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		<title>छठ गीत ‘बबुआ गइले बिसराई’ ने झकझोरा दिल, बुजुर्गों की पीड़ा देख भावुक हुए दर्शक</title>
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		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 04 Nov 2026 01:23:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने किया लोकार्पण, मनीषा श्रीवास्तव की आवाज की सराहना की. आपदा पर भी प्रेरणादायक गीत बनाने का दिया सुझाव पटना. छठ महापर्व की आस्था, परंपरा और सामाजिक संवेदनाओं को संगीत के माध्यम से जीवंत करती लोकगायिका मनीषा श्रीवास्तव की विशेष प्रस्तुति ‘बबुआ गइले बिसराई’ का मंगलवार को बिहार म्यूजियम में भव्य लोकार्पण हुआ. बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने गीत का लोकार्पण किया. बुजुर्ग माता-पिता की उपेक्षा और बदलते पारिवारिक मूल्यों पर आधारित इस गीत ने सभागार में मौजूद दर्शकों को भावुक कर दिया. गीत के फिल्मांकन, संगीत और कलाकारों के अभिनय ने ऐसा प्रभाव छोड़ा कि प्रस्तुति समाप्त होने के बाद भी दर्शक उसकी संवेदनाओं से जुड़े नजर आए. कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम और राष्ट्रगान से हुआ. इसके बाद अतिथियों को भोजपुरी एवं मैथिली पेंटिंग से सुसज्जित अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया गया. वहीं, गीत में योगदान देने वाले कलाकारों और तकनीकी टीम के सदस्यों को स्मृति चिह्न प्रदान किए गए. बुजुर्ग माता-पिता की उपेक्षा पर करारा संदेश‘बबुआ गइले बिसराई’ महज एक छठ गीत नहीं, बल्कि समाज में तेजी से बदलते पारिवारिक रिश्तों और बुजुर्ग माता-पिता की उपेक्षा की पीड़ा को सामने लाने वाली संवेदनशील प्रस्तुति है. गीत के माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि किस तरह नई पीढ़ी अपने माता-पिता और बुजुर्गों को भूलती जा रही है. छठ जैसे पारिवारिक जुड़ाव और लोकआस्था के महापर्व के साथ इस विषय को जोड़ना गीत को विशेष अर्थ देता है. गीत को अपनी आवाज मनीषा श्रीवास्तव ने दी है, जबकि [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने किया लोकार्पण, मनीषा श्रीवास्तव की आवाज की सराहना की. आपदा पर भी प्रेरणादायक गीत बनाने का दिया सुझाव</strong><br><br><strong>पटना.</strong> छठ महापर्व की आस्था, परंपरा और सामाजिक संवेदनाओं को संगीत के माध्यम से जीवंत करती लोकगायिका मनीषा श्रीवास्तव की विशेष प्रस्तुति ‘बबुआ गइले बिसराई’ का मंगलवार को बिहार म्यूजियम में भव्य लोकार्पण हुआ. बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने गीत का लोकार्पण किया. बुजुर्ग माता-पिता की उपेक्षा और बदलते पारिवारिक मूल्यों पर आधारित इस गीत ने सभागार में मौजूद दर्शकों को भावुक कर दिया. गीत के फिल्मांकन, संगीत और कलाकारों के अभिनय ने ऐसा प्रभाव छोड़ा कि प्रस्तुति समाप्त होने के बाद भी दर्शक उसकी संवेदनाओं से जुड़े नजर आए.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="462" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/11/1001954626-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-100143" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/11/1001954626-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/11/1001954626-650x293.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/11/1001954626-1536x694.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/11/1001954626-2048x925.jpg 2048w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम और राष्ट्रगान से हुआ. इसके बाद अतिथियों को भोजपुरी एवं मैथिली पेंटिंग से सुसज्जित अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया गया. वहीं, गीत में योगदान देने वाले कलाकारों और तकनीकी टीम के सदस्यों को स्मृति चिह्न प्रदान किए गए.<br><br><strong>बुजुर्ग माता-पिता की उपेक्षा पर करारा संदेश</strong><br>‘बबुआ गइले बिसराई’ महज एक छठ गीत नहीं, बल्कि समाज में तेजी से बदलते पारिवारिक रिश्तों और बुजुर्ग माता-पिता की उपेक्षा की पीड़ा को सामने लाने वाली संवेदनशील प्रस्तुति है. गीत के माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि किस तरह नई पीढ़ी अपने माता-पिता और बुजुर्गों को भूलती जा रही है. छठ जैसे पारिवारिक जुड़ाव और लोकआस्था के महापर्व के साथ इस विषय को जोड़ना गीत को विशेष अर्थ देता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="768" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/11/1001954624-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-100144" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/11/1001954624-scaled.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2026/11/1001954624-488x650.jpg 488w, https://www.patnanow.com/assets/2026/11/1001954624-1152x1536.jpg 1152w" sizes="(max-width: 768px) 100vw, 768px" /></figure>



<p><br>गीत को अपनी आवाज मनीषा श्रीवास्तव ने दी है, जबकि इसका संगीत प्रभाकर पांडे ने तैयार किया है. कहानी और प्रस्तुति में मनीषा श्रीवास्तव की भूमिका के साथ मुख्य पात्र के रूप में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अभिषेक सिंह ने प्रभावशाली अभिनय किया है. गीत की भावपूर्ण गायकी, संगीत का उत्कृष्ट संयोजन, फिल्मांकन और कलाकारों के अभिनय ने बिहार म्यूजियम के सभागार में मौजूद दर्शकों को भीतर तक झकझोर दिया.<br><br><strong>राज्यपाल ने की मनीषा की आवाज की तारीफ, आपदा पर गीत बनाने का सुझाव</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1024" height="579" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/11/1001955054-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-100148" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/11/1001955054-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/11/1001955054-650x367.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>लोकार्पण के बाद राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने मनीषा श्रीवास्तव की आवाज की विशेष सराहना की. उन्होंने इस तरह के संवेदनशील विषय पर गीत और वीडियो तैयार करने के लिए पूरी टीम को बधाई दी. राज्यपाल ने कहा कि आजकल की युवा पीढ़ी बुजुर्गों का आदर करना भूलती जा रही है. ऐसे समय में छठ गीत के माध्यम से पारिवारिक मूल्यों और बुजुर्गों के सम्मान का संदेश देना बेहद सराहनीय है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="768" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/11/1001954625-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-100145" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/11/1001954625-scaled.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2026/11/1001954625-488x650.jpg 488w, https://www.patnanow.com/assets/2026/11/1001954625-1152x1536.jpg 1152w" sizes="auto, (max-width: 768px) 100vw, 768px" /></figure>



