फर्जी विज्ञापन पर रेलवे की सख्ती

8 जून को कुछ अखबारों में रेलवे के कई पदों पर बहाली को लेकर एक विज्ञापन प्रकाशित हुआ जिसे लेकर अच्छा खासा हंगामा खड़ा हो गया है. भारतीय रेलवे ने इसे पूरी तरह फर्जी विज्ञापन करार दिया है और यह दावा किया है कि भारतीय रेलवे ने किसी भी एजेंसी को बहाली के लिए ऐसा कोई अधिकार नहीं दिया है. 08 अगस्त को रिक्तियों से संबंधित झूठे विज्ञापन का प्रकाशन इस बारे में पूर्व मध्य रेल की तरफ से यह स्पष्ट किया गया है कि इस विज्ञापन से रेलवे का कोई लेना-देना नहीं है. पूर्व मध्य रेल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार ने कहा कि एक हिन्दी समाचार पत्र के विभिन्न संस्करणों में दिनांक 08.08.2020 को एक एजेंसी द्वारा आउटसोर्सिंग के माध्यम से 11 वर्ष के अनुबंध पर नियुक्ति से संबंधित विज्ञापन (संख्या AVSTN/DL/07/NR/2019-20) का प्रकाशन हुआ है, जो बिल्कुल भ्रामक (FAKE) है. उन्होंने कहा कि इस समाचार पत्र में प्रकाशित उक्त विज्ञापन से भारतीय रेल अथवा पूर्व मध्य रेल का कोई लेना-देना नहीं है. रेलवे में रिक्तियों से संबंधित सूचनाएं रेल भर्ती बोर्ड अथवा रेल भर्ती प्रकोष्ठ के आधिकारिक वेबसाइट पर ही उपलब्ध करायी जाती हैंं तथा विभिन्न माध्यमों द्वारा इसका प्रचार प्रसार भी किया जाता है. CPRO ने लोगोंं से अपील की है कि भारतीय रेल के नाम पर रोजगार देने का दावा करने वाले किसी विज्ञापन के धोखे में आने से बचें . रेलवे ने इस मामले में एक जांच शुरू की है और संबंधित एजेंसी पर सख्त कार्रवाई की बात भी कही है. PNCB

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गुड न्यूज: प्रदीप सिंह बने UPSC टॉपर

कोरोना काल में लोगों की परेशानियों और तमाम तरह के अनुभवों के बीच एक अच्छी खबर आई है. UPSC सिविल सर्विसेज 2019 का फाइनल परिणाम आ गया है. सिविल सर्विसेज विशेषज्ञ डॉ आनंद राज ने बताया कि टॉपर लिस्ट में 26वें नंबर पर गोपालगंज के भोरे प्रखंड के प्रदीप सिंह हैं. जबकि पहले नंबर पर हरियाणा के प्रदीप सिंह, दूसरे पर जतिन किशोर और तीसरे पर प्रतिभा वर्मा हैं. टॉप 50 में 19 लड़कियां हैं. UPSC 2019 Final Result Details Total 927 Candidates 180 IAS, 24 IFS, 150 IPS. Click here for Result https://upsc.gov.in/whats-new/Civil%20Services%20Examination%2C%202019/Final%20Result PNCB

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नई शिक्षा नीति की खास बातें

केंद्रीय कैबिनेट ने नई शिक्षा नीति 2019 को दी मंजूरी करीब साढ़े तीन दशक बाद देश में एक बार फिर एजुकेशन सिस्टम में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति 2019 को मंजूरी दे दी है. 35 साल बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय एक बार फिर शिक्षा मंत्रालय हो गया है. बदलते वक्त की जरूरत के अनुसार शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन किया गया है. ना सिर्फ स्कूली शिक्षा बल्कि यूनिवर्सिटी एजुकेशन में भी अब बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. इसके साथ राष्ट्रीय शिक्षा आयोग को मंजूरी दी गई है जिसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री होंगे. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने केंद्रीय कैबिनेट के फैसले की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति के लिए बड़े स्तर पर सलाह ली गई. 2.5 लाख ग्राम पंचायतों, 6600 ब्लॉक्स, 676 जिलों से सलाह ली गई. नई शिक्षा नीति के तहत कोई छात्र एक कोर्स के बीच में अगर कोई दूसरा कोर्स करना चाहे तो पहले कोर्स से सीमित समय के लिए ब्रेक लेकर ऐसा कर सकता है. नए नियम में यह रहेगा कि एक साल के बाद सर्टिफिकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा, तीन या चार साल के बाद डिग्री मिल सकेगी.बताया गया कि मल्टीपल एंट्री थ्रू बैंक ऑफ क्रेडिट के तहत छात्र के फर्स्ट, सेकंड ईयर के क्रेडिट डिजीलॉकर के माध्यम से क्रेडिट रहेंगे, जिससे कि अगर छात्र को किसी कारण ब्रेक लेना है और एक फिक्स्ड टाइम के अंतर्गत वह वापस आता है तो उसे फर्स्ट और सेकंड ईयर रिपीट करने को नहीं कहा जाएगा. छात्र

