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	<title>abhay sinha &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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	<title>abhay sinha &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>प्रांगण पटना की प्रस्तुति फूल नौटंकी विलास का मंचन</title>
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		<pubDate>Sat, 23 Dec 2023 03:09:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इजेडसीसी,कोलकाता द्वारा इंद्रधनुष कार्यक्रम के दूसरे दिन कई कार्यक्रम आयोजित बिहार की लोक कथाओं तथा किवदंतियों पर आधारित यह लोक नाटक नौटंकी शैली का नाटक है. कथा सूत्र एवम् प्रसंग नट तथा नटी संवहन करते हैं. फूल सिंह निम्न जाति का पेशेवर योद्धा हैं. उसकी दो भाभियाँ उसी के साथ रहती हैं. दो बड़े भाई भी पेशेवर योद्धा है. नट और नटी से प्रेम नगर की राजकुमारी नौटंकी की प्रसंशा सुनकर वह नौटंकी को देखने को व्याकुल हो जाता है. नौटंकी राजा हरिसिंह की इकलौती संतान है. राजा बहुत कूर प्रकृति का हैं. वह अपनी प्रजा पर तरह-तरह के जुल्म करता हैं. स्वयंवर के बहाने वह युवकों को तरह-तरह से सजा देती है. जब उसकी सवारी निकलती है, तो राजमार्ग के दोनों ओर ब्याह के इच्छुक युवकों की कतार लग जाती है. परन्तु सबकी नजरें नीचे झुकी हुई. राजकुमारी को आँख उठाकर देखना मृत्यु को बुलाना है. राजकुमारी अपने रथ पर रखी विभिन्न वस्तुओं को फेंक &#8211; फेंक कर युवकों को उपहार देती है. परन्तु यह भी राजकुमारी की एक चाल है. अक्सर उपहार के रूप में ईट-पत्थरों के टुकड़े होते हैं. अगर कोई युवक उनसे बचने की कोशिश करता, तो नौटंकी समझ जाती है कि वह युवक चोरी चुपके उसे देख रहा है और उसी रथ से कुचल कर उसे मृत्युदंड दिया जाता है. फूल सिंह चोरी चुपके नौटंकी को देख लेता है. परन्तु पत्थर की मार से परहेज नहीं करता. वह लहुलुहान हो जाता है. नौटंकी की सुंदरता पर वह फिदा हो जाता है. फूल सिंह उग्र स्वभाव [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>इजेडसीसी,कोलकाता द्वारा इंद्रधनुष कार्यक्रम के दूसरे दिन कई कार्यक्रम आयोजित</strong></p>



<p>बिहार की लोक कथाओं तथा किवदंतियों पर आधारित यह लोक नाटक नौटंकी शैली का नाटक है. कथा सूत्र एवम् प्रसंग नट तथा नटी संवहन करते हैं. फूल सिंह निम्न जाति का पेशेवर योद्धा हैं. उसकी दो भाभियाँ उसी के साथ रहती हैं. दो बड़े भाई भी पेशेवर योद्धा है. नट और नटी से प्रेम नगर की राजकुमारी नौटंकी की प्रसंशा सुनकर वह नौटंकी को देखने को व्याकुल हो जाता है. नौटंकी राजा हरिसिंह की इकलौती संतान है. राजा बहुत कूर प्रकृति का हैं. वह अपनी प्रजा पर तरह-तरह के जुल्म करता हैं. स्वयंवर के बहाने वह युवकों को तरह-तरह से सजा देती है. जब उसकी सवारी निकलती है, तो राजमार्ग के दोनों ओर ब्याह के इच्छुक युवकों की कतार लग जाती है. परन्तु सबकी नजरें नीचे झुकी हुई. राजकुमारी को आँख उठाकर देखना मृत्यु को बुलाना है. राजकुमारी अपने रथ पर रखी विभिन्न वस्तुओं को फेंक &#8211; फेंक कर युवकों को उपहार देती है. परन्तु यह भी राजकुमारी की एक चाल है. अक्सर उपहार के रूप में ईट-पत्थरों के टुकड़े होते हैं. अगर कोई युवक उनसे बचने की कोशिश करता, तो नौटंकी समझ जाती है कि वह युवक चोरी चुपके उसे देख रहा है और उसी रथ से कुचल कर उसे मृत्युदंड दिया जाता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="476" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/35afb2ab-cc14-460a-bb62-62e1b224bc2b-650x476.jpeg" alt="" class="wp-image-81080" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/35afb2ab-cc14-460a-bb62-62e1b224bc2b-650x476.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/35afb2ab-cc14-460a-bb62-62e1b224bc2b-350x256.jpeg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/35afb2ab-cc14-460a-bb62-62e1b224bc2b-768x562.jpeg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/35afb2ab-cc14-460a-bb62-62e1b224bc2b.jpeg 799w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>फूल सिंह चोरी चुपके नौटंकी को देख लेता है. परन्तु पत्थर की मार से परहेज नहीं करता. वह लहुलुहान हो जाता है. नौटंकी की सुंदरता पर वह फिदा हो जाता है. फूल सिंह उग्र स्वभाव का है. वह अक्सर अपनी खामियों पर रौब गांठा करता है. एक बार चिढ़कर उसकी भाभियों ने उसे ताना मारा &#8211; &#8220;अगर इतना ही वीर हो, तो नौटंकी से ब्याह करके दिखाओं.&#8221; यह बात फूल सिंह को लग जाती है. वह घर छोड़कर प्रेम नगर की राह पकड़ता है. राजमहल की बूढ़ी मालिन को प्रभावित करके वह राजकुमारी के लिए सुंदर माला बनाता है. जब राजकुमारी माला देखती है तो चकित रह जाती है. पूछने पर मालिन बताती है कि यह माला उसकी भतीजी ने बनायी है. नौटंकी भतीजी से मिलने की मंशा जाहिर करती है. मालिन फूल सिंह को सारी बात बताती है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="415" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/11b0f3e6-3477-44df-9b1b-daa466f117c7-650x415.jpeg" alt="" class="wp-image-81082" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/11b0f3e6-3477-44df-9b1b-daa466f117c7-650x415.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/11b0f3e6-3477-44df-9b1b-daa466f117c7-350x224.jpeg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/11b0f3e6-3477-44df-9b1b-daa466f117c7-768x491.jpeg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/11b0f3e6-3477-44df-9b1b-daa466f117c7.jpeg 870w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>&nbsp;फूल सिंह स्त्री वेश में नौटंकी के शयन कक्ष में पहुँचता है. उसकी कदकाठी सुंदरता और मर्दानी आवाज पर नौटंकी मोहित हो जाती है. वह फूल सिंह को अपनी खास, सखी बना लेती है. रात बीतने पर नौटंकी इच्छा जाहिर करती है कि यदि फूल सिंह पुरूष होता, तो तुरंत शादी कर लेती. फूल सिंह अपने आपको पुरूष के रूप में पेश कर देता है. पहले तो नौटंकी नाराज होती है. परन्तु बाद में उसके प्रेमपाश में फँस जाती है. दोनों का प्रेम परवान चढ़ने लगता है. तभी हरिसिंह को इसकी भनक पड़ जाती है . वह फूल सिंह को कैद कर लेता है. उसे मृत्युदंड की सजा दी जाती है. नौटंकी वधशाला में पहुंचती है. हरिसिंह से विद्रोह कर देती है. वह फूल सिंह के साथ ही मरना चाहती है. पिता हरिसिंह अंत में झुक जाता है. फूल सिंह और नौटंकी की शादी हो जाती है.</p>



<p>&nbsp;पात्र परिचय&nbsp; (मंच पर )</p>



<p>&nbsp;नट-सैंटी कुमार,नटी-अर्पिता घोष,फूल सिंह &#8211; संजय सिंह, नौटंकी- शांति प्रिया,मोहिनी भाभी- सोमा चक्रवर्ती ,तारा भाभी &#8211; प्रीति कुमारी,चंपा मालन &#8211; सुरभि सिंह,महाराज &#8211; अमिताभ रंजन,सिपाही १ &#8211; अतिश कुमार,सिपाही २ &#8211; संजय कुमार,गोरखनाथ &#8211; आशुतोष कुमार,गरबरिया &#8211; ओमप्रकाश</p>



