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	<title>नियोजित शिक्षक &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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	<title>नियोजित शिक्षक &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>नियोजित शिक्षकों को जोर का झटका, वजह भी जान लीजिए</title>
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		<dc:creator><![CDATA[dnv md]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Jun 2022 02:26:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[CITY/OFFICE]]></category>
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		<category><![CDATA[नियोजित शिक्षक]]></category>
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					<description><![CDATA[पिछले 15 साल से अपने कंफर्ट जोन में तबादले की बाट जोह रहे नियोजित शिक्षकों को शिक्षा विभाग ने एक और बड़ा झटका दिया है. अब उन्हें सातवें चरण की बहाली खत्म होने का इंतजार करना होगा उसके बाद ही नई नियमावली के तहत उनका ऐच्छिक तबादला (एक नियोजन इकाई से दूसरी नियोजन इकाई) हो सकेगा. शिक्षा विभाग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सातवां चरण पूरा होगा उसके बाद ही ऐच्छिक तबादला होगा. यानी 2-4 साल का और इंतजार. शिक्षकों ने 2 साल पहले लगभग 70 दिनों की लंबी हड़ताल की थी जिसके बाद सरकार ने नियोजित शिक्षकों के लिए नियमावली बनाई थी. नियमावली के तहत अन्य बातों के अलावा शिक्षकों को एक बार ऐच्छिक स्थानांतरण की सुविधा देने की बात कही गई थी. वर्ष 2020 के अगस्त महीने में सरकार ने यह घोषणा की थी लेकिन दो साल बाद भी सरकार इस पर काम नहीं कर पाई है. एक सॉफ्टवेयर तक सरकार तैयार नहीं कर पाई है जिसके जरिए इच्छुक शिक्षक तबादले के लिए आवेदन कर सकेंगे. इसका खामियाजा बिहार के दूरदराज इलाकों में काम कर रहे शिक्षक, विशेष तौर पर महिला और दिव्यांग शिक्षक भुगत रहे हैं. लेकिन अब इसके पीछे की वजह भी समझ लीजिए. उन्हें असली खामियाजा भुगतना पड़ रहा है उन बड़े शिक्षक संघों की वजह से, जो इस बारे में उनकी परेशानी शिक्षा विभाग तक नहीं पहुंचा पा रहे. शिक्षक संघ से जुड़ी कई महिला शिक्षकों ने कहा है कि दरअसल बड़े-बड़े शिक्षक संघ के शिक्षक नेता पटना समेत अन्य जिला मुख्यालयों [&#8230;]]]></description>
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<p>पिछले 15 साल से अपने कंफर्ट जोन में तबादले की बाट जोह रहे नियोजित शिक्षकों को शिक्षा विभाग ने एक और बड़ा झटका दिया है. अब उन्हें सातवें चरण की बहाली खत्म होने का इंतजार करना होगा उसके बाद ही नई नियमावली के तहत उनका <strong>ऐच्छिक तबादला (एक नियोजन इकाई से दूसरी नियोजन इकाई) </strong>हो सकेगा. शिक्षा विभाग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सातवां चरण पूरा होगा उसके बाद ही ऐच्छिक तबादला होगा. यानी 2-4 साल का और इंतजार.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="400" height="400" src="https://www.patnanow.com/assets/2021/03/pnc-bihar-education-department-logo.jpg" alt="" class="wp-image-51521" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2021/03/pnc-bihar-education-department-logo.jpg 400w, https://www.patnanow.com/assets/2021/03/pnc-bihar-education-department-logo-350x350.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2021/03/pnc-bihar-education-department-logo-250x250.jpg 250w" sizes="(max-width: 400px) 100vw, 400px" /></figure>



<p>शिक्षकों ने 2 साल पहले लगभग 70 दिनों की लंबी हड़ताल की थी जिसके बाद सरकार ने नियोजित शिक्षकों के लिए नियमावली बनाई थी. नियमावली के तहत अन्य बातों के अलावा शिक्षकों को एक बार ऐच्छिक स्थानांतरण की सुविधा देने की बात कही गई थी. वर्ष 2020 के अगस्त महीने में सरकार ने यह घोषणा की थी लेकिन दो साल बाद भी सरकार इस पर काम नहीं कर पाई है. एक सॉफ्टवेयर तक सरकार तैयार नहीं कर पाई है जिसके जरिए इच्छुक शिक्षक तबादले के लिए आवेदन कर सकेंगे. इसका खामियाजा बिहार के दूरदराज इलाकों में काम कर रहे शिक्षक, विशेष तौर पर महिला और दिव्यांग शिक्षक भुगत रहे हैं. लेकिन अब इसके पीछे की वजह भी समझ लीजिए. उन्हें असली खामियाजा भुगतना पड़ रहा है उन बड़े शिक्षक संघों की वजह से, जो इस बारे में उनकी परेशानी शिक्षा विभाग तक नहीं पहुंचा पा रहे. शिक्षक संघ से जुड़ी कई महिला शिक्षकों ने कहा है कि दरअसल बड़े-बड़े शिक्षक संघ के शिक्षक नेता पटना समेत अन्य जिला मुख्यालयों में प्रमुख स्थलों पर पदस्थापित हैं और उन्हें खुद कोई परेशानी नहीं है. इसलिए वे बाकी शिक्षकों की परेशानी नहीं समझ रहे और आराम से बैठे हैं. इस बारे में उन्होंने अब तक कोई रणनीति नहीं बनाई और ना ही शिक्षा विभाग तक वे मजबूती से अपनी बात पहुंचा पा रहे हैं जिसका खामियाजा महिलाएं और दिव्यांग शिक्षक भुगत रहे हैं. इधर सातवें चरण की बहाली के लिए जब शिक्षक अभ्यर्थियों ने कई दिनों तक पटना में आंदोलन किया तो इसका प्रभाव देखने को मिला और शिक्षा विभाग ने आनन-फानन में सभी जिलों से रिक्तियों की संख्या से संबंधित पत्र भी जारी कर दिया है और यह निर्णय लिया है कि सातवें चरण की बहाली होने के बाद ही तबादला होगा. लेकिन यह तय है कि सातवें चरण में कम से कम 2-4 साल का वक्त लग जाएगा यानी 2-4 साल और शिक्षकों को मनमाफिक स्थानांतरण का इंतजार करना पड़ेगा.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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		<title>सेवा शर्त पर पहली मीटिंग में पुराने ड्राफ्ट पर हुई चर्चा</title>
