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		<title>37 वें पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव में सामन्ता चंद्रशेखर ने दर्शकों का जीता दिल</title>
		<link>https://www.patnanow.com/samantha-chandrasekhar-won-the-hearts-of-the-audience-at-the-37th-patliputra-natya-mahotsav/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Feb 2023 03:39:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[37वां पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव 2022-23 &#8220;सिद्धान्त दर्पण . उड़िया साहित्य में भले यह आज भी कृति हो पर समाज ने तो जैसे इसे भुला ही दिया है. प्रांगण द्वारा आयोजित पांच दिवसीय पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव 2022-23 के आखिरी दिन सम्पर्क, राउरकेला (उड़ीसा) की प्रस्तुति हुई जिसमें नाटककार भास्कर चन्द्र महापात्र लिखित व निर्देशित नाटक सामन्ता चंद्रशेखर का मंचन किया गया. नाटक के कथासार में जो निज स्वार्थ त्यागकर बिना लाग-लपेट अपना सर्वस्व दूसरों के कल्याण और समाज के हित में लगा देते हैं, वही &#8220;महान&#8221; कहलाते हैं. उनके किये कार्यों और दिखाए गये मार्गों का अनुशरण कर जो विपथगामी को सुपथ पर लाता है, वह भी महान कहा जा सकता है. ऐसे ही महान आत्माओं में एक थे, महामहोपाध्याय पठानी सामन्ता चंद्रशेखर सिंह हरिचंदना महापात्रा. उनका जन्म खानदापदा साम्राज्य में हुआ था. वे अपनी गरीबी और बीमारी से लगातार जूझते रहे. फिर भी सदा बाँस या लकड़ियों का औजार बनाकर आकाश को निहारते रहते थे, पेड़-पौधों का अवलोकन करते रहते थे. वे लगातार कुछ ढूंढ रहे होते थे और इसी काम में उन्होंने अपना पूरा जीवन खपा दिया. पेड़-पौधों की स्थिति और गतिशीलता पर किये गये अपने खोज के परिणामस्वरूप उन्होंने दुनिया को बेमिसाल तोहफा दिया जो बाद में समाज और दुनिया के लिए वरदान साबित हुआ. इसी अन्वेषण और उपलब्धि पर आधारित उन्होंने एक किताब भी लिखी, &#8220;सिद्धान्त दर्पण . उड़िया साहित्य में भले यह आज भी कृति हो पर समाज ने तो जैसे इसे भुला ही दिया है.मंच पर : भास्कर चन्द्र महापात्रा, बुशिन्धा मोहन्ती, विजय पात्रो, सुरेन्द्र [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>37वां पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव 2022-23</strong></p>



<p><strong> &#8220;सिद्धान्त दर्पण . उड़िया साहित्य में भले यह आज भी कृति हो पर समाज ने तो जैसे इसे भुला ही दिया है.</strong></p>



<p>प्रांगण द्वारा आयोजित पांच दिवसीय पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव 2022-23 के आखिरी दिन सम्पर्क, राउरकेला (उड़ीसा) की प्रस्तुति हुई जिसमें नाटककार भास्कर चन्द्र महापात्र लिखित व निर्देशित नाटक सामन्ता चंद्रशेखर का मंचन किया गया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="542" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1-3.jpg" alt="" class="wp-image-71345" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1-3.jpg 542w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1-3-316x350.jpg 316w" sizes="(max-width: 542px) 100vw, 542px" /></figure>