<p><strong> संगीत पक्ष :-</strong></p>



<p>&nbsp;रामकृष्ण सिंह (हारमोनियम वादक व मुख्य गायक), विकास कुमार ( ढोलक वादक ),मिथलेश कुमार ( नगाड़ा वादक), बूच्चूल भट्ट (क्लार्नेट)अरविन्द कुमार , दिनेश कुमार व संटू कुमार,अर्पिता घोष ( गायिका )</p>



<p><strong> नेपथ्य :- </strong></p>



<p><strong>रूपसज्जा &#8211;</strong> अशोक घोष,वेषभूषा &#8211; सोमा चक्रवर्ती व अभय सिन्हा,सहायक निर्देशक &#8211; संजय सिंह व सोमा चक्रवर्ती</p>



<p><strong>पूर्वाभ्यास प्रभारी</strong> &#8211; अमिताभ रंजन,मंच सज्जा &#8211; सुनील कुमार शर्मा,नृत्य निर्देशन &#8211; सोमा चक्रवर्ती व अर्पिता घोष,प्रकाश परिकल्पना -रौशन कुमार, संगीत परिकल्पना &#8211; मनोरंजन ओझा,संगीत निर्देशन व मुख्य गायक &#8211; रामकृष्ण सिंह,नाट्य लेखन व गीतकार &#8211; अरूण सिन्हा,परिकल्पना व निर्देशक &#8211; अभय सिन्हा,प्रस्तुति &#8211; प्रांगण , पटना  बिहार )</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/7e033b32-4063-4e0e-9c2e-ff8e1848911b-650x488.jpeg" alt="" class="wp-image-81083" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/7e033b32-4063-4e0e-9c2e-ff8e1848911b-650x488.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/7e033b32-4063-4e0e-9c2e-ff8e1848911b-350x263.jpeg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/7e033b32-4063-4e0e-9c2e-ff8e1848911b-768x576.jpeg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/7e033b32-4063-4e0e-9c2e-ff8e1848911b.jpeg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="414" height="650" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/aa98eabb-dcca-43b5-a08d-3a2c039d6ff9-414x650.jpeg" alt="" class="wp-image-81084" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/12/aa98eabb-dcca-43b5-a08d-3a2c039d6ff9-414x650.jpeg 414w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/aa98eabb-dcca-43b5-a08d-3a2c039d6ff9-223x350.jpeg 223w, https://www.patnanow.com/assets/2023/12/aa98eabb-dcca-43b5-a08d-3a2c039d6ff9.jpeg 720w" sizes="(max-width: 414px) 100vw, 414px" /></figure>



<p>लोगों ने इन्द्रधनुष कार्यक्रम के माध्यम से बिहार के तमाम व्यंजनो का लुत्फ उठाया साथ ही हस्तशिल्प मेला में वन्दना पाण्डेय द्वारा संचालित स्टौल पर सिल्क की साड़ी व मधु जी के स्टौल पर हस्त निर्मित ओढ़नी का विशेष प्रदर्शनी एवं एक से बढ़ कर एक चित्रकारी का भी प्रदर्शनी लगाया गया.दूसरा कार्यक्रम हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया. जिसमें बबिता साकिया (असम) सूर्या गुरु (ओडिसा) नेहाल कुमार सिंह निर्मल( बिहार), प्रसाद रत्नेश्वर (बिहार) के कवि की कविताओं ने लोगों को खूब गुदगुदाया. फैशन शो का आयोजन किया जिसमे सभी प्रदेश के कलाकारों की भागीदारी रही. जिसके कोरियोग्राफर सूरज गुरु (ओडिसा) का रहा. बहुत ही मनोरम दृश्य का समायोजन किया गया.लोक नृत्य  में कालबेलिया,भांगड़ा, जट जटिन, बिहू एवं राजस्थान के लोक नृत्य से आज के कार्यक्रम का समापन हुआ.</p>



<p>PNCDESK</p>
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		<title>राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय,वाराणसी, केंद्र के निदेशक बने प्रवीण कुमार गुंजन</title>
		<link>https://www.patnanow.com/praveen-kumar-gunjan-becomes-the-director-of-the-national-school-of-drama-varanasi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 06 Sep 2023 02:44:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[abhay sinha]]></category>
		<category><![CDATA[director]]></category>
		<category><![CDATA[nsd varanashi]]></category>
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					<description><![CDATA[बिहार के रंग जगत में ज़बरदस्त खुशी का माहौल : अभय सिन्हा महिन्द्रा थिएटर सम्मान बतौर निर्देशक, से सम्मानित हैं प्रवीण राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय,वाराणसी, केंद्र के निदेशक ,बिहार और देश के प्रतिष्ठित ,सम्पूर्ण रंग व्यक्तित्व प्रवीण कुमार गुंजन को बनाये जाने पर पूरे पटना,बिहार के रंग जगत में ज़बरदस्त खुशी का माहौल है.. प्रवीण गुंजन राष्ट्रीय फ़लक पे चर्चित एवं प्रतिष्ठित रंगकर्मी हैं. प्रवीण कुमार गुंजन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय दिल्ली से प्रशिक्षित हैं,बिहार व देश के प्रतिष्ठित और रंगकर्म के सबसे बड़े सम्मान विस्मिल्लाह खां ,संगीत नाटक ,अकादमी दिल्ली से सम्मानित हैं, ,मेटा सम्मान जो रंगकर्म में बड़ा सम्मान है,महिन्द्रा थिएटर सम्मान बतौर निर्देशक, से सम्मानित हैं. जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर बिहार का नाम भी ऊंचा किया है .यूथ फेस्टिवल बिहार सरकार द्वारा आयोजित होता है उसमें बिहार से चयन होकर इनका नाटक देश के सारे राज्यों से चयनित नाटकों में आयोजित नाटकों में पहला स्थान बिहार को दिलवाया था. गुंजन को बिहार सरकार द्वारा रंगकर्म के क्षेत्र में युवा भिखारी ठाकुर सम्मान 2011..2012 में मिला है, लगातार पटना रंगमंच फिर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से उत्तीर्ण होने के बाद बेगूसराय में इन्होंने लगातार काम करते हुए देश के सारे बड़े नाट्य निर्देशकों का नाट्य फेस्टिवल लगातार आयोजित करवाया,इन्होंने फैक्ट रंगमंडल बेगूसराय के द्वारा लगातार नाटक निर्देशित एवं राष्ट्रीय स्तर पर 6 महीने का कार्यशाला कर नए रंगकर्मियों को दिशा दी.वाराणसी केंद्र ,राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के डायरेक्टर बनाये जाने से बिहार रंगकर्म में बहुत ही ख़ुशनुमा वातावरण बन गया है .इस खुशी पर देश के नाट्य निर्देशकों रंगकर्मी लोगों ने प्रवीण गुंजन [&#8230;]]]></description>
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<p></p>



<p><strong>बिहार के रंग जगत में ज़बरदस्त खुशी का माहौल</strong> : <em><strong>अभय सिन्हा </strong></em></p>



<p><strong>महिन्द्रा थिएटर सम्मान बतौर निर्देशक, से सम्मानित हैं</strong> <strong>प्रवीण </strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="643" height="650" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/d093c076-9874-410d-873b-7eac238dfa7d-643x650.jpg" alt="" class="wp-image-77878" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/d093c076-9874-410d-873b-7eac238dfa7d-643x650.jpg 643w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/d093c076-9874-410d-873b-7eac238dfa7d-346x350.jpg 346w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/d093c076-9874-410d-873b-7eac238dfa7d-768x776.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/d093c076-9874-410d-873b-7eac238dfa7d.jpg 950w" sizes="(max-width: 643px) 100vw, 643px" /></figure>



