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	<title>UPSC/PCS &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>बदलते भोजपुर की तस्वीर: जातीय संघर्षों की धरती से UPSC तक पहुँची आकांक्षा सिंह</title>
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		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 11:56:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[UPSC/PCS]]></category>
		<category><![CDATA[जॉब/करियर]]></category>
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					<description><![CDATA[रणवीर सेना के सुप्रीमो की पोती बनी सिविल सर्विस अफसर, UPSC में 301वीं रैंक आरा,7 मार्च। भोजपुर की वही धरती, जो कभी जातीय संघर्ष और नरसंहारों की खबरों के कारण देशभर में सुर्खियों में रहती थी, आज एक नई पहचान बना रही है। इसी जिले की बेटी आकांक्षा सिंह ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 301वीं रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। आकांक्षा की सफलता इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह कभी बिहार की जातीय राजनीति और संघर्षों के केंद्र में रहे रणवीर सेना के सुप्रीमो ब्रह्मेश्वर सिंह उर्फ ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती हैं। ऐसे में उनकी यह उपलब्धि सिर्फ एक व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि बदलते भोजपुर और नई पीढ़ी की प्राथमिकताओं की कहानी भी बयां करती है। परिवार से जुड़ा चर्चित इतिहासआकांक्षा सिंह, ब्रह्मेश्वर मुखिया के पुत्र इंदु भूषण सिंह की बेटी हैं। 1990 के दशक में भोजपुर की पहचान अक्सर जातीय संघर्ष और निजी सेनाओं की गतिविधियों से जुड़ी खबरों से होती थी। ऐसे माहौल से जुड़े परिवार की नई पीढ़ी का प्रशासनिक सेवा में जाना क्षेत्र के बदलते सामाजिक परिदृश्य को भी दर्शाता है। आरा से शुरू हुई पढ़ाईआकांक्षा सिंह की शुरुआती पढ़ाई आरा के कैथोलिक मिशन स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने एच.डी. जैन कॉलेज, आरा से अंग्रेजी साहित्य में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। आकांक्षा बताती हैं कि सिविल सेवा की तैयारी के दौरान उन्होंने रोजाना 8 से 10 घंटे नियमित अध्ययन किया। खास तौर पर उन्होंने करंट अफेयर्स और विषयों की गहरी समझ पर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>रणवीर सेना के सुप्रीमो की पोती बनी सिविल सर्विस अफसर, UPSC में 301वीं रैंक</strong></p>



<p>आरा,7 मार्च। भोजपुर की वही धरती, जो कभी जातीय संघर्ष और नरसंहारों की खबरों के कारण देशभर में सुर्खियों में रहती थी, आज एक नई पहचान बना रही है। इसी जिले की बेटी आकांक्षा सिंह ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 301वीं रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001079401-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95489" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001079401-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001079401-650x488.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><br>आकांक्षा की सफलता इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह कभी बिहार की जातीय राजनीति और संघर्षों के केंद्र में रहे रणवीर सेना के सुप्रीमो ब्रह्मेश्वर सिंह उर्फ ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती हैं। ऐसे में उनकी यह उपलब्धि सिर्फ एक व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि बदलते भोजपुर और नई पीढ़ी की प्राथमिकताओं की कहानी भी बयां करती है।</p>



<p><strong>परिवार से जुड़ा चर्चित इतिहास</strong><br>आकांक्षा सिंह, ब्रह्मेश्वर मुखिया के पुत्र इंदु भूषण सिंह की बेटी हैं। 1990 के दशक में भोजपुर की पहचान अक्सर जातीय संघर्ष और निजी सेनाओं की गतिविधियों से जुड़ी खबरों से होती थी। ऐसे माहौल से जुड़े परिवार की नई पीढ़ी का प्रशासनिक सेवा में जाना क्षेत्र के बदलते सामाजिक परिदृश्य को भी दर्शाता है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001079400-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95490" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001079400-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001079400-650x488.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><strong>आरा से शुरू हुई पढ़ाई</strong><br>आकांक्षा सिंह की शुरुआती पढ़ाई आरा के कैथोलिक मिशन स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने एच.डी. जैन कॉलेज, आरा से अंग्रेजी साहित्य में स्नातक की पढ़ाई पूरी की।</p>



<p>आकांक्षा बताती हैं कि सिविल सेवा की तैयारी के दौरान उन्होंने रोजाना 8 से 10 घंटे नियमित अध्ययन किया। खास तौर पर उन्होंने करंट अफेयर्स और विषयों की गहरी समझ पर विशेष ध्यान दिया।</p>



<p><strong>इंटरव्यू में भी आया भोजपुर का जिक्र</strong><br>सिविल सेवा के इंटरव्यू के दौरान उनसे भोजपुर से जुड़े कई सवाल पूछे गए। इंटरव्यू बोर्ड ने हाल ही में पद्मश्री से सम्मानित भोजपुर के लोकगायक भारत सिंह भारती के बारे में भी प्रश्न किया, जिसका उन्होंने आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया।</p>



<p><strong>पूरा हुआ एक सपना</strong><br>परिवार के लोगों के अनुसार, ब्रह्मेश्वर मुखिया की इच्छा थी कि उनके परिवार से कोई सदस्य यूपीएससी पास कर प्रशासनिक सेवा में जाए। आकांक्षा की सफलता को उसी सपने के पूरा होने के रूप में देखा जा रहा है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1024" height="573" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001079418-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95491" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001079418-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001079418-650x364.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><strong>भोजपुर में खुशी की लहर</strong><br>आकांक्षा की सफलता के बाद पूरे भोजपुर जिले में खुशी का माहौल है। उनके घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह उपलब्धि क्षेत्र के युवाओं को सिविल सेवा की तैयारी के लिए प्रेरित करेगी.</p>



<p><strong>बदलते समय की पहचान</strong><br>1990 के दशक में जिस भोजपुर का नाम जातीय संघर्षों और निजी सेनाओं के कारण सुर्खियों में आता था, आज उसी जमीन से प्रशासनिक सेवा में जाने वाली नई पीढ़ी सामने आ रही है। यह बदलाव न केवल समाज के बदलते सोच को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि अब यहां की युवा पीढ़ी बंदूक नहीं, किताब और कलम के सहारे भविष्य गढ़ना चाहती है.</p>



<p><strong>एक रिजल्ट पर दो का दावा</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="578" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001079626-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95499" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001079626-scaled.jpg 578w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001079626-367x650.jpg 367w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001079626-868x1536.jpg 868w" sizes="auto, (max-width: 578px) 100vw, 578px" /></figure>



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<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="840" height="1024" data-id="95496" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001079399-1-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95496" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001079399-1-scaled.jpg 840w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001079399-1-533x650.jpg 533w" sizes="auto, (max-width: 840px) 100vw, 840px" /></figure>
</figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="790" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001079398-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95492" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001079398-scaled.jpg 790w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001079398-501x650.jpg 501w" sizes="auto, (max-width: 790px) 100vw, 790px" /></figure>



<p>हालांकि रिजल्ट आने के बाद यूपी की एक आकांक्षा नाम की कैंडिडेट ने अपना नाम का दावा किया है। दोनों के एडमिट कार्ड पर एक ही रोल नंबर है। यूपी की आकांक्षा डॉक्टर है और रिजल्ट आने के बाद उसने एक वीडियो जारी कर अपने नाम पर दावा किया है। अब दोनों में से सही कौन है ये तो आयोग जांच कर तय करेगा लेकिन बहरहाल भोजपुरवासी आज आकांक्षा के नाम आने के बाद बहुत ही खुश दिखे।</p>



<p>आरा से <strong>ओ पी पाण्डेय</strong> की रिपोर्ट </p>
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			</item>
		<item>
		<title>फुलवारी शरीफ की बेटी ने यूपीएससी में किया कमाल</title>
		<link>https://www.patnanow.com/phulwari-sharif-girl-passes-upsc/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 07:01:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[UPSC/PCS]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[जॉब/करियर]]></category>
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					<description><![CDATA[232वीं रैंक के साथ प्रिया कुमारी ने यूपीएससी में रचा इतिहासफुलवारी शरीफ के महमदपुर गांव की बेटी ने बढ़ाया पटना का मान फुलवारी शरीफ। अजीत।। कड़ी मेहनत, आत्मविश्वास और सेल्फ स्टडी के दम पर फुलवारी शरीफ के महमदपुर गांव की बेटी प्रिया कुमारी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में ऑल इंडिया 232वीं रैंक हासिल कर परिवार, गांव और पूरे इलाके का नाम रोशन किया है. परिणाम आने के बाद गांव में खुशी का माहौल है और लोगों ने मिठाइयां बांटकर इस उपलब्धि का जश्न मनाया.प्रिया के छोटे भाई प्रिंस कुमार बेंगलुरु में मैकेनिकल इंजीनियर हैं. परिवार के अन्य सदस्यों और भाइयों प्रकाश कुमार और शौर्य शर्मा ने भी उनकी तैयारी के दौरान हर कदम पर सहयोग किया. परिणाम आने के बाद महमदपुर गांव में खुशी की लहर दौड़ गई. बड़ी संख्या में गांव और आसपास के लोग प्रिया के घर पहुंचकर बधाई देने लगे. लोगों ने मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की. ग्रामीणों का कहना है कि गांव की बेटी ने पूरे इलाके का मान बढ़ाया है और यह गांव की पहली लड़की है जिसने इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल कर युवाओं के लिए नई प्रेरणा दी है. प्रिया कुमारी के पिता राम नारायण सिंह सारण के बेला दरियापुर स्थित रेल चक्का कारखाना में टेक्नीशियन ग्रेड-वन के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता सुजानती देवी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका हैं. दादा विजय नारायण शर्मा राजस्व कर्मचारी के पद से सेवानिवृत्त हैं. परिवार में शिक्षा का माहौल होने के कारण बचपन से ही प्रिया को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>232वीं रैंक के साथ प्रिया कुमारी ने यूपीएससी में रचा इतिहास<br>फुलवारी शरीफ के महमदपुर गांव की बेटी ने बढ़ाया पटना का मान</strong></p>