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आप अपने बच्चे को स्कूल कब से भेजेंगे…

कोरोना काल में लोग वर्ष 2020 का हर दिन ईश्वर का नाम लेकर गुजार रहे हैं. सबको बस इस बात की चिंता है कि वह और उसका परिवार संक्रमण का शिकार ना हो. बुजुर्गों का खास ख्याल रखा जा रहा है. वहीं बच्चों को भी घर से बाहर निकलने पर रोक है. बच्चों की पढ़ाई ऑनलाइन हो रही है. लेकिन स्कूल वाले परेशान हैं. परेशानी बच्चों को भी हो रही है क्योंकि क्लासरुम की पढ़ाई की बजाय ऑनलाइन पढ़ाई से वे खुश नहीं हैं. सरकार ने अनलॉक2 के बाद की तैयारी के तहत अब एक बार फिर अभिभावकों का मन टटोलने की कोशिश की है. देखिए ये लेटर जो 17 जुलाई को सभी राज्यों के शिक्षा विभाग के सचिवों को भेजा गया है. इसके जरिए सरकार आपसे जानना चाहती है कि स्कूल कब खुलने चाहिए. जी हां, एक तरफ अभिभावक अपने बच्चे को लेकर चिंतित हैं और वे कोई रिस्क नहीं लेना चाहते. दूसरी तरफ 31 जुलाई के बाद क्या करना है इसे लेकर केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सभी राज्यों से 20 जुलाई तक जवाब मांगा है. आपको बता दें कि पिछली बार अभिभावकों ने खुलकर कहा था कि जबतक हालात सामान्य नहीं हो जाते, वे अपने बच्चे को स्कूल नहीं भेजेंगे. अब हालात पहले से ज्यादा खराब हैं. बिहार में तो फिर से 16 दिनों का लॉकडाउन लगाना पड़ा है. ऐसे में अभिभावकों से सभी स्कूल फिर से सलाह मांगेंगे कि उनकी क्या राय है. सवाल तीन प्रमुख प्वायंट्स पर होंगे- # स्कूल कब खुलने चाहिए- अगस्त

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64वीं BPSC मेन्स का रिजल्ट जारी

बीपीएससी ने 64वीं मुख्य परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया है. गुरुवार की देर शाम जारी रिजल्ट में 3799 अभ्यर्थियों को सफलता मिली है. बीपीएससी ने पिछले साल 1465 पदों के लिए मुख्य परीक्षा का आयोजन किया था जिसमेंं करीब 19000 अभ्यर्थी शामिल हुए थे. मुख्य परीक्षा का रिजल्ट देखने के लिए आप नीचे दिए गए लिंक को क्लिक कर सकते हैं -http://www.bpsc.bih.nic.in/ PNC

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दसवीं की परीक्षा में छोटे शहरों का जलवा, पटना के स्टूडेंट्स ने भी दिखाया दम

CBSE दसवीं की परीक्षा में इस बार बिहार के छोटे शहरों ने कमाल कर दिया है पटना जोन में जहां एक बार फिर बेटियों ने बेहतर प्रदर्शन किया है वही औरंगाबाद गया बांका और कटिहार के बच्चों ने भी टॉप टेन में जगह बनाई है. बिहार में पूर्णिया के बीपी स्कूल की छात्रा बॉबी प्रशांत 99.2% अंकों के साथ बिहार में टॉपर रही हैं. पटना के केंद्रीय विद्यालय की अलीफा ने 99 फ़ीसदी अंक हासिल किए हैं जबकि नोट्रेडेम अकैडमी की नव्या ने भी 99% अंक हासिल किया है. इनके अलावा गया के ज्ञान भारती स्कूल की मुस्कान को भी नियंत्रित एजेंट मिले हैं. कटिहार की जानवी, औरंगाबाद डीएवी के श्वेताभ श्रीवास्तव और बांका के अद्वैत मिशन स्कूल के निखिल कुमार ने भी 99 अंक हासिल किए हैं. पटना जोन में 90.69% परीक्षार्थियों को सफलता मिली है. 2019 की तुलना में 2020 में 1.17 सीसी छात्र कम पास हुए हैं. 2020 के रिजल्ट में केंद्रीय विद्यालय का जलवा रहा है. रिजल्ट में सबसे ऊपर केंद्रीय विद्यालय के छात्र रहे हैं. पटना जोन की बात करें तो यहां केंद्रीय विद्यालय के 98.87% छात्र पास हुए हैं. पटना की विद्युत बोर्ड डीएवी के सभी 594 छात्र-छात्राएं सफल हुए हैं. डीएवी बीएसईबी कॉलोनी के आयुष प्रतीक को 98.4% मार्क्स मिले हैं जबकि सनोज एस विजेंद्र को 98.2% मार्क्स प्राप्त हुए हैं. 97% मार्क्स के साथ कनिष्क राय अपने स्कूल में तीसरे स्थान पर रहे हैं. बाल्डविन अकैडमी पटना के सौरभ कुमार 97.4% मार्क्स के साथ स्कूल टॉपर रहे हैं. डॉ जी एल दत्ता