<p>राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय,वाराणसी, केंद्र के निदेशक ,बिहार और देश के प्रतिष्ठित ,सम्पूर्ण रंग व्यक्तित्व  प्रवीण कुमार गुंजन  को बनाये जाने पर पूरे पटना,बिहार के रंग जगत में ज़बरदस्त खुशी का माहौल है.. प्रवीण गुंजन राष्ट्रीय फ़लक पे चर्चित एवं प्रतिष्ठित रंगकर्मी हैं. प्रवीण कुमार गुंजन  राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय दिल्ली से प्रशिक्षित हैं,बिहार व देश के प्रतिष्ठित और रंगकर्म के सबसे बड़े सम्मान विस्मिल्लाह खां ,संगीत नाटक ,अकादमी दिल्ली से सम्मानित हैं, ,मेटा सम्मान जो रंगकर्म में बड़ा सम्मान है,महिन्द्रा थिएटर सम्मान बतौर निर्देशक, से सम्मानित हैं. जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर बिहार का नाम भी ऊंचा किया है .यूथ फेस्टिवल बिहार सरकार द्वारा आयोजित होता है उसमें बिहार से चयन होकर इनका नाटक देश के सारे राज्यों से चयनित नाटकों में आयोजित नाटकों में पहला स्थान बिहार को दिलवाया था.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="488" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/557bdc36-9cc7-44a3-a9f9-4aa1eb96a6f1-650x488.jpg" alt="" class="wp-image-77879" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/09/557bdc36-9cc7-44a3-a9f9-4aa1eb96a6f1-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/557bdc36-9cc7-44a3-a9f9-4aa1eb96a6f1-350x263.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/557bdc36-9cc7-44a3-a9f9-4aa1eb96a6f1-768x576.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/09/557bdc36-9cc7-44a3-a9f9-4aa1eb96a6f1.jpg 1280w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p> गुंजन को बिहार सरकार द्वारा रंगकर्म के क्षेत्र में युवा भिखारी ठाकुर सम्मान 2011..2012 में मिला है, लगातार पटना रंगमंच फिर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से उत्तीर्ण होने के बाद बेगूसराय में इन्होंने लगातार काम करते हुए देश के सारे बड़े नाट्य निर्देशकों का नाट्य फेस्टिवल लगातार आयोजित करवाया,इन्होंने फैक्ट रंगमंडल बेगूसराय के द्वारा लगातार नाटक निर्देशित एवं राष्ट्रीय स्तर पर 6 महीने का कार्यशाला कर नए रंगकर्मियों को दिशा दी.वाराणसी केंद्र ,राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के डायरेक्टर बनाये जाने से बिहार रंगकर्म में बहुत ही ख़ुशनुमा वातावरण बन गया है .इस खुशी पर देश के नाट्य निर्देशकों रंगकर्मी लोगों ने प्रवीण गुंजन जी को बधाई दी..जिसमें  सतीश आनंद जी, ,अभय सिन्हा, रविकांत सिंह विनोद अनुपम,सोमा चक्रवर्ती, संजय उपाध्याय आशीष मिश्र जी,सनत कुमार,बिजेन्द्र टांक, संगीता रमन,सुबन्ति बनर्जी,रवि मुकुल,दीपक सिन्हा,अशोक कुमार सिन्हा,मोहित मोहन,चंदन वत्स,नीलेश मिश्रा, मिथिलेश रॉय,मंजरी मणि त्रिपाठी,राजेश राज,नीलेश्वर मिश्रा, आशुतोष मिश्रा, पीयूष सिंह आदि ने खूब बधाई और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय दिल्ली तथा संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार को साधुवाद दिया,</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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		<title>भिखारी ठाकुर की 52 वीं पुण्यतिथि के अवसर पर बटोही का होगा मंचन</title>
		<link>https://www.patnanow.com/batohi-will-be-staged-on-the-occasion-of-52nd-death-anniversary-of-bhikhari-thakur/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 08 Jul 2023 07:08:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[बटोही नाटक में दिखेगी भिखारी ठाकुर की जीवन यात्रा ऋषिकेश सुलभ लिखित और अभय सिन्हा &#160;निर्देशित नाटक बटोही का मंचन प्रेमचंद रंगशाला में 9 जुलाई और 10 जुलाई को होगा मंचन बटोही इस एक शब्द में उनकी यायावरी, छटपटाहट और रचनात्मक बेचनी, सबकुछ है शामिल समाज में फैले जातीय उत्पीड़न और शोषण ने भिखारी ठाकुर को उद्वेलित कर दिया. स्थिति में बदलाव के नाटकों आदि माध्यमों का सहारा लिया और जन-जन में जागरुकता फैलाने के लिए निकल पड़े. भिखारी ठाकुर की यह जीवन यात्रा दिखेगी प्रस्तुति बटोही में जिसका मंचन भिखारी ठाकुर की 52 वीं पुण्यतिथि के अवसर पर दिनांक 09  जुलाई एवं 10 जुलाई 2023को संध्या 6:30  बजे  प्रेमचंद रंगशाला,राजेन्द्र नगर ,पटना  में आयोजित किया गया है . इस नाटक का आयोजन शनिवार और रविवार को प्रेमचंद रंगशाला किया गया है. ऋषिकेश सुलभ के लिखे और अभय सिन्हा निर्देशित नाटक बटोही में दिखाया गया कि समाज में जाति के नाम पर भेदभाव, दलितों के साथ उत्पीड़न की घटनाएं देख भिखारी ठाकुर बेहद ही आहत हुए थे। नाटक के माध्यम से भिखारी ठाकुर के जीवन में घटी महत्वपूर्ण घटनाओं को दिखाया गया। इन घटनाओं का ही परिणाम था कि वह एक आम इंसान भिखारी ठाकुर से समाज को दिशा देने वाले भिखारी ठाकुर बने. नाटक में प्रकाश रौशन कुमार ,संगीत संयोजन रामकृष्ण सिंह और संगीत परिकल्पना नीलेश्वर मिश्रा का है. बटोही भिखारी ठाकुर की रचनात्मक इस नाटक की केन्द्रीय चेतना है.यह नाटक उन चिन्ताओं स्थितियों और लोगों के बीच से गुजरने का प्रयास है जिनके रचनात्मक दबाव के कारण भिखारी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बटोही नाटक में दिखेगी भिखारी ठाकुर की जीवन यात्रा</strong></p>



<p><strong>ऋषिकेश सुलभ लिखित और अभय सिन्हा &nbsp;निर्देशित नाटक बटोही का मंचन</strong></p>



<p><strong>प्रेमचंद रंगशाला में 9 जुलाई और 10 जुलाई को होगा मंचन</strong></p>



<p><strong>बटोही इस एक शब्द में उनकी यायावरी, छटपटाहट और रचनात्मक बेचनी, सबकुछ है शामिल </strong></p>