<p>उन्होंने मनीषा श्रीवास्तव को भविष्य में आपदा जैसे गंभीर विषयों पर भी अपनी दमदार आवाज में प्रेरणादायक रचनाएं तैयार करने का सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि इस तरह के गीत युवाओं के लिए प्रेरणा और जागरूकता का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं. राज्यपाल ने ऐसी रचनात्मक पहल को आगे बढ़ाने के लिए पूरी टीम को प्रोत्साहित किया.<br><br><strong>छठ की पुरानी परंपराओं को किया याद</strong><br>राज्यपाल ने छठ से जुड़ी अपनी पुरानी स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि पहले छठ के अवसर पर लोग बाहर से अपने गांव और शहर लौटते थे, ताकि भगवान भास्कर की आराधना के इस पावन पर्व को पूरे परिवार और सगे-संबंधियों के साथ मना सकें. लेकिन अब पर्व के अवसर पर भी कई लोग अपने घर नहीं पहुंचते हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/11/1001954591-scaled.png" alt="" class="wp-image-100146" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/11/1001954591-scaled.png 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/11/1001954591-650x366.png 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/11/1001954591-1536x864.png 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>उन्होंने लोगों से छठ के साथ दीपावली, गोवर्धन पूजा और भैया दूज जैसे त्योहारों को भी पूरी सतर्कता और सावधानी के साथ मनाने की अपील की, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना या दुर्घटना न हो और पर्व खुशियों के साथ संपन्न हों.<br><br><strong>आलोक पांडे की प्रस्तुति ने भी मोहा मन</strong><br>कार्यक्रम में आलोक पांडे ने अपनी लोकगीत प्रस्तुति ‘केहू कतनी दुलारी बाकी, माई ना होई’ से उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया. कार्यक्रम का समापन भी वंदे मातरम और राष्ट्रगान के साथ हुआ. अंत में मनीषा श्रीवास्तव ने आगत अतिथियों और उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया.<br><br>इस अवसर पर बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी, बिहार संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह, उप महानिदेशक अशोक सिन्हा, बिहार विधान परिषद सदस्य डॉ. संजय मयुख सहित कला, संस्कृति और संगीत जगत से जुड़ी कई हस्तियां मौजूद रहीं.<br><br><strong>ओ. पी. पाण्डेय | पटना नाउ</strong></p>
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		<title>बिहार म्यूजियम में आज होगा भव्य समारोह</title>
		<link>https://www.patnanow.com/aaj-hoga-udghatan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Nov 2026 02:44:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
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					<description><![CDATA[छठ के गीत में गूंजेगी रिश्तों की संवेदना, ‘बबुआ देलें बिसराई’ का लोकार्पण करेंगे राज्यपाल कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी समेत कई गणमान्य हस्तियां रहेंगी मौजूद पटना, 3 नवंबर। छठ महापर्व की लोकआस्था, सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक संवेदनाओं को समर्पित विशेष छठ गीत ‘बबुआ देलें बिसराई’ का भव्य लोकार्पण मंगलवार को पटना स्थित बिहार म्यूजियम में होगा। मणिषा श्रीवास्तव ऑफिशियल की इस विशेष प्रस्तुति का लोकार्पण बिहार के महामहिम राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन के करकमलों से किया जाएगा। 3 नवंबर को अपराह्न 4 बजे आयोजित इस समारोह में बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। वहीं, बिहार संग्रहालय के महानिदेशक श्री अंजनी कुमार सिंह कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। बिहार विधान परिषद के सदस्य डॉ. संजय मयुख की भी गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। कार्यक्रम के स्वागतकर्ता बिहार संग्रहालय, पटना के अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा हैं, जबकि आयोजन की जिम्मेदारी लोकगायिका मनीषा श्रीवास्तव निभा रही हैं। ‘बबुआ देलें बिसराई’ शीर्षक से तैयार यह गीत केवल छठ की पारंपरिक भक्ति और आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से लोकजीवन की सामाजिक संवेदनाओं को भी अभिव्यक्त करने का प्रयास किया गया है। छठ महापर्व के अवसर पर इस तरह की सांस्कृतिक प्रस्तुति बिहार की लोकपरंपरा, पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक सरोकारों को संगीत के माध्यम से सामने लाने की एक पहल है।बिहार म्यूजियम, नेहरू पथ (बेली रोड), पटना में आयोजित इस समारोह में कला, संस्कृति, साहित्य और संगीत जगत से जुड़ी हस्तियों सहित कई गणमान्य लोगों को [&#8230;]]]></description>
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<p>छठ के गीत में गूंजेगी रिश्तों की संवेदना, ‘बबुआ देलें बिसराई’ का लोकार्पण करेंगे राज्यपाल<br><br><strong>कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी समेत कई गणमान्य हस्तियां रहेंगी मौजूद</strong><br><br><strong>पटना, 3 नवंबर। </strong>छठ महापर्व की लोकआस्था, सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक संवेदनाओं को समर्पित विशेष छठ गीत ‘बबुआ देलें बिसराई’ का भव्य लोकार्पण मंगलवार को पटना स्थित बिहार म्यूजियम में होगा। मणिषा श्रीवास्तव ऑफिशियल की इस विशेष प्रस्तुति का लोकार्पण बिहार के महामहिम राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन के करकमलों से किया जाएगा।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="819" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/11/1001950303-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-100124" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/11/1001950303-scaled.jpg 819w, https://www.patnanow.com/assets/2026/11/1001950303-520x650.jpg 520w, https://www.patnanow.com/assets/2026/11/1001950303-1229x1536.jpg 1229w" sizes="auto, (max-width: 819px) 100vw, 819px" /></figure>



<p>3 नवंबर को अपराह्न 4 बजे आयोजित इस समारोह में बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। वहीं, बिहार संग्रहालय के महानिदेशक श्री अंजनी कुमार सिंह कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। बिहार विधान परिषद के सदस्य डॉ. संजय मयुख की भी गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।<br><br>कार्यक्रम के स्वागतकर्ता बिहार संग्रहालय, पटना के अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा हैं, जबकि आयोजन की जिम्मेदारी लोकगायिका मनीषा श्रीवास्तव निभा रही हैं।<br><br>‘बबुआ देलें बिसराई’ शीर्षक से तैयार यह गीत केवल छठ की पारंपरिक भक्ति और आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से लोकजीवन की सामाजिक संवेदनाओं को भी अभिव्यक्त करने का प्रयास किया गया है। छठ महापर्व के अवसर पर इस तरह की सांस्कृतिक प्रस्तुति बिहार की लोकपरंपरा, पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक सरोकारों को संगीत के माध्यम से सामने लाने की एक पहल है।<br>बिहार म्यूजियम, नेहरू पथ (बेली रोड), पटना में आयोजित इस समारोह में कला, संस्कृति, साहित्य और संगीत जगत से जुड़ी हस्तियों सहित कई गणमान्य लोगों को आमंत्रित किया गया है। आयोजक मनीषा श्रीवास्तव ने सभी से समारोह में शामिल होकर इस सांस्कृतिक अवसर की शोभा बढ़ाने की अपील की है।</p>
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		<title>कला, संस्कृति और हस्तशिल्प का अनूठा उत्सव ‘जुगनु हाट’ 5 से 7 नवंबर तक पटना में</title>
		<link>https://www.patnanow.com/jugnu-haat/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Nov 2026 02:28:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
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		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
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					<description><![CDATA[मलातन इन्फ्रा एंड सर्विस प्राइवेट लिमिटेड प्रस्तुत करेगा बिहार की लोक परंपराओं, हस्तशिल्प और बुनकरों की रचनात्मकता का संगम पटना।। बिहार की कला, संस्कृति, हस्तशिल्प और बुनकरों की अद्भुत रचनात्मकता को एक मंच प्रदान करने के उद्देश्य से ‘जुगनु हाट’ का आयोजन 5, 6 और 7 नवंबर 2026 को बापू टावर, गर्दनीबाग, पटना में किया जाएगा. मलातन इन्फ्रा एंड सर्विस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रस्तुत इस आयोजन में बिहार की समृद्ध लोक परंपराओं, पारंपरिक हस्तशिल्प और बुनकरी की विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा. ‘जुगनु हाट’ में बिहार की विविध सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा को सामने लाने की विशेष पहल की गई है. आयोजन के दौरान मगही लोक संगीत, जट-जटिन नृत्य जैसी लोक कलाओं के प्रदर्शन के साथ टेराकोटा, दोसूती और पेपरमाशे जैसे पारंपरिक हस्तशिल्प की रचनात्मकता देखने को मिलेगी. इसके अलावा बिहार की प्रसिद्ध बुनकरी परंपराओं में शामिल 52 बूटी और भागलपुरी टसर के उत्पादों का भी प्रदर्शन किया जाएगा. कार्यक्रम में क्रोशिया और एप्लिक कला से संबंधित वर्कशॉप का आयोजन भी किया जाएगा, जिसके माध्यम से प्रतिभागियों को इन पारंपरिक कलाओं को समझने और सीखने का अवसर मिलेगा. डॉ. स्मृति पासवान ने कहा, “जुगनु हाट केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बिहार की कला, संस्कृति और हमारी पारंपरिक विरासत को सम्मान देने का एक प्रयास है. हमारे स्थानीय कलाकार, शिल्पकार और बुनकर अपनी मेहनत, कौशल और रचनात्मकता से बिहार की पहचान को जीवंत बनाए हुए हैं. ऐसे मंच उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, अपने उत्पादों को लोगों तक पहुंचाने और नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मलातन इन्फ्रा एंड सर्विस प्राइवेट लिमिटेड प्रस्तुत करेगा बिहार की लोक परंपराओं, हस्तशिल्प और बुनकरों की रचनात्मकता का संगम</strong></p>



<p>पटना।। बिहार की कला, संस्कृति, हस्तशिल्प और बुनकरों की अद्भुत रचनात्मकता को एक मंच प्रदान करने के उद्देश्य से ‘जुगनु हाट’ का आयोजन 5, 6 और 7 नवंबर 2026 को बापू टावर, गर्दनीबाग, पटना में किया जाएगा. मलातन इन्फ्रा एंड सर्विस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रस्तुत इस आयोजन में बिहार की समृद्ध लोक परंपराओं, पारंपरिक हस्तशिल्प और बुनकरी की विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="683" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/11/1001241262-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-100121" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/11/1001241262-scaled.jpg 683w, https://www.patnanow.com/assets/2026/11/1001241262-433x650.jpg 433w" sizes="auto, (max-width: 683px) 100vw, 683px" /></figure>



