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	<title>समान काम समान वेतन &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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	<title>समान काम समान वेतन &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>नियोजित शिक्षकों को झटका!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[dnv md]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 09 Sep 2018 04:02:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नियोजित शिक्षकों को समान काम समान वेतन मामले की बहुचर्चित सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है.  सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी साप्ताहिक केस लिस्ट में कोर्ट नंबर 11 में बिहार के नियोजित शिक्षकों को समान काम के बदले समान वेतन मामले पर चल रही सुनवाई 11 सितंबर (मंगलवार) को सूचीबद्ध नहीं की गई है जबकि इस मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति द्वय अभय मनोहर सप्रे एवं उदय उमेश ललित की खंडपीठ ने पिछली सुनवाई छह सितंबर को मौखिक व लिखित आदेश में सुनवाई की अगली तारीख 11 सितंबर को निर्धारित करते हुए निदेश दिया था कि अटॉर्नी जनरल अपनी बात पूरी करेंगे और शिक्षक संगठनों के शेष वकीलों को भी समय दिया जायेगा जिसके बाद ये सुनवाई समाप्त की जायेगी. लेकिन अगले सप्ताह (11, 12 व 13 सितंबर) में नियोजित शिक्षकों को समान काम के बदले समान वेतन मामले की सुनवाई कोर्ट नंबर-11 में लिस्टेड नहीं है तथा सुनवाई कर रहे दोनों न्यायमूर्ति को अलग-अलग बेंचों में दूसरे न्यायधीशों के साथ बिठा दिया गया है. इसके बाद नियोजित शिक्षकों में आशंका गहरा गई है कि कहीं उनकी सुनवाई ठंडे बस्ते में ना चली जाए. सुनवाई जारी रखने की अपील बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने मुख्य न्यायधीश से पूर्ववत सुनवाई जारी रखने की अपील की है. बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के मीडिया प्रभारी सह प्रवक्ता अभिषेक कुमार ने कहा कि राज्य के करीब चार लाख नियोजित शिक्षक और उनपर आश्रित 20 लाख लोग आस और टकटकी लगाए हुए थे कि अब सुनवाई का पटाक्षेप होगा और उनको न्याय मिलेगा. उन्होंने कहा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नियोजित शिक्षकों को समान काम समान वेतन मामले की बहुचर्चित सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है.  सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी साप्ताहिक केस लिस्ट में कोर्ट नंबर 11 में बिहार के नियोजित शिक्षकों को समान काम के बदले समान वेतन मामले पर चल रही सुनवाई 11 सितंबर (मंगलवार) को सूचीबद्ध नहीं की गई है जबकि इस मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति द्वय अभय मनोहर सप्रे एवं उदय उमेश ललित की खंडपीठ ने पिछली सुनवाई छह सितंबर को मौखिक व लिखित आदेश में सुनवाई की अगली तारीख 11 सितंबर को निर्धारित करते हुए निदेश दिया था कि अटॉर्नी जनरल अपनी बात पूरी करेंगे और शिक्षक संगठनों के शेष वकीलों को भी समय दिया जायेगा जिसके बाद ये सुनवाई समाप्त की जायेगी.</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone wp-image-22534 size-full" src="https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC.jpg" alt="" width="650" height="353" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC-350x190.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><br />
लेकिन अगले सप्ताह (11, 12 व 13 सितंबर) में नियोजित शिक्षकों को समान काम के बदले समान वेतन मामले की सुनवाई कोर्ट नंबर-11 में लिस्टेड नहीं है तथा सुनवाई कर रहे दोनों न्यायमूर्ति को अलग-अलग बेंचों में दूसरे न्यायधीशों के साथ बिठा दिया गया है. इसके बाद नियोजित शिक्षकों में आशंका गहरा गई है कि कहीं उनकी सुनवाई ठंडे बस्ते में ना चली जाए.</p>