<p>फुलवारी शरीफ। अजीत।। कड़ी मेहनत, आत्मविश्वास और सेल्फ स्टडी के दम पर फुलवारी शरीफ के महमदपुर गांव की बेटी प्रिया कुमारी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में ऑल इंडिया 232वीं रैंक हासिल कर परिवार, गांव और पूरे इलाके का नाम रोशन किया है. परिणाम आने के बाद गांव में खुशी का माहौल है और लोगों ने मिठाइयां बांटकर इस उपलब्धि का जश्न मनाया.प्रिया के छोटे भाई प्रिंस कुमार बेंगलुरु में मैकेनिकल इंजीनियर हैं. परिवार के अन्य सदस्यों और भाइयों प्रकाश कुमार और शौर्य शर्मा ने भी उनकी तैयारी के दौरान हर कदम पर सहयोग किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="651" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/pnc-upsc-pass-232-rank-priya-with-family-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95467" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/pnc-upsc-pass-232-rank-priya-with-family-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/pnc-upsc-pass-232-rank-priya-with-family-650x413.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>परिणाम आने के बाद महमदपुर गांव में खुशी की लहर दौड़ गई. बड़ी संख्या में गांव और आसपास के लोग प्रिया के घर पहुंचकर बधाई देने लगे. लोगों ने मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की. ग्रामीणों का कहना है कि गांव की बेटी ने पूरे इलाके का मान बढ़ाया है और यह गांव की पहली लड़की है जिसने इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल कर युवाओं के लिए नई प्रेरणा दी है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="844" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/pnc-upsc-rank232-priya-phulwari-sharif.jpg" alt="" class="wp-image-95469" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/pnc-upsc-rank232-priya-phulwari-sharif.jpg 844w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/pnc-upsc-rank232-priya-phulwari-sharif-650x444.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 844px) 100vw, 844px" /></figure>



<p>प्रिया कुमारी के पिता राम नारायण सिंह सारण के बेला दरियापुर स्थित रेल चक्का कारखाना में टेक्नीशियन ग्रेड-वन के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता सुजानती देवी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका हैं. दादा विजय नारायण शर्मा राजस्व कर्मचारी के पद से सेवानिवृत्त हैं. परिवार में शिक्षा का माहौल होने के कारण बचपन से ही प्रिया को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया गया.<br>प्रिया कुमारी ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई डीएवी वाल्मी से की. इसके बाद उन्होंने मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की और वर्ष 2021 से पेसिफिक न्यूज प्राइवेट लिमिटेड में नौकरी कर रही हैं. नौकरी के साथ-साथ उन्होंने यूपीएससी की तैयारी जारी रखी. उन्होंने बताया कि कई जगहों पर कोचिंग भी की, लेकिन अंतिम समय में उन्होंने सेल्फ स्टडी पर ही सबसे अधिक भरोसा किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="820" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/pnc-priya-232-rank-upsc2025.jpg" alt="" class="wp-image-95466" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/pnc-priya-232-rank-upsc2025.jpg 820w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/pnc-priya-232-rank-upsc2025-650x457.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 820px) 100vw, 820px" /></figure>



<p>प्रिया ने बताया कि इससे पहले भी उन्होंने 2021 में सीएस फाइनल परीक्षा में ऑल इंडिया 21वीं रैंक हासिल की थी, लेकिन उन्हें उससे संतुष्टि नहीं मिली. उनका सपना प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज के लिए कुछ बड़ा करने का था. इसी उद्देश्य से उन्होंने यूपीएससी की तैयारी जारी रखी और आखिरकार मेहनत रंग लाई.<br>प्रिया कुमारी ने कहा कि अगर उन्हें मौका मिला तो वह आईपीएस बनकर देश की सेवा करना चाहती हैं. उन्होंने छात्रों को संदेश देते हुए कहा कि कोचिंग और नोट्स उपयोगी होते हैं, लेकिन सफलता का सबसे बड़ा आधार सेल्फ स्टडी है. उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और यूट्यूब का भी सही तरीके से उपयोग करें और नियमित पढ़ाई जारी रखें.<br>पिता राम नारायण सिंह ने कहा कि उन्होंने कभी बेटा-बेटी में फर्क नहीं किया. उन्होंने हमेशा बच्चों की शिक्षा को सबसे अधिक महत्व दिया और अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा बच्चों की पढ़ाई पर खर्च किया. उन्होंने कहा कि बेटी की सफलता से पूरा परिवार गौरवान्वित महसूस कर रहा है.<br>मां सुजानती देवी ने कहा कि उन्होंने हमेशा अपनी बेटी को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया. उन्होंने समाज से अपील करते हुए कहा कि बेटियों पर भरोसा करें, उन्हें पढ़ने और अपने सपने पूरे करने का मौका दें. बेटियों को आगे बढ़ने की आजादी दी जाए तो वे परिवार और समाज दोनों का नाम रोशन कर सकती हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="649" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/pnc-upsc-232rank-priya-with-family-phulwari-sharif-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95465" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/pnc-upsc-232rank-priya-with-family-phulwari-sharif-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/pnc-upsc-232rank-priya-with-family-phulwari-sharif-650x412.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>दादा विजय नारायण शर्मा ने इस सफलता के लिए भगवान का शुक्रिया अदा किया. उन्होंने कहा कि प्रिया शुरू से ही मेहनती रही है और कई परीक्षाओं में सफलता हासिल कर चुकी थी, लेकिन वह हमेशा और बेहतर करना चाहती थी. परिवार ने हमेशा उसे संघर्ष जारी रखने की प्रेरणा दी और आज उसका परिणाम सबके सामने है.</p>
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		<item>
		<title>बिहार के लाल आरव ने लिख डाली एक रहस्मयी किताब</title>
		<link>https://www.patnanow.com/bihars-son-aarav-wrote-a-mysterious-book/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Jul 2025 06:43:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[BANK/RAILWAY/SSC]]></category>
		<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[UPSC/PCS]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
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		<category><![CDATA[Bihar's son Aarav wrote a mysterious book]]></category>
		<category><![CDATA[niraj kumar verma]]></category>
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					<description><![CDATA[&#8220;द एनवेलप्ड &#8211; मिस्ट्री ऑफ डार्क पावर पुस्तक समीक्षा: द एनवेलप्ड &#8211; मिस्ट्री ऑफ डार्क पावर समीक्षक: नीरज कुमार वर्मा&#160; लेखक: आरव श्रीवास्तव&#160; द एनवेलप्ड: मिस्ट्री ऑफ डार्क पावर, बिहार के सबसे युवा लेखक आरव श्रीवास्तव द्वारा रचित एक रोमांचक फंतासी थ्रिलर है, जिसने अपनी अनूठी कहानी और गहन कथानक के साथ पाठकों का ध्यान आकर्षित किया है. इस पुस्तक का विमोचन बिहार के माननीय राज्यपाल श्री अरिफ मोहम्मद खान द्वारा राजभवन, पटना में किया गया, जो इसकी महत्ता को और बढ़ाता है.&#160; कथानक का सार&#160; पुस्तक दो भाइयों, हेनरी और रॉन, के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनका जीवन एक रहस्यमयी और खतरनाक वस्तु के इर्द-गिर्द उलझ जाता है. कहानी की शुरुआत एक जन्मदिन समारोह से होती है, जो जल्द ही एक भयावह घटना में बदल जाता है. एक रहस्यमयी वस्तु, जिसे बिजली का प्रहार सक्रिय करता है, भाइयों के जीवन को तहस-नहस कर देता है. यह वस्तु, जिसे बाद में &#8220;अस्त्र&#8221; के रूप में जाना जाता है, एक प्राचीन दुष्ट शक्ति से जुड़ी है, जो कहानी को रहस्य और रोमांच से भर देती है.&#160; कथानक में तनाव, रहस्य और पारिवारिक बंधन का मिश्रण है. हेनरी और रॉन की यात्रा में कई उतार-चढ़ाव आते हैं, जिसमें वे न केवल अपने परिवार की त्रासदी से जूझते हैं, बल्कि इस रहस्यमयी वस्तु के पीछे छिपे सच को भी उजागर करने की कोशिश करते हैं. कहानी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उनकी सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों को दर्शाता है, जैसे कि बेघर होना और एक आश्रम में शरण लेना, जो पाठकों को भावनात्मक रूप से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>&#8220;द एनवेलप्ड &#8211; मिस्ट्री ऑफ डार्क पावर </strong></p>



<p><strong>पुस्तक समीक्षा: द एनवेलप्ड &#8211; मिस्ट्री ऑफ डार्क पावर </strong><strong></strong></p>



<p><strong>समीक्षक: नीरज कुमार वर्मा&nbsp; </strong><strong></strong></p>



<p><strong>लेखक: आरव श्रीवास्तव&nbsp; </strong><strong></strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="668" height="1005" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/07/ae5cfba5-1c1d-4e6d-8427-c5f5c8c0f49e.jpeg" alt="" class="wp-image-91009" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2025/07/ae5cfba5-1c1d-4e6d-8427-c5f5c8c0f49e.jpeg 668w, https://www.patnanow.com/assets/2025/07/ae5cfba5-1c1d-4e6d-8427-c5f5c8c0f49e-432x650.jpeg 432w" sizes="auto, (max-width: 668px) 100vw, 668px" /></figure>



<p>द एनवेलप्ड: मिस्ट्री ऑफ डार्क पावर, बिहार के सबसे युवा लेखक आरव श्रीवास्तव द्वारा रचित एक रोमांचक फंतासी थ्रिलर है, जिसने अपनी अनूठी कहानी और गहन कथानक के साथ पाठकों का ध्यान आकर्षित किया है. इस पुस्तक का विमोचन बिहार के माननीय राज्यपाल श्री अरिफ मोहम्मद खान द्वारा राजभवन, पटना में किया गया, जो इसकी महत्ता को और बढ़ाता है.&nbsp;</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="351" height="359" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/07/b76c4619-47b8-4de3-8a34-532273d759e1.jpeg" alt="" class="wp-image-91010"/></figure>



<p><strong>कथानक का सार&nbsp; </strong><strong></strong></p>



<p>पुस्तक दो भाइयों, हेनरी और रॉन, के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनका जीवन एक रहस्यमयी और खतरनाक वस्तु के इर्द-गिर्द उलझ जाता है. कहानी की शुरुआत एक जन्मदिन समारोह से होती है, जो जल्द ही एक भयावह घटना में बदल जाता है. एक रहस्यमयी वस्तु, जिसे बिजली का प्रहार सक्रिय करता है, भाइयों के जीवन को तहस-नहस कर देता है. यह वस्तु, जिसे बाद में &#8220;अस्त्र&#8221; के रूप में जाना जाता है, एक प्राचीन दुष्ट शक्ति से जुड़ी है, जो कहानी को रहस्य और रोमांच से भर देती है.&nbsp;</p>



<p>कथानक में तनाव, रहस्य और पारिवारिक बंधन का मिश्रण है. हेनरी और रॉन की यात्रा में कई उतार-चढ़ाव आते हैं, जिसमें वे न केवल अपने परिवार की त्रासदी से जूझते हैं, बल्कि इस रहस्यमयी वस्तु के पीछे छिपे सच को भी उजागर करने की कोशिश करते हैं. कहानी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उनकी सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों को दर्शाता है, जैसे कि बेघर होना और एक आश्रम में शरण लेना, जो पाठकों को भावनात्मक रूप से जोड़ता है.&nbsp;</p>



<p><strong>लेखन शैली और थीम&nbsp; </strong><strong></strong></p>



<p>आरव श्रीवास्तव की लेखन शैली सरल लेकिन प्रभावशाली है. उनकी कम उम्र को देखते हुए, यह पुस्तक उनकी रचनात्मकता और कहानी कहने की क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण है. कथानक में फंतासी, रहस्य और मानवीय भावनाओं का संतुलन बनाए रखा गया है. लेखक ने दो भाइयों के बीच के रिश्ते को बहुत ही संवेदनशीलता के साथ चित्रित किया है, जो उनकी एकजुटता और संघर्ष को दर्शाता है.&nbsp;</p>