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<p>नाटक के कथासार में जो निज स्वार्थ त्यागकर बिना लाग-लपेट अपना सर्वस्व दूसरों के कल्याण और समाज के हित में लगा देते हैं, वही &#8220;महान&#8221; कहलाते हैं. उनके किये कार्यों और दिखाए गये मार्गों का अनुशरण कर जो विपथगामी को सुपथ पर लाता है, वह भी महान कहा जा सकता है. ऐसे ही महान आत्माओं में एक थे, महामहोपाध्याय पठानी सामन्ता चंद्रशेखर सिंह हरिचंदना महापात्रा. उनका जन्म खानदापदा साम्राज्य में हुआ था. वे अपनी गरीबी और बीमारी से लगातार जूझते रहे. फिर भी सदा बाँस या लकड़ियों का औजार बनाकर आकाश को निहारते रहते थे, पेड़-पौधों का अवलोकन करते रहते थे. वे लगातार कुछ ढूंढ रहे होते थे और इसी काम में उन्होंने अपना पूरा जीवन खपा दिया. पेड़-पौधों की स्थिति और गतिशीलता पर किये गये अपने खोज के परिणामस्वरूप उन्होंने दुनिया को बेमिसाल तोहफा दिया जो बाद में समाज और दुनिया के लिए वरदान साबित हुआ. इसी अन्वेषण और उपलब्धि पर आधारित उन्होंने एक किताब भी लिखी, &#8220;सिद्धान्त दर्पण . उड़िया साहित्य में भले यह आज भी कृति हो पर समाज ने तो जैसे इसे भुला ही दिया है.मंच पर : भास्कर चन्द्र महापात्रा, बुशिन्धा मोहन्ती, विजय पात्रो, सुरेन्द्र पाघी, प्रलय सतपथी, तृप्ति नारायण मिश्रा, प्रज्ञानन्द मोहन्ती, पुष्पा बिशोई, सस्मित बेक, सेदेशना रानी राउत, सुरभि राणा.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="449" height="600" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/4.jpg" alt="" class="wp-image-71347" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/4.jpg 449w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/4-262x350.jpg 262w" sizes="(max-width: 449px) 100vw, 449px" /></figure>



<p></p>



<p><strong>नेपथ्य</strong>:संगीत : शक्ति प्रसाद मिश्रा, प्रकाश: राकेश सतपथी, मंच व्यवस्था : प्रलय सतपथी,और रूप सज्जा : मामा चित्रालय (पिंक)का था.</p>



<p><strong>नुक्कड़ पर</strong></p>



<p><strong>एकजुट, खगौल, पटना</strong> की ओर से सुशील कुमार सिंह लिखित और अमन कुमार निर्देशित नुक्कड़ नाटक <strong>बापू की हत्या हजारवीं बार</strong> की प्रस्तुति की गई.</p>



<p>इस नाटक में यह दिखाया गया है कि दुनिया को मानवता का मार्गदर्शन देनेवाले बापू के देश में आज भी उनके आदर्शों की अनदेखी हो रही है. दहेज, नशा, बाल विवाह, भ्रष्टाचार, स्वच्छता आदि से मुक्ति के लिए बापू का यह देश आज भी छटपटा रहा है. हम बापू के स्वभाव के विपरीत अपने कर्तव्य से विमुख होते जा रहे हैं. नाटक जनसमुदाय को बापू के आदर्शों पर चलने को प्रेरित करता है.पात्र परिचय:- पागल 1- अमन कुमार, पागल 2- दीनानाथ गोस्वामी, नेता अमरजीत शर्मा, सूत्रधार &#8211; सौम्या भारती, शराबी रोहन राज, वैष्णव – प्रशांत संगीत श्यामाकांत / रंजित दास &#8211; कुमार. भिखारी अजय कुमार और संगीत &#8211; श्यामा कांत/ रंजीत दास का था</p>



<p><strong>प्रांगण, पटना की ओर से लोक गायन की प्रस्तुति</strong> की गई जिसमें &nbsp;प्रांगण के कालाकारों में :- रामकृष्ण सिंहकलाकार:कुंदन कुमार,शिखा कुमारी,मोनी कुमारी,संगीत सहयोगी:- विकास कुमार / दिनेश कुमार (ढोलक),समीर कुमार (बांसुरी),संजय कुमार (इफैक्ट) पर थे.</p>