		<link>https://www.patnanow.com/meeting-on-niyojit-teachers-sewa-shart-update/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[dnv md]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Jul 2020 18:34:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[बिहार में नियोजित शिक्षकों के सेवा शर्त तय करने के लिए पुनर्गठित हाई लेवल कमिटी की पहली बैठक सोमवार को हुई. बैठक में अपर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी, शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव आरके महाजन, पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव, वित्त विभाग के प्रधान सचिव और नगर विकास विभाग के सचिव के साथ एक अपर महाधिवक्ता भी शामिल थे. सूत्रों के मुताबिक सरकार जल्द से जल्द नियोजित शिक्षकों की सेवा शर्त लागू करने के पक्ष में है. चुनावी साल में नीतीश कुमार कोई रिस्क नहीं लेना चाहते. शिक्षक भी कई बार नाराजगी जता चुके हैं. ऐसे में हाई लेवल कमिटी भी जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप सकती है. पहली बैठक में 3 साल पहले से तैयार किए गए सेवा शर्त ड्राफ्ट पर चर्चा हुई. हालांकि सेवा शर्तों को लेकर कोई सहमति पहली बैठक में नहीं बन पाई है. जानकारी के अनुसार, आगे कुछ और बैठकें होंगी और उसके बाद कमेटी अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप सकती है. पीएनसी]]></description>
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<p>बिहार में नियोजित शिक्षकों के सेवा शर्त  तय करने के लिए पुनर्गठित हाई लेवल कमिटी की पहली बैठक सोमवार को हुई. बैठक में अपर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी, शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव आरके महाजन, पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव, वित्त विभाग के प्रधान सचिव और नगर विकास विभाग के सचिव के साथ एक अपर महाधिवक्ता भी शामिल थे.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="427" src="https://www.patnanow.com/assets/2020/07/pnc-amir-subhani-meeting-on-sewa-shart.jpg" alt="" class="wp-image-47693" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2020/07/pnc-amir-subhani-meeting-on-sewa-shart.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2020/07/pnc-amir-subhani-meeting-on-sewa-shart-350x230.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>सूत्रों के मुताबिक  सरकार जल्द से जल्द नियोजित शिक्षकों की सेवा शर्त लागू करने के पक्ष में है. चुनावी साल में नीतीश कुमार कोई रिस्क नहीं लेना चाहते. शिक्षक भी कई बार नाराजगी जता चुके हैं. ऐसे में हाई लेवल कमिटी भी जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप सकती है. पहली बैठक में 3 साल पहले से तैयार किए गए सेवा शर्त ड्राफ्ट पर चर्चा हुई. हालांकि सेवा शर्तों को लेकर कोई सहमति पहली बैठक में नहीं बन पाई है. जानकारी के अनुसार, आगे कुछ और बैठकें होंगी और उसके बाद कमेटी अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप सकती है.</p>



<p><strong>पीएनसी</strong></p>
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			</item>
		<item>
		<title>प्रशिक्षित शिक्षक अब सड़क पर लड़ने को तैयार</title>
		<link>https://www.patnanow.com/niyojit-shikshak-ab-sadak-par-karenge-pradarshan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Nikhil]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 21 Sep 2019 09:29:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना (राजेश तिवारी) &#124; एनआईओएस से डीएलएड किए हुए प्रशिक्षित शिक्षक अपनी डिग्री को मान्यता दिलाने के लिए अब कोर्ट से लेकर सड़क पर लड़ने को तैयार हैं. ये प्रशिक्षित शिक्षक 25 सितंबर को राजधानी के गर्दनीबाग में धरना प्रदर्शन करेंगे. इन प्रशिक्षित शिक्षकों की मांग है कि &#8220;समान डिग्री समान नियोजन&#8221; किया जाए. इन प्रशिक्षित शिक्षकों का ये भी कहना है कि अगर एक ही संस्था से कराए गए डिग्री को अगर राज्य सरकार सरकारी शिक्षकों को मान्यता देती है तो गैर सरकारी शिक्षकों को नियोजन इकाई में क्यों नहीं मान्यता देगी. यह सभी नव प्रशिक्षु शिक्षक आगामी 25 सितंबर को राजधानी के गर्दनीबाग में धरना प्रदर्शन किए प्रशासन से इजाजत ले ली है. आपको बता दें कि बिहार में तकरीबन ढाई लाख प्रशिक्षित शिक्षक बिहार नियोजन प्रक्रिया 2019 -20 से सरकार की गलत नीतियों से नियोजन प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं.]