जेपी और लोहिया के विचार नहीं हटाये जा सकते -लालू

दिल्ली- लोहिया और जेपी के विचारों को अब जेपी विश्वविद्यालय में नहीं पढ़ाये जाने पर छात्रों की तीखी प्रतिक्रिया मिल रही है वहीं राजद के मुखिया ने इस खबर पर ट्वीट कर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है उन्होंने कहा है कि जयप्रकाश जी के नाम पर अपनी कर्मभूमि छपरा में 30 वर्ष पूर्व जेपी विश्वविद्यालय की स्थापना की थी।अब उसी यूनिवर्सिटी के सिलेबस से संघी बिहार सरकार तथा संघी मानसिकता के पदाधिकारी महान समाजवादी नेताओं जेपी-लोहिया के विचार हटा रहे है।यह बर्दाश्त से बाहर है।सरकार तुरंत संज्ञान लें । इधर पाठ्यक्रम से लोहिया और जेपी के विचार हटाने पर छात्र संघ भी आंदोलन के मूड में हैं ।

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जाम से कराहते लोगों को क्या जाम से मिलेगी निजात ??

एस पी विनय तिवारी की देख रेख में बनाई गई है जाम से मुक्ति के प्लान प्रतिदिन 60 हजार से ज्यादा बाइक और छोटी बड़ी गाड़ियां आरा में आती है सड़कों के किनारे कब्जा है प्राइवेट वाहन और एम्बुलेंस वालों का दुकानों के अलावे भी फुटपाथी दुकानें सजती है सड़कों पर अतिक्रमण के कारण और अनावश्यक गाड़ी पार्किंग के कारण लगता है जाम अभी तक आरा में एक भी नहीं है पार्किंग स्पॉट स्थानीय लोगों को करनी पड़ती है भारी दिक्कतों का सामना आरा : – अगर आप आरा से बाहर है और आरा जा रहे हैं तो बदले रूट के बारे में पहले जान लें नहीं तो होसकता है आप गाड़ी लेकर कहीं फंस जाए और आपको दंड भी देना पड़े ।जाम से कराह रहे आरा के लोगों को जाम से निजात दिलाने के लिए आरा शहर में मास्टर ट्रैफिक प्लान 31 अगस्त से को लागू कर दिया गया। सड़कों पर वनवे और नो इंट्री शुरू कर दी गयी। 1 सितम्बर से लेन ड्राइविंग भी शुरू हो जायेगी। एसपी विनय तिवारी के निर्देश पर मंगलवार को नो इंट्री और वनवे व्यवस्था को शुरू की गयी जो सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक यह व्यवस्था लागू रहेगी। इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जायेगी। इसे लेकर एसपी की ओर से ट्रैफिक डीएसपी, ट्रैफिक थाना प्रभारी, टाउन और नवादा थाना इंचार्ज को सख्त निर्देश दिया गया है। बिनय तिवारी ने आम पब्लिक से पुलिस को सहयोग करने की अपील की गयी है। बता दें कि

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समाज के अंतिम पायदान की हकीकत से रूबरू कराती है ‘हाशिए पर हसरत’-हरिवंश

बहुत से विकास के कार्य हो रहे हैं लेकिन यह सच्चाई है कि लगभग सारी चीजें अंतिम पायदान के लोगों तक नहीं पहुंच पाई है -हरिवंश हरिवंश ने कहा कि नीतीश कुमार ने मुसहर जाति से आने वाले जीतन राम मांझी को भी सीएम बनाया। यह भी समाज का एक यथार्थ है। सभी की यह मांग होती है कि समाज के अंतिम पंक्ति के लोगों का उद्धार हो लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसा संभव नहीं हो पाता है -अवधेश नारायण सिंह समाज के मार्मिक दृश्य की दस्तावेज और जीवंत कृति है यह पुस्तक भीम सिंह भवेश की पुस्तक का विधान परिषद सभागार में लोकार्पण प्रख्यात लेखक सह पत्रकार भीम सिंह भवेश की पुस्तक “हाशिए पर हसरत” का लोकार्पण सोमवार को बिहार विधान परिषद के सभागार में किया गया। प्रभात प्रकाशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम का पुस्तक का लोकार्पण राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश, बिहार सरकार के कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह और बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर हरिवंश ने कहा कि हाशिए पर हसरत अपने आप में ही पूरी किताब के बारे में बता रहा है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक समाज के मार्मिक दृश्य की दस्तावेज और जीवंत कृति है। बिना संवेदना के कोई कुछ नहीं लिख सकता है लेकिन मुसहर जाति से आने वाले लोगों के लिए लेखक ने जो कुछ लिखा है वह अद्भुत है। यह किताब सामूहिक जीवन के प्रयास का सत्य है, जिसे हम गागर में सागर भी कह सकते हैं। किताब का उल्लेख करते हुए हरिवंश