<p><strong>पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव 2022-23 में अपने जिम्मेदारियों के साथ डटे रंगकर्मी . . .</strong></p>



<p>सचिव अभय सिन्हा,अध्यक्ष मधुरेश शरण,उपाध्यक्ष अनिल वर्मा,कोषाध्यक्ष सोमा चक्रवर्ती, महोत्सव संयोजक : नीलेश्वर मिश्र,नुकड़ मंच प्रभारी : ओम प्रकाश, प्रेक्षागृह प्रभारी : अमिताभ,दिनेश,आशुतोष,संसंजय, अतीश ,अरविंद,भोजन व्यवस्था : संजय बरनवाल,आवास व्यवस्था : राजेश पांडेय, नुकड एवम मंच उद्घोषणा : संजय सिंह, कालिदास परिसर साज सज्जा : उमेश शर्मा, परिसर लाइट सज्जा : संजय बरनवाल, सुरक्षा व्यवस्था : अगर सिक्योरिटी,स्टील और वीडियोग्राफी : रतन कुमार और रवि, महोत्सव संयोजक सहयोग :&nbsp; संजय सिंह थे</p>



<p><strong>रवीन्द्र भारती ,पटना </strong></p>
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		<title>37 वें पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव 2022-23 में जुटे देश के कलाकार</title>
		<link>https://www.patnanow.com/artists-of-the-country-gathered-in-37th-pataliputra-natya-mahotsav-2022-23/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Feb 2023 04:36:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
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		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
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		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
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					<description><![CDATA[राजधानी के लोगों को देखने मिल रहे हैं अच्छे नाटक तीसरे दिन दो मंचीय नाटक ‘खोया हुआ आदमी’ और आरा के कलाकारों ने ‘गंगा स्नान’ नाटक की प्रस्तुति रंगमंच हमारे जीवन संघर्ष, चुनौतियों और सम्भावनाओं को रचनात्मकता के साथ संप्रेषण का उपादान है जो जीवन दर्शन विशिष्टता प्रदान करता है : सुमन कुमार प्रांगण द्वारा आयोजित 37वां पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन दो मंचीय 2 नुक्कड़ प्रस्तुतियों के साथ-साथ सुमन कुमार जी एवं स्थानीय कलाकार और दर्शकों के बीच खुली बातचीत हुई. केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी दिल्ली के उप सचिव और वरिष्ठ रंगकर्मी सुमन कुमार ने कहा है कि रंगमंच हमारे जीवन संघर्ष, चुनौतियों और सम्भावनाओं को रचनात्मकता के साथ संप्रेषण का उपादान है जो जीवन दर्शन विशिष्टता प्रदान करता हैं. वे 37वें पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव के दौरान कालिदास रंगालय में &#8221; नाटक पर चर्चा &#8221; सत्र के दौरान पटना शहर के रंगकर्मियों से मुखातिब थे उन्होंने कहा कि बिहार सहित हिंदी पट्टी में रंगकर्मियों के लिए संभावनाओं के अनेक द्वार खुल रहे हैं . इसका लाभ बिहार के रंगकर्मियों को मिलने लगा है . कार्यक्रम में वरिष्ठ रंगकर्मी उषा वर्मा डॉ ध्रुव कुमार, नीलेश्वर मिश्रा, अभय सिन्हा, आशीष कुमार मिश्र, अभिषेक कुमार, सोमा चक्रवर्ती और मनीष महिवाल उपस्थित थे . काइट एक्टर स्टूडियो (कर्मयोगी क्रियेटिव ग्रुप), मुंबई नाटककार : रिशीष दुबे, खोया हुआ आदमी,निर्देशक : साहेब नितीश आज के दौर में पूरी इंसानियत तकनीक, महत्वाकांक्षाओं और पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित होकर झूठा और दिखावटी जीवन व्यतीत करते हुए खुद को खुशियों से कोसों दूर करता जा रहा है. [&#8230;]]]></description>
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<p></p>