<p>पुस्तक में सामाजिक मुद्दों, जैसे कि गरीबी, बेघरपन और मानवीय मूल्यों पर भी प्रकाश डाला गया है. विशेष रूप से, युवी (युवराज सिंह) जैसे पात्रों के माध्यम से लेखक ने परोपकार और सामाजिक सेवा के महत्व को रेखांकित किया है. साथ ही, रहस्यमयी वस्तु और प्राचीन शक्ति की थीम कहानी को एक जादुई और रोमांचक आयाम देती है.&nbsp;</p>



<p><strong>विशेषताएँ और प्रभाव&nbsp; </strong><strong></strong></p>



<p><strong>द एनवेलप्ड </strong>की सबसे बड़ी ताकत इसका रोमांचक कथानक और अप्रत्याशित मोड़ हैं. प्रत्येक अध्याय पाठक को अगले पृष्ठ की ओर खींचता है, जिससे इसे एक बार में पढ़ने की इच्छा होती है. लेखक ने पात्रों के चरित्र-चित्रण में गहराई लाने की कोशिश की है, विशेष रूप से हेनरी और रॉन, जिनके व्यक्तित्व और उनकी आपसी बातचीत कहानी को जीवंत बनाती है.&nbsp;</p>



<p>पुस्तक का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू इसका स्थानीय संदर्भ है. बिहार के परिवेश और सामाजिक संरचना को कहानी में सूक्ष्मता से शामिल किया गया है, जो इसे भारतीय पाठकों के लिए और अधिक प्रासंगिक बनाता है. साथ ही, यह एक वैश्विक कहानी भी है, जो हर आयु वर्ग के पाठकों को आकर्षित कर सकती है.&nbsp;</p>



<p><strong>कमियाँ&nbsp; </strong><strong></strong></p>



<p>हालांकि पुस्तक की कहानी प्रभावशाली है, कुछ स्थानों पर लेखन में अपरिपक्वता झलकती है, जो शायद लेखक की कम उम्र के कारण हो. कुछ संवाद और वर्णन थोड़े सरल और दोहराव वाले लग सकते हैं. इसके अलावा, कुछ कथानक बिंदु, जैसे कि रहस्यमयी वस्तु का उद्देश्य, पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाते, जिससे पाठक के मन में कुछ सवाल रह सकते हैं.&nbsp;</p>



<p><strong>निष्कर्ष&nbsp; </strong><strong></strong></p>



<p><strong>द एनवेलप्ड: मिस्ट्री ऑफ डार्क पावर</strong> एक ऐसी पुस्तक है, जो अपनी रोमांचक कहानी, भावनात्मक गहराई और सामाजिक संदेशों के साथ पाठकों को बांधे रखती है. आरव श्रीवास्तव ने अपनी पहली पुस्तक में ही यह साबित कर दिया है कि वे एक उभरते हुए लेखक हैं, जिनसे भविष्य में और भी बेहतरीन रचनाओं की उम्मीद की जा सकती है. यह पुस्तक फंतासी और थ्रिलर प्रेमियों के लिए एक शानदार पठन है, और विशेष रूप से युवा पाठकों को प्रेरित कर सकती है.&nbsp;</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="243" height="358" src="https://www.patnanow.com/assets/2025/07/5807ffd4-ee0e-41ec-901b-facb936f0cef.jpeg" alt="" class="wp-image-91011"/></figure>



<p><strong>समीक्षक: नीरज कुमार वर्मा  </strong></p>



<p>बिहार के इस युवा लेखक की उपलब्धि न केवल स्थानीय समुदाय के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि उम्र रचनात्मकता की राह में बाधा नहीं है. <strong>द एनवेलप्ड</strong> निश्चित रूप से पढ़ने योग्य है और इसे हर उस व्यक्ति को पढ़ना चाहिए जो रोमांच और रहस्य की दुनिया में खोना चाहता है.&nbsp;</p>



<p>प्रकाशक: प्रभात प्रकाशन&nbsp;</p>



<p>प्रकाशन वर्ष: 2025</p>



<p>link : <a href="https://amzn.in/d/j3MpDke">https://amzn.in/d/j3MpDke</a></p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>



<p></p>
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		<title>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिले अवसर ट्रस्ट के बच्चे</title>
		<link>https://www.patnanow.com/children-of-avsar-trust-met-president-draupadi-murmu/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 24 Dec 2024 13:08:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA]]></category>
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		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[Draupadi murmu]]></category>
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					<description><![CDATA[अवसर ट्रस्ट के आईआईटी और एनआईटी उतीर्ण 21 मेधावी छात्रों ने आज राष्टपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाक़ात की सिर्फ सरकार के भरोसे रहने से समाज का सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता: राष्ट्रपति 24 दिसंबर।अवसर ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष और राज्यसभा के पूर्व सांसद डॉ आर के सिन्हा के नेतृत्व में अवसर ट्रस्ट के आईआईटी और एनआईटी उतीर्ण 21 मेधावी छात्रों ने आज राष्टपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाक़ात की। राष्ट्रपति ने मेधावी बच्चों की हौसलाअफजाई करते हुए कहा कि जिस तरह डॉ सिन्हा ने आपको दो साल पटना में रखकर आपके रहने, खाने और पढने की व्यवस्था की, आपका भी दायित्व बनता है कि आप भी आगे चलकर गरीब बच्चों को पढ़ाने और जीवन में आगे बढ़ने में मदद करें .सिर्फ सरकार के भरोसे रहने से समाज का सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता. इसके लिए सरकार के साथ समाज को भी कदम से कदम मिलाकर चलना पड़ता है.राष्ट्रपति ने कहा कि मैं जब झारखंड की राज्यपाल थी, तब से डॉ आर के सिन्हा को जानती हूं। सामाजिक कार्यों में और गरीबों की मदद करने में यह कभी पीछे नहीं रहे। इनका कार्य अनुकरणीय है।उल्लेखनीय है कि अवसर ट्रस्ट आर्थिक रूप से गरीब बच्चों की शिक्षा तथा उनके रहने-खाने की व्यवस्था करता रहता है। अवसर ट्रस्ट से पढ़े सैकड़ों लोग आज उच्च पदों पर आसीन हैं। ट्रस्ट न सिर्फ बच्चों को किताबें सुलभ कराता है, बल्कि लैपटॉप और आगे की पढ़ाई में आर्थिक सहयोग देकर उन्हें काबिल बनाता रहा है।राष्टपति से मिलनेवालों में शुभम कृष्ण, दिव्या [&#8230;]]]></description>
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<p>अवसर ट्रस्ट के आईआईटी और एनआईटी उतीर्ण 21 मेधावी छात्रों ने आज राष्टपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाक़ात की</p>



<p><strong>सिर्फ सरकार के भरोसे रहने से समाज का सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता</strong>: राष्ट्रपति </p>



<p></p>



<p>24 दिसंबर।<br>अवसर ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष और राज्यसभा के पूर्व सांसद डॉ आर के सिन्हा के नेतृत्व में अवसर ट्रस्ट के आईआईटी और एनआईटी उतीर्ण 21 मेधावी छात्रों ने आज राष्टपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाक़ात की। राष्ट्रपति ने मेधावी बच्चों की हौसलाअफजाई करते हुए कहा कि जिस तरह डॉ सिन्हा ने आपको दो साल पटना में रखकर आपके रहने, खाने और पढने की व्यवस्था की, आपका भी दायित्व बनता है कि आप भी आगे चलकर गरीब बच्चों को पढ़ाने और जीवन में आगे बढ़ने में मदद करें .सिर्फ सरकार के भरोसे रहने से समाज का सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता. इसके लिए सरकार के साथ समाज को भी कदम से कदम मिलाकर चलना पड़ता है.<br>राष्ट्रपति ने कहा कि मैं जब झारखंड की राज्यपाल थी, तब से डॉ आर के सिन्हा को जानती हूं। सामाजिक कार्यों में और गरीबों की मदद करने में यह कभी पीछे नहीं रहे। इनका कार्य अनुकरणीय है।<br>उल्लेखनीय है कि अवसर ट्रस्ट आर्थिक रूप से गरीब बच्चों की शिक्षा तथा उनके रहने-खाने की व्यवस्था करता रहता है। <strong>अवसर ट्रस्ट से पढ़े सैकड़ों लोग आज उच्च पदों पर आसीन हैं। ट्रस्ट न सिर्फ बच्चों को किताबें सुलभ कराता है, बल्कि लैपटॉप और आगे की पढ़ाई में आर्थिक सहयोग देकर उन्हें काबिल बनाता रहा है।</strong><br>राष्टपति से मिलनेवालों में शुभम कृष्ण, दिव्या कुमारी, काजल कुमारी, आदित्य रंजन, अभिषेक सिन्हा, आशुतोष सिन्हा, नितीश कुमार, नीरज कुमार, कुणाल शर्मा, विशाखा कुमारी, शिवम कुमार, आर्यन कुमार, आशीष कुमार, रुचिका, अभय, अभिनव, संदीप कुमार, ज्ञान प्रकाश, पिंटू वर्णवाल शामिल हैं।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="682" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/IMG-20241224-WA0021-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88280" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/IMG-20241224-WA0021-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/IMG-20241224-WA0021-650x433.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><br>शुभम कृष्ण की माता मिथिला मिथिला पेंटिंग से अपना खर्च चलाती हैं। उनके पास अपना घर भी नहीं है। पिंटू के पिताजी मोमबत्ती बेचकर घर चलाते हैं। नितीश और नीरज के पिता की रेडियो मरम्मत की दुकान है। आदित्य के पिता मजदूरी करते हैं तो अभिषेक और आशुतोष के पिता निजी स्कूल में 8 हजार वेतन पर पढ़ाते हैं। यही कहानी कमोवेश अवसर ट्रस्ट के सभी बच्चों की है।<br>राष्ट्रपति से मिलनेवाले प्रतिनिधिमंडल में अवसर ट्रस्ट के निदेशक रजनीकांत सिन्हा और रत्ना सिन्हा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनुरंजन श्रीवास्तव और राहुल कुदेशिया भी शामिल थे।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="682" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/IMG-20241224-WA0020-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88279" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/IMG-20241224-WA0020-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/IMG-20241224-WA0020-650x433.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p></p>
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		<title>&#8216;वाटर सिक्यूरिटी एंड इकोसिस्टम बैलेंस&#8217; पर आ गई  पुस्तक</title>
		<link>https://www.patnanow.com/water-security-ecosystem-balance/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 22 Dec 2024 06:43:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PATNA]]></category>
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		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रो. (डॉ.)अनिल कुमार सिन्हा ,श्रीमती शिखा श्रीवास्तव और डॉ. रेणु कौशिक की किताब पारिस्थितिक तंत्र और मानव जीवन में पानी की महत्वपूर्ण भूमिका पर देता है जोर घरेलू, कृषि और औद्योगिक उपयोग के तरीकों सहित ऐतिहासिक और आधुनिक जल संरक्षण तकनीकों की पड़ताल यह पुस्तक वैश्विक जल वितरण और विशेष रूप से भारत में मीठे पानी की उपलब्धता पर ध्यान केंद्रित करते हुए जल संसाधनों का व्यापक परिचय प्रस्तुत करती है. यह पारिस्थितिक तंत्र और मानव जीवन में पानी की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देता है, जो प्रभावी जल प्रबंधन को समझने की नींव रखता है. मुख्य विषयों में वैश्विक जल चक्र, वाटरशेड, नदी बेसिन और जल वितरण और पहुंच की चुनौतियाँ शामिल हैं. यह पुस्तक घरेलू, कृषि और औद्योगिक उपयोग के तरीकों सहित ऐतिहासिक और आधुनिक जल संरक्षण तकनीकों की पड़ताल करती है. इसमें भूजल पुनर्भरण और प्रबंधन पर ध्यान देने के साथ टिकाऊ जल प्रबंधन प्रथाओं, नीतियों और विनियमों को शामिल किया गया है, जिसमें सफल पहल की तकनीकों और केस अध्ययन भी शामिल हैं. पानी और पारिस्थितिक तंत्र के बीच संबंधों की जांच की जाती है, जिसमें जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन में पानी की भूमिका पर प्रकाश डाला जाता है, जिसमें आर्द्रभूमि और तटवर्ती क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाता है. यह आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए भारत के विधायी ढांचे की समीक्षा करता है और जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का पता लगाता है, केस अध्ययनों द्वारा समर्थित अनुकूलन रणनीतियों की पेशकश करता है. टिकाऊ जल प्रबंधन के लिए वैश्विक पहलों और रूपरेखाओं पर [&#8230;]]]></description>
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<p></p>