<p>समाज में फैले जातीय उत्पीड़न और शोषण ने भिखारी ठाकुर को उद्वेलित कर दिया. स्थिति में बदलाव के नाटकों आदि माध्यमों का सहारा लिया और जन-जन में जागरुकता फैलाने के लिए निकल पड़े. भिखारी ठाकुर की यह जीवन यात्रा दिखेगी प्रस्तुति बटोही में जिसका मंचन भिखारी ठाकुर की 52 वीं पुण्यतिथि के अवसर पर दिनांक 09  जुलाई एवं 10 जुलाई 2023को संध्या 6:30  बजे  प्रेमचंद रंगशाला,राजेन्द्र नगर ,पटना  में आयोजित किया गया है . इस नाटक का आयोजन शनिवार और रविवार को प्रेमचंद रंगशाला किया गया है. </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/1bbc4b63-121f-4a32-9481-f58a591c9844-650x433.jpg" alt="" class="wp-image-76157" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/1bbc4b63-121f-4a32-9481-f58a591c9844-650x433.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/1bbc4b63-121f-4a32-9481-f58a591c9844-350x233.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/1bbc4b63-121f-4a32-9481-f58a591c9844-768x512.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/1bbc4b63-121f-4a32-9481-f58a591c9844.jpg 1080w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="433" height="650" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/0a7e6b1f-cd04-4a03-b522-905f909b5ec4-1-433x650.jpg" alt="" class="wp-image-76155" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/0a7e6b1f-cd04-4a03-b522-905f909b5ec4-1-433x650.jpg 433w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/0a7e6b1f-cd04-4a03-b522-905f909b5ec4-1-233x350.jpg 233w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/0a7e6b1f-cd04-4a03-b522-905f909b5ec4-1-768x1153.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/0a7e6b1f-cd04-4a03-b522-905f909b5ec4-1-1023x1536.jpg 1023w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/0a7e6b1f-cd04-4a03-b522-905f909b5ec4-1.jpg 1066w" sizes="(max-width: 433px) 100vw, 433px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="495" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/2d21f5e1-75cb-413f-8d07-7161298dc39c-650x495.jpg" alt="" class="wp-image-76158" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/2d21f5e1-75cb-413f-8d07-7161298dc39c-650x495.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/2d21f5e1-75cb-413f-8d07-7161298dc39c-350x266.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/2d21f5e1-75cb-413f-8d07-7161298dc39c-768x585.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/2d21f5e1-75cb-413f-8d07-7161298dc39c.jpg 1080w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>ऋषिकेश सुलभ के लिखे और अभय सिन्हा निर्देशित नाटक बटोही में दिखाया गया कि समाज में जाति के नाम पर भेदभाव, दलितों के साथ उत्पीड़न की घटनाएं देख भिखारी ठाकुर बेहद ही आहत हुए थे। नाटक के माध्यम से भिखारी ठाकुर के जीवन में घटी महत्वपूर्ण घटनाओं को दिखाया गया। इन घटनाओं का ही परिणाम था कि वह एक आम इंसान भिखारी ठाकुर से समाज को दिशा देने वाले भिखारी ठाकुर बने. नाटक में प्रकाश रौशन कुमार ,संगीत संयोजन रामकृष्ण सिंह और संगीत परिकल्पना नीलेश्वर मिश्रा का है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/36cb0b39-8d5d-40fc-807e-46bd48a76db7-650x433.jpg" alt="" class="wp-image-76159" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/36cb0b39-8d5d-40fc-807e-46bd48a76db7-650x433.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/36cb0b39-8d5d-40fc-807e-46bd48a76db7-350x233.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/36cb0b39-8d5d-40fc-807e-46bd48a76db7-768x512.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/36cb0b39-8d5d-40fc-807e-46bd48a76db7.jpg 1080w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>बटोही भिखारी ठाकुर की रचनात्मक इस नाटक की केन्द्रीय चेतना है.यह नाटक उन चिन्ताओं स्थितियों और लोगों के बीच से गुजरने का प्रयास है जिनके रचनात्मक दबाव के कारण भिखारी ठाकुर जैसे कवि नाटककार रंगकर्मी ने आकार लिया वह समाज के अन्तिम कतार में खड़े लोगों के बीच पैदा हुए और उन्होंने वहीं से चुने अपनी रचना के बीज तत्व सामन्ती व्यवस्था की क्रूरताओं और जाति व्यवस्था के घिनौने आतंक के बीच अपने रंगकर्म से जीवन की पक्षधार का दुस्साहसी अभियान चलाने वाले भिखारी ठाकुर को रचते हुए लेखक ने तथ्यों से परे जाकर बहुत कुछ तलाशने की कोशिश की है. इस नाटक में कमला बबुनी की उपस्थिति ऐसी ही कोशिश का प्रतिफल है. ऐसे कई और चरित्र इस नाटक बटोही में शामिल है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/86437a7c-a11e-476f-ae46-0fb9e4c1f7c4-650x433.jpg" alt="" class="wp-image-76161" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/86437a7c-a11e-476f-ae46-0fb9e4c1f7c4-650x433.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/86437a7c-a11e-476f-ae46-0fb9e4c1f7c4-350x233.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/86437a7c-a11e-476f-ae46-0fb9e4c1f7c4-768x512.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/86437a7c-a11e-476f-ae46-0fb9e4c1f7c4.jpg 960w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>उनकी पत्नी मनतुरनी को लेखक ने एक ऐसी स्त्री के रूप में रचने का प्रयास किया है जो उपर से अनपढ़ दिखती है पर भीतर से बेहद संवेदनशील और सजग है.मनतुरनी के भीतर छिपा है स्त्री जीवन की पीड़ा का समुद्र। इसकी लहरों के थपेड़ों में भिखारी की दुर्बलताएँ बह जाती है. मनतुरनी उनके अन्तर्द्वन्द्वो को उजागर करती है और उनकी लालसाओं की दिशा मोडकर नई राहो की ओर संकेत करती है. कनला बबनी की दुख भी भिखारी ठाकुर को मॉजता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="433" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/ee1765da-ade4-4622-b656-3c4ce33d5aa4-650x433.jpg" alt="" class="wp-image-76162" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/07/ee1765da-ade4-4622-b656-3c4ce33d5aa4-650x433.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/ee1765da-ade4-4622-b656-3c4ce33d5aa4-350x233.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/ee1765da-ade4-4622-b656-3c4ce33d5aa4-768x512.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2023/07/ee1765da-ade4-4622-b656-3c4ce33d5aa4.jpg 1080w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p> भिखारी ठाकुर को सृजन के लिए उकसाती है. तिवारी बहु मोती बहु और बुचिया जैसी स्त्रियों के जीवन का हाहाकार भिखारी ठाकुर के मन-प्राण अज़रन नाद की तरह की गूँजता है और ढलता है शब्दों मे, लय-ताल में, स्वरों में देह की गतियों मुद्राओं में यानी नाट्य की विभिन्न भगिनाओं में. बटोही इस एक शब्द में उनकी यायावरी, छटपटाहट और रचनात्मक बेचनी, सबकुछ शामिल है.</p>



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			</item>
		<item>
		<title>37 वें पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव में सामन्ता चंद्रशेखर ने दर्शकों का जीता दिल</title>
		<link>https://www.patnanow.com/samantha-chandrasekhar-won-the-hearts-of-the-audience-at-the-37th-patliputra-natya-mahotsav/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Feb 2023 03:39:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[37 th patliputra natya mahotsav]]></category>
		<category><![CDATA[abhay sinha]]></category>
		<category><![CDATA[gandhi ki hatya hjarvi baar]]></category>
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					<description><![CDATA[37वां पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव 2022-23 &#8220;सिद्धान्त दर्पण . उड़िया साहित्य में भले यह आज भी कृति हो पर समाज ने तो जैसे इसे भुला ही दिया है. प्रांगण द्वारा आयोजित पांच दिवसीय पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव 2022-23 के आखिरी दिन सम्पर्क, राउरकेला (उड़ीसा) की प्रस्तुति हुई जिसमें नाटककार भास्कर चन्द्र महापात्र लिखित व निर्देशित नाटक सामन्ता चंद्रशेखर का मंचन किया गया. नाटक के कथासार में जो निज स्वार्थ त्यागकर बिना लाग-लपेट अपना सर्वस्व दूसरों के कल्याण और समाज के हित में लगा देते हैं, वही &#8220;महान&#8221; कहलाते हैं. उनके किये कार्यों और दिखाए गये मार्गों का अनुशरण कर जो विपथगामी को सुपथ पर लाता है, वह भी महान कहा जा सकता है. ऐसे ही महान आत्माओं में एक थे, महामहोपाध्याय पठानी सामन्ता चंद्रशेखर सिंह हरिचंदना महापात्रा. उनका जन्म खानदापदा साम्राज्य में हुआ था. वे अपनी गरीबी और बीमारी से लगातार जूझते रहे. फिर भी सदा बाँस या लकड़ियों का औजार बनाकर आकाश को निहारते रहते थे, पेड़-पौधों का अवलोकन करते रहते थे. वे लगातार कुछ ढूंढ रहे होते थे और इसी काम में उन्होंने अपना पूरा जीवन खपा दिया. पेड़-पौधों की स्थिति और गतिशीलता पर किये गये अपने खोज के परिणामस्वरूप उन्होंने दुनिया को बेमिसाल तोहफा दिया जो बाद में समाज और दुनिया के लिए वरदान साबित हुआ. इसी अन्वेषण और उपलब्धि पर आधारित उन्होंने एक किताब भी लिखी, &#8220;सिद्धान्त दर्पण . उड़िया साहित्य में भले यह आज भी कृति हो पर समाज ने तो जैसे इसे भुला ही दिया है.मंच पर : भास्कर चन्द्र महापात्रा, बुशिन्धा मोहन्ती, विजय पात्रो, सुरेन्द्र [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>37वां पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव 2022-23</strong></p>