<p></p>



<p><strong>राजधानी के लोगों को देखने मिल रहे हैं अच्छे नाटक </strong></p>



<p><strong>तीसरे दिन दो मंचीय नाटक ‘खोया हुआ आदमी’ और आरा के कलाकारों ने ‘गंगा स्नान’ नाटक की प्रस्तुति</strong></p>



<p><strong>रंगमंच हमारे जीवन संघर्ष, चुनौतियों और सम्भावनाओं को रचनात्मकता के साथ संप्रेषण का उपादान है जो जीवन दर्शन विशिष्टता प्रदान करता है : सुमन कुमार</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="409" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1678e76a-2fed-4005-8d34-13a1c3d7e387.jpg" alt="" class="wp-image-71273" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1678e76a-2fed-4005-8d34-13a1c3d7e387.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1678e76a-2fed-4005-8d34-13a1c3d7e387-350x220.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>प्रांगण द्वारा आयोजित 37वां पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन दो मंचीय 2 नुक्कड़ प्रस्तुतियों के साथ-साथ सुमन कुमार जी एवं स्थानीय कलाकार और दर्शकों के बीच खुली बातचीत हुई. केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी दिल्ली के उप सचिव और वरिष्ठ रंगकर्मी सुमन कुमार ने कहा है कि रंगमंच हमारे जीवन संघर्ष, चुनौतियों और सम्भावनाओं को रचनात्मकता के साथ संप्रेषण का उपादान है जो जीवन दर्शन विशिष्टता प्रदान करता हैं. वे 37वें पाटलिपुत्र नाट्य महोत्सव के दौरान कालिदास रंगालय में &#8221; नाटक पर चर्चा &#8221; सत्र के दौरान पटना शहर के रंगकर्मियों से मुखातिब थे उन्होंने कहा कि बिहार सहित हिंदी पट्टी में रंगकर्मियों के लिए संभावनाओं के अनेक द्वार खुल रहे हैं . इसका लाभ बिहार के रंगकर्मियों को मिलने लगा है . कार्यक्रम में वरिष्ठ रंगकर्मी उषा वर्मा डॉ ध्रुव कुमार, नीलेश्वर मिश्रा, अभय सिन्हा, आशीष कुमार मिश्र, अभिषेक कुमार, सोमा चक्रवर्ती और मनीष महिवाल उपस्थित थे .</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/c5c5bd97-1d16-4263-a9fc-e035b9a90366-edited.jpg" alt="" class="wp-image-71277" width="549" height="309" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/c5c5bd97-1d16-4263-a9fc-e035b9a90366-edited.jpg 400w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/c5c5bd97-1d16-4263-a9fc-e035b9a90366-edited-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 549px) 100vw, 549px" /></figure>



<p><strong>काइट एक्टर स्टूडियो (कर्मयोगी क्रियेटिव ग्रुप), मुंबई नाटककार : रिशीष दुबे, खोया हुआ आदमी,निर्देशक : साहेब नितीश</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="301" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/5f2c843a-e111-4f54-9d97-65345f369233.jpg" alt="" class="wp-image-71271" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/5f2c843a-e111-4f54-9d97-65345f369233.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/5f2c843a-e111-4f54-9d97-65345f369233-350x162.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>आज के दौर में पूरी इंसानियत तकनीक, महत्वाकांक्षाओं और पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित होकर झूठा और दिखावटी जीवन व्यतीत करते हुए खुद को खुशियों से कोसों दूर करता जा रहा है. समस्त मानवता से झूठी और खोखली अपेक्षाओं के चलते जीवन के वास्तविक उद्देश्य को ही भुला बैठा है,सफलता के पीछे भागते हुए व्यक्तिगत भावनाओं, रिश्तो और अहसासों को भुला बैठा है. सफलता के पीछे रात-दिन भागने की इसी कोशिश में सही-गलत की भी परवाह नहीं जिसके कारण अंततः गलत दिशा और संगत में फंसकर अपने अस्तित्व को ही खो देता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="301" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1.jpg" alt="" class="wp-image-71278" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/1-350x162.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p> खोया हुआ आदमी&#8221; इसी मनोदशा मे जी रहे और मेट्रो शहर में रह रहे एक दंपति की कहानी है जिसके पास एक दूसरे के लिए न भावनाएं है न संवेदनाएँ. छोटी बातों को भी बड़ा समझने की मानिसकता और बेवजह की चिंता में डूबे रहने का अंततः परिणाम होता क्या है. यही इस नाटक का मूल उत्स है.</p>