<p>‘जुगनु हाट’ में बिहार की विविध सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा को सामने लाने की विशेष पहल की गई है. आयोजन के दौरान मगही लोक संगीत, जट-जटिन नृत्य जैसी लोक कलाओं के प्रदर्शन के साथ टेराकोटा, दोसूती और पेपरमाशे जैसे पारंपरिक हस्तशिल्प की रचनात्मकता देखने को मिलेगी. इसके अलावा बिहार की प्रसिद्ध बुनकरी परंपराओं में शामिल 52 बूटी और भागलपुरी टसर के उत्पादों का भी प्रदर्शन किया जाएगा. कार्यक्रम में क्रोशिया और एप्लिक कला से संबंधित वर्कशॉप का आयोजन भी किया जाएगा, जिसके माध्यम से प्रतिभागियों को इन पारंपरिक कलाओं को समझने और सीखने का अवसर मिलेगा.</p>



<p>डॉ. स्मृति पासवान ने कहा, “जुगनु हाट केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बिहार की कला, संस्कृति और हमारी पारंपरिक विरासत को सम्मान देने का एक प्रयास है. हमारे स्थानीय कलाकार, शिल्पकार और बुनकर अपनी मेहनत, कौशल और रचनात्मकता से बिहार की पहचान को जीवंत बनाए हुए हैं. ऐसे मंच उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, अपने उत्पादों को लोगों तक पहुंचाने और नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं. हमारी कोशिश है कि स्थानीय कलाओं और कलाकारों को प्रोत्साहन मिले और बिहार की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर पहचान मिले.”</p>



<p>आयोजकों ने कला, संस्कृति और हस्तशिल्प में रुचि रखने वाले लोगों से ‘जुगनु हाट’ में शामिल होने की अपील की है. उनका कहना है कि आम लोगों की सहभागिता स्थानीय कलाकारों, कारीगरों और बुनकरों का मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ बिहार की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.</p>



<p>कार्यक्रम का विवरण</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>आयोजन: जुगनु हाट</li>



<li>प्रस्तुतकर्ता: मलातन इन्फ्रा एंड सर्विस प्राइवेट लिमिटेड</li>



<li>स्थान: बापू टावर, गर्दनीबाग, पटना</li>



<li>तिथि: 5, 6 एवं 7 नवंबर 2026</li>



<li>मुख्य आकर्षण: लोक संगीत, जट-जटिन नृत्य, टेराकोटा, दोसूती, पेपरमाशे, 52 बूटी, भागलपुरी टसर, क्रोशिया एवं एप्लिक वर्कशॉप.</li>
</ul>
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		<item>
		<title>वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में शुरू हुआ जंगल सफारी, हेली टूरिज्म भी होगा बड़ा आकर्षण</title>
		<link>https://www.patnanow.com/pnc-vtr-tourist-season-start/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 18 Oct 2026 18:27:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[CITY/OFFICE]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
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					<description><![CDATA[वीटीआर में टूरिज्म सीजन की शुरुआत वाल्मीकि नगर।। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) में पर्यटन सत्र 2026-27 का शुभारंभ 17.10.2026 (शनिवार) को किया गया. पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (HoFF) अरविंदर सिंह ने फीता काटकर जंगल सफारी का उद्घाटन किया. इस अवसर पर सैलानियों के पहले जत्थे को जंगल सफारी के लिए रवाना किया गया. इस अवसर पर अरविंदर सिंह ने कहा कि बिहार सरकार राज्य में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने और अधिकाधिक पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है. पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से इस दिशा में विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है. वर्तमान में राजगीर और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में पर्यटन सुविधाओं का विकास प्रमुखता से किया गया है. इसके साथ ही राज्य के अन्य संभावित पर्यटन स्थलों पर भी इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए कार्य किए जा रहे हैं. प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व आने वाले पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. पहले यहां प्रतिवर्ष लगभग ढाई से तीन लाख पर्यटक आते थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर करीब छह लाख तक पहुंच गई है. विभाग का प्रयास है कि बेहतर सुविधाओं और पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के माध्यम से पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि की जाए. उन्होंने कहा कि पर्यटकों को बेहतर अनुभव प्रदान करने के लिए वीटीआर में पर्यटन संबंधी बुनियादी ढांचे का लगातार विकास किया जा रहा है. [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>वीटीआर में टूरिज्म सीजन की शुरुआत </strong></p>



<p>वाल्मीकि नगर।। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) में पर्यटन सत्र 2026-27 का शुभारंभ 17.10.2026 (शनिवार) को किया गया. पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (HoFF) अरविंदर सिंह ने फीता काटकर जंगल सफारी का उद्घाटन किया. इस अवसर पर सैलानियों के पहले जत्थे को जंगल सफारी के लिए रवाना किया गया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/pnc-valmiki-tiger-reserve-tourism-season-start-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-99899" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/pnc-valmiki-tiger-reserve-tourism-season-start-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/10/pnc-valmiki-tiger-reserve-tourism-season-start-650x366.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>इस अवसर पर अरविंदर सिंह ने कहा कि बिहार सरकार राज्य में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने और अधिकाधिक पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है. पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से इस दिशा में विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है. वर्तमान में राजगीर और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में पर्यटन सुविधाओं का विकास प्रमुखता से किया गया है. इसके साथ ही राज्य के अन्य संभावित पर्यटन स्थलों पर भी इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए कार्य किए जा रहे हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="466" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/pnc-vtr-jangal-safari-start-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-99900" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/pnc-vtr-jangal-safari-start-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/10/pnc-vtr-jangal-safari-start-650x296.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/10/pnc-vtr-jangal-safari-start-1536x699.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व आने वाले पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. पहले यहां प्रतिवर्ष लगभग ढाई से तीन लाख पर्यटक आते थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर करीब छह लाख तक पहुंच गई है. विभाग का प्रयास है कि बेहतर सुविधाओं और पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के माध्यम से पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि की जाए.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/pnc-vtr-function-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-99897" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/pnc-vtr-function-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/10/pnc-vtr-function-650x366.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>उन्होंने कहा कि पर्यटकों को बेहतर अनुभव प्रदान करने के लिए वीटीआर में पर्यटन संबंधी बुनियादी ढांचे का लगातार विकास किया जा रहा है. यहां इको-कॉटेज और कन्वेंशन सेंटर जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं. कन्वेंशन सेंटर में उच्चस्तरीय आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं. इसके अतिरिक्त, पर्यटकों के ठहरने की सुविधा को और बेहतर बनाने के लिए विभिन्न स्थानों पर रिसॉर्ट विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है. जंगल सफारी को अधिक सुविधाजनक और यादगार बनाने के लिए नई गाड़ियों की व्यवस्था की गई है. साथ ही, पर्यटकों को जंगल, वन्यजीवों और जैव विविधता के बारे में विस्तृत जानकारी देने के उद्देश्य से गाइडों की नियुक्ति भी की गई है. इससे पर्यटक जंगल और वन्यजीवों को करीब से समझ सकेंगे तथा संरक्षण के प्रति जागरूक होंगे.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/pnc-vtr-tourist-season-launch-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-99896" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/pnc-vtr-tourist-season-launch-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/10/pnc-vtr-tourist-season-launch-650x366.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>अरविंदर सिंह ने बताया कि वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में पर्यटन के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए हेली-टूरिज्म के तहत हेलीकॉप्टर सेवा भी शुरू की गई है. इन पहलों का उद्देश्य पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ बिहार को इको-टूरिज्म के प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित करना है.<br>पर्यटन सत्र के शुभारंभ के अवसर पर वन संरक्षक-सह-क्षेत्र निदेशक गौरव ओझा, डीएफओ-सह-उप निदेशक, प्रमंडल-2  विकास अहलावत, डीएफओ-सह-उप निदेशक, प्रमंडल-1  शिखर प्रधान सहित सहायक वन संरक्षक, वन क्षेत्र पदाधिकारी एवं विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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		<title>दस साल से आरा के दिल में बसा ‘अम्बा डांडिया उत्सव’</title>
		<link>https://www.patnanow.com/10-sal-se-aara-ke-dil-ka-sartaj-bana-amba-dandiya-nite/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 14 Oct 2026 00:49:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[दस साल . बेमिसाल! डांडिया की थाप पर थिरका आरा, ‘अम्बा डांडिया उत्सव’ ने बनाई खास पहचान परिवारों के संग संस्कृति और परंपरा का अनूठा संगम पटना नाउ &#124; आरा, 13 अक्टूबर। नवरात्रि की उमंग . पारिवारिक आत्मीयता का रंग . भारतीय संस्कृति की खुशबू और डांडिया की थाप . इन सबके संग ‘अम्बा डांडिया उत्सव’ ने अपने दसवें संस्करण के साथ आरा की सांस्कृतिक पहचान में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया. दस वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा यह उत्सव अब महज एक आयोजन नहीं, बल्कि शहर के परिवारों के मिलन और सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने का एक खास मंच बन चुका है. नवरात्रि के अवसर पर आयोजित दसवां अम्बा डांडिया उत्सव सोमवार को पूरे उत्साह और उमंग के साथ संपन्न हुआ. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शहरवासियों ने अपने परिवार, बच्चों और बुजुर्गों के साथ पारंपरिक परिधानों में शिरकत की. रंग-बिरंगे परिधान, डांडिया की थाप और उत्सव के उल्लास ने पूरे माहौल को जीवंत बना दिया. कार्यक्रम में जिला कला अधिकारी अनुप्रिया मुख्य अतिथि और डीपीओ नमामि गंगे अमित कुमार सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए. अतिथियों ने दीप प्रज्वलित किया और मां दुर्गा की आरती कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. उन्होंने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए ऐसे आयोजनों को सामाजिक और सांस्कृतिक एकजुटता के लिए महत्वपूर्ण बताया. दसवीं वर्षगांठ पर प्रतिभाओं का सम्मान . 10 श्रेणियों में बांटे गए पुरस्कार अम्बा डांडिया उत्सव के दस वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रतिभागियों की प्रतिभा और उत्साह को सम्मानित करने के लिए 10 विभिन्न श्रेणियों [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>दस साल . बेमिसाल! डांडिया की थाप पर थिरका आरा, ‘अम्बा डांडिया उत्सव’ ने बनाई खास पहचान</strong></p>