<p></p>



<p><strong>प्रो. (डॉ.)अनिल कुमार सिन्हा ,श्रीमती शिखा श्रीवास्तव और डॉ. रेणु कौशिक की किताब </strong></p>



<p><strong>पारिस्थितिक तंत्र और मानव जीवन में पानी की महत्वपूर्ण भूमिका पर देता है जोर </strong></p>



<p><strong>घरेलू, कृषि और औद्योगिक उपयोग के तरीकों सहित ऐतिहासिक और आधुनिक जल संरक्षण तकनीकों की पड़ताल </strong></p>



<p></p>



<p>यह पुस्तक वैश्विक जल वितरण और विशेष रूप से भारत में मीठे पानी की उपलब्धता पर ध्यान केंद्रित करते हुए जल संसाधनों का व्यापक परिचय प्रस्तुत करती है. यह पारिस्थितिक तंत्र और मानव जीवन में पानी की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देता है, जो प्रभावी जल प्रबंधन को समझने की नींव रखता है. मुख्य विषयों में वैश्विक जल चक्र, वाटरशेड, नदी बेसिन और जल वितरण और पहुंच की चुनौतियाँ शामिल हैं. यह पुस्तक घरेलू, कृषि और औद्योगिक उपयोग के तरीकों सहित ऐतिहासिक और आधुनिक जल संरक्षण तकनीकों की पड़ताल करती है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="734" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1-anil-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88240" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1-anil-scaled.jpg 734w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1-anil-466x650.jpg 466w" sizes="auto, (max-width: 734px) 100vw, 734px" /></figure>



<p> इसमें भूजल पुनर्भरण और प्रबंधन पर ध्यान देने के साथ टिकाऊ जल प्रबंधन प्रथाओं, नीतियों और विनियमों को शामिल किया गया है, जिसमें सफल पहल की तकनीकों और केस अध्ययन भी शामिल हैं. पानी और पारिस्थितिक तंत्र के बीच संबंधों की जांच की जाती है, जिसमें जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन में पानी की भूमिका पर प्रकाश डाला जाता है, जिसमें आर्द्रभूमि और तटवर्ती क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाता है. यह आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए भारत के विधायी ढांचे की समीक्षा करता है और जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का पता लगाता है, केस अध्ययनों द्वारा समर्थित अनुकूलन रणनीतियों की पेशकश करता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="739" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/anil-2-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88241" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/anil-2-scaled.jpg 739w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/anil-2-469x650.jpg 469w" sizes="auto, (max-width: 739px) 100vw, 739px" /></figure>



<p> टिकाऊ जल प्रबंधन के लिए वैश्विक पहलों और रूपरेखाओं पर चर्चा के साथ समापन करते हुए, पुस्तक अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर जोर देती है. &#8220;जल सुरक्षा और पारिस्थितिकी तंत्र संतुलन&#8221; जल वितरण, संरक्षण, भूजल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन प्रभावों और पारिस्थितिक तंत्र की भूमिका में आवश्यक अंतर्दृष्टि प्रदान करता है, जिससे यह वैश्विक जल चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक मूल्यवान संसाधन बन जाता है.</p>



<p>किताब यहाँ से खरीद सकते हैं &#8211;<a href="https://www.amazon.in/WATER-SECURITY-ECOSYSTEM-BALANCE-Kumar/dp/B0DP4L1TX7/ref=">https://www.amazon.in/WATER-SECURITY-ECOSYSTEM-BALANCE-Kumar/dp/B0DP4L1TX7/ref=</a></p>



<p>PNC DESK</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>BPSC ने रद्द कर दी इस परीक्षा केंद्र की 70वीं संयुक्त पीटी परीक्षा</title>
		<link>https://www.patnanow.com/bpsc-cancels-exam-of-this-centre/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Dec 2024 11:06:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[UPSC/PCS]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[जॉब/करियर]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[70th BPSC]]></category>
		<category><![CDATA[Bapu exam centre]]></category>
		<category><![CDATA[Bpsc exam]]></category>
		<category><![CDATA[BPSC PT]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना।। बीपीएससी ने आखिरकार उस केन्द्र की परीक्षा रद्द कर दी है जहां परीक्षा के दौरान हंगामा हुआ था. 70वीं संयुक्त पीटी परीक्षा को लेकर ये जानकारी Bpsc के अध्यक्ष और सचिव ने पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी. Bpsc चेयरमैन परमार रवि मनुभाई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 911 सेंटर के चार लाख 75 हजार अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी है. परीक्षा आम तौर पर शांतिपूर्व माहौल में संपन्न हुई है.उन्होंने पेपर लीक होने की बातों को खारिज करते हुए साफ कहा कि परीक्षा कैंसिल नहीं होगी, लेकिन एक केंद्र पर दोबारा परीक्षा ली जाएगी. दोबारा परीक्षा लेकर भी एक साथ ही परिणाम जारी किया जाएगा. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि सेंटर पर हंगामा करने वाले अभ्यर्थियों की पहचान हो रही है. BPSC अध्यक्ष ने कहा कि जांच के दौरान यह भी देखने को मिला कि कुछ शरारती तत्व परीक्षा केंद्र के अन्दर मोबाइल से वीडियो भी बना रहे थे. वह कैसे मोबाइल लेकर घुसे, इसकी भी जांच की जा रही है. इन सभी के कारण जितने भी अभ्यर्थी परीक्षा नहीं दे पाए, उनके प्रति भी आयोग की सहानुभूति है. केंद्राधीक्षक की रिपोर्ट को देखते हुए बापू परीक्षा परिसर की पूरी परीक्षा को रद्द कर दिया गया है. आयोग जल्द नई परीक्षा की तिथि की घोषणा करेगा. बापू परीक्षा परिसर में रद्द की गई परीक्षा जल्द ही ली जाएगी. इस रिजल्ट का प्रकाशन एक साथ किया जाएगा. SSP के नेतृत्व में 2 टीमें कर रही जांच बीपीएससी अध्यक्ष ने बताया कि SSP के नेतृत्व में 2 टीम बनी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पटना।। बीपीएससी ने आखिरकार उस केन्द्र की परीक्षा रद्द कर दी है जहां परीक्षा के दौरान हंगामा हुआ था. 70वीं संयुक्त पीटी परीक्षा को लेकर ये जानकारी Bpsc के अध्यक्ष और सचिव ने पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="704" height="560" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/pnc-BPSC-chairman-ravi-manubhai-parmar.jpg" alt="" class="wp-image-88156" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/pnc-BPSC-chairman-ravi-manubhai-parmar.jpg 704w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/pnc-BPSC-chairman-ravi-manubhai-parmar-650x517.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 704px) 100vw, 704px" /></figure>



<p>Bpsc चेयरमैन परमार रवि मनुभाई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 911 सेंटर के चार लाख 75 हजार अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी है. परीक्षा आम तौर पर शांतिपूर्व माहौल में संपन्न हुई है.<br>उन्होंने पेपर लीक होने की बातों को खारिज करते हुए साफ कहा कि परीक्षा कैंसिल नहीं होगी, लेकिन एक केंद्र पर दोबारा परीक्षा ली जाएगी. दोबारा परीक्षा लेकर भी एक साथ ही परिणाम जारी किया जाएगा. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि सेंटर पर हंगामा करने वाले अभ्यर्थियों की पहचान हो रही है. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="837" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/pnc-bapu-exam-BPSC-pt-hungama-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-88150" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/pnc-bapu-exam-BPSC-pt-hungama-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/pnc-bapu-exam-BPSC-pt-hungama-650x532.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>BPSC अध्यक्ष ने कहा कि जांच के दौरान यह भी देखने को मिला कि कुछ शरारती तत्व परीक्षा केंद्र के अन्दर मोबाइल से वीडियो भी बना रहे थे. वह कैसे मोबाइल लेकर घुसे, इसकी भी जांच की जा रही है. इन सभी के कारण जितने भी अभ्यर्थी परीक्षा नहीं दे पाए, उनके प्रति भी आयोग की सहानुभूति है. केंद्राधीक्षक की रिपोर्ट को देखते हुए बापू परीक्षा परिसर की पूरी परीक्षा को रद्द कर दिया गया है. आयोग जल्द नई परीक्षा की तिथि की घोषणा करेगा. बापू परीक्षा परिसर में रद्द की गई परीक्षा जल्द ही ली जाएगी. इस रिजल्ट का प्रकाशन एक साथ किया जाएगा.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="704" height="452" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/pnc-BPSC-exam-centre-bapu-pariksha-Kendra.jpg" alt="" class="wp-image-88151" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/pnc-BPSC-exam-centre-bapu-pariksha-Kendra.jpg 704w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/pnc-BPSC-exam-centre-bapu-pariksha-Kendra-650x417.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 704px) 100vw, 704px" /></figure>