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" width="650" height="340" src="https://www.patnanow.com/assets/2019/09/PNC-Niyojit-shikshak-karenge-pradarshan-650x340.png" alt="" class="wp-image-41267" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2019/09/PNC-Niyojit-shikshak-karenge-pradarshan.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2019/09/PNC-Niyojit-shikshak-karenge-pradarshan-350x183.png 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p><strong>पटना (राजेश तिवारी)</strong> | एनआईओएस से डीएलएड किए हुए प्रशिक्षित शिक्षक अपनी डिग्री को मान्यता दिलाने के लिए अब कोर्ट से लेकर सड़क पर लड़ने को तैयार हैं. ये प्रशिक्षित शिक्षक 25 सितंबर को राजधानी के गर्दनीबाग में धरना प्रदर्शन करेंगे. इन प्रशिक्षित शिक्षकों की मांग है कि &#8220;समान डिग्री समान नियोजन&#8221; किया जाए. इन प्रशिक्षित शिक्षकों का ये भी कहना है कि अगर एक ही संस्था से कराए गए डिग्री को अगर राज्य सरकार सरकारी शिक्षकों को मान्यता देती है तो गैर सरकारी शिक्षकों को नियोजन इकाई में क्यों नहीं मान्यता देगी. यह सभी नव प्रशिक्षु शिक्षक आगामी 25 सितंबर को राजधानी के गर्दनीबाग में धरना प्रदर्शन किए प्रशासन से इजाजत ले ली है. आपको बता दें कि बिहार में तकरीबन ढाई लाख प्रशिक्षित शिक्षक बिहार नियोजन प्रक्रिया 2019 -20 से सरकार की गलत नीतियों से नियोजन प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>नियोजित शिक्षकों के लिए आने वाला है बड़ा फैसला</title>
		<link>https://www.patnanow.com/niyojit-teacher-case-update-new/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[dnv md]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Sep 2018 16:24:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
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		<category><![CDATA[नियोजित शिक्षक]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट सुनवाई]]></category>
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					<description><![CDATA[करीब एक साल से सरकार और कोर्ट के चक्कर में पड़े बिहार के लाखों नियोजित शिक्षकों के लिए एक बार फिर राहत भरी खबर है. सुप्रीम कोर्ट में जारी सुनवाई में इस महीने ही बड़ा फैसला आने की उम्मीद बढ़ गई है. नियोजित शिक्षकों के समान काम समान वेतन मामले की सुप्रीम कोर्ट में 25, 26 और 27 सितम्बर को सुनवाई होगी. शनिवार को सुप्रीम कोर्ट ने अगले सप्ताह का केस लिस्ट जारी कर दिया है. जस्टिस अभय मनोहर सप्रे और जस्टिस यू यू ललित की अदालत में 25 सितम्बर के यह केस पहले नम्बर पर सूचीबद्ध है. अब ये उम्मीद की जा रहा है कि अगले सप्ताह तक इस केस पर फैसला आ सकता है. तीनों दिन सुनवाई करेगी दो सदस्यीय खंडपीठ 25, 26 और 27 सितम्बर को न्यायमूर्ति अभय़ मनोहर सप्रे और न्यामूर्ति यूयू ललित की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई करेगी. 25 और 26 सितम्बर को फुल डे कोर्ट है जबकि 27 सितम्बर को हाफ डे कोर्ट है. लगातार तीन दिनों तक सुनवाई होने से अब ये उम्मीद की जा रही है कि नियोजित शिक्षकों के मामले में अब फैसला आ सकता है. नियोजित शिक्षकों को है फैसले का इंतजार सुप्रीम कोर्ट में 19 सितम्बर को इस मामले की सुनवाई हुई थी लेकिन अटर्नी जनरल की बात पूरी ना होने के कारण कोर्ट ने अगला डेट दे दिया था. अब 25 सितम्बर से फिर इस मामले की सुनवाई होनी है. 3 लाख 70 हजार नियोजित शिक्षकों को कोर्ट के फैसले का इंतजार है. पिछली सुनावाई में टीइटी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-22534 size-slider" src="https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC-650x320.jpg" alt="" width="650" height="320" /></p>
<p>करीब एक साल से सरकार और कोर्ट के चक्कर में पड़े बिहार के लाखों नियोजित शिक्षकों के लिए एक बार फिर राहत भरी खबर है. सुप्रीम कोर्ट में जारी सुनवाई में इस महीने ही बड़ा फैसला आने की उम्मीद बढ़ गई है. नियोजित शिक्षकों के समान काम समान वेतन मामले की सुप्रीम कोर्ट में 25, 26 और 27 सितम्बर को सुनवाई होगी. शनिवार को सुप्रीम कोर्ट ने अगले सप्ताह का केस लिस्ट जारी कर दिया है. जस्टिस अभय मनोहर सप्रे और जस्टिस यू यू ललित की अदालत में 25 सितम्बर के यह केस पहले नम्बर पर सूचीबद्ध है. अब ये उम्मीद की जा रहा है कि अगले सप्ताह तक इस केस पर फैसला आ सकता है.</p>
<p><strong>तीनों दिन सुनवाई करेगी दो सदस्यीय खंडपीठ</strong></p>