<p><strong>परिवारों के संग संस्कृति और परंपरा का अनूठा संगम</strong><br></p>



<p><strong>पटना नाउ | </strong></p>



<p><strong>आरा, 13 अक्टूबर।</strong> नवरात्रि की उमंग . पारिवारिक आत्मीयता का रंग . भारतीय संस्कृति की खुशबू और डांडिया की थाप . इन सबके संग ‘अम्बा डांडिया उत्सव’ ने अपने दसवें संस्करण के साथ आरा की सांस्कृतिक पहचान में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया. दस वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा यह उत्सव अब महज एक आयोजन नहीं, बल्कि शहर के परिवारों के मिलन और सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने का एक खास मंच बन चुका है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="679" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868050-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-99821" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868050-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868050-650x431.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>नवरात्रि के अवसर पर आयोजित दसवां अम्बा डांडिया उत्सव सोमवार को पूरे उत्साह और उमंग के साथ संपन्न हुआ. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शहरवासियों ने अपने परिवार, बच्चों और बुजुर्गों के साथ पारंपरिक परिधानों में शिरकत की. रंग-बिरंगे परिधान, डांडिया की थाप और उत्सव के उल्लास ने पूरे माहौल को जीवंत बना दिया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="568" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868051-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-99824" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868051-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868051-650x361.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



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<p>कार्यक्रम में जिला कला अधिकारी अनुप्रिया मुख्य अतिथि और डीपीओ नमामि गंगे अमित कुमार सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए. अतिथियों ने दीप प्रज्वलित किया और मां दुर्गा की आरती कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. उन्होंने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए ऐसे आयोजनों को सामाजिक और सांस्कृतिक एकजुटता के लिए महत्वपूर्ण बताया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="656" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868052-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-99823" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868052-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868052-650x416.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><strong>दसवीं वर्षगांठ पर प्रतिभाओं का सम्मान . 10 श्रेणियों में बांटे गए पुरस्कार</strong><br><br>अम्बा डांडिया उत्सव के दस वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रतिभागियों की प्रतिभा और उत्साह को सम्मानित करने के लिए 10 विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार दिए गए. ईको ट्राईवा की ओर से बेस्ट कपल, बेस्ट डांसर, बेस्ट क्यूट फेस चाइल्ड, बेस्ट कपल डांस, बेस्ट जोड़ीदार और बेस्ट ड्रेस जैसी श्रेणियों में चयनित प्रतिभागियों को आकर्षक गिफ्ट हैंपर देकर पुरस्कृत किया गया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="768" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868078-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-99825" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868078-scaled.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868078-488x650.jpg 488w, https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868078-1152x1536.jpg 1152w" sizes="auto, (max-width: 768px) 100vw, 768px" /></figure>



<p>इस अवसर पर सुधा के प्रबंध निदेशक सुमन, मेडिकॉन हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक बादल विराट, ईको ट्राईवा के प्रबंध निदेशक सोहित कुमार और न्यूज वन नेशन के बिहार-झारखंड हेड मनोज कुमार सिंह और विजय स्टूडियो के प्रबंध निदेशक और बेहतरीन छायाकार हरि जी की उपस्थिति रही. अतिथियों ने आयोजन की सराहना करते हुए इसके दस वर्षों के सफर को सराहनीय उपलब्धि बताया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="626" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868122-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-99832" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868122-scaled.jpg 626w, https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868122-397x650.jpg 397w, https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868122-938x1536.jpg 938w" sizes="auto, (max-width: 626px) 100vw, 626px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="667" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868053-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-99830" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868053-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868053-650x424.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><strong>जब डांडिया बना परिवारों के मिलन का माध्यम</strong><br>अम्बा डांडिया उत्सव की शुरुआत एक ऐसी सोच के साथ हुई थी, जिसमें पति-पत्नी अपने बच्चों और परिजनों के साथ सुरक्षित, अनुशासित और पारिवारिक माहौल में नवरात्रि का आनंद ले सकें. आयोजन की यही खासियत धीरे-धीरे इसकी पहचान बन गई.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="768" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868079-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-99828" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868079-scaled.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868079-488x650.jpg 488w, https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868079-1152x1536.jpg 1152w" sizes="auto, (max-width: 768px) 100vw, 768px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="691" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868091-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-99827" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868091-scaled.jpg 691w, https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868091-439x650.jpg 439w, https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868091-1037x1536.jpg 1037w" sizes="auto, (max-width: 691px) 100vw, 691px" /></figure>



<p>समय के साथ इस पहल ने लोकप्रियता हासिल की और आरा में गरबा व डांडिया संस्कृति को पारिवारिक स्वरूप देने में अपनी अलग जगह बनाई. आज जब विद्यालयों और विभिन्न संस्थानों में भी डांडिया आयोजनों का चलन बढ़ रहा है, तब अम्बा डांडिया जैसे मंच नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, पारंपरिक परिधानों और सामूहिक उत्सव की परंपरा से जोड़ने का काम कर रहे हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="683" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001866467-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-99833" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001866467-scaled.jpg 683w, https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001866467-433x650.jpg 433w, https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001866467-1024x1536.jpg 1024w" sizes="auto, (max-width: 683px) 100vw, 683px" /></figure>



<p>इस आयोजन की खास बात यह रही कि यहां मनोरंजन के साथ पारिवारिक सहभागिता और सामाजिक मेलजोल को भी समान महत्व दिया गया. बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की भागीदारी ने उत्सव को एक साझा सांस्कृतिक अनुभव बना दिया.<br><br><strong>महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर विशेष जोर</strong><br>बड़े स्तर पर आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. आयोजन स्थल पर महिला पुलिसकर्मियों की सक्रिय तैनाती रही, जिससे प्रतिभागियों को सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल उपलब्ध कराने में मदद मिली.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="683" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868125-scaled.png" alt="" class="wp-image-99835" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868125-scaled.png 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001868125-650x433.png 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><strong>आयोजन समिति की मेहनत से सफल हुआ दसवां संस्करण</strong><br>अम्बा डांडिया उत्सव के दसवें संस्करण को सफल बनाने में आयोजन समिति के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही. आयोजन को व्यवस्थित रूप देने और कार्यक्रम को सफल बनाने में ओ पी पांडेय, राकेश राजपूत, मंगलेश तिवारी, स्वीटी कुमारी, समीर कुमार श्रीवास्तव, करिश्मा सिंह, गौरी तिवारी, अदिति राज, अभय विश्वास भट्ट, प्रियांशु भास्कर, हर्षिता विक्रम, जया कुमारी, आलोक कुमार सिंह, प्रियंका कुमारी, रोहित सिंह बजरंगी, चिंताहरण पांडेय, अभिषेक द्विवेदी, शुभम कुमार और सुमित कुमार की समर्पित भूमिका रही.</p>



<p><strong>दस वर्षों का सफर . संस्कृति से जुड़ाव और परिवारों का विश्वास</strong><br>अम्बा डांडिया उत्सव का दसवां संस्करण इस बात का प्रमाण बना कि जब किसी आयोजन की बुनियाद पारिवारिक मूल्यों, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सहभागिता पर रखी जाती है, तो वह धीरे-धीरे शहर की पहचान बन जाता है. आरा में अम्बा डांडिया उत्सव ने इसी पहचान को मजबूत करते हुए एक बार फिर साबित किया कि त्योहारों की असली खूबसूरती अपनों के साथ मिलकर खुशियां बांटने में है. हर साल सबसे पहला डांडिया का उत्सव करा कर संस्था जैसे लोगों में एक कुलबुलाहट पैदा कर कई आयोजनों को कराने के लिए प्रेरित कर जाता है और एक।के बाद एक कई आयोजन होने लगते हैं।</p>