<p><strong> &#8220;सिद्धान्त दर्पण . उड़िया साहित्य में भले यह आज भी कृति हो पर समाज ने तो जैसे इसे भुला ही दिया है.</strong></p>



<p>प्रांगण द्वारा आयोजित पांच दिवसीय पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव 2022-23 के आखिरी दिन सम्पर्क, राउरकेला (उड़ीसा) की प्रस्तुति हुई जिसमें नाटककार भास्कर चन्द्र महापात्र लिखित व निर्देशित नाटक सामन्ता चंद्रशेखर का मंचन किया गया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="542" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1-3.jpg" alt="" class="wp-image-71345" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1-3.jpg 542w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1-3-316x350.jpg 316w" sizes="(max-width: 542px) 100vw, 542px" /></figure>



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<p>नाटक के कथासार में जो निज स्वार्थ त्यागकर बिना लाग-लपेट अपना सर्वस्व दूसरों के कल्याण और समाज के हित में लगा देते हैं, वही &#8220;महान&#8221; कहलाते हैं. उनके किये कार्यों और दिखाए गये मार्गों का अनुशरण कर जो विपथगामी को सुपथ पर लाता है, वह भी महान कहा जा सकता है. ऐसे ही महान आत्माओं में एक थे, महामहोपाध्याय पठानी सामन्ता चंद्रशेखर सिंह हरिचंदना महापात्रा. उनका जन्म खानदापदा साम्राज्य में हुआ था. वे अपनी गरीबी और बीमारी से लगातार जूझते रहे. फिर भी सदा बाँस या लकड़ियों का औजार बनाकर आकाश को निहारते रहते थे, पेड़-पौधों का अवलोकन करते रहते थे. वे लगातार कुछ ढूंढ रहे होते थे और इसी काम में उन्होंने अपना पूरा जीवन खपा दिया. पेड़-पौधों की स्थिति और गतिशीलता पर किये गये अपने खोज के परिणामस्वरूप उन्होंने दुनिया को बेमिसाल तोहफा दिया जो बाद में समाज और दुनिया के लिए वरदान साबित हुआ. इसी अन्वेषण और उपलब्धि पर आधारित उन्होंने एक किताब भी लिखी, &#8220;सिद्धान्त दर्पण . उड़िया साहित्य में भले यह आज भी कृति हो पर समाज ने तो जैसे इसे भुला ही दिया है.मंच पर : भास्कर चन्द्र महापात्रा, बुशिन्धा मोहन्ती, विजय पात्रो, सुरेन्द्र पाघी, प्रलय सतपथी, तृप्ति नारायण मिश्रा, प्रज्ञानन्द मोहन्ती, पुष्पा बिशोई, सस्मित बेक, सेदेशना रानी राउत, सुरभि राणा.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="449" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/4.jpg" alt="" class="wp-image-71347" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/4.jpg 449w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/4-262x350.jpg 262w" sizes="(max-width: 449px) 100vw, 449px" /></figure>



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<p><strong>नेपथ्य</strong>:संगीत : शक्ति प्रसाद मिश्रा, प्रकाश: राकेश सतपथी, मंच व्यवस्था : प्रलय सतपथी,और रूप सज्जा : मामा चित्रालय (पिंक)का था.</p>



<p><strong>नुक्कड़ पर</strong></p>



<p><strong>एकजुट, खगौल, पटना</strong> की ओर से सुशील कुमार सिंह लिखित और अमन कुमार निर्देशित नुक्कड़ नाटक <strong>बापू की हत्या हजारवीं बार</strong> की प्रस्तुति की गई.</p>



<p>इस नाटक में यह दिखाया गया है कि दुनिया को मानवता का मार्गदर्शन देनेवाले बापू के देश में आज भी उनके आदर्शों की अनदेखी हो रही है. दहेज, नशा, बाल विवाह, भ्रष्टाचार, स्वच्छता आदि से मुक्ति के लिए बापू का यह देश आज भी छटपटा रहा है. हम बापू के स्वभाव के विपरीत अपने कर्तव्य से विमुख होते जा रहे हैं. नाटक जनसमुदाय को बापू के आदर्शों पर चलने को प्रेरित करता है.पात्र परिचय:- पागल 1- अमन कुमार, पागल 2- दीनानाथ गोस्वामी, नेता अमरजीत शर्मा, सूत्रधार &#8211; सौम्या भारती, शराबी रोहन राज, वैष्णव – प्रशांत संगीत श्यामाकांत / रंजित दास &#8211; कुमार. भिखारी अजय कुमार और संगीत &#8211; श्यामा कांत/ रंजीत दास का था</p>



<p><strong>प्रांगण, पटना की ओर से लोक गायन की प्रस्तुति</strong> की गई जिसमें &nbsp;प्रांगण के कालाकारों में :- रामकृष्ण सिंहकलाकार:कुंदन कुमार,शिखा कुमारी,मोनी कुमारी,संगीत सहयोगी:- विकास कुमार / दिनेश कुमार (ढोलक),समीर कुमार (बांसुरी),संजय कुमार (इफैक्ट) पर थे.</p>



<p><strong>पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव 2022-23 में अपने जिम्मेदारियों के साथ डटे रंगकर्मी . . .</strong></p>



<p>सचिव अभय सिन्हा,अध्यक्ष मधुरेश शरण,उपाध्यक्ष अनिल वर्मा,कोषाध्यक्ष सोमा चक्रवर्ती, महोत्सव संयोजक : नीलेश्वर मिश्र,नुकड़ मंच प्रभारी : ओम प्रकाश, प्रेक्षागृह प्रभारी : अमिताभ,दिनेश,आशुतोष,संसंजय, अतीश ,अरविंद,भोजन व्यवस्था : संजय बरनवाल,आवास व्यवस्था : राजेश पांडेय, नुकड एवम मंच उद्घोषणा : संजय सिंह, कालिदास परिसर साज सज्जा : उमेश शर्मा, परिसर लाइट सज्जा : संजय बरनवाल, सुरक्षा व्यवस्था : अगर सिक्योरिटी,स्टील और वीडियोग्राफी : रतन कुमार और रवि, महोत्सव संयोजक सहयोग :&nbsp; संजय सिंह थे</p>



<p><strong>रवीन्द्र भारती ,पटना </strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>प्रांगण के 37 वें नाट्य महोत्सव में दिखे नाटकों  के पौराणिक रंग</title>
		<link>https://www.patnanow.com/mythological-colors-of-the-plays-seen-in-the-37th-natya-mahotsav-of-the-courtyard/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Feb 2023 03:20:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
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		<category><![CDATA[bhola ram ka jeev]]></category>
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		<category><![CDATA[soma charvarti]]></category>
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					<description><![CDATA[37वां पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव 2022-23 प्रायोगिक और लोक कला आधारित शिल्प का जादू दिख रहा है नाटकों में प्रांगण द्वारा आयोजित पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव 2022-23 के चौथे दिन (5 फरवरी 2023) संस्कार भारती नाट्य केंद्र, आगरा, उत्तर प्रदेश की प्रस्तुति हरी भाई बड़गांवकर लिखित और चन्द्रशेखर बहावर निर्देशित नाटक गधे की बारात का मंचन किया गया. नाटक में वर्ग विभाजन एवं शोषित समाज के हृदय का दर्द जैसे न समाप्त होने वाला घाव है. सामाजिक ताना-बाना और राजनीतिक दुष्चक्र इसमें घी का ही काम करते रहे हैं. इसलिए कभी-कभी शुद्ध अंतःकरण से किया गया प्रयास भी विफल होता रहा है और खाई को पाट नहीं पाया है. समस्या और विकराल होती चली गयी है. सरकारें आती हैं और चली जाती हैं, किंतु वर्गीय खाई नहीं पाट सकीं. इसी विषय-वस्तु को मनोरंजक शिल्प में नाटक में दिखाने की कोशिश की गयी है. इसके लिए भगवान इंद्र द्वारा शापित चित्रसेन की पौराणिक कथा का सहारा लिया गया है. चित्रसेन मृत्युलोक में गधा बनकर अवतरित होता है. राजनैतिक ताने बाने के कारण राजकुमारी प्रियदर्शनी से उसका विवाह होता है. मंच पर कल्लूः पंकज शर्मा, गंगी : निमिषा जैन, राजा : चंद्रशेखर बहावर, दीवान : राहुल शर्मा, बृहस्पति : मोंटी, राजकुमारी: दिव्यता, इंद्र : अरुण भारद्वाज, चित्रसेन : दिव्यांश मिश्रा, जासूस/डोंडी वाला :ओम गुप्ता, द्वारपाल : करण यादव,वहीँ नेपथ्य से संगीत : दीपक जैन और पुनीत कपूर का था. नुक्कड़ नाटक एच० एम० टी०, पटना की प्रस्तुति भारतेन्दु हरिश्चन्द्र लिखित व सुरेश कुमार हज्जु निर्देशित नाटक अंधेर नगरी अंधेरी नगरी आधुनिक नाटक के अद्वितीय [&#8230;]]]></description>
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<p class="has-vivid-red-color has-text-color"><strong>37वां पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव 2022-23</strong></p>