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CBSE रिजल्ट देखने के लिए यहां क्लिक करें

Click on the pic to find Your Result. CBSE ने आज 12 वीं कक्षा के नतीजे घोषित कर दिए हैं. 2020 के रिजल्ट में सफल छात्रों के प्रतिशत में 5.38 फ़ीसदी की वृद्धि हुई है. त्रिवेंद्रम ने जहां ओवरऑल रिजल्ट में बाजी मारी है वही पटना रीजन इस बार सबसे पीछे रहा है. यहां करीब 74 फीसदी छात्र सफल हुए हैं. त्रिवेंद्रम में इस साल 97.67% छात्र सफल हुए हैं जबकि पटना में पासिंग परसेंटेज 74.57 है. पीएनसी

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लॉकडाउन में बेहतर प्रदर्शन से शिवांगी ने कायम की मिसाल

“आई सी एस सी” परीक्षा में शिवांगी का कमाल लॉकडाउन में एक तरफ जहां हर व्यक्ति परेशान है छात्र-छात्राओं को भी परीक्षा की तैयारी में विशेष मशक्कत करनी पड़ी. इस दौरान पटना के छात्र और छात्राओं ने मैट्रिक परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर मिसाल कायम किया है. 90 फ़ीसदी से ज्यादा मार्क्स लाने वाली छात्राओं में एक शिवांगी भी शामिल है जो पटना के माउंट कार्मेल हाई स्कूल की छात्रा है. कार्मल हाई स्कूल, पटना की छात्रा शिवांगी पाठक “आई सी एस सी” की परिक्षा में 93.5% मार्क्स से उत्तीर्ण हुई है. उसे कम्प्यूटर एप्लीकेशन में 98%, हिन्दी में 95%, गणित में 93%, इतिहास, सिविक्स और भूगोल में 92%, अंग्रेजी में 91% और साइंस में 89% प्राप्त हुआ है. सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के प्रशाखा पदाधिकारी विनोद कुमार पाठक ने बताया कि शिवांगी ने स्वयं से घर पर ही परीक्षा की तैयारी की थी. उसे तैयारी में कभी भी कोई कठिनाई होती थी तो अपने स्कूल के शिक्षकों की सहायता लेती थी. जितेंद्र कुमार सिन्हा

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समय से आगे के रचयिता थे भिखारी ठाकुर

आरा. भोजपुरी संस्कृति के अग्रदूत और लोककलाकार भिखारी ठाकुर की 49 वीं पुण्यतिथि का आयोजन स्नातकोत्तर भोजपुरी विभाग, वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय के द्वारा कोरोना संकट के चलते ऑनलाइन व्याख्यान श्रृंखला के रूप में हुआ. इस व्याख्यान का सीधा प्रसारण भोजपुरी विभाग के फेसबुक पेज के माध्यम से किया गया. सुबह के सत्र में प्रख्यात साहित्यकार और भिखारी साहित्य के मर्मज्ञ डॉ जीतेंद्र वर्मा ने सीवान से अपने वक्तव्य में भिखारी ठाकुर के उपर प्रकाशित पुस्तकों की चर्चा की. उन्होंने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शोधार्थियों का आह्वान किया कि वे भिखारी ठाकुर पर अकादमिक शोध कार्यों को पूरा करने की दिशा में प्रयास करें. दोपहर के सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक और मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली के कार्यकारिणी सदस्य डॉ मुन्ना कुमार पाण्डेय ने बिदेसिया और गबरघिचोर नाटकों की विशद चर्चा करते हुए इन नाटकों के जरिये भोजपुरिया समाज से जुड़े स्त्री विमर्श के मुद्दों पर सवाल उठाया. उन्होंने इन नाटकों की तुलना कई विश्वप्रसिद्ध समकालीन नाटकों और रचनाओं से करते हुए भिखारी ठाकुर को समय की नब्ज़ पर हाथ रखने वाला और दूरद्रष्टा रचनाकार बताया. बाद में विभागाध्यक्ष प्रो दिवाकर पाण्डेय ने वक्ताओं का धन्यवाद दिया तथा बताया कि वर्त्तमान कोरोना संकट में भी विभाग के द्वारा ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन जारी है तथा इन कक्षाओं में छात्रों की शत-प्रतिशत उपस्थिति रहती है और ऐसे कार्यक्रम भविष्य में भी आयोजित होते रहेंगे. कार्यक्रम के आयोजन में विभाग के शोधार्थियों यशवंत कुमार सिंह, संजय कुमार सिंह, राजेश कुमार, रवि प्रकाश सूरज और सनोज कुमार की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही. ऑनलाइन

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