<p>मंच पर-अमर रंधावा : साहेब नितीश, सीमा रंधावा : अंकिता दुबे, कुलजीत रंधावा / चोर : अनिल शर्मा ,डॉक्टर सिंह/चोर : चिरंजीवी जोशी</p>



<p>नेपथ्य-संगीत संचालन : शुभम जोशी, प्रकाश संचालन : अर्जुन ठाकुर,संयोजन : समर मेहदी.</p>



<p><strong>दुसरी प्रस्तुति मनोज कुमार सिंह निर्देशित और भिखारी ठाकुर लिखित गंगा स्नान की हुई</strong></p>



<p><strong> &#8220;गंगा पूजनीय तो वृद्ध भी पूजनीय बनें, उन्हें वृद्धाश्रम मत पहुँचाओ.</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/0b8df79d-cde4-45e6-8cca-42c7a4a8ef2f.jpg" alt="" class="wp-image-71298" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/0b8df79d-cde4-45e6-8cca-42c7a4a8ef2f.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/0b8df79d-cde4-45e6-8cca-42c7a4a8ef2f-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>नाटक में मलछु की शादी को सात साल हो गए है पर वह अबतक निःसंतान है. वह गाँव के लोगों के साथ सपरिवार गंगा स्नान के लिए जाना चाहता है. उसके साथ बूढ़ी माँ भी जाना चाहती है, जिसके लिए मलेछु की पत्नी तैयार नहीं है. वह इस पर तैयार होती है कि माँ उसकी भी गठरी ढोएगी. भीड-भाड़ और मेला के कारण माँ से गठरी गिर जाती है. उसमें रखा कपड़ा और सामान खराब हो जाता है. गुस्से में पति-पत्नी मिलकर माँ  को मारपीट कर भगा देते हैं. मेला में उसे ठग मिलता है ठग  साधु के भेष में है. ठग उसका सारा सामान, गहना आदि छीन लेता है. उसे पछतावा होता है. वह माँ को मेला में खोज कर निकालता है और गंगा स्नान कराकर घर लौट आता है. इस नाटक में गंगा और उसके घाटों के आसपास की संस्कृति तो है ही, साथ ही आज के समय की सबसे बड़ी समस्या &#8216;वृद्धजनों की उपेक्षा&#8217; को मार्मिक ढंग से उकेरा गया है. नाटक कहती है, &#8220;गंगा पूजनीय तो वृद्ध भी पूजनीय बनें, उन्हें वृद्धाश्रम मत पहुँचाओ.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/7161ebcb-6a85-4f9e-895f-1dbc17a43aee.jpg" alt="" class="wp-image-71299" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/7161ebcb-6a85-4f9e-895f-1dbc17a43aee.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/7161ebcb-6a85-4f9e-895f-1dbc17a43aee-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>मंच पर-मलेछु : पंकज भट्ट, मलेछु बहू : रागिनी कश्यप ने अपने अभिनय की अमिट छाप छोडी.वहीँ अटपट : नीतीश पाण्डेय, माई : आशा पाण्डेय अटपट बहू : ऋतु पाण्डेय, ठग साधु : लवकुश सिंह, कोरस 1 साहेब लाल यादव कोरस-2 &#8211; मुकेश कुमार, कोरस-3 लड्डू भोपाली कोरस-4 रोहन पाठक, कोरस-5: राजा कोर्स, ओमजी पाठक, सखी-1 मीनाक्षी पाण्डेय, रात्री- 2 पम्मी कुमारी, गायन श्याम बाबू कुमार, संतोष तिवारी, हरिशंकर जी निराला, अंकिता, जागृति, ढोलक अभय ओझा भूमिकाओं में थे. तबला : सूरज कान्त पाण्डेय,संगीत: श्याम बाबू कुमार, रूपसज्जा व वस्त्र सज्जा : तिरुपति नाथ का था</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="293" src="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/d5b39a46-177b-49b1-b7c3-bb8de567b201.jpg" alt="" class="wp-image-71300" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2023/02/d5b39a46-177b-49b1-b7c3-bb8de567b201.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2023/02/d5b39a46-177b-49b1-b7c3-bb8de567b201-350x158.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



