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		<title>आचार्य सोमदेव को विश्वविद्यालय के मैथिली विभाग में दी गई श्रद्धांजलि</title>
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		<pubDate>Wed, 16 Nov 2022 05:30:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सोमदेव मैथिली एवं हिन्दी भाषा के थे अच्छे विद्वान गुरु आचार्य सोमदेव का जाना शून्य पैदा कर गया विश्वविद्यालय मैथिली विभाग के द्वारा प्रो रमेश झा की अध्यक्षता में आचार्य सोमदेव के निधन के अवसर पर एक शोक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें सभी शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र छात्राओं ने हिस्सा लिया. आरम्भ में आचार्य सोमदेव के व्यक्तित्व एवं कृतित्व की चर्चा करते हुए प्रो रमेश झा ने कहा की सोमदेव मैथिली एवं हिन्दी भाषा के अच्छे विद्वान थे. उन्होंने महारानी कल्याणी महाविद्यालय, लहेरियासराय में कई दशकों तक विद्यार्थियों को हिन्दी के यसस्वी प्राध्यापक के रूप में भी अपनी परिचिति बनाये हुए थे. प्रो दमन कुमार झा ने कहा कि वे मेरे गुरु थे. वर्ग मे पढ़ाने &#160;के साथ साथ बहुत सारी संस्मरण सुनाते रहते थे. कभी पोथी लेखन प्रसंग, कभी कवि सम्मलेन प्रसंग,तो कभी जीवन दर्शन प्रसंग. उनसे बहुत सारी बातें मुझे सीखने को मिली. कई बार उनके निवास पर भी जाने का अवसर मिला. हरबार पुत्रवत स्नेह प्राप्त हुआ. दरभंगा अध्ययन क्रम में मैंने जिन जिन व्यक्तित्व से शिक्षा पाई उनमें अब तक बचे गुरु आचार्य सोमदेव का जाना मेरे लिए शून्य पैदा कर गया. प्रो अशोक कुमार मेहता ने उन्हें मैथिली के रचनाकार के रूप में याद किया. उन्होंने कहा की वे सहजतावाद के प्रणेता थे. उनकी कविता, कथा एवं उपन्यास सदैव नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक रहेगी. मंचीयकवि के रूप में वे हमेशा आकर्षण के केंद्र में रहे. काव्य प्रस्तुति में उनकी आंगिक और वाचिक समन्वय मनोहरी रहता था. उनका जाना मैथिली साहित्य के लिए [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सोमदेव मैथिली एवं हिन्दी भाषा के थे अच्छे विद्वान</strong></p>



<p><strong>गुरु आचार्य सोमदेव का जाना शून्य पैदा कर गया</strong></p>



<p>विश्वविद्यालय मैथिली विभाग के द्वारा प्रो रमेश झा की अध्यक्षता में आचार्य सोमदेव के निधन के अवसर पर एक शोक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें सभी शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र छात्राओं ने हिस्सा लिया. आरम्भ में आचार्य सोमदेव के व्यक्तित्व एवं कृतित्व की चर्चा करते हुए प्रो रमेश झा ने कहा की सोमदेव मैथिली एवं हिन्दी भाषा के अच्छे विद्वान थे. उन्होंने महारानी कल्याणी महाविद्यालय, लहेरियासराय में कई दशकों तक विद्यार्थियों को हिन्दी के यसस्वी प्राध्यापक के रूप में भी अपनी परिचिति बनाये हुए थे.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/cf6e83c4-be4f-4754-9163-3e21f4c85dcf.jpg" alt="" class="wp-image-68739" width="544" height="738" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/11/cf6e83c4-be4f-4754-9163-3e21f4c85dcf.jpg 442w, https://www.patnanow.com/assets/2022/11/cf6e83c4-be4f-4754-9163-3e21f4c85dcf-258x350.jpg 258w" sizes="(max-width: 544px) 100vw, 544px" /></figure>



<p>प्रो दमन कुमार झा ने कहा कि वे मेरे गुरु थे. वर्ग मे पढ़ाने &nbsp;के साथ साथ बहुत सारी संस्मरण सुनाते रहते थे. कभी पोथी लेखन प्रसंग, कभी कवि सम्मलेन प्रसंग,तो कभी जीवन दर्शन प्रसंग. उनसे बहुत सारी बातें मुझे सीखने को मिली. कई बार उनके निवास पर भी जाने का अवसर मिला. हरबार पुत्रवत स्नेह प्राप्त हुआ. दरभंगा अध्ययन क्रम में मैंने जिन जिन व्यक्तित्व से शिक्षा पाई उनमें अब तक बचे गुरु आचार्य सोमदेव का जाना मेरे लिए शून्य पैदा कर गया.</p>



<p>प्रो अशोक कुमार मेहता ने उन्हें मैथिली के रचनाकार के रूप में याद किया. उन्होंने कहा की वे सहजतावाद के प्रणेता थे. उनकी कविता, कथा एवं उपन्यास सदैव नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक रहेगी. मंचीयकवि के रूप में वे हमेशा आकर्षण के केंद्र में रहे. काव्य प्रस्तुति में उनकी आंगिक और वाचिक समन्वय मनोहरी रहता था. उनका जाना मैथिली साहित्य के लिए अपूर्णीय क्षति है.डॉ सुनीता कुमारी ने कहा कि मुझे यह सौभाग्य मिला कि मैं उस महाविद्यालय में सर्वप्रथम योगदान किया जहाँ आचार्य सोमदेव कभी प्रोफेसर थे. उनके सम्बन्ध में कई तरह के संस्मरण महाविद्यालय में सुनने को मिलते रहते थे. आज वे नहीं हैं ऐसा प्रतीत नहीं होता है.इस अवसर पर  वन्दना कुमारी , दीपेश कुमार , दीपक कुमार , हरेराम पंडित , नीतू कुमारी , राज्यश्री कुमारी और शालिनी कुमारी , भाग्यनारायण झा और नृपति नारायण झा आदि उपस्थित थे . अंत में दो मिनट का मौन धारण कर उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की गई.</p>



<p><strong>संजय मिश्र ,दरभंगा </strong></p>
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