<p>25, 26 और 27 सितम्बर को न्यायमूर्ति अभय़ मनोहर सप्रे और न्यामूर्ति यूयू ललित की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई करेगी. 25 और 26 सितम्बर को फुल डे कोर्ट है जबकि 27 सितम्बर को हाफ डे कोर्ट है. लगातार तीन दिनों तक सुनवाई होने से अब ये उम्मीद की जा रही है कि नियोजित शिक्षकों के मामले में अब फैसला आ सकता है.</p>
<p><strong>नियोजित शिक्षकों को है फैसले का इंतजार</strong></p>
<p>सुप्रीम कोर्ट में 19 सितम्बर को इस मामले की सुनवाई हुई थी लेकिन अटर्नी जनरल की बात पूरी ना होने के कारण कोर्ट ने अगला डेट दे दिया था. अब 25 सितम्बर से फिर इस मामले की सुनवाई होनी है. 3 लाख 70 हजार नियोजित शिक्षकों को कोर्ट के फैसले का इंतजार है. पिछली सुनावाई में टीइटी शिक्षकों की वकील विभा दत्त मखीजा ने उनका पक्ष रखा था. उन्होंने कहा था कि क्वालिटी एजुकेशन तभी संभव है जब हमारे पास क्वालिटी टीचर हों. शिक्षकों को न्यूनतम योग्यता के साथ टीइटी पास होना अनिवार्य है.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-25611 size-large" src="https://www.patnanow.com/assets/2017/11/pnc-niyojit-teacher-meeting-patna12-alok-priyadarshi23-650x509.jpg" alt="" width="650" height="509" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/11/pnc-niyojit-teacher-meeting-patna12-alok-priyadarshi23.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2017/11/pnc-niyojit-teacher-meeting-patna12-alok-priyadarshi23-350x274.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></p>
<p>File pic</p>
<p>दूसरी ओर बिहार सरकार और केन्द्र सरकार की तरफ से कोर्ट में यह कहा गया है कि नियोजित शिक्षकों के समान काम के बदले समान वेतन देने के लिए आर्थिक क्षमता नहीं है. बिहार सरकार नियोजित शिक्षकों के वेतन में 20 फीसदी बढ़ोतरी के लिए तैयार है. इस मामले में कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि क्या नियोजित शिक्षकों को समान वेतन नहीं देने से क्वालिटी एजुकेशन मुमकिन है ? कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि एक शिक्षक को 70 हजार वेतन और एक शिक्षक को 26 हजार क्यों दिया जा रहा है ? फिलहाल इस मामले में दोनों पक्षों की तरफ से बहस जारी है.</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>राजेश तिवारी</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>नियोजित शिक्षकों को झटका!</title>
		<link>https://www.patnanow.com/niyojit-shikshak-case-update/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[dnv md]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 09 Sep 2018 04:02:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[CITY/OFFICE]]></category>
		<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[NIYOJIT SHIKSHAK]]></category>
		<category><![CDATA[UPDATE]]></category>
		<category><![CDATA[नियोजित शिक्षक]]></category>
		<category><![CDATA[समान काम समान वेतन]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट सुनवाई]]></category>
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					<description><![CDATA[नियोजित शिक्षकों को समान काम समान वेतन मामले की बहुचर्चित सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है.  सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी साप्ताहिक केस लिस्ट में कोर्ट नंबर 11 में बिहार के नियोजित शिक्षकों को समान काम के बदले समान वेतन मामले पर चल रही सुनवाई 11 सितंबर (मंगलवार) को सूचीबद्ध नहीं की गई है जबकि इस मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति द्वय अभय मनोहर सप्रे एवं उदय उमेश ललित की खंडपीठ ने पिछली सुनवाई छह सितंबर को मौखिक व लिखित आदेश में सुनवाई की अगली तारीख 11 सितंबर को निर्धारित करते हुए निदेश दिया था कि अटॉर्नी जनरल अपनी बात पूरी करेंगे और शिक्षक संगठनों के शेष वकीलों को भी समय दिया जायेगा जिसके बाद ये सुनवाई समाप्त की जायेगी. लेकिन अगले सप्ताह (11, 12 व 13 सितंबर) में नियोजित शिक्षकों को समान काम के बदले समान वेतन मामले की सुनवाई कोर्ट नंबर-11 में लिस्टेड नहीं है तथा सुनवाई कर रहे दोनों न्यायमूर्ति को अलग-अलग बेंचों में दूसरे न्यायधीशों के साथ बिठा दिया गया है. इसके बाद नियोजित शिक्षकों में आशंका गहरा गई है कि कहीं उनकी सुनवाई ठंडे बस्ते में ना चली जाए. सुनवाई जारी रखने की अपील बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने मुख्य न्यायधीश से पूर्ववत सुनवाई जारी रखने की अपील की है. बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के मीडिया प्रभारी सह प्रवक्ता अभिषेक कुमार ने कहा कि राज्य के करीब चार लाख नियोजित शिक्षक और उनपर आश्रित 20 लाख लोग आस और टकटकी लगाए हुए थे कि अब सुनवाई का पटाक्षेप होगा और उनको न्याय मिलेगा. उन्होंने कहा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नियोजित शिक्षकों को समान काम समान वेतन मामले की बहुचर्चित सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है.  सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी साप्ताहिक केस लिस्ट में कोर्ट नंबर 11 में बिहार के नियोजित शिक्षकों को समान काम के बदले समान वेतन मामले पर चल रही सुनवाई 11 सितंबर (मंगलवार) को सूचीबद्ध नहीं की गई है जबकि इस मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति द्वय अभय मनोहर सप्रे एवं उदय उमेश ललित की खंडपीठ ने पिछली सुनवाई छह सितंबर को मौखिक व लिखित आदेश में सुनवाई की अगली तारीख 11 सितंबर को निर्धारित करते हुए निदेश दिया था कि अटॉर्नी जनरल अपनी बात पूरी करेंगे और शिक्षक संगठनों के शेष वकीलों को भी समय दिया जायेगा जिसके बाद ये सुनवाई समाप्त की जायेगी.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-22534 size-full" src="https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC.jpg" alt="" width="650" height="353" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC-350x190.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /><br />
लेकिन अगले सप्ताह (11, 12 व 13 सितंबर) में नियोजित शिक्षकों को समान काम के बदले समान वेतन मामले की सुनवाई कोर्ट नंबर-11 में लिस्टेड नहीं है तथा सुनवाई कर रहे दोनों न्यायमूर्ति को अलग-अलग बेंचों में दूसरे न्यायधीशों के साथ बिठा दिया गया है. इसके बाद नियोजित शिक्षकों में आशंका गहरा गई है कि कहीं उनकी सुनवाई ठंडे बस्ते में ना चली जाए.</p>
<p><strong>सुनवाई जारी रखने की अपील</strong></p>
<p>बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने मुख्य न्यायधीश से पूर्ववत सुनवाई जारी रखने की अपील की है. बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के मीडिया प्रभारी सह प्रवक्ता अभिषेक कुमार ने कहा कि राज्य के करीब चार लाख नियोजित शिक्षक और उनपर आश्रित 20 लाख लोग आस और टकटकी लगाए हुए थे कि अब सुनवाई का पटाक्षेप होगा और उनको न्याय मिलेगा. उन्होंने कहा कि बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से प्रार्थना व अपील करता है कि सुनवाई को पूर्ववत रखा जाए और उनसे उम्मीद करता है कि जारी होने वाले पूरक (सप्लीमेंटरी) लिस्ट में इस केस को शामिल कर लिया जायेगा. उन्होंने बताया कि सभी शिक्षक संगठनों के वकील सोमवार को कोर्ट नंबर-11 सामूहिक रूप से सुनवाई हेतु मेंशन करेंगे.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>बिहार के 3.5 लाख से ज्यादा शिक्षकों की उम्मीदें बरकरार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[dnv md]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 06 Sep 2018 02:26:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट में बिहार के 3.5 लाख से ज्यादा नियोजित शिक्षकों के मामले में सुनवाई जारी है. बुधवार को केन्द्र की ओर से अटर्नी जनरल के वेणुगोपाल ने फिर से कहा कि केन्द्र सरकार इतनी बड़ी राशि नहीं दे सकती. वे पहले भी ये बातें कोर्ट के सामने रख चुके हैं. कोर्ट ने अटर्नी जनरल से पांच सवाल किए हैं जिनके जवाब के लिए उन्होंने गुरुवार तक का समय लिया है. सुप्रीम कोर्ट में हुई कार्रवाई की जानकारी देते हुए बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव व पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने बताया कि जस्टिस यूयू ललित ने अटर्नी जनरल से ये पांच सवाल किये हैं : क्या कभी बिहार में प्राथमिक या माध्यमिक शिक्षकों के बीच की वेतन विषमता दूर हुई है कि नहीं? भारत के जिन राज्यों में सातवां वेतनमान लागू है या जिन राज्यों में इनके कैडर को मिला दिया गया है, उनमें वेतनमान की समानता दी गयी है कि नहीं? जिन राज्यों में वेतनमान की समानता है, क्या उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार से कोई सवाल किया है? बिहार के शिक्षकों के साथ राज्य या भारत सरकार कब तक यह विषमता कायम रखना चाहती है? समानता के अधिकार के लिए संविधान और RTE में जो नियम या अनुच्छेद हैं, उनको लागू करने में क्या कोई संकट हुआ, इसके लिए राज्य और केंद्र सरकार ने क्या-क्या कदम उठाये हैं? बहस के दौरान के वेणुगोपाल ने ड्राइवरों से शिक्षकों की तुलना कर दी.  उन्होंने किशोर लाल मुखर्जी बनाम भारत सरकार तथा दिल्ली पुलिस बनाम भारत सरकार में सुप्रीम [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-22534 size-large" src="https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC-650x353.jpg" alt="" width="650" height="353" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC-350x190.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></p>