<p><strong>PNCB</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>&#8220;संगीत के बिना &#8220;ब्रांड बिहार&#8221; पुनर्निर्मित नहीं हो सकता&#8221;</title>
		<link>https://www.patnanow.com/vijaya-bharti-pc/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 Oct 2026 16:03:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[art and culture]]></category>
		<category><![CDATA[Bihar culture]]></category>
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		<category><![CDATA[Vijaya bharti]]></category>
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					<description><![CDATA[&#8220;Brand Bihar Can not be ReBuilt Without the Music&#8221; अश्लील एवं द्विअर्थी लोकगीतों पर प्रतिबंध का स्वागत पटना।। प्रख्यात लोकगायिका विजया भारती ने आज पटना में संस्कृति विभाग, बिहार सरकार के सचिव प्रणव कुमार (IAS) एवं निदेशक (संस्कृति) रूबी से सौजन्य भेंट की. इस मुलाकात में उन्होंने बिहार की सांस्कृतिक विरासत, लोक कलाकारों की दशा एवं संस्कृति-आधारित आत्मनिर्भरता पर अपने विचार रखे और राज्य के सांस्कृतिक पुनरुत्थान, कलाकारों के प्रोत्साहन और विभिन्न कलाओं के समग्र विकास, संरक्षण और संवर्धन के लिए पटना में एक विशेष कला ग्राम की स्थापना की मांग की. विजया भारती ने कहा कि बिहार — गर्व की वह भूमि है, जहाँ से भारत ने भाषा पाई, सुर पाये, सौहार्द्र, समानता और समागम की संस्कृति विकसित की. उन्होंने कहा कि बिहार केवल एक राज्य नहीं, एक सभ्यता है. यह वह भूमि है जहाँ कला, संगीत, साहित्य, दर्शन, धर्म, भाषा, शिक्षा और लोकतंत्र — सबने अपना प्रथम स्वर पाया, विश्व में स्थापित किया और कीर्तिमान बनाया. विजया भारती ने बिहार को लेकर कहा कि यह वही धरती है जहाँ महाकवि विद्यापति ने मैथिली को अमर कर दिया, जहाँ भिखारी ठाकुर ने लोक-नाट्य को जनता की आवाज़ बनाया, जहाँ महेंद्र मिसिर ने मगही को साहित्य की गरिमा दी. यह वही भूमि है जहाँ महात्मा गांधी ने चंपारण सत्याग्रह से सत्य और अहिंसा को विश्व-पटल पर स्थापित किया, जहाँ बाबू कुंवर सिंह ने 1857 में अंग्रेज़ों के विरुद्ध प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल फूँका। बिहार — यानी आर्यभट्ट की जन्मभूमि, चाणक्य की कर्मभूमि, नालंदा एवं विक्रमशिला की शिक्षा-परंपरा, बोधगया का [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>&#8220;<strong>Brand Bihar Can not be ReBuilt Without the Music&#8221;</strong></p>



<p><strong>अश्लील एवं द्विअर्थी लोकगीतों पर प्रतिबंध का स्वागत</strong></p>



<p>पटना।। प्रख्यात लोकगायिका विजया भारती ने आज पटना में संस्कृति विभाग, बिहार सरकार के सचिव प्रणव कुमार (IAS) एवं निदेशक (संस्कृति) रूबी से सौजन्य भेंट की.</p>



<p>इस मुलाकात में उन्होंने बिहार की सांस्कृतिक विरासत, लोक कलाकारों की दशा एवं संस्कृति-आधारित आत्मनिर्भरता पर अपने विचार रखे और राज्य के सांस्कृतिक पुनरुत्थान, कलाकारों के प्रोत्साहन और विभिन्न कलाओं के समग्र विकास, संरक्षण और संवर्धन के लिए पटना में एक विशेष कला ग्राम की स्थापना की मांग की.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="803" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001194328-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-99768" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001194328-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001194328-650x509.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>विजया भारती ने कहा कि बिहार — गर्व की वह भूमि है, जहाँ से भारत ने भाषा पाई, सुर पाये, सौहार्द्र, समानता और समागम की संस्कृति विकसित की. उन्होंने कहा कि बिहार केवल एक राज्य नहीं, एक सभ्यता है. यह वह भूमि है जहाँ कला, संगीत, साहित्य, दर्शन, धर्म, भाषा, शिक्षा और लोकतंत्र — सबने अपना प्रथम स्वर पाया, विश्व में स्थापित किया और कीर्तिमान बनाया.</p>



<p>विजया भारती ने बिहार को लेकर कहा कि यह वही धरती है जहाँ महाकवि विद्यापति ने मैथिली को अमर कर दिया, जहाँ भिखारी ठाकुर ने लोक-नाट्य को जनता की आवाज़ बनाया, जहाँ महेंद्र मिसिर ने मगही को साहित्य की गरिमा दी. यह वही भूमि है जहाँ महात्मा गांधी ने चंपारण सत्याग्रह से सत्य और अहिंसा को विश्व-पटल पर स्थापित किया, जहाँ बाबू कुंवर सिंह ने 1857 में अंग्रेज़ों के विरुद्ध प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल फूँका। बिहार — यानी आर्यभट्ट की जन्मभूमि, चाणक्य की कर्मभूमि, नालंदा एवं विक्रमशिला की शिक्षा-परंपरा, बोधगया का ज्ञान, वैशाली का विश्व का प्रथम गणराज्य — लोकतंत्र की जननी.</p>



<p>यहाँ सोहर जन्म का स्वर है, समदाउन विदाई का, कजरी विरह की, चैती फसल की, झूमर उल्लास का, निर्गुण आत्म-खोज का, और छठ गीत सूर्य-उपासना का. मिथिला की मधुबनी, भोजपुर का आरा, मगध का राजगीर, अंग की भागलपुर, बज्जिका की बोली — ये केवल नाम नहीं, सभ्यता के स्तंभ हैं. बिहार की पहचान उसकी विविधता में है — भोजपुरी, मैथिली, मगही, अंगिका, बज्जिका, अवधी.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001194066-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-99769" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001194066-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001194066-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001194066-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>अश्लील और द्विअर्थी लोक संगीत पर राज्य सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को ऐतिहासिक कदम करार देते हुए विजया भारती ने कहा कि &#8211; &#8220;मैं बिहार सरकार को हृदय से बधाई देती हूँ. 9 फरवरी 2026 का वह ऐतिहासिक आदेश, जिसके द्वारा अश्लील, द्विअर्थी एवं जातिसूचक भोजपुरी आदि गानों पर सार्वजनिक स्थलों एवं वाहनों में पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया, सांस्कृतिक गरिमा, सामाजिक सद्भाव एवं महिलाओं की मर्यादा की रक्षा की दिशा में निर्णायक पहल है. यह केवल प्रतिबंध नहीं, पुनर्स्थापना का आरंभ है.&#8221;</p>



<p>हालांकि साथ ही उन्होंने कहा कि &#8220;प्रतिबंधों के साथ प्रोत्साहन भी अनिवार्य है. कोविड-19 के बाद बिहार के हज़ारों लोक कलाकार आज भी संघर्ष कर रहे हैं। उनके लिए मंच, मानदेय, बीमा, पेंशन एवं प्रशिक्षण — यही सच्ची सांस्कृतिक सेवा होगी.&#8221;</p>
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		<item>
		<title>नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन</title>
		<link>https://www.patnanow.com/nahi-rehe-nana/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 08 Oct 2026 04:33:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[कार्डियक अरेस्ट ने ली जान गोवा स्थित आवास पर बेहोश मिले दिग्गज अभिनेता, 45 मिनट तक CPR के बाद भी नहीं बचाया जा सका; बेटे मल्हार ने दी पुष्टि पटना,8 सितम्बर। बॉलीवुड और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 की सुबह 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके अचानक निधन की खबर से पूरे देश और फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। नाना पाटेकर गोवा के डोना पाउला स्थित अपने आवास पर बेहोश पाए गए थे, जिसके बाद उन्हें तत्काल मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल से सामने आई जानकारी के अनुसार नाना पाटेकर को गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया था। मणिपाल अस्पताल के डॉक्टर शेखर सालकर के मुताबिक, उन्हें बचाने के लिए करीब 45 मिनट तक लगातार CPR दिया गया, लेकिन उन्हें पुनर्जीवित नहीं किया जा सका। उन्हें सुबह करीब 5:20 बजे मृत घोषित किया गया। मामले को मेडिको-लीगल केस के तौर पर दर्ज किया गया है और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया की जाएगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक नाना पाटेकर ने तड़के अपने एक मित्र को असहज महसूस होने की जानकारी दी थी। इसके कुछ समय बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी। बेटे मल्हार ने की निधन की पुष्टि नाना पाटेकर के बेटे मल्हार पाटेकर ने उनके निधन की पुष्टि की है। रिपोर्ट्स के अनुसार मल्हार पुणे से गोवा के लिए रवाना हुए हैं और परिवार की ओर से आगे विस्तृत जानकारी साझा किए जाने की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<h1 class="wp-block-heading">कार्डियक अरेस्ट ने ली जान</h1>