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हाशिये पर जो हैं उनकी हसरत

“हाशिए पर हसरत” का लोकार्पण 30 अगस्त को बिहार में हाशिये पर रहने वालों की क्या है हसरतकैसा जीवन चाहते हैं हाशिये पर रहने वाले लोगक्या बचा है उनके जीवन में आजादी के 75 साल बाद आरा: भीम सिंह भवेश आज पत्रकारिता और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में 20 से ज्यादा वर्ष से सक्रिय है। उन्होंने बिहार और खास कर भोजपुर के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों के लिए अनेक काम किए हैं । उनकी दूसरी पुस्तक “हाशिए पर हसरत” (प्रभात प्रकाशन) का लोकार्पण 30 अगस्त को हरिवंश जी (उपसभापति, राज्यसभा) के कर कमलों द्वारा किया जायेगा। पुस्तक विमोचन का कार्यक्रम विधान परिषद के सभागार में 30 अगस्त को अपराह्न 3:15 बजे होगा।इस मौके पर विशिष्ट अतिथि कृषि मंत्री बिहार सरकार,वरिष्ठ पत्रकार श्रीकांत और मुंगेर विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति प्रो.जवाहर लाल होंगे और कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे साहित्यकार एवं पूर्व विभागाध्यक्ष वीर कुंवर सिंह विश्वविधालय आरा,के डॉ नीरज सिंह । भीम सिंह भवेश की दूसरी प्रकाशित पुस्तक ‘हाशिये पर हसरत’ का प्रकाशन किया है प्रभात प्रकाशन ने।इस अवसर पर प्रकाशन के निदेशक राजेश शर्मा भी मौजूद रहेंगे। PNC desk

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कहानी साहित्य की सबसे लोकप्रिय विद्या – मिथिलेश्वर

कथा लेखन के पांच दशक मेरे जानते कहानी साहित्य की सबसे लोकप्रिय विधा रही है।उसकी लोकप्रियता की शक्ति अपने समय और समाज के सच की अभिव्यक्ति तथा संवेदना के नये आख्यानों की रचना में ही निहित होती है।शायद यही वजह है कि अपने जीवन में पढ़ी अनेक कहानियों को हम कभी भूल नहीं पाते हैं।”उसने कहा था” के लहना सिंह तथा “शतरंज के खिलाड़ी” के मीर मिर्जा ही नहीं, ऐसे सैकड़ों चरित्र और उनके प्रसंग हमारी चेतना को प्रेरित और प्रभावित करते रहे हैं। इन्हीं विशेषताओं के चलते कहानी से मेरा लगाव प्रारंभ से ही रहा है।शायद इसीलिए जिस उम्र में रचनाकार कविता से शुरुआत करते हैं,मैंने कहानी से की।वह 1970 का वर्ष था जब मैं कथा लेखन की दुनिया में आया।वह हिन्दी में व्यापक पाठकीयता का समय था।”धर्मयुग”,”साप्ताहिक हिन्दुस्तान”,”सारिका” जैसी जिन पत्रिकाओं में मैं लिखता था, उनकी प्रसार संख्या लाखों में थी।उस समय पठकों की उत्साहजनक प्रतिक्रियाएं हमारे रचनाकार मन को आश्वस्त करती थीं।कहने की आवश्यकता नहीं कि तब लेखन हमें सामाजिक विकास के संघर्ष में रचनात्मक भागीदारी का एहसास कराता था।इस तरह पिछले पचास वर्षों के दौरान पत्रिकाओं में प्रकाशित कहानियों से जब-जब नए कहानी संग्रह प्रकाशित होते रहे ,हमें रचनात्मक सुख की अनुभूति कराते हुए निरंतर रचनारत रहने के लिए प्रेरित करते रहे।इसके मूल में हमारे समय की पाठकीयता की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।इस क्रम में मेरे 12 कहानी संग्रह प्रकाशित हुए — बाबूजी-1976, बंद रास्तों के बीच -1978, दूसरा महाभारत-1979, मेघना का निर्णय-1980, तिरिया जनम-1982, हरिहर काका-1983, एक में अनेक-1987, एक थे प्रो.बी.लाल-1993, भोर होने से

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बच्चों ने मनाया आजादी का जश्न