<p>सुप्रीम कोर्ट में बिहार के 3.5 लाख से ज्यादा नियोजित शिक्षकों के मामले में सुनवाई जारी है. बुधवार को केन्द्र की ओर से अटर्नी जनरल के वेणुगोपाल ने फिर से कहा कि केन्द्र सरकार इतनी बड़ी राशि नहीं दे सकती. वे पहले भी ये बातें कोर्ट के सामने रख चुके हैं. कोर्ट ने अटर्नी जनरल से पांच सवाल किए हैं जिनके जवाब के लिए उन्होंने गुरुवार तक का समय लिया है.</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट में हुई कार्रवाई की जानकारी देते हुए बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव व पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने बताया कि जस्टिस यूयू ललित ने अटर्नी जनरल से ये पांच सवाल किये हैं :</p>
<ol>
<li><strong>क्या कभी बिहार में प्राथमिक या माध्यमिक शिक्षकों के बीच की वेतन विषमता दूर हुई है कि नहीं?</strong></li>
<li><strong>भारत के जिन राज्यों में सातवां वेतनमान लागू है या जिन राज्यों में इनके कैडर को मिला दिया गया है, उनमें वेतनमान की समानता दी गयी है कि नहीं?</strong></li>
<li><strong>जिन राज्यों में वेतनमान की समानता है, क्या उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार से कोई सवाल किया है?</strong></li>
<li><strong>बिहार के शिक्षकों के साथ राज्य या भारत सरकार कब तक यह विषमता कायम रखना चाहती है?</strong></li>
<li><strong>समानता के अधिकार के लिए संविधान और RTE में जो नियम या अनुच्छेद हैं, उनको लागू करने में क्या कोई संकट हुआ, इसके लिए राज्य और केंद्र सरकार ने क्या-क्या कदम उठाये हैं?</strong></li>
</ol>
<p>बहस के दौरान के वेणुगोपाल ने ड्राइवरों से शिक्षकों की तुलना कर दी.  उन्होंने किशोर लाल मुखर्जी बनाम भारत सरकार तथा दिल्ली पुलिस बनाम भारत सरकार में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पटल पर रखकर कहा कि विभिन्न विभागों के विभिन्न ड्राइवर का वेतन अलग-अलग हो सकता है. अलग-अलग कोटि के पुलिस का अलग-अलग वेतन होता है. इसलिए अलग-अलग शिक्षकों का अलग-अलग वेतन हो सकता है. इसपर भी शिक्षक संघ के वकीलों की ओर से आपत्ति जताई गई. वरिष्ठ वकील विजय हंसरिया ने कहा कि सरकार द्वारा ड्राइवर से शिक्षकों की तुलना शर्मनांक है. शिक्षक दिवस के अवसर पर सरकार शिक्षकों को अपमानित कर रही है. सरकार देश को किस दिशा में ले जा रही है?</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल की बहस समाप्त होने के बाद शिक्षक संघों की ओर से भी वकीलों ने अपना पक्ष रखा. इनमें कपिल सिब्बल, राजीव धवन और प्रशांत भूषण शामिल हैं. राजीव धवन ने संवैधानिक अधिकारों की व्याख्या करते हुए इस बात पर जोर दिया कि बिहार के नियोजित शिक्षकों को समान काम के बदले समान वेतन मिलना ही चाहिए.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>शिक्षकों को मिलनी चाहिए सबसे ज्यादा सैलरी, क्योंकि&#8230;</title>
		<link>https://www.patnanow.com/sc-comments/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[dnv md]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Aug 2018 13:42:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[&#160; समान काम के लिए समान वेतन की मांग कर रहे शिक्षकों को फिर एक नई तारीख मिल गई है. हालांकि उनकी उम्मीदों को हर दिन नए पंख लग रहे हैं. गुरुवार 2 अगस्त को लगातार तीसरे दिन इस मामले की पूरे दिन सुनवाई हुई. इस दौरान एक बार फिर सरकार का पक्ष सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने सुना. इस दौरान एक बार फिर सरकारी वकील वही पुराना राग अलापते नजर आए. इस पर कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी भी की. सरकार का पक्ष रखते कहा कि एक ही बात को बार-बार कहने का क्या मतलब. मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी. जब पैसे नहीं तो बंद क्यों नहीं कर देते सरकारी स्कूल! समान काम के लिए समान वेतन के मामले में गुरुवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस यूयू ललित ने बिहार सरकार के वकील से पूछा कि वर्तमान सिस्टम सुधारने और नियोजन को खत्म करने में आपको कितने दिन लगेंगे. कोर्ट ने वकील से पूछा कि आप IAS ऑफिसर को ज्यादा सैलरी देते हैं, इंजीनियर को ज्यादा सैलरी देते हैं, पर शिक्षक राष्ट्र निर्माता हैं. इन्हें सबसे ज्यादा सैलरी मिलनी चाहिए, जिससे शिक्षक निश्चिंत होकर बेहतर राष्ट्र का निर्माण कर सकें. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को भी राज्य सरकार पर तल्ख टिप्पणी की थी. कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि वेतन निर्धारण और नियमावली का आदेश कौन देता है, सरकार या पंचायत. साथ ही कोर्ट ने कहा था कि अगर राज्य सरकार के पास पैसे नहीं हैं, तो स्कूल को बंद कर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-22534 aligncenter" src="http://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC.jpg" alt="" width="650" height="353" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC-350x190.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" />समान काम के लिए समान वेतन की मांग कर रहे शिक्षकों को फिर एक नई तारीख मिल गई है. हालांकि उनकी उम्मीदों को हर दिन नए पंख लग रहे हैं. गुरुवार 2 अगस्त को लगातार तीसरे दिन इस मामले की पूरे दिन सुनवाई हुई. इस दौरान एक बार फिर सरकार का पक्ष सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने सुना. इस दौरान एक बार फिर सरकारी वकील वही पुराना राग अलापते नजर आए. इस पर कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी भी की. सरकार का पक्ष रखते कहा कि एक ही बात को बार-बार कहने का क्या मतलब. मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी.</p>