<p><strong>SSP के नेतृत्व में 2 टीमें कर रही जांच</strong></p>



<p>बीपीएससी अध्यक्ष ने बताया कि SSP के नेतृत्व में 2 टीम बनी है. 25 से 30 छात्रों की पहचान हुई है. 100 जीबी डाटा की जांच जारी है. पहचान करने के बाद कारण बताओ नोटिस की कार्रवाई की जाएगी. बीपीएससी अध्यक्ष ने कहा कि बापू परीक्षा परिसर में हुई गड़बड़ी को लेकर पटना जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी गई थी. इस मामले की जांच आयोग की आईटी सेल भी कर रही है. जिन लोगों ने परीक्षा बाधित करने की कोशिश करते हुए आईटी नियम का उल्लंघन किया है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>लॉटरी सिस्टम से तय होगा बीपीएससी के प्रश्न पत्र का सेट</title>
		<link>https://www.patnanow.com/lottery-system-demand/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 09 Dec 2024 17:35:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[UPSC/PCS]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[जॉब/करियर]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[70th BPSC]]></category>
		<category><![CDATA[BPSC PT]]></category>
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					<description><![CDATA[‌पटना।। BPSC 70वीं पीटी परीक्षा में कौन सा प्रश्न पत्र इस्तेमाल होगा, इसका फैसला लॉटरी से होगा. बीपीएससी चेयरमैन ने सोमवार को कहा कि 4 राज्यों के प्रिंटर से प्रश्न पत्र बना है. प्रश्न पत्र 4 सेट में है. इसमें एक सेट का चयन लॉटरी सिस्टम से किया जाएगा. इसके बाद राज्य में सभी सेंटर्स पर भेजा जाएगा. उन्होंने आज स्पष्ट किया कि पीटी तारीख में कोई बदलाव नहीं होगा. परीक्षा 13 दिसंबर को ही होगी. अफवाह फैलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई बिहार लोक सेवा के अध्यक्ष ने कहा कि अफवाह के कारण अभ्यर्थी परेशान हुए हैं. नॉर्मलाइजेशन और परीक्षा डेट को लेकर जिन लोगों ने अफवाह फैलाई है, वैसे सभी लोगों के खिलाफ साक्ष्य जमा करके साइबर सेल को दे रहे हैं. इन सभी पर कार्रवाई की जाएगी. हम एक-एक वीडियो की जांच कर रहे हैं। जो लोग या संस्थान इसमें शामिल हैं, उन पर साइबर क्राइम के तहत FIR दर्ज की जाएगी. pncb]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>‌पटना।। BPSC 70वीं पीटी परीक्षा में कौन सा प्रश्न पत्र इस्तेमाल होगा, इसका फैसला लॉटरी से होगा. बीपीएससी चेयरमैन ने सोमवार को कहा कि 4 राज्यों के प्रिंटर से प्रश्न पत्र बना है. प्रश्न पत्र 4 सेट में है. इसमें एक सेट का चयन लॉटरी सिस्टम से किया जाएगा. इसके बाद राज्य में सभी सेंटर्स पर भेजा जाएगा.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="704" height="560" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1000233473.jpg" alt="" class="wp-image-88060" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1000233473.jpg 704w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1000233473-650x517.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 704px) 100vw, 704px" /></figure>



<p>उन्होंने आज स्पष्ट किया कि पीटी तारीख में कोई बदलाव नहीं होगा. परीक्षा 13 दिसंबर को ही होगी. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="992" height="800" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1000233474.jpg" alt="" class="wp-image-88059" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1000233474.jpg 992w, https://www.patnanow.com/assets/2024/12/1000233474-650x524.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 992px) 100vw, 992px" /></figure>



<p><strong>अफवाह फैलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई</strong></p>



<p>बिहार लोक सेवा के अध्यक्ष ने कहा कि अफवाह के कारण अभ्यर्थी परेशान हुए हैं. नॉर्मलाइजेशन और परीक्षा डेट को लेकर जिन लोगों ने अफवाह फैलाई है, वैसे सभी लोगों के खिलाफ साक्ष्य जमा करके साइबर सेल को दे रहे हैं. इन सभी पर कार्रवाई की जाएगी. हम एक-एक वीडियो की जांच कर रहे हैं। जो लोग या संस्थान इसमें शामिल हैं, उन पर साइबर क्राइम के तहत FIR दर्ज की जाएगी.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आरा के लाल ने किया कमाल</title>
		<link>https://www.patnanow.com/aras-son-did-wonders-dr-abhishek-anand/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Sep 2024 04:46:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[UPSC/PCS]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[काम की ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[bits pilani]]></category>
		<category><![CDATA[csir]]></category>
		<category><![CDATA[Dr. Abhishek aanand]]></category>
		<category><![CDATA[pilani]]></category>
		<category><![CDATA[son of dr binod kumar sinha]]></category>
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					<description><![CDATA[किसानों की आय बढ़ाने में मिलेगी मदद : डॉ आनंद अभिषेक पिलानी में हुआ एग्रीवोल्टिक्स प्लांट का उद्घाटन 10 किलोवाट डीसी माइक्रोग्रिड-आधारित एग्रीवोल्टिक्स हैं प्लांट कृषि और बिजली उत्पादन के उपयोगी होगा सिस्टम फसलों को न्यूनतम छाया के साथ अधिकतम सौर ऊर्जा उत्पादन कर सके पिलानी फसलों को न्यूनतम छाया के साथ अधिकतम सौर ऊर्जा उत्पादन कर सके. इसके तहत सालाना लगभग 15,000 यूनिट बिजली का उत्पादन किया जा सकता है और पैनलों के नीचे की मिट्टी का तापमान 5°C से 10°C तक कम हो सकता है, जिससे फसलों की वृद्धि में मदद मिलती है. ये बातें सीएसआईआर के वैज्ञानिक डॉ आनंद अभिषेक ने कहीं. उन्होंने कहा कि सीएसआईआर-केन्द्रीय इलेक्ट्रॉनिकी अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीरी), पिलानी के वैज्ञानिकों ने 10 किलोवाट डीसी माइक्रोग्रिड-आधारित एग्रीवोल्टिक्स प्लांट तैयार किया है जो न केवल ऊर्जा बचत में उपयोगी होगा बल्कि कृषि उत्पादन में वृद्धि के द्वारा किसानों की आय बढ़ाने में भी मददगार होगा. इस परियोजना के वैज्ञानिक डॉ आनन्द यह एपीवोल्टिक्स प्रणाली, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित परियोजना के अंतर्गत सीएसआईआर-सीरी द्वारा विकसित की गई है. संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यह तकनीक कृषि भूमि के दोहरे उपयोग के लिए सौर-फोटोवोल्टिक आधारित डीसी माइक्रोग्रिड का लाभ उठाती है, जिससे किसानों को खेती के साथ-साथ ऊर्जा उत्पादन का भी अवसर मिलता है. डॉ आनन्द ने कहा कि सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता में कमी प्रमुख हैं. विकसित प्रणाली को इस तरह से अनुकूलित किया गया है कि यह फसलों को न्यूनतम छाया के साथ अधिकतम सौर ऊर्जा उत्पादन कर सके. [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p></p>



<p></p>



<p><strong>किसानों की आय बढ़ाने में मिलेगी मदद : डॉ आनंद अभिषेक</strong></p>



<p><strong>पिलानी में हुआ एग्रीवोल्टिक्स प्लांट का उद्घाटन</strong></p>



<p><strong>10 किलोवाट डीसी माइक्रोग्रिड-आधारित एग्रीवोल्टिक्स हैं प्लांट</strong></p>



<p><strong>कृषि और बिजली उत्पादन के उपयोगी होगा सिस्टम</strong></p>



<p><strong>फसलों को न्यूनतम छाया के साथ अधिकतम सौर ऊर्जा उत्पादन कर सके</strong></p>



<p>पिलानी</p>



<p>फसलों को न्यूनतम छाया के साथ अधिकतम सौर ऊर्जा उत्पादन कर सके. इसके तहत सालाना लगभग 15,000 यूनिट बिजली का उत्पादन किया जा सकता है और पैनलों के नीचे की मिट्टी का तापमान 5°C से 10°C तक कम हो सकता है, जिससे फसलों की वृद्धि में मदद मिलती है. ये बातें सीएसआईआर के वैज्ञानिक डॉ आनंद अभिषेक ने कहीं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="682" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/09/493f0c25-6789-400f-bd09-d4dbe7a9f0cf-scaled.jpeg" alt="" class="wp-image-87130" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/09/493f0c25-6789-400f-bd09-d4dbe7a9f0cf-scaled.jpeg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/09/493f0c25-6789-400f-bd09-d4dbe7a9f0cf-650x433.jpeg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>उन्होंने कहा कि सीएसआईआर-केन्द्रीय इलेक्ट्रॉनिकी अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीरी), पिलानी के वैज्ञानिकों ने 10 किलोवाट डीसी माइक्रोग्रिड-आधारित एग्रीवोल्टिक्स प्लांट तैयार किया है जो न केवल ऊर्जा बचत में उपयोगी होगा बल्कि कृषि उत्पादन में वृद्धि के द्वारा किसानों की आय बढ़ाने में भी मददगार होगा.</p>