Aim नृत्य अकादमी में मनाया गया स्वतंत्रता दिवस समारोह स्वाधीनता के 75 साल पूरे होने पर जगह जगह अमृत महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। स्वाधीनता दिवस पर शिवगंज स्थित ऐम डांस अकादमी की ओर से झंडोतोलन कार्यक्रम और संगीत नृत्य का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बालिका उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक जगदीश सिंह ने झंडोतोलन किया।इस मौके पर उन्होंने बच्चों से देश के प्रति सम्मान बढाने की बात कही।कार्यक्रम का संचालन करते हुए सुरेश कुमार ने आजादी के महत्व पर प्रकाश डाला।आई टी आई निदेशक रामजी तिवारी ने इस अवसर पर कहा कि आजादी और अनुशासन दोनों का महत्व है। सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन अविनाश कुमार और माही बासु ने किया। नृत्य प्रस्तुतियों में बाहुबली के नृत्य को किशु ने प्रस्तुत किया । आद्या और सृस्टि ने वंदेमातरम गीतों पर मनोहारी प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।सोनू आर्या और अविनाश गुप्ता के नृत्य संयोजन में परी और ग्रुप ,सान्वी और रागनी ,स्माइली ग्रुप ने नृत्य नाटिका ,अंजली और काव्या के ग्रुप ने जय हो ,ईशा सोनी ने सुनो गौर से दुनिया वालों ,टाइगर ग्रुप ने ऐसा अपना तिरंगा प्यारा की प्रस्तुति दी ।स्वाधीनता दिवस का जोश बच्चों के सिर चढ़ कर बोल रहा था । निधि भगत ,सोनल राज ,अदिति जैन ट्विंकल गुप्ता ,मानवी सिंह ने अपनी प्रस्तुति से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया । इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार रवींद्र भारती ,पत्रकार ओम प्रकाश पांडेय ,सिमरन भगत ,ऐम के निदेशक और कोरियोग्राफर बब्बू भी उपस्थित थे । Pnc

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जंगल पुकारते हैं ….जंगल गाथा

लेखक : गुंजन सिन्हा जंगल गाथा पुस्तक के बारे में…..यह गाथा है एक महाविनाश की – मेहनतकश मजदूरिन से वेश्या बनी बिरसी मुन्डाइन की, किसान से कैदी बने धनेसर उरांव की, तीन पीढ़ियों से विस्थापन झेल रहे सुघड़ खरवार की, बंजर बना दिए गए घनघोर जंगलों की, निरीह जंगली जानवरों की जो बिला वजह मारे गए, उन तितलियों की जो जंगली पगडंडियों पर गोल बना बैठती थीं, मंडल, कुटकू, कोयल, कोइना, हरया, कारो नदियों की.……जंगल पुकारते हैं. कभी अपने नैसर्गिक स्पर्श से हमें स्वस्थ कर देने के लिए, कभी अपने घाव, कष्ट, अपना क्षत-विक्षत अस्तित्व दिखाने के लिए. ..निजी अनुभवों और विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारियों पर आधारित यह किताब जंगलों और उनसे जुड़े मुद्दों की बात करती है, जैसे – जंगलों का नाश, जानवर, अविकास, अंधविश्वास, आदिवासी, नक्सल, आबो-हवा, विस्थापन, डायन-हत्या, प्रकृति का निर्मम दोहन और इन सब के बीच मानव मन को चंगा करने की जंगलों की जादुई शक्ति.यह किताब उनके लिए है जिन्हें जिंदगी कोई भारी भरकम पुस्तक पढ़ने नहीं देती. उन्हें भी जंगल पुकारते हैं. यह पुकार कभी पिकनिक पर जाने की इच्छा के रूप में जगती है, कभी यूँही एक आवारगी जगाती है. इंसान के अन्दर यह खास आवारगी उसकी भटकन है, अपनी उदास रूह की तलाश में. आदिम इन्सान की रूह शहर और सभ्यता के रोजमर्रे में कहीं खो गई है.इस पुस्तक को पढ़ कर आपको जंगल की याद आएगी. अत्याचारों का शोर सुनाई देगा और उसके बीच किसी कोयल की कूक, किसी आमापाको की हूक भी सुनाई देगी. और सबसे बढ़ कर सुनाई

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बाढ़ से बिहार के 16.91 लाख लोग प्रभावित