<p><strong>जब पैसे नहीं तो बंद क्यों नहीं कर देते सरकारी स्कूल!</strong></p>
<p>समान काम के लिए समान वेतन के मामले में गुरुवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस यूयू ललित ने बिहार सरकार के वकील से पूछा कि वर्तमान सिस्टम सुधारने और नियोजन को खत्म करने में आपको कितने दिन लगेंगे. कोर्ट ने वकील से पूछा कि आप IAS ऑफिसर को ज्यादा सैलरी देते हैं, इंजीनियर को ज्यादा सैलरी देते हैं, पर शिक्षक राष्ट्र निर्माता हैं. इन्हें सबसे ज्यादा सैलरी मिलनी चाहिए, जिससे शिक्षक निश्चिंत होकर बेहतर राष्ट्र का निर्माण कर सकें. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को भी राज्य सरकार पर तल्ख टिप्पणी की थी. कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि वेतन निर्धारण और नियमावली का आदेश कौन देता है, सरकार या पंचायत. साथ ही कोर्ट ने कहा था कि अगर राज्य सरकार के पास पैसे नहीं हैं, तो स्कूल को बंद कर देना ही बेहतर होगा.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-25609 size-full" src="http://www.patnanow.com/assets/2017/11/pnc-niyojit-teacher-meeting-patna1.jpg" alt="" width="650" height="488" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/11/pnc-niyojit-teacher-meeting-patna1.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2017/11/pnc-niyojit-teacher-meeting-patna1-350x263.jpg 350w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></p>
<p>FILE PIC</p>
<p>बता दें कि बिहार के करीब 4 लाख नियोजित शिक्षक समान काम के लिए समान वेतन की मांग कर रहे हैं. पटना हाईकोर्ट ने इस मामले में 31 अक्टूबर 2017 को शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुना चुका है. हाईकोर्ट ने बिहार सरकार को आदेश दिया था कि नियोजित शिक्षकों को ना सिर्फ समान काम के लिए समान वेतन मिले बल्कि वर्ष 2003 से उनका एरियर भी उन्हें दिया जाए. इसके बाद बिहार सरकार ने वित्तीय हालात का रोना रोते हुए सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी. इधर शिक्षकों ने भी कैवियट दायर करके सरकार की एसएलपी का विरोध दर्ज किया था. इसी को लेकर जनवरी से ये सुनवाई चल रही है.</p>
<p>ब्यूरो रिपोर्ट</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>नियोजित शिक्षकों को मिली एक और तारीख</title>
		<link>https://www.patnanow.com/niyojit-teacher-swsp-update/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[dnv md]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 27 Mar 2018 15:22:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[MONEY MATTERS]]></category>
		<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
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		<category><![CDATA[नियोजित शिक्षक]]></category>
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					<description><![CDATA[बिहार के करीब साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षकों का इंतजार लंबा होता जा रहा है. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए अब फाइनल हियरिंग के लिए 12 जुलाई का वक्त दिया है. समान काम के लिए समान वेतन की मांग कर रहे नियोजित शिक्षक पटना हाईकोर्ट के आदेश को लागू करने की मांग कर रहे हैं.  मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में समान काम के लिए समान वेतन के मामले में सुनवाई में हुई. सुनवाई के दौरान केन्द्र सरकार ने इस मामले में कोर्ट से चार हफ्ते का समय मांगा. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को चार सप्ताह के अंदर कंप्रिहेंसिव एक्शन स्कीम से संबंधित हलफनामा पेश करने को कहा है. आपको याद दिला दें कि इससे पहले, बिहार सरकार ने कहा था कि नियोजित शिक्षकों के परीक्षा में पास होने से ही सैलरी इन्क्रीमेंट होगा और ये वृद्धि 20 फीसदी की होगी, लेकिन कोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया. मंगलवार को भी बिहार सरकार से 30 फीसदी वेतन वृद्धि का प्रपोजल दिया गया लेकिन कोर्ट ने सरकार से कहा कि एक ऐसी स्किम लाएं, जिससे बिहार ही नहीं, बल्कि समान काम के लिए समान वेतन मांगने वाले अन्य प्रदेश के  सभी शिक्षकों का भी भला हो सके. कोर्ट ने कहा कि इसके लिए केन्द्र सरकार और बिहार सरकार बैठ कर बात करें. सुप्रीम कोर्ट ने अटार्नी जनरल की दलील पर चार सप्ताह का समय दिया और कहा कि केन्द्र सरकार चार सप्ताह के भीतर कम्प्रिहैंसिव स्कीम बनाए और कोर्ट में हलफनामा दाखिल करे. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>बिहार के करीब साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षकों का इंतजार लंबा होता जा रहा है. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए अब फाइनल हियरिंग के लिए 12 जुलाई का वक्त दिया है. समान काम के लिए समान वेतन की मांग कर रहे नियोजित शिक्षक पटना हाईकोर्ट के आदेश को लागू करने की मांग कर रहे हैं.  मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में समान काम के लिए समान वेतन के मामले में सुनवाई में हुई. सुनवाई के दौरान केन्द्र सरकार ने इस मामले में कोर्ट से चार हफ्ते का समय मांगा. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को चार सप्ताह के अंदर कंप्रिहेंसिव एक्शन स्कीम से संबंधित हलफनामा पेश करने को कहा है.<br />
<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-22534" src="http://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC-350x190.jpg" alt="" width="350" height="190" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC-350x190.jpg 350w, https://www.patnanow.com/assets/2017/08/PNC-SUPREME-COURT-OF-INDIA-SC.jpg 650w" sizes="(max-width: 350px) 100vw, 350px" /><br />
आपको याद दिला दें कि इससे पहले, बिहार सरकार ने कहा था कि नियोजित शिक्षकों के परीक्षा में पास होने से ही सैलरी इन्क्रीमेंट होगा और ये वृद्धि 20 फीसदी की होगी, लेकिन कोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया. मंगलवार को भी बिहार सरकार से 30 फीसदी वेतन वृद्धि का प्रपोजल दिया गया लेकिन कोर्ट ने सरकार से कहा कि एक ऐसी स्किम लाएं, जिससे बिहार ही नहीं, बल्कि समान काम के लिए समान वेतन मांगने वाले अन्य प्रदेश के  सभी शिक्षकों का भी भला हो सके. कोर्ट ने कहा कि इसके लिए केन्द्र सरकार और बिहार सरकार बैठ कर बात करें. सुप्रीम कोर्ट ने अटार्नी जनरल की दलील पर चार सप्ताह का समय दिया और कहा कि केन्द्र सरकार चार सप्ताह के भीतर कम्प्रिहैंसिव स्कीम बनाए और कोर्ट में हलफनामा दाखिल करे. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 12 जुलाई की तय की है.</p>
<p>बता दें कि पिछले साल इस मामले में पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार को नियोजित शिक्षकों को समान काम के लिए समान वेतन देने का आदेश दिया था और साथ ही वर्ष 2009 से एरियर देने का भी आदेश दिया था. इसके बाद बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी.</p>
<blockquote><p><strong>Mr. B.K. Sinha, Adv.</strong><br />
<strong> UPON hearing the counsel the Court made the following</strong><br />
<strong> O R D E R</strong><br />
<strong>Learned Attorney General submitted that the matter will</strong><br />
<strong>be considered on a holistic basis having regard to the fact that</strong><br />
<strong>teaching is the priority area, that there should be uniformity for</strong><br />
<strong>the whole country and financial the implications.</strong><br />
<strong>This will require interaction with the States.</strong><br />
<strong>Sh. Ranjit Kumar, learned senior counsel states that</strong><br />
<strong>funding by the Central Government only relates to primary and not</strong><br />
<strong>to secondary or higher education. This is disputed by the learned</strong><br />
<strong>counsel for the State of Bihar.</strong><br />
<strong>We are of the view that the disputed contentions of the</strong><br />
<strong>parties cannot be resolved unless the matter is fully heard.</strong><br />
<strong>Accordingly, let the matters be listed in the list for</strong><br />
<strong>final hearing on 12th July, 2018.</strong></p></blockquote>
<p><strong>कोर्ट के आदेश का हिन्दी अनुवाद</strong></p>
<h6><strong>वकीलों की सुनवाई के बाद न्यायालय ने निम्नलिखित आदेश पारित किया:-</strong><br />
<strong>विद्वान अटार्नी जनरल ने प्रस्तुत किया कि इस तथ्य (समान काम समान वेतन) के संबंध में एक समग्र आधार पर विचार किया जाना चाहिए कि शिक्षण प्राथमिकता क्षेत्र है, इसके लिए पूरे देश में और वित्तीय प्रभाव की एकरूपता होनी चाहिए। इसके लिए राज्यों के साथ बातचीत की आवश्यकता होगी। श्री रणजीत कुमार, वरिष्ठ वकील से पता चला है कि केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषण केवल प्राथमिक से संबंधित है और न कि माध्यमिक या उच्च शिक्षा के लिए। बिहार सरकार के वकील ने इसका विरोध किया।</strong><br />
<strong>हम इस मत के हैं कि पार्टियों के विवादित मसलों का तब तक हल नहीं किया जा सकता जब तक मामला पूरी तरह से सुना नहीं जाता है।</strong></h6>
<p>&nbsp;</p>
<p>साभार- आलोक कुमार</p>
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