<p><strong>सुनवाई जारी रखने की अपील</strong></p>
<p>बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने मुख्य न्यायधीश से पूर्ववत सुनवाई जारी रखने की अपील की है. बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के मीडिया प्रभारी सह प्रवक्ता अभिषेक कुमार ने कहा कि राज्य के करीब चार लाख नियोजित शिक्षक और उनपर आश्रित 20 लाख लोग आस और टकटकी लगाए हुए थे कि अब सुनवाई का पटाक्षेप होगा और उनको न्याय मिलेगा. उन्होंने कहा कि बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से प्रार्थना व अपील करता है कि सुनवाई को पूर्ववत रखा जाए और उनसे उम्मीद करता है कि जारी होने वाले पूरक (सप्लीमेंटरी) लिस्ट में इस केस को शामिल कर लिया जायेगा. उन्होंने बताया कि सभी शिक्षक संगठनों के वकील सोमवार को कोर्ट नंबर-11 सामूहिक रूप से सुनवाई हेतु मेंशन करेंगे.</p>
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		<title>बिहार के 3.5 लाख से ज्यादा शिक्षकों की उम्मीदें बरकरार</title>
		<link>https://www.patnanow.com/niyojit-teacher-sunwai-update/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[dnv md]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 06 Sep 2018 02:26:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट में बिहार के 3.5 लाख से ज्यादा नियोजित शिक्षकों के मामले में सुनवाई जारी है. बुधवार को केन्द्र की ओर से अटर्नी जनरल के वेणुगोपाल ने फिर से कहा कि केन्द्र सरकार इतनी बड़ी राशि नहीं दे सकती. वे पहले भी ये बातें कोर्ट के सामने रख चुके हैं. कोर्ट ने अटर्नी जनरल से पांच सवाल किए हैं जिनके जवाब के लिए उन्होंने गुरुवार तक का समय लिया है. सुप्रीम कोर्ट में हुई कार्रवाई की जानकारी देते हुए बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव व पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने बताया कि जस्टिस यूयू ललित ने अटर्नी जनरल से ये पांच सवाल किये हैं : क्या कभी बिहार में प्राथमिक या माध्यमिक शिक्षकों के बीच की वेतन विषमता दूर हुई है कि नहीं? भारत के जिन राज्यों में सातवां वेतनमान लागू है या जिन राज्यों में इनके कैडर को मिला दिया गया है, उनमें वेतनमान की समानता दी गयी है कि नहीं? जिन राज्यों में वेतनमान की समानता है, क्या उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार से कोई सवाल किया है? बिहार के शिक्षकों के साथ राज्य या भारत सरकार कब तक यह विषमता कायम रखना चाहती है? समानता के अधिकार के लिए संविधान और RTE में जो नियम या अनुच्छेद हैं, उनको लागू करने में क्या कोई संकट हुआ, इसके लिए राज्य और केंद्र सरकार ने क्या-क्या कदम उठाये हैं? बहस के दौरान के वेणुगोपाल ने ड्राइवरों से शिक्षकों की तुलना कर दी.  उन्होंने किशोर लाल मुखर्जी बनाम भारत सरकार तथा दिल्ली पुलिस बनाम भारत सरकार में सुप्रीम [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" class="alignnone wp-image-22534 size-large" src="https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC-650x353.jpg" alt="" width="650" height="353" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC-350x190.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></p>
<p>सुप्रीम कोर्ट में बिहार के 3.5 लाख से ज्यादा नियोजित शिक्षकों के मामले में सुनवाई जारी है. बुधवार को केन्द्र की ओर से अटर्नी जनरल के वेणुगोपाल ने फिर से कहा कि केन्द्र सरकार इतनी बड़ी राशि नहीं दे सकती. वे पहले भी ये बातें कोर्ट के सामने रख चुके हैं. कोर्ट ने अटर्नी जनरल से पांच सवाल किए हैं जिनके जवाब के लिए उन्होंने गुरुवार तक का समय लिया है.</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट में हुई कार्रवाई की जानकारी देते हुए बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव व पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने बताया कि जस्टिस यूयू ललित ने अटर्नी जनरल से ये पांच सवाल किये हैं :</p>
