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	<title>छात्रवृति घोटाला &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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	<title>छात्रवृति घोटाला &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>DPO को छात्रवृति घोटाला में रिमांड पर लेगी पुलिस </title>
		<link>https://www.patnanow.com/buxar-vigilance-will-take-dpo-on-remand/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Amit Verma]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 23 Jul 2017 20:18:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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		<category><![CDATA[छात्रवृति घोटाला]]></category>
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					<description><![CDATA[ डीपीओ के रिमांड पर लिए जाने की सूचना पर शिक्षा विभाग में हड़कंप   वित्तीय वर्ष 14-15 व 15-16 में छात्रवृति के नाम पर बक्सर जिले में हुए सवा दो करोड़ के घोटाले का जिन्न शांत होने का नाम नहीं ले रहा है. वहीं रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ निगरानी के हत्थे चढ़े शिक्षा विभाग के स्थापना शाखा के पूर्व डीपीओ विनायक पांडेय की मुश्किलें भी बढ़ती जा रही हैं. छात्रवृति गोटाले में जहां निगरानी ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. वहीं टाउन थाना पुलिस भी जांच के दायरे को बढ़ाते हुए डीपीओ को रिमांड पर लेने की तैयारी में है. उल्लेखनीय है कि निगरानी ब्यूरो द्वारा जिले के करीब 50 छात्रों से पूछताछ की जा चुकी है. पूछताछ से लौटे छात्रों की माने तो निगरानी ने सख्ती बरतने के संकेत दिए हैं. एक छात्र ने बताया कि निगरानी के डीएसपी रमेश कुमार मल्ल ने आवश्यक पूछताछ किये थे. अब डीपीओ को रिमांड पर लिए जाने की सूचना से जिले के शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है. जांच की जद में कई ओहदेदार भी आएंगे. गौरतलब हो कि पिछड़े व दलित बच्चों का हक लूटने के लिए फर्जी नामों से स्कूल के एकाउंट खोले गये थे. इसमें कल्याण विभाग के अधिकारी पर भी गाज गिर चुकी है. डीपीओ को डीएम ने जांच टीम से किया था बाहर छात्रवृति घोटाले की जांच टीम में पहले डीपीओ विनायक पांडेय भी शामिल थे. लेकिन विभागीय सूत्रों का कहना है कि छात्रवृत्ति वितरण कार्य राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान से संबद्ध है और [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div dir="auto"><strong> डीपीओ के रिमांड पर लिए जाने की सूचना पर शिक्षा विभाग में हड़कंप</strong></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"> <img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone  wp-image-20692" src="http://www.patnanow.com/assets/2017/07/SCAM.jpeg" alt="" width="470" height="392" /></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">वित्तीय वर्ष 14-15 व 15-16 में छात्रवृति के नाम पर बक्सर जिले में हुए सवा दो करोड़ के घोटाले का जिन्न शांत होने का नाम नहीं ले रहा है. वहीं रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ निगरानी के हत्थे चढ़े शिक्षा विभाग के स्थापना शाखा के पूर्व डीपीओ विनायक पांडेय की मुश्किलें भी बढ़ती जा रही हैं. छात्रवृति गोटाले में जहां निगरानी ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. वहीं टाउन थाना पुलिस भी जांच के दायरे को बढ़ाते हुए डीपीओ को रिमांड पर लेने की तैयारी में है. उल्लेखनीय है कि निगरानी ब्यूरो द्वारा जिले के करीब 50 छात्रों से पूछताछ की जा चुकी है. पूछताछ से लौटे छात्रों की माने तो निगरानी ने सख्ती बरतने के संकेत दिए हैं. एक छात्र ने बताया कि निगरानी के डीएसपी रमेश कुमार मल्ल ने आवश्यक पूछताछ किये थे. अब डीपीओ को रिमांड पर लिए जाने की सूचना से जिले के शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है. जांच की जद में कई ओहदेदार भी आएंगे. गौरतलब हो कि पिछड़े व दलित बच्चों का हक लूटने के लिए फर्जी नामों से स्कूल के एकाउंट खोले गये थे. इसमें कल्याण विभाग के अधिकारी पर भी गाज गिर चुकी है.</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"><img decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-20690" src="http://www.patnanow.com/assets/2017/07/pnc-buxar-school.jpg" alt="" width="640" height="434" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/07/pnc-buxar-school.jpg 640w, https://www.patnanow.com/assets/2017/07/pnc-buxar-school-350x237.jpg 350w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /></div>