बिहार में बाढ़ के कारण पटना समेत पंद्रह जिले प्रभावित हैं। इन जिलों के 82 प्रखंडों की 484 पंचायतों के 16.91 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।सरकार ने बाढ़ से अब तक 5 लोगों की मौत की पुष्टि की है। राज्य में बाढ़ की विभीषका को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने कमर कस ली है। जारी रिपोर्ट के अनुसार पंद्रह जिलों मुजफ्फरपुर, दरभंगा, खगड़िया, सहरसा, पटना, वैशाली, भोजपुर, लखीसराय, भागलपुर, सारण, बक्सर, बेगूसराय, कटिहार, मुंगेर और समस्तीपुर के 82 प्रखंडों की 484 पंचायतें आंशिक अथवा पूर्ण रूप से प्रभावित हैं। 15 लाख से ज्यादा आबादी के सामने खाना पानी का संकट खड़ा हो गया है । मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का सड़क मार्ग से दौरा किया और बाढ़ पीड़ितों के बीच जल्द से जल्द सहायता पहुंचाने का आदेश भी दिया है।गंगा,सोन और कई अन्य नदियों में भी पानी आ जाने से राज्य के एक बड़े भूभाग से लोगों का सम्पर्क टूट गया है । सिर्फ भोजपुर में अब तक चार लोगों की जान जा चुकी है।

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बाढ़ से बिहार में स्थिति विकराल

सरकारी मदद अभी फाइलों में ही ,नहीं पहुंच पाई मदद लाखों की आबादी के सामने भोजन और आवास का संकट गंगा समेत कई नदियां उफान पर ,पटना राजधानी पर बढ़ा बाढ़ का संकट बिहार में बाढ़ से हालत गंभीर है वहीं सूबे के मुखिया ने बाढ़ प्रभावितों को हर सम्भव सहायता उपलब्ध कराने का आदेश जारी किया है ।बिहार के कई जिलों में गंगा नदी लगभग हर जगह खतरे के निशान को पार कर गई है. गंगा का पानी बक्सर से कटिहार तक, हर जगह खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है. बिहार के बक्सर,शाहपुर,आरा, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार जिले में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।पटना में भी गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के ऊपर जा चुका है जिससे इन शहरों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है.कई जगहों पर जिला प्रशासन ने कई जगह खतरनाक घाट घोषित कर रखा है और बोर्ड लगा दिया है। पटना में गंगा नदी का जलस्तर पिछले 4 दिनों में तेजी से बढ़ रहा है जिससे निचले इलाकों में पानी प्रवेश कर गया है।अब पटना शहर में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. बक्सर में गंगा नदी खतरे के निशान से 41 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है वही पटना के दीघा इलाके में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 41 सेंटीमीटर ऊपर था. पटना के गांधी घाट पर गंगा नदी खतरे के निशान से 98 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। बिहार की सभी नदियों में भारी बारिश के बाद नदियां उफान पर है ।समस्तीपुर में

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सबसे अमीर गांव ….

5,000 करोड़ रुपये जमा हैं बैंकों में सबसे अमीर गांव किस देश में होगा किस राज्य में होगा जहां 17 से अधिक बैंक काम कर रहे हो और वहां के गांव वालों के पास 1-2 करोड़ नहीं पांच हजार करोड़ रुपये जमा हो ऐसे देश और गांव की कल्पना सिर्फ भारत में ही की जा सकती है।7,600 घर वाले इस गांव में सुविधा सम्पन्न लोग निवास करते हैं हम जिस गांव की बात कर रहे हैं, उसका नाम माधापार है जो दुनिया में एक आदर्श गांव माना जाता है । गुजरात के कच्छ जिले में स्थित, माधापार कच्छ के मिस्त्रियों द्वारा बसाए गए 18 गांवों में से एक है।सिर्फ बैंकों में पैसा जमा है ऐसा नहीं है एक गांव में जो कुछ भी होना चाहिए वो सब कुछ वहां है जैसे स्कूल, कॉलेज, झीलें, हरियाली, बांध, स्वास्थ्य केंद्र और मंदिर भी हैं। गांव में एक अत्याधुनिक गौशाला भी चल रहा है । ये गांव भारत के पारंपरिक गांवों से इतना अलग क्यों है?कैसे बना ? इसी भारत में इस गांव को छोड़ दें तो गांवों की तस्वीर जो जेहन उभरती है वो हताश करने वाली है। इस गांव के ज्यादातर परिवार के सदस्य खाड़ी देश, अमेरिका,अफ्रीका में रहते हैं । 65 प्रतिशत से ज्यादा लोग NRI हैं,जो बाहर से अपनी कमाई का हिस्सा गांव में भेजते हैं कई NRI पैसा कमाने के बाद, भारत वापस आ गए और गांव में ही अच्छे व्यापार शुरू कर दिए । आजादी के बाद इस गांव के लोग मिस्त्री का काम करने के लिए

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