वट सावित्री व्रत की पूरी जानकारी

वट सावित्री पूजा जिसे बरसाइत के नाम से भी जाना जाता है, पूरे देश में बेहद भक्ति भाव से मनाया जाता है. हालांकि इस बारे में एक बड़ी रोचक जानकारी यह है कि देश के अलग-अलग भागों में यह अलग-अलग दिन मनाया जाता है. आखिर क्या है इसके पीछे की वजह और इस व्रत को मनाने की विधि क्या है. इस बारे में पूरी जानकारी के लिए इस वीडियो को क्लिक करें. pncb

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अखंड सौभाग्य की कामना के साथ सुहागिनों ने की वट सावित्री पूजा

फुलवारी शरीफ (अजीत ) ।। वट सावित्री पूजा के मौके पर गुरुवार को सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु होने की कामना के साथ पूरी निष्ठा के साथ वट सावित्री पूजा कर अखंड सौभाग्‍य की कामना की. सबसे पहले वट (बरगद) के पेड़ के नीचे के स्थान को अच्छे से साफ कर वहां सावित्री-सत्यवान की मूर्ति स्थापित की गई. इसके पश्चात बरगद के पेड़ पर जल चढ़ाने के बाद पुष्प, अक्षत, फूल, भीगा चना, गुड़ और मिठाई चढ़ाए गए. फिर वट वृक्ष के तने के चारों ओर कच्चा धागा लपेट कर सात बार परिक्रमा की.हिन्दू धर्म में बरगद के पेड़ को पूजनीय माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार इस पेड़ में सभी देवी-देवताओं का वास होता है. इसलिए बरगद के पेड़ की आराधना करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है. कहा जाता है कि इस दिन सावित्री ने अपने पति के प्राण वापस लौटाने के लिए यमराज को विवश कर दिया था. इस व्रत वाले दिन वट वृक्ष का पूजन कर सावित्री-सत्यवान की कथा को याद किया जाता है. गुरुवार को सुबह से ही नवविवाहिता सहित महिलाएं नए-नए परिधानों में सजधज कर बांस की डलिया में मौसमी फल, पकवान प्रसाद के रुप में लेकर वट वृक्ष के पास पहुंचीं. वहीं घरों में भी व्रत का अनुष्‍ठान विधि विधान से पूरा किया गया. दुलहन की तरह सजी धजी महिलाओं ने प्रसाद चढ़ा कर वट वृक्ष की पूजा की, वट वृक्ष में कच्चा धागा बांधी और पंखा झेल कर पति के दीर्घायु होने और अखंड सौभाग्‍य की कामना की. व्रत करने

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