<h3 class="wp-block-heading">गोवा स्थित आवास पर बेहोश मिले दिग्गज अभिनेता, 45 मिनट तक CPR के बाद भी नहीं बचाया जा सका; बेटे मल्हार ने दी पुष्टि</h3>



<p><strong>पटना,8 सितम्बर।</strong> बॉलीवुड और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता <strong>नाना पाटेकर</strong> का गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 की सुबह 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके अचानक निधन की खबर से पूरे देश और फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। नाना पाटेकर गोवा के डोना पाउला स्थित अपने आवास पर बेहोश पाए गए थे, जिसके बाद उन्हें तत्काल मणिपाल अस्पताल ले जाया गया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="853" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001843064-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-99754" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001843064-scaled.jpg 853w, https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001843064-542x650.jpg 542w" sizes="auto, (max-width: 853px) 100vw, 853px" /></figure>



<p>अस्पताल से सामने आई जानकारी के अनुसार नाना पाटेकर को गंभीर <strong>कार्डियक अरेस्ट</strong> आया था। मणिपाल अस्पताल के डॉक्टर शेखर सालकर के मुताबिक, उन्हें बचाने के लिए करीब <strong>45 मिनट तक लगातार CPR</strong> दिया गया, लेकिन उन्हें पुनर्जीवित नहीं किया जा सका। उन्हें सुबह करीब <strong>5:20 बजे मृत घोषित किया गया</strong>। मामले को मेडिको-लीगल केस के तौर पर दर्ज किया गया है और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया की जाएगी।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="997" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001843038-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-99755" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001843038-scaled.jpg 997w, https://www.patnanow.com/assets/2026/10/1001843038-633x650.jpg 633w" sizes="auto, (max-width: 997px) 100vw, 997px" /></figure>



<p>रिपोर्ट्स के मुताबिक नाना पाटेकर ने तड़के अपने एक मित्र को असहज महसूस होने की जानकारी दी थी। इसके कुछ समय बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी।</p>



<h3 class="wp-block-heading">बेटे मल्हार ने की निधन की पुष्टि</h3>



<p>नाना पाटेकर के बेटे <strong>मल्हार पाटेकर</strong> ने उनके निधन की पुष्टि की है। रिपोर्ट्स के अनुसार मल्हार पुणे से गोवा के लिए रवाना हुए हैं और परिवार की ओर से आगे विस्तृत जानकारी साझा किए जाने की बात सामने आई है।</p>



<figure class="wp-block-embed is-type-rich is-provider-x wp-block-embed-x"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="en" dir="ltr">Extremely shocked and saddened by the demise of <a href="https://x.com/hashtag/NanaPatekar?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#NanaPatekar</a> ji&#8230; One of the finest actors to have ever graced the <a href="https://x.com/hashtag/Indian?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Indian</a> screen.<br><br>I had the honour of interviewing him a few times and will always cherish those memories, along with the many conversations we shared over the… <a href="https://t.co/WulwWCri3d">pic.twitter.com/WulwWCri3d</a></p>&mdash; taran adarsh (@taran_adarsh) <a href="https://x.com/taran_adarsh/status/2108040307577356374?ref_src=twsrc%5Etfw">October 8, 2026</a></blockquote><script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
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<figure class="wp-block-embed is-type-rich is-provider-x wp-block-embed-x"><div class="wp-block-embed__wrapper">
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<figure class="wp-block-embed is-type-rich is-provider-x wp-block-embed-x"><div class="wp-block-embed__wrapper">
https://twitter.com/prakashraaj/status/2108029148392554520
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<figure class="wp-block-embed is-type-rich is-provider-x wp-block-embed-x"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="en" dir="ltr">Few actors possessed the intensity, individuality and unmistakable presence that Shri Nana Patekar Ji had. He brought remarkable versatility and creativity to every role and gave us characters that will be remembered for generations. He was also admired for his frank and…</p>&mdash; Narendra Modi (@narendramodi) <a href="https://x.com/narendramodi/status/2108040795844706467?ref_src=twsrc%5Etfw">October 8, 2026</a></blockquote><script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</div></figure>



<p>नाना पाटेकर के निधन पर प्रधानमंत्री <strong>नरेंद्र मोदी</strong> समेत राजनीतिक और फिल्म जगत की कई हस्तियों ने शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री ने उनके निधन को हिंदी और मराठी सिनेमा के लिए बड़ी क्षति बताते हुए कहा कि उनके जाने से एक गहरा शून्य पैदा हुआ है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">&#8216;गमन&#8217; से शुरू हुआ था सफर</h3>



<p>नाना पाटेकर ने वर्ष <strong>1978 में फिल्म &#8216;गमन&#8217;</strong> से अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने &#8216;परिंदा&#8217;, &#8216;प्रहार&#8217;, &#8216;क्रांतिवीर&#8217;, &#8216;अग्निसाक्षी&#8217;, &#8216;अब तक छप्पन&#8217;, &#8216;वेलकम&#8217;, &#8216;नटसम्राट&#8217; समेत कई फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं।</p>



<p>उनकी संवाद अदायगी, दमदार आवाज और किरदारों में जान डाल देने वाले अभिनय ने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली अभिनेताओं में शामिल किया। अभिनय के साथ-साथ उन्होंने निर्देशन और थिएटर में भी अपनी पहचान बनाई।</p>



<p>नाना पाटेकर को उनके अभिनय के लिए <strong>तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार</strong> मिले थे। वर्ष <strong>2013 में उन्हें पद्मश्री</strong> से सम्मानित किया गया था।</p>



<p>नाना पाटेकर के निधन से हिंदी और मराठी सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया है, जिसकी आवाज, अभिनय और स्क्रीन प्रेजेंस की अपनी अलग पहचान थी। उनके निधन की खबर के बाद फिल्म इंडस्ट्री, राजनेताओं और प्रशंसकों की ओर से लगातार श्रद्धांजलियां दी जा रही हैं।</p>



<p><strong>PNCB</strong> </p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>चर्चित शिक्षक शिव कुमार सहाय का निधन</title>
		<link>https://www.patnanow.com/famous-teacher-sheo-kumar-sahay-is-no-more/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 19 Sep 2026 02:05:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ACADEMIC]]></category>
		<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[We Care]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
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		<category><![CDATA[Bollywood]]></category>
		<category><![CDATA[Jain school Ara]]></category>
		<category><![CDATA[Journalist O P Pandey]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA NOW]]></category>
		<category><![CDATA[satyakam anand]]></category>
		<category><![CDATA[Sheo Kumar Sahay]]></category>
		<category><![CDATA[teacher]]></category>
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					<description><![CDATA[बॉलीवुड अभिनेता सत्यकाम आनंद के थे पिता 84 वर्ष की उम्र में हृदय गति रुकने से हुआ निधन, शिष्यों में शोक की लहर आरा,19 सितंबर। शहर के मौलाबाग निवासी, जैन स्कूल के चर्चित विज्ञान शिक्षक एवं पूर्व प्रभारी प्रधानाचार्य शिव कुमार सहाय का शुक्रवार की शाम निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे। उनके छोटे पुत्र सोनू ने बताया कि शुक्रवार की शाम करीब 4 से 5 बजे के बीच मौलाबाग स्थित आवास पर हृदय गति रुकने से उनका निधन हुआ। शिव कुमार सहाय जिले के चर्चित शिक्षकों में शुमार रहे। विज्ञान और गणित विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ तथा विद्यार्थियों के प्रति सहज और सौम्य व्यवहार के कारण वह लंबे समय तक अपने शिष्यों के बीच लोकप्रिय रहे। सेवानिवृत्ति के बाद भी उनसे पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या कम नहीं हुई। उन्होंने अपने जीवन में आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क शिक्षा भी दी।शिक्षण के साथ-साथ शिव कुमार सहाय सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहे। समाज के जरूरतमंद और दबे-कुचले लोगों की मदद के लिए वह लगातार प्रयासरत रहते थे। सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी उनकी अपनी पहचान थी। समाजसेवा के प्रति इसी जुड़ाव के कारण उन्होंने आरा से विधानसभा चुनाव भी लड़ा था। हालांकि चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने सामाजिक सरोकारों से खुद को अलग नहीं किया और लोगों की मदद करते रहे। शिव कुमार सहाय अपने पीछे पत्नी, तीन पुत्र, दो पुत्रियों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके बड़े पुत्र सुनील सहाय स्कॉलर एवं भोजपुरी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong> बॉलीवुड अभिनेता सत्यकाम आनंद के थे पिता</strong><br><br><strong>84 वर्ष की उम्र में हृदय गति रुकने से हुआ निधन, शिष्यों में शोक की लहर</strong><br><br><strong>आरा,19 सितंबर।</strong> शहर के मौलाबाग निवासी, जैन स्कूल के चर्चित विज्ञान शिक्षक एवं पूर्व प्रभारी प्रधानाचार्य <strong>शिव कुमार सहाय</strong> का शुक्रवार की शाम निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे। उनके छोटे पुत्र सोनू ने बताया कि शुक्रवार की शाम करीब 4 से 5 बजे के बीच मौलाबाग स्थित आवास पर हृदय गति रुकने से उनका निधन हुआ।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="687" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/09/1001765230-scaled.png" alt="" class="wp-image-99364" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/09/1001765230-scaled.png 687w, https://www.patnanow.com/assets/2026/09/1001765230-436x650.png 436w" sizes="auto, (max-width: 687px) 100vw, 687px" /></figure>



