8वीं पास नीतू ने दिया कईयों को रोजगार, बनी समाज की मिसाल

हुनर दे रहा है रोजगार, ध्वस्त हो रही है मैकाले शिक्षा-पद्धति

आरा,17 फरवरी. मैकाले की शिक्षा-पद्धति में पढ़ता भारत और उस पद्धति में बंटोरते डिग्रियों के लिए लाखों खर्च करने के बाद भी एक भारी संख्या बेरोजगारों की खड़ी है. लेकिन मात्र 8वीं पास एक ऐसी महिला है जो अबतक 50 से ज्यादा लोगों को रोजगार दे चुकी है. सुनकर कानो पर यकीन आना मुमकिन नही होगा लेकिन यह सत्य है. ऐसा काम करने वाली कोई और नही भोजपुर जिले की नीतू है जिसने आर्थिक तंगी के बावजूद अपने हुनर को विकसित करने का फैसला लिया जिसमे जीविका ने उसका साथ दिया और जब नीतू आगे बढ़ी तो बढ़ते गयी और आज वह समाज के बीच एक रोल मॉडल के रूप में खड़ी है मिसाल बनकर. नीतू की सफलता की कहानी आइये जानते हैं थोड़ा विस्तार से…




अभाव एवं आर्थिक तंगी की चुनौतियों से जूझती हुई आरा सदर प्रखंड के महुली गांव की आठवीं पास नीतू कुमारी ने जीविका से जुड़कर न केवल अपनी पारिवारिक स्थिति को सुंदृढ़ता प्रदान की बल्कि सैकड़ों बेटियों को हुनरमंद एवं स्वरोजगार प्रदान कर महिला सशक्तिकरण का अनोखा एवं अनुपम उदाहरण प्रस्तुत की है. नीतू के जीवन जीने का सफर मायके रामपुर से शुरू हुआ. 15 वर्ष पूर्व जयकुमार सिंह से शादी के बाद दिल्ली में पति के प्राइवेट नौकरी से परदेश में परिवार का जीवन बसर चलना मुश्किल था. अभाव एवं आर्थिक तंगी तथा मन में जीवन जीने की कसक और बेहतर जीवन यापन की आस लिए नीतू गांव लौट कर सिलाई कढ़ाई के हुनर से रिश्ता जोड़ा. घर से ही कपड़े सिलने का कार्य शुरू हुआ. जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं के भी कपड़े सिलने लगी.

नीतू ने स्वरोजगार को आगे बढ़ाने में सबसे बड़ी आर्थिक समस्या को जीविका दीदियों से साझा की. जीविका दीदियों ने समूह से जुड़ने की सलाह दी. अपनी अदम्य साहस तथा कुछ कर गुजरने की चाहत की बदौलत नीतू अप्रैल 2018 में राम जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ी. निरंतर बैठकों में भाग लेने लगी. कुछ माह बाद नीतू समूह की कोषाध्यक्ष भी चुनी गई. समूह से ₹5000 ऋण लेकर सिलाई मशीन और उससे संबंधित सामान खरीदी. इससे उन्हें स्वरोजगार के साथ ही आमदनी भी बढ़ने लगी. इस बीच उन्होंने समूह से जुड़ी महिलाओं एवं घर की बेटियों को भी सिलाई कढ़ाई सिखाने की सलाह दी. किंतु विचार सूत्र को पकड़ना आसान नहीं था. सिलाई मशीन की कमी और जगह बड़ी समस्या थी. इस बीच नीतू ने मुनाफे की राशि से ऋण को चुकता कर दिया. अपने सिलाई कढ़ाई के व्यवसाय आगे बढ़ाने और अपने गांव तथा आसपास के गांव की बेटियों को हुनरमंद बनाने के उद्देश्य से गांव के रामपुर चौक पर जुलाई 2018 में किराए पर दुकान ली. दुकान को व्यवस्थित करने और अत्यधिक सामान की खरीदारी के लिए नीतू ने विवेक जीविका महिला ग्राम संगठन से ₹50000 ॠण लिया. ॠण की ताकत से दुकान का विस्तार किया और सिलाई कढ़ाई के साथ ब्यूटी पार्लर दुकान का प्रशिक्षण केंद्र खोल दिया. सिलाई-कटाई के 6 माह के कोर्स के लिए महज 1500 रुपए प्रति प्रशिक्षणार्थी निर्धारित हुआ. अक्टूबर 2019 तक 60 लड़कियों ने ब्यूटी पार्लर का कोर्स पूर्ण कर खुद का पार्लर चला रही है. वहीं 55 प्रशिक्षणार्थियों ने सिलाई कटाई का कोर्स पूर्ण कर स्वावलंबन की दिशा में अपना कदम आगे बढ़ाया है. जनवरी 2020 में सिलाई-कटाई एवं ब्यूटी पार्लर के दो बैच चल रहे हैं. एक बैच में 35 लड़कियां होती हैं. सिलाई-कटाई और पार्लर से हो रहे मुनाफे से नीतू ने ग्राम संगठन से लिए गए ₹50000 ऋण को वापस कर दिया है तथा एक और दुकान ले ली है. अब उनके पास 15 सिलाई मशीन है इन सबके बीच वह इस बात को लेकर चिंतित है कि प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र नहीं दे पाती हैं साथ ही पीको मशीन भी खरीदने की योजना भी अधर में है. उन्हें जीविका की ओर से आर .से. टी. जैसी संस्थानों से जोड़ने की प्रक्रिया जारी है. नीतू और उनकी जैसी अन्य महिलाओं के सपनों को साकार करने हेतु नीतू के पति गांव वापस लौट आए हैं. अपने सिलाई-कटाई सह ब्यूटी-पार्लर प्रशिक्षण केंद्र से नीतू का प्रतिमा 25 से ₹30000 का व्यवसाय है. दुकान से वह श्रृंगार का सामान भी भेजती है प्रतिमाह इन्हें 12000 से 15000 का मुनाफा है. नीतू और उसका परिवार खुश है तथा उनके जीवन में खुशहाली आई है. नीतू बताती है कि जीविका ने उन्हें आगे बढ़ाया है और पहचान दिलाई है. नीतू वस्तुतः क्रांति जीविका महिला संकुल स्तरीय संघ महोली और गांव के लिए सामाजिक और आर्थिक बदलाव की मिसाल है. इनके पति और बच्चों को भी इन पर गर्व है. कर्म को प्रधान मानकर महिलाओं और बेटियों को एक सूत्र में पिरो स्वावलंबन की राह दिखाने की कवायद की अग्रणी दूत नीतू है. नीतू के काम का जुनून और उसके परिश्रम ने आज उसकी समाज मे एक विशेष पहचान बनाई है.

तो अगर आप भी कोई हुनर रखते हैं तो उसे दृढ़ता से करने की ठाने. क्योंकि डिग्रियां झूठी और फरेबी हो सकती हैं लेकिन हुनर कभी नही. हुनर लगातार काम का निखार है जिसकी चमक से आप ही नही पूरा समाज चमक उठता है.

आरा से ओ पी पांडेय की रिपोर्ट