<ol>
<li><strong>क्या कभी बिहार में प्राथमिक या माध्यमिक शिक्षकों के बीच की वेतन विषमता दूर हुई है कि नहीं?</strong></li>
<li><strong>भारत के जिन राज्यों में सातवां वेतनमान लागू है या जिन राज्यों में इनके कैडर को मिला दिया गया है, उनमें वेतनमान की समानता दी गयी है कि नहीं?</strong></li>
<li><strong>जिन राज्यों में वेतनमान की समानता है, क्या उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार से कोई सवाल किया है?</strong></li>
<li><strong>बिहार के शिक्षकों के साथ राज्य या भारत सरकार कब तक यह विषमता कायम रखना चाहती है?</strong></li>
<li><strong>समानता के अधिकार के लिए संविधान और RTE में जो नियम या अनुच्छेद हैं, उनको लागू करने में क्या कोई संकट हुआ, इसके लिए राज्य और केंद्र सरकार ने क्या-क्या कदम उठाये हैं?</strong></li>
</ol>
<p>बहस के दौरान के वेणुगोपाल ने ड्राइवरों से शिक्षकों की तुलना कर दी.  उन्होंने किशोर लाल मुखर्जी बनाम भारत सरकार तथा दिल्ली पुलिस बनाम भारत सरकार में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पटल पर रखकर कहा कि विभिन्न विभागों के विभिन्न ड्राइवर का वेतन अलग-अलग हो सकता है. अलग-अलग कोटि के पुलिस का अलग-अलग वेतन होता है. इसलिए अलग-अलग शिक्षकों का अलग-अलग वेतन हो सकता है. इसपर भी शिक्षक संघ के वकीलों की ओर से आपत्ति जताई गई. वरिष्ठ वकील विजय हंसरिया ने कहा कि सरकार द्वारा ड्राइवर से शिक्षकों की तुलना शर्मनांक है. शिक्षक दिवस के अवसर पर सरकार शिक्षकों को अपमानित कर रही है. सरकार देश को किस दिशा में ले जा रही है?</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल की बहस समाप्त होने के बाद शिक्षक संघों की ओर से भी वकीलों ने अपना पक्ष रखा. इनमें कपिल सिब्बल, राजीव धवन और प्रशांत भूषण शामिल हैं. राजीव धवन ने संवैधानिक अधिकारों की व्याख्या करते हुए इस बात पर जोर दिया कि बिहार के नियोजित शिक्षकों को समान काम के बदले समान वेतन मिलना ही चाहिए.</p>
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		<title>शिक्षकों को मिलनी चाहिए सबसे ज्यादा सैलरी, क्योंकि&#8230;</title>
		<link>https://www.patnanow.com/sc-comments/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[dnv md]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Aug 2018 13:42:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160; समान काम के लिए समान वेतन की मांग कर रहे शिक्षकों को फिर एक नई तारीख मिल गई है. हालांकि उनकी उम्मीदों को हर दिन नए पंख लग रहे हैं. गुरुवार 2 अगस्त को लगातार तीसरे दिन इस मामले की पूरे दिन सुनवाई हुई. इस दौरान एक बार फिर सरकार का पक्ष सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने सुना. इस दौरान एक बार फिर सरकारी वकील वही पुराना राग अलापते नजर आए. इस पर कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी भी की. सरकार का पक्ष रखते कहा कि एक ही बात को बार-बार कहने का क्या मतलब. मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी. जब पैसे नहीं तो बंद क्यों नहीं कर देते सरकारी स्कूल! समान काम के लिए समान वेतन के मामले में गुरुवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस यूयू ललित ने बिहार सरकार के वकील से पूछा कि वर्तमान सिस्टम सुधारने और नियोजन को खत्म करने में आपको कितने दिन लगेंगे. कोर्ट ने वकील से पूछा कि आप IAS ऑफिसर को ज्यादा सैलरी देते हैं, इंजीनियर को ज्यादा सैलरी देते हैं, पर शिक्षक राष्ट्र निर्माता हैं. इन्हें सबसे ज्यादा सैलरी मिलनी चाहिए, जिससे शिक्षक निश्चिंत होकर बेहतर राष्ट्र का निर्माण कर सकें. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को भी राज्य सरकार पर तल्ख टिप्पणी की थी. कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि वेतन निर्धारण और नियमावली का आदेश कौन देता है, सरकार या पंचायत. साथ ही कोर्ट ने कहा था कि अगर राज्य सरकार के पास पैसे नहीं हैं, तो स्कूल को बंद कर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><img decoding="async" class="size-full wp-image-22534 aligncenter" src="http://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC.jpg" alt="" width="650" height="353" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC-350x190.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" />समान काम के लिए समान वेतन की मांग कर रहे शिक्षकों को फिर एक नई तारीख मिल गई है. हालांकि उनकी उम्मीदों को हर दिन नए पंख लग रहे हैं. गुरुवार 2 अगस्त को लगातार तीसरे दिन इस मामले की पूरे दिन सुनवाई हुई. इस दौरान एक बार फिर सरकार का पक्ष सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने सुना. इस दौरान एक बार फिर सरकारी वकील वही पुराना राग अलापते नजर आए. इस पर कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी भी की. सरकार का पक्ष रखते कहा कि एक ही बात को बार-बार कहने का क्या मतलब. मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी.</p>
<p><strong>जब पैसे नहीं तो बंद क्यों नहीं कर देते सरकारी स्कूल!</strong></p>
<p>समान काम के लिए समान वेतन के मामले में गुरुवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस यूयू ललित ने बिहार सरकार के वकील से पूछा कि वर्तमान सिस्टम सुधारने और नियोजन को खत्म करने में आपको कितने दिन लगेंगे. कोर्ट ने वकील से पूछा कि आप IAS ऑफिसर को ज्यादा सैलरी देते हैं, इंजीनियर को ज्यादा सैलरी देते हैं, पर शिक्षक राष्ट्र निर्माता हैं. इन्हें सबसे ज्यादा सैलरी मिलनी चाहिए, जिससे शिक्षक निश्चिंत होकर बेहतर राष्ट्र का निर्माण कर सकें. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को भी राज्य सरकार पर तल्ख टिप्पणी की थी. कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि वेतन निर्धारण और नियमावली का आदेश कौन देता है, सरकार या पंचायत. साथ ही कोर्ट ने कहा था कि अगर राज्य सरकार के पास पैसे नहीं हैं, तो स्कूल को बंद कर देना ही बेहतर होगा.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-25609 size-full" src="http://www.patnanow.com/assets/2017/11/pnc-niyojit-teacher-meeting-patna1.jpg" alt="" width="650" height="488" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/11/pnc-niyojit-teacher-meeting-patna1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2017/11/pnc-niyojit-teacher-meeting-patna1-350x263.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></p>
<p>FILE PIC</p>
<p>बता दें कि बिहार के करीब 4 लाख नियोजित शिक्षक समान काम के लिए समान वेतन की मांग कर रहे हैं. पटना हाईकोर्ट ने इस मामले में 31 अक्टूबर 2017 को शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुना चुका है. हाईकोर्ट ने बिहार सरकार को आदेश दिया था कि नियोजित शिक्षकों को ना सिर्फ समान काम के लिए समान वेतन मिले बल्कि वर्ष 2003 से उनका एरियर भी उन्हें दिया जाए. इसके बाद बिहार सरकार ने वित्तीय हालात का रोना रोते हुए सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी. इधर शिक्षकों ने भी कैवियट दायर करके सरकार की एसएलपी का विरोध दर्ज किया था. इसी को लेकर जनवरी से ये सुनवाई चल रही है.</p>
<p>ब्यूरो रिपोर्ट</p>
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