<p><br>शिव कुमार सहाय जिले के चर्चित शिक्षकों में शुमार रहे। विज्ञान और गणित विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ तथा विद्यार्थियों के प्रति सहज और सौम्य व्यवहार के कारण वह लंबे समय तक अपने शिष्यों के बीच लोकप्रिय रहे। सेवानिवृत्ति के बाद भी उनसे पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या कम नहीं हुई। उन्होंने अपने जीवन में आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क शिक्षा भी दी।<br>शिक्षण के साथ-साथ शिव कुमार सहाय सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहे। समाज के जरूरतमंद और दबे-कुचले लोगों की मदद के लिए वह लगातार प्रयासरत रहते थे। सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी उनकी अपनी पहचान थी। समाजसेवा के प्रति इसी जुड़ाव के कारण उन्होंने आरा से विधानसभा चुनाव भी लड़ा था। हालांकि चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने सामाजिक सरोकारों से खुद को अलग नहीं किया और लोगों की मदद करते रहे।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="785" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/09/1001765281-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-99365" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/09/1001765281-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/09/1001765281-650x498.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>शिव कुमार सहाय अपने पीछे पत्नी, तीन पुत्र, दो पुत्रियों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके बड़े पुत्र <strong>सुनील सहाय</strong> स्कॉलर एवं भोजपुरी विभाग के प्राध्यापक रहे हैं। दूसरे पुत्र <strong>सत्यकाम आनंद</strong> बॉलीवुड के चर्चित अभिनेता एवं रंगकर्मी हैं, जबकि सबसे छोटे पुत्र <strong>सोनू</strong> बीपीएससी और यूपीएससी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले शिक्षक हैं।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="768" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/09/1001765282-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-99366" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/09/1001765282-scaled.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2026/09/1001765282-488x650.jpg 488w, https://www.patnanow.com/assets/2026/09/1001765282-1152x1536.jpg 1152w" sizes="auto, (max-width: 768px) 100vw, 768px" /></figure>



<p>उनके निधन की सूचना मिलते ही अलग-अलग शहरों में रह रहे परिवार के सदस्य आरा के लिए रवाना हो गए हैं। परिजनों के शनिवार की सुबह तक आरा पहुंचने के बाद स्वर्गीय शिव कुमार सहाय की अंत्येष्टि की जाएगी।<br><br>इधर, उनके निधन की खबर फैलते ही उनके पुराने शिष्यों और परिचितों के घर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। जैन स्कूल सहित शहर के विभिन्न क्षेत्रों में उनसे शिक्षा प्राप्त कर चुके सैकड़ों लोग उनके आवास पर पहुंचकर श्रद्धांजलि दे रहे हैं। उनके निधन से शिक्षा जगत, रंगकर्म और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है।</p>



<p>आरा से <strong>ओ पी पाण्डेय</strong> की रिपोर्ट </p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>पटना में 20 सितंबर से बिहार सरस मेला, 15 राज्यों के व्यंजन और शिल्प की लगेगी प्रदर्शनी</title>
		<link>https://www.patnanow.com/saras-mela-starting-soon/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Sep 2026 13:24:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
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					<description><![CDATA[ज्ञान भवन में जुटेंगे 15 राज्यों के स्वयं सहायता समूह पटना, 18 सितंबर। ग्रामीण महिलाओं के हुनर और उद्यम को बाजार से जोड़ने के लिए बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) द्वारा बिहार सरस मेला 2026 के प्रथम संस्करण का आयोजन 20 से 29 सितंबर तक ज्ञान भवन, पटना में किया जाएगा. ग्रामीण विकास विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस मेले का यह 18वां संस्करण है. जीविका ने बताया कि सरस मेला की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी और 2018 से इसके दो संस्करण आयोजित किए जा रहे हैं. ज्ञान भवन में इसका स्वरूप क्रेता-विक्रेता संवाद वाला होता है, जबकि गांधी मैदान में यह एक बड़े जन-उत्सव के रूप में लगता है. इस बार के मेले में बिहार समेत 15 राज्यों की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिला उद्यमी शामिल हो रही हैं. इनमें आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड, मध्य प्रदेश, मणिपुर, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गोवा, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर शामिल हैं. मेले में लगभग 135 स्टॉल लगाए जाएंगे. क्या मिलेगा मेले में?मेले में बिहार के सभी 38 जिलों के उत्पादों के साथ-साथ हस्तशिल्प, हैंडलूम, कालीन, मलबरी-सिल्क और खादी के कपड़े, मधुबनी पेंटिंग, लाह की चूड़ियां, सीप के गहने, बांस और लकड़ी से बने सजावटी सामान, केले के तने से बने उत्पादों की खरीद-बिक्री होगी. फूड जोन में &#8216;दीदी की रसोई&#8217; आकर्षण का केंद्र रहेगी, जहां देशी व्यंजन, अचार, पापड़, सत्तू, बड़ी, दनौरी और ड्राई फ्रूट्स मिलेंगे. साथ ही जीविका दीदियों द्वारा संचालित महानंदा चाय, जीविका शिल्पग्राम, जीविका मधु ग्राम और जानकी महिला सिलाई केंद्र [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>ज्ञान भवन में जुटेंगे 15 राज्यों के स्वयं सहायता समूह </strong></p>



<p><em>पटना, 18 सितंबर।</em> ग्रामीण महिलाओं के हुनर और उद्यम को बाजार से जोड़ने के लिए बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) द्वारा <em>बिहार सरस मेला 2026</em> के प्रथम संस्करण का आयोजन <em>20 से 29 सितंबर तक ज्ञान भवन, पटना</em> में किया जाएगा.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/09/pnc-Saras-File-Photi-3-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-99356" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/09/pnc-Saras-File-Photi-3-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/09/pnc-Saras-File-Photi-3-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/09/pnc-Saras-File-Photi-3-1536x864.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/09/pnc-Saras-File-Photi-3-2048x1153.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>ग्रामीण विकास विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस मेले का यह <em>18वां संस्करण</em> है. जीविका ने बताया कि सरस मेला की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी और 2018 से इसके दो संस्करण आयोजित किए जा रहे हैं. ज्ञान भवन में इसका स्वरूप क्रेता-विक्रेता संवाद वाला होता है, जबकि गांधी मैदान में यह एक बड़े जन-उत्सव के रूप में लगता है.</p>



<p>इस बार के मेले में बिहार समेत <em>15 राज्यों</em> की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिला उद्यमी शामिल हो रही हैं. इनमें आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड, मध्य प्रदेश, मणिपुर, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गोवा, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर शामिल हैं. मेले में <em>लगभग 135 स्टॉल</em> लगाए जाएंगे.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/09/pnc-I-love-Saras-File-Photo-1-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-99357" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/09/pnc-I-love-Saras-File-Photo-1-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/09/pnc-I-love-Saras-File-Photo-1-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/09/pnc-I-love-Saras-File-Photo-1-1536x864.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/09/pnc-I-love-Saras-File-Photo-1-2048x1153.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><strong>क्या मिलेगा मेले में?</strong><br>मेले में बिहार के सभी 38 जिलों के उत्पादों के साथ-साथ हस्तशिल्प, हैंडलूम, कालीन, मलबरी-सिल्क और खादी के कपड़े, मधुबनी पेंटिंग, लाह की चूड़ियां, सीप के गहने, बांस और लकड़ी से बने सजावटी सामान, केले के तने से बने उत्पादों की खरीद-बिक्री होगी.</p>



