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	<title>28 teeth are coming to 25% of the youth &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>क्या आपके भी दांत कम आए हैं</title>
		<link>https://www.patnanow.com/28-teeth-are-coming-to-25-of-the-youth-revealed-in-the-study-of-bhu/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pnc]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 26 Apr 2022 04:54:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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		<category><![CDATA[revealed in the study of BHU]]></category>
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					<description><![CDATA[25% युवाओं को आ रहे हैं 28 दांत, बीएचयू की स्टडी में खुलासाखाना चबाने वाले दांत भी सिर्फ 8 रह गएजबड़ों का साइज होने लगा है छोटा25 साल की उम्र तक निकलता है 29 से लेकर 32वां दांतमोलर दांत अब अवशेषी अंग में हो रहा शामिल दांतों को बत्तीसी कहने का चलन अब खत्म होता जा रहा है. इसके पीछे सिर्फ यह वजह नहीं है कि युवा आबादी इस शब्द से वाकिफ नहीं है, बल्कि एक बड़ी वजह यह है कि अब लोगों की बत्तीसी निकल ही नहीं रही है. 21वीं सदी में जन्म लेने वाले लोगों में बहुत बड़ी तादाद उन लोगों की है जिनके सिर्फ 28 दांत ही निकल रहे हैं. वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ डेंटल साइंस में सीनियर डेंटल एक्सपर्ट प्रोफेसर टीपी चतुर्वेदी ने एक स्टडी की है. इसके मुताबिक पिछले 20 साल से उनकी ओपीडी में आने वाले 25% युवाओं के सिर्फ 28 दांत ही निकल रहे हैं. 35% युवाओं को बड़ी मुश्किल से पूरे 32 दांत आ पाते हैं. ये दांत भी टेढ़े-मेढ़े निकलते हैं, जिन्हें ट्रीटमेंट कर ठीक करना पड़ता है. प्रो. टीपी चतुर्वेदी ने बताया कि अमूमन 18-25 साल के बीच में लोगों के 29 से लेकर 32वां दांत निकलता है. इसे थर्ड मोलर दांत कहते हैं. आम बोलचाल की भाषा में इसे अक्ल ढाढ़ या विज्डम टीथ भी कहा जाता है. ये जबड़े के सबसे पिछले हिस्से में होते हैं.डॉक्टर का कहना है कि पिछले 20 साल से 25% मरीजों के विज्डम टीथ नहीं निकल रहे हैं. वहीं, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>25% युवाओं को आ रहे हैं 28 दांत, बीएचयू की स्टडी में खुलासा<br>खाना चबाने वाले दांत भी सिर्फ 8 रह गए<br>जबड़ों का साइज होने लगा है छोटा<br>25 साल की उम्र तक निकलता है 29 से लेकर 32वां दांत<br>मोलर दांत अब अवशेषी अंग में हो रहा शामिल</strong><br><br>दांतों को बत्तीसी कहने का चलन अब खत्म होता जा रहा है. इसके पीछे सिर्फ यह वजह नहीं है कि युवा आबादी इस शब्द से वाकिफ नहीं है, बल्कि एक बड़ी वजह यह है कि अब लोगों की बत्तीसी निकल ही नहीं रही है. 21वीं सदी में जन्म लेने वाले लोगों में बहुत बड़ी तादाद उन लोगों की है जिनके सिर्फ 28 दांत ही निकल रहे हैं. वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ डेंटल साइंस में सीनियर डेंटल एक्सपर्ट प्रोफेसर टीपी चतुर्वेदी ने एक स्टडी की है. इसके मुताबिक पिछले 20 साल से उनकी ओपीडी में आने वाले 25% युवाओं के सिर्फ 28 दांत ही निकल रहे हैं. 35% युवाओं को बड़ी मुश्किल से पूरे 32 दांत आ पाते हैं. ये दांत भी टेढ़े-मेढ़े निकलते हैं, जिन्हें ट्रीटमेंट कर ठीक करना पड़ता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/images-5.jpg" alt="" class="wp-image-61301" width="666" height="488"/></figure>



<p><br>प्रो. टीपी चतुर्वेदी ने बताया कि अमूमन 18-25 साल के बीच में लोगों के 29 से लेकर 32वां दांत निकलता है. इसे थर्ड मोलर दांत कहते हैं. आम बोलचाल की भाषा में इसे अक्ल ढाढ़ या विज्डम टीथ भी कहा जाता है. ये जबड़े के सबसे पिछले हिस्से में होते हैं.<br>डॉक्टर का कहना है कि पिछले 20 साल से 25% मरीजों के विज्डम टीथ नहीं निकल रहे हैं. वहीं, एक और चौंकाने वाली बात भी सामने आई है. हमारे मुंह के अंदर खाना चबाने के लिए 12 दांत होते हैं, जिनकी संख्या भी अब घटकर आठ हो गई है. यानी अब लोगों को खाना चबाने में भी समस्या हो रही है. वैसे, सामने की ओर काटने के लिए 20 दांत होते हैं, उनमें कोई बदलाव नहीं है.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="472" src="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/dental.png" alt="" class="wp-image-61303" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2022/04/dental.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2022/04/dental-350x254.png 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><br>प्रोफेसर टीपी चतुर्वेदी कहते हैं कि कम दांत निकलने की यह समस्या शहरी युवाओं में ज्यादा देखने को मिल रही है. इसके पीछे वजह यह है कि नए जमाने के बच्चों ने दांत से कड़ी चीजें खानी कम कर दी हैं या फिर बंद कर दी हैं.पहले लोग भुना चना, भुट्टा और तमाम चीजें चबा-चबाकर खाया करते थे. गांव में अभी भी लोग ऐसा कर रहे हैं. मगर शहरों में अब वह सब बीते जमाने की बात हो गई है. प्रो. चतुर्वेदी ने बताया कि कम चबाने से हुआ यह कि अब हमारे जबड़ों का साइज छोटा होने लगा है. अक्ल दाढ़ उगने के लिए कोई स्थान ही नहीं बच रहा.<br>मोलर दांत धीरे-धीरे अब अवशेषी अंग (वे अंग जो शरीर में होते तो नहीं, लेकिन उनका कोई काम नहीं होता) में शामिल होने की कगार पर है. बड़ी तेजी से लोगों में इसकी कमी देखी जा रही है. वहीं, अब इस युग में मोलर दांत की जरूरत भी नहीं समझी जा रही है. उन्होंने कहा कि यह धीरे-धीरे विलुप्त होता जाएगा और आने वाले 5000 साल में यह मानव का अवशेषी अंग हो जाएगा.</p>



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