पुलित्ज़र पुरस्कार से सम्मानित पत्रकार की कंधार में मौत


बहादुरी को कैमरे में कैद करने वाले जर्नलिस्ट की जंग के मैदान में मौत!

पटना,16 जुलाई. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के लिए काम करने वाले भारतीय मूल के फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी की कंधार में मौत की खबर ने सबको हैरान कर दिया है.  उनकी मौत उस वक्त हुई जब वे अफगानिस्तान के कंधार में तालिबानियों और सिक्योरिटी फोर्सेस के मुठभेड़ के दौरान फंस गए.  स्पिन बोल्डक जिले में दानिश पिछले कई दिनों से मौजूदा हालात को कवर कर रहे थे. अफगानिस्तान की स्पेशल फोर्सेस जब एक रेस्क्यू मिशन पर थी, तब दानिश उनके साथ मौजूद थे. उनकी बॉडी कंधार के स्पिन बोल्डक से रिकवर की गई. दानिश के सिर और पसलियों में गनशॉट दिखाई पड़ रहे हैं.

2018 में उन्हें बेस्ट फोटोग्राफी के लिए पुलित्जर अवॉर्ड रोहिंग्या कवरेज के लिए मिला था.  दानिश मुंबई के रहने वाले थे. उन्हें रॉयटर्स के फोटोग्राफी स्टाफ के साथ पुलित्जर अवॉर्ड दिया गया था. उन्होंने दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रैजुएट किया था. 2007 में उन्होंने जामिया के मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर से मास कम्युनिकेशन की डिग्री ली थी. उन्होंने टेलीविजन से अपना करियर शुरू किया और 2010 में रॉयटर्स से जुड़े. इसी हफ्ते जब तालिबान ने कंधार के स्पिन बोल्डक पर कब्जा किया तो स्पेशल फोर्सेस के साथ लगातार उसकी मुठभेड़ शुरू हो गईं. पिछले कई दिनों से दोनों के बीच भीषण संघर्ष जारी है. दानिश इसी मिशन को कवर कर रहे थे.




दानिश सिद्दीकी ने  2 दिन पहले आखिरी बार अपने पिता प्रोफेसर अख्तर सिद्दकी से बात की थी. उन्होंने बताया कि दानिश अपने काम को लेकर बेहद संजीदा थे. प्रोफेशन के आगे वह किसी की भी बात नहीं सुनते थे. उन्हें चैलेंज हमेशा पसंद था. उनके पैशन के कारण ही दानिश के पिता ने उन्हें अफगानिस्तान जाने से नहीं रोका था.

दानिश ने ट्वीट किया था- स्पेशल फोर्सेस का मिशन कवर कर रहा हूं
13 जुलाई को दानिश ने अपने ट्विटर हैंडल पर  कई पोस्ट किये थे. उन्होंने बताया था कि वे पूरे अफगानिस्तान में कई मोर्चों पर लड़ाई लड़ रही अफगान स्पेशल फोर्सेस के साथ हैं.


उन्होंने लिखा था- मैं एक मिशन पर इन युवाओं के साथ हूं. आज कंधार में ये फोर्सेस रेस्क्यू मिशन पर थीं. इससे पहले ये लोग पूरी रात एक कॉम्बैट मिशन पर थे. इसी हफ्ते जब तालिबान ने कंधार के स्पिन बोल्डक पर कब्जा किया तो स्पेशल फोर्सेस के साथ लगातार उसकी मुठभेड़ शुरू हो गई. पिछले कई दिनों से दोनों के बीच भीषण संघर्ष जारी है. इस भीषण संघर्ष को दानिश  कवर कर रहे थे.

कैसे हुई दानिश की मौत
अफगानिस्तान के एम्बेस्डर फरीद मामुन्दजई ने शुक्रवार को इस बात की जानकारी अपने ट्वीटर हैंडल पर देते हुए बताया कि हत्या किसने की और इसकी वजह क्या थी, इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं सामने आई है.

फरीद मामुन्दजई ने ट्वीट में लिखा- कंधार में गुरुवार रात दोस्त दानिश की हत्या कर दी गई. इस घटना से बहुत दुखी हूं. भारतीय जर्नलिस्ट और पुलित्जर पुरस्कार विजेता दानिश सिक्युरिटी फोर्सेस के साथ थे. मैं उनसे 2 हफ्ते पहले मिला था, तब वो काबुल जाने वाले थे. उनकी फैमिली के साथ मेरी संवेदनाएं हैं.

रिपोर्ट्स के अनुसार, दानिश ने हाल ही में अफगानिस्तान की स्पेशल फोर्सेस के मिशन की रिपोर्टिंग की थी. इस मिशन के दौरान अफगानिस्तानी फोर्सेस एक ऐसे पुलिसवाले को रेस्क्यू कर रहे थे, जो अपने साथियों से अलग हो गया था और तालिबानियों के साथ लगातार लड़ता रहा. दानिश की इस रिपोर्ट में दिखाया गया था कि तालिबानियों ने किस तरह रॉकेट से अफगानी फोर्सेस के काफिले पर हमला किया था.

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने दुख जताया


प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने दानिश सिद्दकी की मौत पर दुःख जताया है. प्रेस क्लब ऑफ इंडिया कंधार में रॉयटर्स के पुलित्ज़र पुरस्कार विजेता फोटो जर्नलिस्ट दानिश के निधन से स्तब्ध है,जहां वह तालिबान की गोलियों से गिर गया था. सच्ची पत्रकारिता के लिए साहस की आवश्यकता होती है और दानिश की कार्यशैली इसका प्रमाण है. हम शब्दों के नुकसान में हैं.

कंधार में तालिबान और स्पेशल फोर्सेस की झड़प के दौरान दानिश के अलावा एक कमांडर की भी जान गई है.उनका नाम उनका नाम सादिक करजई है.

Source : Dainik Bhaskar

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