<p>फूड जोन में <em>&#8216;दीदी की रसोई&#8217;</em> आकर्षण का केंद्र रहेगी, जहां देशी व्यंजन, अचार, पापड़, सत्तू, बड़ी, दनौरी और ड्राई फ्रूट्स मिलेंगे. साथ ही जीविका दीदियों द्वारा संचालित महानंदा चाय, जीविका शिल्पग्राम, जीविका मधु ग्राम और जानकी महिला सिलाई केंद्र के स्टॉल पर आत्मनिर्भरता की झलक दिखेगी. सतत जीविकोपार्जन योजना और मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के लाभार्थियों के उत्पाद भी यहां उपलब्ध रहेंगे.</p>



<p><strong>इस बार नई पहल &#8211;</strong><br>इस वर्ष ज्ञान भवन में पहली बार <em>क्रेता-विक्रेता संवाद</em> का आयोजन होगा  इसमें सिर्फ उत्पादों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि उत्पाद की गुणवत्ता, पैकेजिंग, आपूर्ति और बाजार की मांग पर संभावित खरीदारों और संस्थागत खरीदारों के बीच सीधी बातचीत होगी, ताकि महिला उद्यमियों को स्थायी बाजार मिल सके.</p>



<p>मेले में कैशलेस खरीददारी और रुपयों की जमा-निकासी के लिए ग्राहक सेवा केंद्र की सुविधा रहेगी। आगंतुकों के लिए सहायता केंद्र भी बनाए गए हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/09/pnc-Saras-File-Photo-2-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-99355" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/09/pnc-Saras-File-Photo-2-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/09/pnc-Saras-File-Photo-2-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/09/pnc-Saras-File-Photo-2-1536x864.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/09/pnc-Saras-File-Photo-2-2048x1153.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>मेले का समय <em>सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक</em> रहेगा और <em>प्रवेश निःशुल्क</em> है.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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		<item>
		<title>मिलिए 2 साल के  इस नन्हे डांसर से..</title>
		<link>https://www.patnanow.com/the-samllestes-dancer-moksh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 25 Aug 2026 01:55:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
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		<category><![CDATA[Dance bihar dance season 5]]></category>
		<category><![CDATA[Journalist O P Pandey]]></category>
		<category><![CDATA[Moksh Pathak]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA NOW]]></category>
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					<description><![CDATA[सिर्फ 2 साल की उम्र… और बड़े-बड़े डांसरों के बीच मंच पर उतरे Moksh Pathak, मोक्ष पाठक बने Dance Bihar Dance के सबसे छोटे स्टार! आरा। उम्र महज 2 साल, लेकिन हौसला किसी बड़े कलाकार से कम नहीं। आरा में चल रही बिहार स्तरीय नृत्य प्रतियोगिता “Dance Bihar Dance – Season 5” में एक नन्हे डांसर ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। नाम है मोक्ष पाठक और खास बात यह है कि वह इस पूरे प्रतियोगिता के सबसे छोटे प्रतिभागी हैं। R. S. D. C Music &#38; Dance School एवं Satya Event Management के बैनर तले आयोजित इस प्रतियोगिता में बिहार के अलग-अलग जिलों से बच्चे, युवा, स्कूल और कॉलेज के प्रतिभागी अपनी नृत्य प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन इन सभी के बीच दो साल के मोक्ष ने अपनी मासूमियत और डांस से अलग ही पहचान बना ली है। जब मंच पर उतरा सिर्फ 2 साल का डांसर… आपको बता दें कि भोजपुर के चर्चित डांसर ऋषिकल्प पाठक के मोक्ष पुत्र हैं। ऑडिशन के दौरान जब यह नन्हा कलाकार डांस करने पहुंचा तो उसकी उम्र देखकर हर कोई हैरान रह गया। लेकिन जैसे ही मोक्ष ने अपने अंदाज में डांस शुरू किया, वहां मौजूद लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ गई। मासूम अदाएं, छोटा-सा शरीर और डांस का गजब उत्साह मोक्ष ने इसी उम्र में अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया। सबसे खास बात यह रही कि इस उम्र में बच्चे जहां मम्मी पापा से दूर होते ही रोने लगते हैं इतनी कम उम्र [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<h1 class="wp-block-heading">सिर्फ 2 साल की उम्र… और बड़े-बड़े डांसरों के बीच मंच पर उतरे Moksh Pathak, </h1>



<p><strong>मोक्ष पाठक बने Dance Bihar Dance के सबसे छोटे स्टार!</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="768" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/08/1001663902-scaled.png" alt="" class="wp-image-98804" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/08/1001663902-scaled.png 768w, https://www.patnanow.com/assets/2026/08/1001663902-488x650.png 488w" sizes="auto, (max-width: 768px) 100vw, 768px" /></figure>



<p><strong>आरा।</strong> उम्र महज <strong>2 साल</strong>, लेकिन हौसला किसी बड़े कलाकार से कम नहीं। आरा में चल रही बिहार स्तरीय नृत्य प्रतियोगिता <strong>“Dance Bihar Dance – Season 5”</strong> में एक नन्हे डांसर ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। नाम है मोक्ष पाठक और खास बात यह है कि वह इस पूरे प्रतियोगिता के <strong>सबसे छोटे प्रतिभागी</strong> हैं।</p>



<p><strong>R. S. D. C Music &amp; Dance School</strong> एवं <strong>Satya Event Management</strong> के बैनर तले आयोजित इस प्रतियोगिता में बिहार के अलग-अलग जिलों से बच्चे, युवा, स्कूल और कॉलेज के प्रतिभागी अपनी नृत्य प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन इन सभी के बीच दो साल के मोक्ष ने अपनी मासूमियत और डांस से अलग ही पहचान बना ली है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="466" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/08/1001660719-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-98801" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/08/1001660719-scaled.jpg 466w, https://www.patnanow.com/assets/2026/08/1001660719-296x650.jpg 296w, https://www.patnanow.com/assets/2026/08/1001660719-699x1536.jpg 699w" sizes="auto, (max-width: 466px) 100vw, 466px" /></figure>



<h3 class="wp-block-heading">जब मंच पर उतरा सिर्फ 2 साल का डांसर…</h3>



<p>आपको बता दें कि भोजपुर के चर्चित डांसर ऋषिकल्प पाठक के मोक्ष पुत्र हैं। ऑडिशन के दौरान जब यह नन्हा कलाकार डांस करने पहुंचा तो उसकी उम्र देखकर हर कोई हैरान रह गया। लेकिन जैसे ही मोक्ष ने अपने अंदाज में डांस शुरू किया, वहां मौजूद लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ गई।</p>



<p>मासूम अदाएं, छोटा-सा शरीर और डांस का गजब उत्साह मोक्ष  ने इसी उम्र में अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया।</p>



<p>सबसे खास बात यह रही कि इस उम्र में बच्चे जहां मम्मी पापा से दूर होते ही रोने लगते हैं इतनी कम उम्र के बावजूद मोक्ष ने मंच पर अपना आत्मविश्वास दिखाया और पूरे उत्साह के साथ प्रस्तुति दी।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अब Grand Finale में दिखेगा मोक्ष का जलवा</h3>



<p>ऑडिशन के बाद अब इस नन्हे सितारे की नजर <strong>Dance Bihar Dance – Season 5 के Grand Finale</strong> पर है। बिहार के विभिन्न जिलों से पहुंचे प्रतिभागियों के बीच मोक्ष की मौजूदगी इस प्रतियोगिता के लिए भी खास आकर्षण बन गई है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="468" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/08/1001660717-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-98802" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/08/1001660717-scaled.jpg 468w, https://www.patnanow.com/assets/2026/08/1001660717-297x650.jpg 297w, https://www.patnanow.com/assets/2026/08/1001660717-702x1536.jpg 702w" sizes="auto, (max-width: 468px) 100vw, 468px" /></figure>



<p><strong>सिर्फ दो साल की उम्र में डांस के बड़े मंच तक पहुंचना अपने आप में चर्चा का विषय है।</strong> मोक्ष ने यह संदेश भी दिया है कि प्रतिभा के लिए उम्र कोई सीमा नहीं होती।</p>



<p>अब सबसे बड़ा सवाल है <strong>Grand Finale में जब 2 साल का मोक्ष मंच पर उतरेगा, तो क्या वह एक बार फिर सबका दिल जीत पाएगा?</strong></p>



<p><em>pncb</em></p>



<p></p>
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