<div dir="auto"><strong>डीपीओ को डीएम ने जांच टीम से किया था बाहर</strong></div>
<div dir="auto">छात्रवृति घोटाले की जांच टीम में पहले डीपीओ विनायक पांडेय भी शामिल थे. लेकिन विभागीय सूत्रों का कहना है कि छात्रवृत्ति वितरण कार्य राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान से संबद्ध है और उस समय स्थापना डीपीओ विनायक पांडेय राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के ही डीपीओ थे. जाहिर सी बात है, विभागीय पदाधिकारी के जांच टीम में रहने से इसके प्रभावित होने की आशंका बलवती हो जाती. ऐसे में डीएम रमण कुमार ने छात्रवृत्ति घोटाले की जांच टीम से शिक्षा विभाग के स्थापना डीपीओ विनायक पांडेय को हटाकर कोषागार पदाधिकारी मो.अजमत अली को प्राधिकृत किया था.</div>
<div dir="auto"><img decoding="async" class="alignnone  wp-image-20693" src="http://www.patnanow.com/assets/2017/07/scholarship-1484729425.jpg" alt="" width="677" height="382" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/07/scholarship-1484729425.jpg 390w, https://www.patnanow.com/assets/2017/07/scholarship-1484729425-350x197.jpg 350w" sizes="(max-width: 677px) 100vw, 677px" /></div>
<div dir="auto"><strong>फर्जी स्कूलों के नाम पर अकाउंट में भेजी गई थी राशि</strong></div>
<div dir="auto">नियमों के विरुद्ध विभाग का एकाउंट निजी बैंक में खोला गया था और बाद में उसी एकाउंट से घोटाले की रकम फर्जी स्कूलों के नाम पर ट्रांसफर किये गए थे. इससे संबंधित कैनरा, विजया, एक्सिस व सेंट्रल बैंक के तत्कालीन बैंक प्रबंधक समेत जिला कल्याण पदाधिकारी व जिला कार्यक्रम पदाधिकारी लेखा व योजना से स्पष्टीकरण मांगा गया था. जिला कल्याण पदाधिकारी समेत 19 लोगों पर एफआईआर किया गया था. अब तक दो लोग जेल भी जा चुके हैं. डीएम रमण कुमार द्वारा डीडीसी की अध्यक्षता में गठित जांच समिति द्वारा रिपोर्ट सौंपने के बाद अनियमितता पाए जाने पर कल्याण विभाग के तत्कालीन लिपिक समेत फर्जी विद्यालय और इन विद्यालयों का संचालन कर रही एजेंसी के लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी.</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">
<div dir="auto"><strong>इन फर्जी स्कूलों के नाम आवंटित हुयी थी राशि</strong></div>
<div dir="auto"><strong>1. किशोरी सिन्हा बालिका उच्च विद्यालय इटाढ़ी &#8211; 320400</strong></div>
<div dir="auto"><strong>2. किशोरी उच्च विद्यालय तियरा &#8211; 3987000</strong></div>
<div dir="auto"><strong>3. सीताराम केताकि उच्च विद्यालय रौनी &#8211; 2948300</strong></div>
<div dir="auto"><strong>4. लक्ष्मी उच्च विद्यालय नगवार सिकरौल &#8211; 3059000</strong></div>
<div dir="auto"><strong>5. सूर्य नारायण हाईस्कूल रहथुआ &#8211; 2827800</strong></div>
<div dir="auto"><strong>6. देवकीनंदन उच्च विद्यालय जमौली &#8211; 2327400</strong></div>
<div dir="auto"><strong>7. केताकि मेमोरियल उच्च विद्यालय तियरा &#8211; 2002500</strong></div>
<div dir="auto"><strong>8. किशोरी सिन्हा बालिका उच्च विद्यालय बक्सर &#8211; 1869600</strong></div>
<div dir="auto"></div>
<p><strong>ऐसे हुआ था घोटाले का खेल</strong></div>
<div dir="auto">जिले में छात्रवृत्ति के नाम पर हुए फर्जीवाड़े में सबकुछ फर्जी तरीके से किया गया था. जिन विद्यालयों के नाम पर छात्रवृत्ति की राशि बांटी गयी, वे विद्यालय धरातल पर थे ही नहीं. इन फर्जी विद्यालयों के संचालक का खाता तक बैंक में मौजूद था. बकायदे बच्चों के नाम भी दर्ज थे, जिनके नाम पर पैसों का आवंटन मंगाया गया है. उसी सूची के आधार पर छात्रों से निगरानी के अधिकारियों ने पूछताछ किया था. निगरानी की जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि समाज कल्याण विभाग के खाते निजी बैंक से संचालित हो रहे थे और इसी के माध्यम से फर्जी स्कूलों के नाम पर भुगतान हुआ था. फर्जी स्कूलों ने अपने फर्जी खाते केनरा बैंक, सेंट्रल बैंक व विजया बैंक में खोले थे. जांच में पता चला था कि सभी स्कूलों के प्रस्तावकों के नाम एक लेकिन, प्राचार्य के नाम अलग-अलग थे. जिससे जाहिर है कि पूरे सुनियोजित तरीके से घोटाले की साजिश रची गयी.</div>
<div dir="auto"><strong> </strong></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">बक्सर से ऋतुराज</div>
<div dir="auto"></div>
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