<p><strong>प्रायोगिक और लोक कला आधारित शिल्प का जादू दिख रहा है नाटकों  में</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="503" height="409" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/4c24b8b7-f9e4-4179-aaae-8e3ef54b7e7a.jpg" alt="" class="wp-image-71304" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/4c24b8b7-f9e4-4179-aaae-8e3ef54b7e7a.jpg 503w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/4c24b8b7-f9e4-4179-aaae-8e3ef54b7e7a-350x285.jpg 350w" sizes="(max-width: 503px) 100vw, 503px" /></figure>



<p>प्रांगण द्वारा आयोजित पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव 2022-23 के चौथे दिन (5 फरवरी 2023) संस्कार भारती नाट्य केंद्र, आगरा, उत्तर प्रदेश की प्रस्तुति <strong>हरी भाई बड़गांवकर लिखित और चन्द्रशेखर बहावर निर्देशित</strong> नाटक <strong>गधे की बारात</strong> का मंचन किया गया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="379" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/991e44f1-3913-461e-a554-7a4a2f78ca42.jpg" alt="" class="wp-image-71305" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/991e44f1-3913-461e-a554-7a4a2f78ca42.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/991e44f1-3913-461e-a554-7a4a2f78ca42-350x204.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>नाटक में वर्ग विभाजन एवं शोषित समाज के हृदय का दर्द जैसे न समाप्त होने वाला घाव है. सामाजिक ताना-बाना और राजनीतिक दुष्चक्र इसमें घी का ही काम करते रहे हैं. इसलिए कभी-कभी शुद्ध अंतःकरण से किया गया प्रयास भी विफल होता रहा है और खाई को पाट नहीं पाया है. समस्या और विकराल होती चली गयी है. सरकारें आती हैं और चली जाती हैं, किंतु वर्गीय खाई नहीं पाट सकीं. इसी विषय-वस्तु को मनोरंजक शिल्प में नाटक में दिखाने की कोशिश की गयी है. इसके लिए भगवान इंद्र द्वारा शापित चित्रसेन की पौराणिक कथा का सहारा लिया गया है. चित्रसेन मृत्युलोक में गधा बनकर अवतरित होता है. राजनैतिक ताने बाने के कारण राजकुमारी प्रियदर्शनी से उसका विवाह होता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="410" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/f49ebd6d-41e0-48a2-909b-f2491b2d8e44.jpg" alt="" class="wp-image-71307" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/f49ebd6d-41e0-48a2-909b-f2491b2d8e44.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/f49ebd6d-41e0-48a2-909b-f2491b2d8e44-350x221.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><strong>मंच पर</strong></p>



<p>कल्लूः पंकज शर्मा, गंगी : निमिषा जैन, राजा : चंद्रशेखर बहावर, दीवान : राहुल शर्मा, बृहस्पति : मोंटी, राजकुमारी: दिव्यता, इंद्र : अरुण भारद्वाज, चित्रसेन : दिव्यांश मिश्रा, जासूस/डोंडी वाला :ओम गुप्ता, द्वारपाल : करण यादव,वहीँ नेपथ्य से संगीत : दीपक जैन और पुनीत कपूर का था.</p>



<p><strong>नुक्कड़ नाटक</strong></p>



<h4 class="has-pale-cyan-blue-color has-text-color wp-block-heading">एच० एम० टी०, पटना की प्रस्तुति भारतेन्दु हरिश्चन्द्र लिखित व सुरेश कुमार हज्जु निर्देशित नाटक <strong>अंधेर नगरी </strong></h4>



<p>अंधेरी नगरी आधुनिक नाटक के अद्वितीय सूत्रधार &#8216;भारतेन्दु हरिश्चन्द&#8217; की कालजयी कृति है. इस नाटिका के माध्यम से नाटककार ने तत्कालीन भारत देश में व्याप्त गोरी सरकार के अनीतिपूर्ण शासन पर कटाक्ष किया था, परंतु सृजन के इतने वर्षों बाद भी &#8216;अंधेरी नगरी&#8217; अभी तक ताजा और प्रासंगिक है.अपने दो चेलों गोवर्धनदास और नारायणदास के साथ गुरूजी पहुँचते हैं एक ऐसे देश में जिसका नाम था &#8216;अंधेरी नगरी और जिसे चलाता था &#8216;चौपट राजा&#8217; जहाँ भाजी भी बिकती थी टके सेर और टके सेर ही बिकता था मीठा खाजा. गुरूजी के मना करने के बाद भी गोवर्धन रूक जाता है &#8216;अंधेरी नगरी में. इधर गिर जाती है एक दीवार और दबकर मर जाती है एक अदद बकरी . मामला पेश होता है &#8216;चौपट राजा&#8217; के दरबार में और मुकदमा दर-मुकदमा आगे बढ़ते-बढ़ते पकड़ लिया जाता है गोवर्धन दास को और उसे मिलता है मृत्युदंड बेचारा गोवर्धन पुकारता है अपने गुरूजी को, गुरूजी आते हैं और सुझाते हैं एक ऐसी अनोखी तरकीब कि सदा के लिए मिल जाता है और राजा खुद को फाँसी पर चढ़ जाता है.</p>



<p><strong>पात्र-परिचय</strong></p>



<p>राजा &#8211; गोपी कुमार, मंत्री-रोहित मेहता, सिपाही (1) सुजाता कुमारी, सिपाही (2)- नेहा कुमारी. गुरुजी- सिमरन कुमारी, गोवर्धन दास-विवेक कुमार, नारायण दास मुस्कान कुमारी, बकरीवाली रिंकी कुमारी / नेहा कुमारी (1) मछली वाली मुस्कान कुमारी / सिमरन कुमारी / नेहा कुमारी (2) चना वाला-विवेक कुमार, कबाब वाला &#8211; गोपी कुमार चुड़न वाला-विवके कुमार सपेरा रोहित मेहता, साँप &#8211; हर्ष कुमार / बादल कुमार / शशि कुमार &nbsp;सहयोगी कलाकारः- साजन कुमार शशी कुमार, हर्ष कुमार, रिया कुमारी, शिवम कुमार, शिबू कुमार, कुमार गौरव सिन्हा,आदित्य कुमार ठाकुर, आयुष कुमार, नितिश कुमार, आशिक कुमार, अंकित कुमार, बादल कुमार, आदित्य राज, रौनक कुमार, आर्यन कुमार आदि. &nbsp;संगीत &#8211; राजु मिश्रा, हारमोनियम- रोहित चन्द्रा / चंदन उगना, नाल-स्पर्श मिश्रा / चंदन घोष .</p>



<h3 class="has-luminous-vivid-orange-color has-text-color wp-block-heading"><strong>आशा रिप्रेटरी व द एक्टर्स स्पेस एन एक्टिंग स्कूल, पटना की प्रस्तुति</strong></h3>