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<p><strong>नुक्कड़ नाटक </strong></p>



<p>नुक्कड़ नाटकों की श्रृंखला में क्रिएशन, पटना की प्रस्तुति कोमिता व जयंती लिखित और गौतम गुलाल निर्देशित ये दौड़ है किसकी की प्रस्तुति की गई.यह नाटक आज के युवाओं की भागदौड़ की जिंदगी, शिक्षा, रोजगार, महंगाई से जूझती जनता की परिस्थितियों को दर्शाता निजीकरण पर सवाल खड़ा करता है साथ ही मेहनतकश मजदूरों की समस्या को यह नाटक उजागर करता है.</p>



<p>पात्र परिचयहर्ष विजेता, दीपक सोनी, नैतिक केशरी, सोमेन मुखर्जी, रोहित कुमार, शिवम कुमार, जानवी सोनी, ऋषिकेश, सौरभ, अशरफ अली एवं राजन .</p>



<p>वहीँ नाद, पटना ने परिकल्पना एवं निर्देशन- मो. जानी व लेखक-:- विवेक कुमार की जनतागिरी नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति हुई. भौतिकवाद दौड़ में अपनी महत्वाकांक्षी इच्छाओं और पारिवारिक स्थिति को अपने में पूरा करने में, उसे यहाँ तक भी पता नही कि मनुष्य योनि में जन्म सभी प्राणी से श्रेष्ठ विवेकी क्यों माना गया है. कैसे अपने ही कुकर्मों द्वारा इस स्वर्ग सी सुंदर एवं सर्वव्यापी अद्भुत सृष्टि को विनाश की और ढकेलता जा रहा है. ऐसे ही इन्ही कुछ अनेक चरण बिन्दुओं को चिंहित करते हुए वास्तविक चेहरे को समाज में पर्दाफाश करता है. इस नाटक में धर्मराज द्वारा एक मनुष्य योनि को धरती लोक पर भेजा जाता है जिसका नाम है, आम आदमी, उसको जन्म सिर्फ इसलिए ही दी जाती है की वो इस पर हो रहे भ्रष्टाचार को देखे, महसूस कर सके, और समाज के प्रत्येक जनता को इन वास्तविक परिस्थितयों से भली भाँति अवगत कराए. एक ओर से ये नाटक जितना मनोरंजक एवं आकर्षक है तो दूसरी ओर से उतना ही समाज में व्यंगात्मक कटाक्ष</p>



<p>पात्र-परिचय-धर्मराज-रवि कश्यप, चित्रगुप्त-मो0 आसिफ, आम आदमी- नंद किशोर कुमार, व्यक्ति-अविनाश मिश्रा, प्रेमी-उज्जवल कुमार गुप्ता, प्रेमिका-आरती सिंह राजपूत, बाप-नितीश कुमार, रिपोर्टर- पूजा राज ढोलक मो0 इमरान, गायक एवं खंजरी-राजीव रॉय.</p>
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