<p>इस परियोजना के वैज्ञानिक डॉ आनन्द यह एपीवोल्टिक्स प्रणाली, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित परियोजना के अंतर्गत सीएसआईआर-सीरी द्वारा विकसित की गई है. संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यह तकनीक कृषि भूमि के दोहरे उपयोग के लिए सौर-फोटोवोल्टिक आधारित डीसी माइक्रोग्रिड का लाभ उठाती है, जिससे किसानों को खेती के साथ-साथ ऊर्जा उत्पादन का भी अवसर मिलता है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="682" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/09/67ed8da2-cdd5-4cb8-b436-7b1fd6b34470-scaled.jpeg" alt="" class="wp-image-87131" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/09/67ed8da2-cdd5-4cb8-b436-7b1fd6b34470-scaled.jpeg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/09/67ed8da2-cdd5-4cb8-b436-7b1fd6b34470-650x433.jpeg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>डॉ आनन्द ने कहा कि सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता में कमी प्रमुख हैं. विकसित प्रणाली को इस तरह से अनुकूलित किया गया है कि यह फसलों को न्यूनतम छाया के साथ अधिकतम सौर ऊर्जा उत्पादन कर सके. इसके तहत सालाना लगभग 15,000 यूनिट बिजली का उत्पादन किया जा सकता है और पैनलों के नीचे की मिट्टी का तापमान 5°C से 10°C तक कम हो सकता है, जिससे फसलों की वृद्धि में मदद मिलती है. इस प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह तकनीक भारत के छोटे और मध्यम किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकती है. यह सोलर पैनलों के माध्यम से बिजली उत्पादन के साथ-साथ उनके कृषि उत्पादन को भी बढ़ावा देती है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="682" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/09/fe53fa80-204f-4a0e-a83e-0847cf32a8e4-scaled.jpeg" alt="" class="wp-image-87132" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/09/fe53fa80-204f-4a0e-a83e-0847cf32a8e4-scaled.jpeg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/09/fe53fa80-204f-4a0e-a83e-0847cf32a8e4-650x433.jpeg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>एग्रीवोल्टिक्स प्लांट का उद्घाटन किया 72वें स्थापना दिवस पर संस्थान ने यह उल्लेखनीय तकनीकी उपलब्धि हासिल की है. इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रोफेसर चंद्रभास नारायण, निदेशक, राजीव गांधी सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी (आरजीसीबी), तिरुअनंतपुरम द्वारा 10 किलोवाट डीसी माइक्रोग्रिड-आधारित एग्रीवोल्टिक्स प्लांट का उद्घाटन किया गया. प्रोफेसर चंद्रभास नारायण ने इस प्लांट की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह एग्रीवोल्टिक्स तकनीक न केवल ऊर्जा और कृषि के क्षेत्र में नई संभावनाओं को जन्म देगी, बल्कि भारत के छोटे किसानों के लिए भी समृद्धि का एक नया मार्ग प्रशस्त करेगी.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="682" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/09/7cdea3ac-5303-4094-aa21-a53ff1fb39b6-scaled.jpeg" alt="" class="wp-image-87133" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/09/7cdea3ac-5303-4094-aa21-a53ff1fb39b6-scaled.jpeg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/09/7cdea3ac-5303-4094-aa21-a53ff1fb39b6-650x433.jpeg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>प्रोफेसर नारायण ने इस प्लांट के उद्घाटन के अवसर पर उपस्थित सीएसएमसीआरआई-भावनगर के निदेशक डॉ कन्नन और आईआईआईएम-जम्मू के निदेशक डॉ. ज़बीर अहमद ने सीएसआईआर-सीरी के निदेशक डॉ. पंचारिया एवं शोधकर्ता वैज्ञानिक डॉ आनंद अभिषेक, अनिर्बान बेरा और उनकी टीम की सराहना की थी . डॉ आनन्द अभिषेक के पिता बनस्पति शास्त्र के वरिष्ठ प्रोफ़ेसर डॉ बिनोद कुमार सिन्हा ने कहा कि डॉ आनंद ने कई ऐसे कार्य कम उम्र में किये हैं जिस पर सभी को गर्व है.</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title> प्राधिकरण विभागों के साथ जलवायु परिवर्तन-शमन एवं अनुकूलन पर करेगा कार्य    </title>
		<link>https://www.patnanow.com/disaster-management-authority-will-work-with-departments-on-climate-change-mitigation-and-adaptation/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 23 Aug 2024 12:17:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[UPSC/PCS]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[BSDMA]]></category>
		<category><![CDATA[change-mitigation and adaptation]]></category>
		<category><![CDATA[deepak kumar bsdma]]></category>
		<category><![CDATA[Disaster Management Authority will work with departments on climate]]></category>
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					<description><![CDATA[बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक में जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर  पटना, 23 अगस्त 2024: बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा आज एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें बिहार में जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन बढ़ाने और इससे निपटने के लिए विभिन्न विभागों के बीच सहयोग को सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया गया. बैठक का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के बारे में समझ को बढ़ाना, संबंधित विभागों को इस कार्यक्रम के लिए प्रेरित करना, और कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए आपसी सहयोग को प्रोत्साहित करना था. बैठक का आयोजन माननीय उपाध्यक्ष डॉ. उदयकांत के दिशानिर्देश में और माननीय सदस्य कौशल किशोर मिश्र की अध्यक्षता एवं नरेंद्र सिंह, प्रकाश कुमार के मार्गदर्शन में किया गया. बिहार भारत के सबसे जलवायु-संवेदनशील राज्यों में से एक है, जो जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती तीव्रता और आवृत्ति वाले मौसम की घटनाओं का सामना कर रहा है. पिछले सदी में राज्य का औसत तापमान लगभग 0.8°C बढ़ा है, जिससे हीटवेव और गर्मी के दिनों में वृद्धि हुई है. 2019-2023 के बीच अनिश्चित मानसून के कारण 22% वर्षा की कमी देखी गई, जिससे बाढ़ और सूखे की स्थितियाँ उत्पन्न हुईं. बिजली गिरने की घटनाओं में 2010 से 34% से अधिक की वृद्धि हुई है, और ठंडी लहरें भी अधिक सामान्य हो गई हैं. बिहार की भौगोलिक स्थिति, विशेष रूप से गंगा, कोसी, गंडक, और बागमती नदियों के कारण, राज्य की 73% भूमि वार्षिक बाढ़ की चपेट में रहती है, जिससे यह क्षेत्र अत्यधिक जलवायु जोखिमों का सामना कर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
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<p><strong>बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक में जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर </strong></p>



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<p>पटना, 23 अगस्त 2024: बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा आज एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें बिहार में जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन बढ़ाने और इससे निपटने के लिए विभिन्न विभागों के बीच सहयोग को सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया गया. बैठक का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के बारे में समझ को बढ़ाना, संबंधित विभागों को इस कार्यक्रम के लिए प्रेरित करना, और कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए आपसी सहयोग को प्रोत्साहित करना था. बैठक का आयोजन माननीय उपाध्यक्ष डॉ. उदयकांत के दिशानिर्देश में और माननीय सदस्य कौशल किशोर मिश्र की अध्यक्षता एवं नरेंद्र सिंह, प्रकाश कुमार के मार्गदर्शन में किया गया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/08/73280a70-0af3-47fd-b664-0a1602743088-scaled.jpeg" alt="" class="wp-image-86470" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/08/73280a70-0af3-47fd-b664-0a1602743088-scaled.jpeg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/08/73280a70-0af3-47fd-b664-0a1602743088-650x366.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/08/73280a70-0af3-47fd-b664-0a1602743088-1536x864.jpeg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>बिहार भारत के सबसे जलवायु-संवेदनशील राज्यों में से एक है, जो जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती तीव्रता और आवृत्ति वाले मौसम की घटनाओं का सामना कर रहा है. पिछले सदी में राज्य का औसत तापमान लगभग 0.8°C बढ़ा है, जिससे हीटवेव और गर्मी के दिनों में वृद्धि हुई है. 2019-2023 के बीच अनिश्चित मानसून के कारण 22% वर्षा की कमी देखी गई, जिससे बाढ़ और सूखे की स्थितियाँ उत्पन्न हुईं. बिजली गिरने की घटनाओं में 2010 से 34% से अधिक की वृद्धि हुई है, और ठंडी लहरें भी अधिक सामान्य हो गई हैं. बिहार की भौगोलिक स्थिति, विशेष रूप से गंगा, कोसी, गंडक, और बागमती नदियों के कारण, राज्य की 73% भूमि वार्षिक बाढ़ की चपेट में रहती है, जिससे यह क्षेत्र अत्यधिक जलवायु जोखिमों का सामना कर रहा है. इन चुनौतियों से निपटने के लिए जलवायु अनुकूलन और आपदा प्रबंधन पर विशेष ध्यान देते हुए बैठक के दौरान बिहार में जलवायु परिवर्तन के प्रति प्रभावी ज़िम्मेदारी बढ़ाने के लिए विभिन्न विभागों की भूमिकाओं पर विस्तार से चर्चा की गई.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/08/5382dee9-1260-4344-ad3b-d813c820dffd-scaled.jpeg" alt="" class="wp-image-86471" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/08/5382dee9-1260-4344-ad3b-d813c820dffd-scaled.jpeg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/08/5382dee9-1260-4344-ad3b-d813c820dffd-650x366.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/08/5382dee9-1260-4344-ad3b-d813c820dffd-1536x864.jpeg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण, वन्यजीव प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण अभियानों और संवेदीकरण, जागरूकता एवं क्षमतावर्द्धन कार्यक्रमों की योजना प्रस्तुत की. विभाग ने अन्य विभागों के साथ समन्वय और सहयोग की आवश्यकता पर भी बल दिया.</p>



<p>लघु जल संसाधन विभाग ने सिंचाई के लिए जमीन की प्राकृतिक ढलान का उपयोग, लिफ्ट सिंचाई योजनाओं के विकास, और जल जीवन हरियाली मिशन के साथ लघु सिंचाई का एकीकरण करने के कार्यक्रमों पर जोर दिया. विभाग ने सतही और भूमिगत जल स्रोतों के प्रभावी उपयोग पर भी ध्यान केंद्रित किया.</p>



<p>ऊर्जा विभाग ने सौर ऊर्जा कार्यक्रमों को बढ़ावा देने, पवन और जल ऊर्जा प्रणालियों की स्थापना में वृद्धि करने, और ऊर्जा की खपत को कम करने के लिए राज्य स्तरीय पहल की दिशा में अपने कार्यक्रमों की जानकारी दी. विभाग ने स्मार्ट ग्रिड प्रौद्योगिकियों के विकास और इसे लागू करने की योजनाओं को भी साझा किया.</p>



<p>स्वास्थ्य विभाग ने राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना और मानव स्वास्थ्य के अनुरूप गर्मी से संबंधित बीमारी प्रबंधन और निगरानी के लिए एक डैशबोर्ड विकसित करने की पहल के बारे में की जानकारी साझा की.</p>



<p>कृषि विभाग ने जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रमों के तहत अल्पावधि बीज किस्मों के विकास, बाढ़ और सूखा रोधी फसल तकनीकों के विस्तार, और कृषि कीटों से सुरक्षा हेतु व्यापक अभियानों की योजना प्रस्तुत की. विभाग ने कृषि विकास की वार्षिक योजनाओं में जलवायु जोखिम को कम करने के उपायों को शामिल करने का संकल्प लिया. </p>



<p>शहरी विकास और आवास विभाग ने सुरक्षित नगरीय परिदृश्य विकसित करने, ग्रीन स्पेसेज के निर्माण, और शहरी बाढ़ प्रबंधन के लिए डिजिटल ट्विन जैसी योजनाओं को लागू करने पर बल दिया. विभाग ने वर्षा जल प्रबंधन के उच्च स्तरीय योजनाओं के विकास पर भी जोर दिया.</p>



<p>ग्रामीण विकास विभाग ने जलवायु-अनुकूल कृषि तकनीकों, भूमि संरक्षण परियोजनाओं और जल संसाधन प्रबंधन के कार्यों को प्राथमिकता दी. विभाग ने कृषि अनुसंधान संस्थानों के साथ भागीदारी कर किसानों के लिए कार्यशालाओं के आयोजन और कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/08/06eb33ac-f974-43bd-a0c2-e0b2270ed292-scaled.jpeg" alt="" class="wp-image-86472" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/08/06eb33ac-f974-43bd-a0c2-e0b2270ed292-scaled.jpeg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/08/06eb33ac-f974-43bd-a0c2-e0b2270ed292-650x366.jpeg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/08/06eb33ac-f974-43bd-a0c2-e0b2270ed292-1536x864.jpeg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>इस बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी विभाग आपस में समन्वय कर जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने के लिए प्रभावी योजनाओं का निर्माण करेंगे और उन्हें जमीनी स्तर पर लागू करेंगे. बैठक में जीविका, मनरेगा, जल जीवन हरियाली सहित संबंधित विभागों के प्रतिनिधि एवं प्राधिकरण के सभी पदाधिकारीगण उपस्थित थे. कार्यक्रम का विषय प्रवेश एवं संचालन प्राधिकरण के वरीय सलाहकार डॉ. अनिल कुमार ने किया.&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>



