अप, कास्ट्यूम, सीनिक-डिजाईन आदि-इत्यादि रंगमंच-कला के मुख्य-सर्जक अभिनेता और उसकी कला को उत्प्रेरित करते हैं, उसे सजाते-सँवारते हैं। रंगमंच कला सृजन में चूँकि शिल्प और तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिये प्रशिक्षण का अत्यधिक महत्त्व है</strong>। अप्रशिक्षित नाट्यकर्मी &#8216;ट्रायल एंड एरर&#8217; के ज़रिये शिल्प का ज्ञान प्राप्त करता है, जिसमें समय का अपव्यय होता है। जबकि प्रशिक्षण के दौरान इस समझ को विकसित करने में समय की बचत होती है और शिल्प में दक्षता तथा पेशेवर तकनीक जानने का अवसर नाट्यकर्मी को मिलता है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="496" height="618" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/pnc_mask.jpg" alt="" class="wp-image-54289" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/pnc_mask.jpg 496w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/pnc_mask-281x350.jpg 281w" sizes="(max-width: 496px) 100vw, 496px" /></figure>



<p><strong>रंगमंच में शिल्प-तकनीक-डिजाईन के प्रशिक्षण के साथ, जो कुछ महत्वपूर्ण कार्य प्रशिक्षण केन्द्र द्वारा किये जाने होते हैं – वे हैं, उचित परिप्रेक्ष्य में रंगमंच-कला के मूल्यांकन करने की क्षमता विकसित करना और इस समझ को विकसित करना, जो ‘कथ्य’ और ‘शिल्प’ के संतुलन के बुनियादी उसूल से प्रशिक्षुओं को परिचित कराये।आशु-रचना (improvisation) की कला, रंगमंच का सबसे विशिष्ट कौशल है। प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न छवि, ध्वनि, विचार, भावना (emotion, sentiment), शब्द और अन्य सभी दृश्य-श्रव्य अवयवों के रंगमंचीय उपयोग के प्रसंग में आशु-रचना के अभ्यास करवाये जाते हैं</strong>। इसी क्रम में यह भी बताया जाता है कि परिस्थिति के अनुसार किस प्रकार अपनी नाट्य-रचना को संयोजित किया जाए।सांकेतिकता, प्रतीकात्मकता और कल्पनाशीलता नाट्य-कला की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है। यह, वह विशिष्टता है, जो नाट्य-सृजन को काव्यात्मक ऊँचाई देती है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/pnc_parvez_akhtar.jpg" alt="" class="wp-image-54290" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/07/pnc_parvez_akhtar.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2021/07/pnc_parvez_akhtar-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption><strong><em>वरिष्ठ निर्देशक परवेजअख्तर</em></strong></figcaption></figure>



<p>यह स्पष्ट है कि नाट्य-प्रशिक्षण संस्थान; शिल्प कौशल, डिजाईन और तकनीक के प्रशिक्षण के साथ; नाट्य-कला की विशिष्टताओं से प्रशिक्षुओं को परिचित कराते हैं। उनका यह दायित्व भी है कि भावी नाट्य नेतृत्व अपने क्षेत्र के दर्शकों के रंगमंच की ज़रूरत का अनुमान लगाने और अपने दर्शकों की आशाओं-आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति, उनकी नाट्य-भाषा में करने में सक्षम हों।लेकिन स्थिति ऐसी है नहीं। दुर्भाग्यवश हिन्दी रंगमंच में अभिनेता स्थायी नहीं है, जबकि यह उसी का माध्यम है। हाँ, निर्देशक का वर्चस्व हिन्दी रंगमंच में बढ़ता गया है। इसलिए <strong>रंगमंच की त्रयी &#8211; नाटककार, दर्शक और अभिनेता के दबाव से मुक्त निर्देशक, ‘शिल्प’ और ‘तकनीक’ के अतिरेक या आतंक के माध्यम से अपनी सत्ता की स्थापना की दिशा में प्रयासरत दिखता है।</strong> यह रंगमंच और दर्शकों दोनों के हित में नहीं है।इस विरोधाभास की तुलना फ़िल्म की उस विडम्बना से की जा सकती है, जिसमें वर्चस्व &#8216;स्टार-एक्टर&#8217; का है और निर्देशक को, फ़िल्म जिसका माध्यम है, वैसा महत्त्व नहीं मिलता। उसी तरह; अभिनेता-का-माध्यम रंगमंच, निर्देशक के नाम से जाना जाने लगा है।</p>



<p>*(यहाँ &#8216;नैसर्गिक&#8217; से मेरा तात्पर्य प्रकृति द्वारा प्रदत्त उन क्षमताओं से है, जो हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकती हैं, बल्कि होती हैं। अभ्यास से मेरे जैसा बेसुरा-व्यक्ति, कोरस गायक तो शायद बन जाए; किन्तु स्वतन्त्र गायक; एक ऐसा गायक जो संगीत-कला में योगदान देने में सक्षम हो, नहीं बन सकता।) </p>



<p><strong> वरिष्ठ निर्देशक परवेज अख्तर के  FB वाल से साभार </strong></p>
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