<p><strong>भोलाराम का जीव</strong></p>



<p><strong>लेखक : हरिशंकर परसाई</strong></p>



<p><strong>निर्देशक : जहाँगीर खान</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/IMG-20230206-WA0021.jpg" alt="" class="wp-image-71310" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/IMG-20230206-WA0021.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/IMG-20230206-WA0021-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>यह नाटक सरकारी व्यवस्था पर गहरी चोट करता है, इस नुक्कड नाटक में यही दिखाया गया है कि कैसे एक आम आदमी अपने अधिकारों के लिए उन सारे सरकारी तंत्रों से लड़ते-लड़ते अंत में उसी व्यवस्था के नीचे दबकर मर जाता है. नाटक की शुरुआत चित्रगुप्त के फाइल में एक जीव यानी मनुष्य की आत्मा के गायब होने से शुरू होता है जिसका नाम भोलाराम है. भोलाराम 5 साल से पृथ्वी लोक पर पेंशन के लिए अनशन पर बैठा रहता है, अनशन पर बैठे बैठे ही उसकी मृत्यु हो जाती है. यमराज अपने यमदूत को आत्मा लाने के लिए पृथ्वी लोक पर भेजते हैं तब पता चलता है कि भोलाराम की आत्मा पेंशन के फाइलों में अटक गयी है और उसका वही मन लग गया है. ये नुक्कड़ नाटक वर्तमान सामाजिक परिदृश्य का सटीक चित्रण है.</p>



<p>पात्र परिचय:- अमन आर्या, प्रिंस प्रणव, आकाश केशरी, विक्की कुमार, विक्की ज्वेल, अभिषेक कुशवाहा, आलोक मिश्र हाफिज अली, तन्नू सिंह, गोविंदा कुमार, विकास कुमार, शाहबाज अली, अमर कुमार, राखी कुमारी, सोनू कुमार, विश्वजीत कुमार .</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>37 वें पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव 2022-23 में जुटे देश के कलाकार</title>
		<link>https://www.patnanow.com/artists-of-the-country-gathered-in-37th-pataliputra-natya-mahotsav-2022-23/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Feb 2023 04:36:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[37 th patliputra natya mahotsav]]></category>
		<category><![CDATA[abhay sinha]]></category>
		<category><![CDATA[manoj singh ganga snan ara]]></category>
		<category><![CDATA[suman kumar]]></category>
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					<description><![CDATA[राजधानी के लोगों को देखने मिल रहे हैं अच्छे नाटक तीसरे दिन दो मंचीय नाटक ‘खोया हुआ आदमी’ और आरा के कलाकारों ने ‘गंगा स्नान’ नाटक की प्रस्तुति रंगमंच हमारे जीवन संघर्ष, चुनौतियों और सम्भावनाओं को रचनात्मकता के साथ संप्रेषण का उपादान है जो जीवन दर्शन विशिष्टता प्रदान करता है : सुमन कुमार प्रांगण द्वारा आयोजित 37वां पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन दो मंचीय 2 नुक्कड़ प्रस्तुतियों के साथ-साथ सुमन कुमार जी एवं स्थानीय कलाकार और दर्शकों के बीच खुली बातचीत हुई. केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी दिल्ली के उप सचिव और वरिष्ठ रंगकर्मी सुमन कुमार ने कहा है कि रंगमंच हमारे जीवन संघर्ष, चुनौतियों और सम्भावनाओं को रचनात्मकता के साथ संप्रेषण का उपादान है जो जीवन दर्शन विशिष्टता प्रदान करता हैं. वे 37वें पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव के दौरान कालिदास रंगालय में &#8221; नाटक पर चर्चा &#8221; सत्र के दौरान पटना शहर के रंगकर्मियों से मुखातिब थे उन्होंने कहा कि बिहार सहित हिंदी पट्टी में रंगकर्मियों के लिए संभावनाओं के अनेक द्वार खुल रहे हैं . इसका लाभ बिहार के रंगकर्मियों को मिलने लगा है . कार्यक्रम में वरिष्ठ रंगकर्मी उषा वर्मा डॉ ध्रुव कुमार, नीलेश्वर मिश्रा, अभय सिन्हा, आशीष कुमार मिश्र, अभिषेक कुमार, सोमा चक्रवर्ती और मनीष महिवाल उपस्थित थे . काइट एक्टर स्टूडियो (कर्मयोगी क्रियेटिव ग्रुप), मुंबई नाटककार : रिशीष दुबे, खोया हुआ आदमी,निर्देशक : साहेब नितीश आज के दौर में पूरी इंसानियत तकनीक, महत्वाकांक्षाओं और पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित होकर झूठा और दिखावटी जीवन व्यतीत करते हुए खुद को खुशियों से कोसों दूर करता जा रहा है. [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>राजधानी के लोगों को देखने मिल रहे हैं अच्छे नाटक </strong></p>



<p><strong>तीसरे दिन दो मंचीय नाटक ‘खोया हुआ आदमी’ और आरा के कलाकारों ने ‘गंगा स्नान’ नाटक की प्रस्तुति</strong></p>



<p><strong>रंगमंच हमारे जीवन संघर्ष, चुनौतियों और सम्भावनाओं को रचनात्मकता के साथ संप्रेषण का उपादान है जो जीवन दर्शन विशिष्टता प्रदान करता है : सुमन कुमार</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="409" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1678e76a-2fed-4005-8d34-13a1c3d7e387.jpg" alt="" class="wp-image-71273" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1678e76a-2fed-4005-8d34-13a1c3d7e387.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1678e76a-2fed-4005-8d34-13a1c3d7e387-350x220.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>प्रांगण द्वारा आयोजित 37वां पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन दो मंचीय 2 नुक्कड़ प्रस्तुतियों के साथ-साथ सुमन कुमार जी एवं स्थानीय कलाकार और दर्शकों के बीच खुली बातचीत हुई. केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी दिल्ली के उप सचिव और वरिष्ठ रंगकर्मी सुमन कुमार ने कहा है कि रंगमंच हमारे जीवन संघर्ष, चुनौतियों और सम्भावनाओं को रचनात्मकता के साथ संप्रेषण का उपादान है जो जीवन दर्शन विशिष्टता प्रदान करता हैं. वे 37वें पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव के दौरान कालिदास रंगालय में &#8221; नाटक पर चर्चा &#8221; सत्र के दौरान पटना शहर के रंगकर्मियों से मुखातिब थे उन्होंने कहा कि बिहार सहित हिंदी पट्टी में रंगकर्मियों के लिए संभावनाओं के अनेक द्वार खुल रहे हैं . इसका लाभ बिहार के रंगकर्मियों को मिलने लगा है . कार्यक्रम में वरिष्ठ रंगकर्मी उषा वर्मा डॉ ध्रुव कुमार, नीलेश्वर मिश्रा, अभय सिन्हा, आशीष कुमार मिश्र, अभिषेक कुमार, सोमा चक्रवर्ती और मनीष महिवाल उपस्थित थे .</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/c5c5bd97-1d16-4263-a9fc-e035b9a90366-edited.jpg" alt="" class="wp-image-71277" width="549" height="309" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/c5c5bd97-1d16-4263-a9fc-e035b9a90366-edited.jpg 400w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/c5c5bd97-1d16-4263-a9fc-e035b9a90366-edited-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 549px) 100vw, 549px" /></figure>