<p><strong>PNCDESK</strong></p>
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		<title>बिहार की &#8216;बावन बूटी&#8217; कला से परिचित हैं आप!</title>
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		<pubDate>Fri, 05 Jul 2024 05:48:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अशोक कुमार सिन्हा लिखित &#8216;बिहार के पद्म श्री कलाकार&#8217; पुस्तक का लोकार्पण बिहार में पद्म सम्मान पाने वालों से मिले रविवार को कलाकारों के जुटान के इस दुर्लभ संयोग का साक्षी बनिए समाज सेवा, राजनीति, चिकित्सा, पर्यावरण, खेल, रंगमंच, संगीत और लोक कला के महारथी विमलेन्दु सिंह पटना: आगामी सात जुलाई, 2024 दिन रविवार को अशोक कुमार सिन्हा जी की पुस्तक &#8216;बिहार के पद्मश्री कलाकार&#8217; का लोकार्पण होने जा रहा है. बिहार म्यूजियम, पटना लोकार्पण स्थल रहेगा. निमंत्रण-पत्र संलग्न है. यह आयोजन मेरे लिए व्यक्तिगत खुशी का पल होने वाला है. व्यक्तिगत इसलिए कि कला जगत से जुड़े लोगों के बारे में जानना, उनसे मिलना, बातें करना मेरा प्रिय शगल रहा है. पेशेवर तौर पर और साथ -साथ निजी अभिरुचि के तौर पर भी. पत्रकारिता के शुरुआती दौर से ही. इस पुस्तक में वर्णित कई कलाकारों से मिलने और बातचीत करने का मौका भी मुझे मिल चुका है. यह मेरे लिए व्यक्तिगत संतुष्टि की बात है. एक बात और स्पष्ट कर दूं. प्रकाशन के पूर्व ही मुझे इस पुस्तक की पांडुलिपि पढ़ने का सौभाग्य प्राप्त हो गया था. लेखक के प्रति मेरे मन में अगाध सम्मान है तो उनके आदेश की मैं अवहेलना नहीं कर सकता था. तो प्रकाशन के पूर्व ही पूरी पांडुलिपि पढ़ डाली. तो पुस्तकाकार लेने से पूर्व ही यह पुस्तक मेरे दिल में रच बस-सा गया है. इसलिए यह पोस्ट लिखते हुए समझिए कि मैं अपनी व्यक्तिगत खुशी का इजहार कर रहा हूं. और एक तरह से आपको निमंत्रण भी दे रहा हूं कि इस पुस्तक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अशोक कुमार सिन्हा लिखित &#8216;बिहार के पद्म श्री कलाकार&#8217; पुस्तक का लोकार्पण </strong></p>



<p><strong>बिहार में पद्म सम्मान पाने वालों से मिले रविवार को</strong></p>



<p><strong>कलाकारों के जुटान के इस दुर्लभ संयोग का साक्षी बनिए</strong></p>



<p><strong>समाज सेवा, राजनीति, चिकित्सा, पर्यावरण, खेल, रंगमंच, संगीत और लोक कला</strong> <strong>के महारथी </strong></p>



<p></p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="402" height="620" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/447604118_331678243299185_5246196419983793471_n.jpg" alt="" class="wp-image-85315" style="width:127px;height:auto"/></figure>



<p><strong>विमलेन्दु सिंह</strong> </p>



<p>पटना: आगामी सात जुलाई, 2024 दिन रविवार को अशोक कुमार सिन्हा जी की पुस्तक &#8216;बिहार के पद्मश्री कलाकार&#8217; का लोकार्पण होने जा रहा है. बिहार म्यूजियम, पटना लोकार्पण स्थल रहेगा. निमंत्रण-पत्र संलग्न है. यह आयोजन मेरे लिए व्यक्तिगत खुशी का पल होने वाला है. व्यक्तिगत इसलिए कि कला जगत से जुड़े लोगों के बारे में जानना, उनसे मिलना, बातें करना मेरा प्रिय शगल रहा है. पेशेवर तौर पर और साथ -साथ निजी अभिरुचि के तौर पर भी. पत्रकारिता के शुरुआती दौर से ही. इस पुस्तक में वर्णित कई कलाकारों से मिलने और बातचीत करने का मौका भी मुझे मिल चुका है. यह मेरे लिए व्यक्तिगत संतुष्टि की बात है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/449614172_352619794538363_2525758149824935479_n-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85314" style="width:488px;height:auto" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/449614172_352619794538363_2525758149824935479_n-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/449614172_352619794538363_2525758149824935479_n-650x650.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/449614172_352619794538363_2525758149824935479_n-1536x1536.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>एक बात और स्पष्ट कर दूं. प्रकाशन के पूर्व ही मुझे इस पुस्तक की पांडुलिपि पढ़ने का सौभाग्य प्राप्त हो गया था. लेखक के प्रति मेरे मन में अगाध सम्मान है तो उनके आदेश की मैं अवहेलना नहीं कर सकता था. तो प्रकाशन के पूर्व ही पूरी पांडुलिपि पढ़ डाली. तो पुस्तकाकार लेने से पूर्व ही यह पुस्तक मेरे दिल में रच बस-सा गया है. इसलिए यह पोस्ट लिखते हुए समझिए कि मैं अपनी व्यक्तिगत खुशी का इजहार कर रहा हूं. और एक तरह से आपको निमंत्रण भी दे रहा हूं कि इस पुस्तक के लोकार्पण समारोह में भी आने का वक्त निकालें.</p>



<p>आप आने का वक्त निकाल पाएंगे तो कई पद्मश्री कलाकारों को प्रत्यक्षतः देख और सुन पाएंगे. विभिन्न कला विधाओं के दिग्गज कलाकारों का ऐसा एकत्रीकरण किसी खगोलीय घटना सदृश ही कोई दुर्लभ संयोग होता है. कला और कलाकार में अगर आपकी थोड़ी भी अभिरुचि है तो कलाकारों के जुटान के इस दुर्लभ संयोग का साक्षी बनिए. आइए. पधारिए. आपको खुशी मिलेगी. मुझे यकीन है.</p>



<p>वाकई खुशी की सीमा का कोई पारावार नहीं रहता जब बिहार के किसी व्यक्ति के नाम की घोषणा पद्म श्रेणी के किसी सर्वोच्च सम्मान के लिए की जाती है. तकरीबन प्रत्येक साल कई एक व्यक्तियों को पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री जैसे सम्मानों से सम्मानित किए जाने के लिए उनके नामों की घोषणा होती है, फिर तय तिथि को समारोहपूर्वक वे सम्मानित भी किए जाते हैं. ऐसे नाम विविध क्षेत्रों से जुड़े हो सकते हैं. समाज सेवा, राजनीति, चिकित्सा, पर्यावरण, खेल, रंगमंच, संगीत और लोक कला आदि.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="683" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/Kapildev-16747267673x2-1-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85316" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/Kapildev-16747267673x2-1-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/Kapildev-16747267673x2-1-650x433.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>सभी अपने क्षेत्र के दिग्गज ही होते हैं. एक से बढ़कर एक. लेकिन कला और संस्कृति से जुड़े किसी व्यक्ति को सबसे ज्यादा खुशी तब होती है जब कोई कलाकार इस सम्मान के लिए चुना जाता है. अशोक कुमार सिन्हा की सद्य: प्रकाशित पुस्तक &#8216;बिहार के पद्मश्री कलाकार&#8217; विभिन्न विधाओं में ख्यातनाम पद्मश्री प्राप्त कलाकारों को समर्पित है. अशोक कुमार सिन्हा जी अभी बिहार म्यूजियम, पटना में अवर निदेशक के पद पर आसीन हैं. विभिन्न विषयों पर उनकी अबतक छत्तीस पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है. और अनेक पुस्तकों के कई संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं. कई रचनाकर्म के मध्य में हैं जो आने वाले वक्त में पाठकों के हाथों में होंगी.</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="176" height="300" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/ashok-ji-e1602830639640-176x300-1.jpg" alt="" class="wp-image-85317" style="width:251px;height:auto"/></figure>



<p><strong>अशोक कुमार सिन्हा</strong> जी पूर्व में बिहार खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी और उपेंद्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान के निदेशक के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं. जाहिर है कला, कलाकार, बुनकर, शिल्पकार, चित्रकार, मूर्तिकार आदि से इनके ताल्लुकात ज्यादा रहे हैं. और जिनसे आपके ज्यादा ताल्लुकात रहते हैं आप उनके जीवन और कर्मक्षेत्र में भी अभिरुचि लेने लग जाते हैं. यकीनन अशोक कुमार सिन्हा जी के साथ भी ऐसा ही हुआ होगा, मैं यह दावा कर सकता हूं.</p>



<p>इस पुस्तक को सिन्हा जी के कलाकारों से संपर्क, संबंध और सरोकार की ही एक परिणति समझिए. इस पुस्तक में जिन पंद्रह पद्म श्री से सम्मानित बिहारियों के बारे में उन्होंने लेखनी चलाई है, सभी के सभी कला संसार के दिग्गज हैं. इनमें उपेंद्र महारथी, श्याम लाल वर्मा जैसी बेहद ख्यातनाम हस्तियां शामिल हैं. वहीं कुछ बेहद ख्यातनाम तो नहीं लेकिन अल्पज्ञात भी नहीं हैं. सबसे बड़ी बात यह है जो मैं कहने की कोशिश कर रहा हूं, वह है उन कलाकारों की पृष्ठभूमि. उनका संघर्ष. उनकी जीवन यात्रा. जिन संघर्षों को उन्होंने जीया है, भोगा है और फिर जो मुकाम हासिल किया है, वह उन्हें प्रेरक शख्सियत बनाता है. निजी जीवन तो नितांत ही लो प्रोफाइल. सरलता और सादगी से भरा. लेकिन जिस काम से जुड़े हैं उसके दिग्गज, धुरंधर और महारथी.</p>



<p>इस पुस्तक में सर्वाधिक वर्णन चर्चित कला मधुबनी पेंटिंग, जिसे मिथिला पेंटिंग के नाम से भी जाना जाता है, से संबद्ध <strong>पद्मश्री पुरस्कृत बिहार के कलाकारों हैं. जगदम्बा देवी, सीता देवी, गंगा देवी, महासुन्दरी देवी, महासुन्दरी देवी, बौआ देवी, गोदावरी दत्त, दुलारी देवी, शिवन पासवान और शांति देवी कुछ ऐसे नाम हैं जिन्होंने मधुबनी पेंटिंग को आंचलिक से वैश्विक पहचान दिलाने का काम किया. </strong>घर की अंधेरी कोठरी और मिट्टी की भित्तियों से मधुबनी पेंटिंग को कला संग्राहकों, आर्ट गैलरीज, संग्रहालयों और कलाकृति बाजार के मुकाम तक का सफर तय करवाया. यह सिर्फ और सिर्फ इन कलाकारों की संघर्ष और लगन की परिणति है.</p>