<p><strong>काइट एक्टर स्टूडियो (कर्मयोगी क्रियेटिव ग्रुप), मुंबई नाटककार : रिशीष दुबे, खोया हुआ आदमी,निर्देशक : साहेब नितीश</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="301" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/5f2c843a-e111-4f54-9d97-65345f369233.jpg" alt="" class="wp-image-71271" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/5f2c843a-e111-4f54-9d97-65345f369233.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/5f2c843a-e111-4f54-9d97-65345f369233-350x162.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>आज के दौर में पूरी इंसानियत तकनीक, महत्वाकांक्षाओं और पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित होकर झूठा और दिखावटी जीवन व्यतीत करते हुए खुद को खुशियों से कोसों दूर करता जा रहा है. समस्त मानवता से झूठी और खोखली अपेक्षाओं के चलते जीवन के वास्तविक उद्देश्य को ही भुला बैठा है,सफलता के पीछे भागते हुए व्यक्तिगत भावनाओं, रिश्तो और अहसासों को भुला बैठा है. सफलता के पीछे रात-दिन भागने की इसी कोशिश में सही-गलत की भी परवाह नहीं जिसके कारण अंततः गलत दिशा और संगत में फंसकर अपने अस्तित्व को ही खो देता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="301" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1.jpg" alt="" class="wp-image-71278" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1-350x162.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p> खोया हुआ आदमी&#8221; इसी मनोदशा मे जी रहे और मेट्रो शहर में रह रहे एक दंपति की कहानी है जिसके पास एक दूसरे के लिए न भावनाएं है न संवेदनाएँ. छोटी बातों को भी बड़ा समझने की मानिसकता और बेवजह की चिंता में डूबे रहने का अंततः परिणाम होता क्या है. यही इस नाटक का मूल उत्स है.</p>



<p>मंच पर-अमर रंधावा : साहेब नितीश, सीमा रंधावा : अंकिता दुबे, कुलजीत रंधावा / चोर : अनिल शर्मा ,डॉक्टर सिंह/चोर : चिरंजीवी जोशी</p>



<p>नेपथ्य-संगीत संचालन : शुभम जोशी, प्रकाश संचालन : अर्जुन ठाकुर,संयोजन : समर मेहदी.</p>



<p><strong>दुसरी प्रस्तुति मनोज कुमार सिंह निर्देशित और भिखारी ठाकुर लिखित गंगा स्नान की हुई</strong></p>



<p><strong> &#8220;गंगा पूजनीय तो वृद्ध भी पूजनीय बनें, उन्हें वृद्धाश्रम मत पहुँचाओ.</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/0b8df79d-cde4-45e6-8cca-42c7a4a8ef2f.jpg" alt="" class="wp-image-71298" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/0b8df79d-cde4-45e6-8cca-42c7a4a8ef2f.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/0b8df79d-cde4-45e6-8cca-42c7a4a8ef2f-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>नाटक में मलछु की शादी को सात साल हो गए है पर वह अबतक निःसंतान है. वह गाँव के लोगों के साथ सपरिवार गंगा स्नान के लिए जाना चाहता है. उसके साथ बूढ़ी माँ भी जाना चाहती है, जिसके लिए मलेछु की पत्नी तैयार नहीं है. वह इस पर तैयार होती है कि माँ उसकी भी गठरी ढोएगी. भीड-भाड़ और मेला के कारण माँ से गठरी गिर जाती है. उसमें रखा कपड़ा और सामान खराब हो जाता है. गुस्से में पति-पत्नी मिलकर माँ  को मारपीट कर भगा देते हैं. मेला में उसे ठग मिलता है ठग  साधु के भेष में है. ठग उसका सारा सामान, गहना आदि छीन लेता है. उसे पछतावा होता है. वह माँ को मेला में खोज कर निकालता है और गंगा स्नान कराकर घर लौट आता है. इस नाटक में गंगा और उसके घाटों के आसपास की संस्कृति तो है ही, साथ ही आज के समय की सबसे बड़ी समस्या &#8216;वृद्धजनों की उपेक्षा&#8217; को मार्मिक ढंग से उकेरा गया है. नाटक कहती है, &#8220;गंगा पूजनीय तो वृद्ध भी पूजनीय बनें, उन्हें वृद्धाश्रम मत पहुँचाओ.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/7161ebcb-6a85-4f9e-895f-1dbc17a43aee.jpg" alt="" class="wp-image-71299" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/7161ebcb-6a85-4f9e-895f-1dbc17a43aee.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/7161ebcb-6a85-4f9e-895f-1dbc17a43aee-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>मंच पर-मलेछु : पंकज भट्ट, मलेछु बहू : रागिनी कश्यप ने अपने अभिनय की अमिट छाप छोडी.वहीँ अटपट : नीतीश पाण्डेय, माई : आशा पाण्डेय अटपट बहू : ऋतु पाण्डेय, ठग साधु : लवकुश सिंह, कोरस 1 साहेब लाल यादव कोरस-2 &#8211; मुकेश कुमार, कोरस-3 लड्डू भोपाली कोरस-4 रोहन पाठक, कोरस-5: राजा कोर्स, ओमजी पाठक, सखी-1 मीनाक्षी पाण्डेय, रात्री- 2 पम्मी कुमारी, गायन श्याम बाबू कुमार, संतोष तिवारी, हरिशंकर जी निराला, अंकिता, जागृति, ढोलक अभय ओझा भूमिकाओं में थे. तबला : सूरज कान्त पाण्डेय,संगीत: श्याम बाबू कुमार, रूपसज्जा व वस्त्र सज्जा : तिरुपति नाथ का था</p>



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<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/f5a5de6c-b98b-4b96-a6b6-fdbd44c18b16.jpg" alt="" class="wp-image-71301" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/f5a5de6c-b98b-4b96-a6b6-fdbd44c18b16.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/f5a5de6c-b98b-4b96-a6b6-fdbd44c18b16-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><strong>नुक्कड़ नाटक </strong></p>



<p>नुक्कड़ नाटकों की श्रृंखला में क्रिएशन, पटना की प्रस्तुति कोमिता व जयंती लिखित और गौतम गुलाल निर्देशित ये दौड़ है किसकी की प्रस्तुति की गई.यह नाटक आज के युवाओं की भागदौड़ की जिंदगी, शिक्षा, रोजगार, महंगाई से जूझती जनता की परिस्थितियों को दर्शाता निजीकरण पर सवाल खड़ा करता है साथ ही मेहनतकश मजदूरों की समस्या को यह नाटक उजागर करता है.</p>



<p>पात्र परिचयहर्ष विजेता, दीपक सोनी, नैतिक केशरी, सोमेन मुखर्जी, रोहित कुमार, शिवम कुमार, जानवी सोनी, ऋषिकेश, सौरभ, अशरफ अली एवं राजन .</p>



<p>वहीँ नाद, पटना ने परिकल्पना एवं निर्देशन- मो. जानी व लेखक-:- विवेक कुमार की जनतागिरी नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति हुई. भौतिकवाद दौड़ में अपनी महत्वाकांक्षी इच्छाओं और पारिवारिक स्थिति को अपने में पूरा करने में, उसे यहाँ तक भी पता नही कि मनुष्य योनि में जन्म सभी प्राणी से श्रेष्ठ विवेकी क्यों माना गया है. कैसे अपने ही कुकर्मों द्वारा इस स्वर्ग सी सुंदर एवं सर्वव्यापी अद्भुत सृष्टि को विनाश की और ढकेलता जा रहा है. ऐसे ही इन्ही कुछ अनेक चरण बिन्दुओं को चिंहित करते हुए वास्तविक चेहरे को समाज में पर्दाफाश करता है. इस नाटक में धर्मराज द्वारा एक मनुष्य योनि को धरती लोक पर भेजा जाता है जिसका नाम है, आम आदमी, उसको जन्म सिर्फ इसलिए ही दी जाती है की वो इस पर हो रहे भ्रष्टाचार को देखे, महसूस कर सके, और समाज के प्रत्येक जनता को इन वास्तविक परिस्थितयों से भली भाँति अवगत कराए. एक ओर से ये नाटक जितना मनोरंजक एवं आकर्षक है तो दूसरी ओर से उतना ही समाज में व्यंगात्मक कटाक्ष</p>



<p>पात्र-परिचय-धर्मराज-रवि कश्यप, चित्रगुप्त-मो0 आसिफ, आम आदमी- नंद किशोर कुमार, व्यक्ति-अविनाश मिश्रा, प्रेमी-उज्जवल कुमार गुप्ता, प्रेमिका-आरती सिंह राजपूत, बाप-नितीश कुमार, रिपोर्टर- पूजा राज ढोलक मो0 इमरान, गायक एवं खंजरी-राजीव रॉय.</p>
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