<p>मधुबनी पेंटिंग पारंपरिक तौर पर मिथिलांचल के ग्रामीण इलाकों की महिलाओं में प्रचलित लोक चित्र शैली है जिसे वे पर्व त्योहारों पर, शादी विवाह के अवसर पर और अपने मिट्टी की कच्ची दीवारों को सुसज्जित करने के लिए बनाया करती थीं. बनाया करती थीं, इसलिए लिखना पड़ रहा है क्योंकि यह अभी नारी वर्चस्व वाली कला है. हालांकि पुरुष भी इस कला में निपुण होते हैं. लेकिन पारंपरिक तौर पर यह कला महिलाओं से ही जुड़ी रही है. कच्ची मिट्टी वाले घरों के गोबर लीपे सतह पर अरिपन (रंगोली) बनाने की परंपरा है. विवाह के अवसर पर घरों में कोहबर बनाने की परंपरा है. इन चित्रों को फर्श और दीवाल से कागज पर उतरने में लंबा वक्त लगा.</p>



<p>मिथिला की महिलाएं चित्रकला में तो दक्ष थीं लेकिन इसके व्यवसायिक पहलू से उनका कोई परिचय नहीं था. उन्हें नहीं पता था कि यह आमदनी का जरिया हो सकता है और इसे बेचा भी जा सकता है. इसमें एक व्यक्ति भास्कर कुलकर्णी की क्या भूमिका रही, इस पुस्तक के विभिन्न अध्यायों से गुजरते हुए आप की ऐसी कई जिज्ञासाएं स्वत: शांत होती चली जाएंगी. बहरहाल मधुबनी पेंटिंग को जब बाजार मिला तो <strong>मधुबनी पेंटिंग की कला यूरोप, अमेरिका और एशिया के कई देशों तक जा पहुंची. बल्कि जापान में तो मिथिला म्यूजियम तक की स्थापना हो गई. मधुबनी के लोक चित्रकार जापान जाते हैं और कई कई माह गुजारकर और अच्छी खासी रकम कमाकर वतन वापसी करते हैं.</strong></p>



<p>पारंपरिक तौर मधुबनी पेंटिंग दो जातियों तक ही सीमित रहा है. <strong>मैथिल ब्राह्मण और कायस्थ. कायस्थ में भी ज्यादातर कर्ण कायस्थ. मधुबनी पेंटिंग में दो शैलियां प्रचलित रही हैं. कचनी शैली और भरनी शैली. पारंपरिक तौर पर ब्राह्मण महिलाएं भरनी शैली और कायस्थ महिलाएं काचनी शैली की पेंटिंग करती रही हैं.</strong></p>



<p>उच्च जातियों को यह बर्दाश्त नहीं था कि नीची जातियों की महिलाएं देवी-देवताओं और पौराणिक आख्यानों का चित्रण करें. फिर इसका जो निदान निकला <strong>उससे गोदना शैली प्रतिष्ठापित हुई. सच कहें तो जातीय विभेद के कारण मधुबनी पेंटिंग की एक नई गोदना शैली का जन्म हुआ और इसके साथ ही यह तथाकथित अस्पृश्य जातियों की मधुबनी कला से जुड़ने की तमन्ना पूरी करने का एक सशक्त माध्यम भी बना. लेखक ने विभिन्न अध्याय में इसकी उत्पत्ति और विकास को अपने तरीके से बताने की सफल कोशिश की है. गोदना शैली में काले रंग की प्रधानता होती है और देवी देवता, तंत्र, पौराणिक गाथाओं की जगह प्रकृति, सामुदायिक नायक, लोक देवता आदि पर केंद्रित तस्वीरें तैयार की जाती हैं.</strong></p>



<p>इस पुस्तक में दुलारी देवी, शांति देवी और शिवन पासवान जी पर केंद्रित दो अध्याय हैं. शांति देवी और शिवन पासवान दंपति हैं. इन दोनों के साथ ही दुलारी देवी की भी जीवन गाथा मधुबनी पेंटिंग के साथ जुड़ी जातीय विभेद जैसी विद्रूपता और विसंगतियों का प्रकटीकरण है तो साथ ही जातीय सौहार्द्र और सामाजिक समरसता की भी गाथा है. लेकिन इसे देखने के लिए आपको अपना पूर्वाग्रहपूर्ण नजरिया बदलना होगा. और इस सौहार्द्र का भी इस्तेकबाल करने की हिम्मत जुटानी होगी.</p>



<p>दुलारी देवी जाति की मल्लाह हैं. मत्स्य आखेट और खेतों में मेहनत &#8211; मजदूरी जीवन &#8211; यापन का साधन रहा. व्यक्ति प्रतिकूलताओं से लड़कर कैसे जीवन की पथरीली राह को निष्कंटक बनाता है, दुलारी देवी का जीवन संघर्ष इसका सबसे सटीक उदाहरण है. लोगों के घरों झाड़ू-पोछा, बर्तन-वासन, चूल्हा-चौका से लेकर खेतों में रोपनी-कटनी और मेहनत-मजदूरी सब कुछ किया. लेकिन <strong>आंखों के सामने तो बस मधुबनी पेंटिंग बना रही महिलाओं की छवि नाचती थी. दिग्गज कलाकार महासुन्दरी देवी और कर्पूरी देवी आपस में जेठानी देवरानी थीं. उनके यहां दुलारी काम करने जातीं तो दोनों को पेंटिंग करते देखतीं. इनकी आंखों में एक सपना पलने लगा. मधुबनी पेंटिंग सीखने का, चित्रित करने का. लेकिन कहें तो कहें कैसे. कर्पूरी देवी और महासुन्दरी देवी, दोनों ने इनके सपनों को भांप लिया और मार्गदर्शन भी किया. दुलारी पर अपना खूब स्नेह लुटाया. आगे सफलता की कहानी तो असंभव को संभव बनने और बनाने की ही कहानी है जिसे हर किसी को अवश्य ही पढ़ना चाहिए.</strong></p>



<p>शांति देवी और शिवन पासवान दुसाध जाति के हैं. दोनों पति पत्नी हैं. यहां उनकी जाति का जिक्र करने का एकमात्र मकसद जाति विशेष का होने की वजह से उनको हुई परेशानियों की ओर आपका ध्यान इंगित करवाना है. शांति जी बाल्यकाल से कुशाग्र बुद्धि थीं. उनको पढ़ने की काफी ललक थी. बड़ी जिद के बाद इनकी मां उन्हें स्कूल भेजने को तैयार तो हुईं लेकिन स्कूल में इनकी पढ़ाई की राह इतनी आसान नहीं रही. इनसे अछूतों जैसा व्यवहार होता रहा. यहां तक कि प्यास बर्दाश्त न कर पाने के कारण जब इन्होंने एक ब्राह्मण के कुएं से लेकर पानी पी लेने की &#8216;जुर्रत&#8217; की तो न सिर्फ कुएं की उड़ाही करवा दी गई बल्कि इनकी मां की सरेआम पिटाई की गई और उन्हें जुर्माना भी भरना पड़ा.</p>



<p>लेकिन इस जातीय विद्रूपता का एक दूसरा पक्ष भी है जो समरसता का है. बालिका शांति की एक सहेली थी और वह ब्राह्मणी थी. इस ब्राह्मणी सहेली ही इनके पढ़ने लिखने का सपना पूरा करने का माध्यम बनी. कैसे? पुस्तक पढ़ेंगे तो भली भांति जान पाएंगे. जीवन में संघर्ष चलता रहा. शांति देवी को बाद में एक स्कूल में शिक्षिका की नौकरी मिली लेकिन विडंबना देखिए कि वह भी सामाजिक प्रतिरोध के कारण उन्हें नौकरी त्यागना पड़ गया. नर्स की नौकरी मिल रही थी लेकिन किसी कारणवश उसे ज्वाइन नहीं किया. पेंटिंग करने इच्छा बलवती हुई. सीखा भी. लेकिन सब कुछ आसानी से हासिल कहां होता है. पेंटिंग करने तक के लिए भी इन्हें और इनके पति शिवन पासवान को जिन सामाजिक दुश्वारियों से गुजरना पड़ा, उसका लेखक ने बड़ा हृदय स्पर्शी वर्णन किया है. कड़वा है, लेकिन सच है. हम सभी को इससे अवगत होना चाहिए. एक बात और. <strong>शांति देवी और शिवन पासवान को मां सरस्वती ने सुमधुर कंठ प्रदान किया है. दोनों राजा सलहेस की गाथा को जब गाकर प्रस्तुत करते हैं तो आप भाव-विभोर हुए बगैर नहीं रह पाएंगे.</strong></p>



<p>गोदावरी दत्त मधुबनी पेंटिंग की पुरानी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती हैं, वयोवृद्ध हैं और बेहद सम्मानित. विनम्र, सरल और मृदुभाषी इतनी की किसी को भी अपना प्रशंसक बना लें. गोदावरी जी 94 वर्ष की हैं और पुस्तक के लेखक पर स्नेह न्योछावर करती रही हैं. उंगलियां तो अब थोड़ी थक गई हैं लेकिन याददाश्त अभी भी बुलंद हैं. थोड़े दिनों तक मुलाकात न हो तो लेखक को उलाहना के साथ मिलने का बुलावा भेज देती हैं और लेखक उनके आदेश को टाल नहीं पाते और थोड़ी देर के लिए ही सही उनसे मिलने के लिए मधुबनी स्थित उनके गांव में उनके घर के चौखट को लांघ ही आते हैं. लेखक कहते हैं, कैसे न जाऊं? अपने जीवन में मैंने संबंध और स्नेह ही तो उपार्जित किया है. सोचिए, तो पलकें गीली हो जाती हैं.</p>



<p><strong>गोदावरी दत्त अंतरराष्ट्रीय ख्याति की कलाकार हैं और देश विदेश में न जाने कितने कला गुण ग्राहकों के संग्रह को इनकी पेंटिंग समृद्ध कर रही होंगी. जगदम्बा देवी, सीता देवी, गंगा देवी, महासुन्दरी देवी और बौआ देवी मधुबनी पेंटिंग कलाकारों की उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती हैं जिन्होंने इस कला को सतह से सातवें आसमान तक के सफर की सारथी रहीं.</strong> इस कला को अपनी लगन, मेहनत और कल्पनाशीलता से व्यापक फलक प्रदान करने की सहभागी रहीं. देश विदेश में इस कला और अपनी कलाकृति को पहुंचाया. लोगों का प्यार और सम्मान पाया और नई पीढ़ी के कलाकारों की प्रेरणा स्रोत बनीं. उन्होंने तब संघर्ष किया जब न कोई साधन था और न कोई सहारा. आज नई पीढ़ी के कलाकारों को कम से कम वह संघर्ष तो नहीं करना पड़ रहा है. वैसे जीवन संघर्ष के बगैर भी होता है क्या? यह तो जीवन का हमसाया है. जब तक जीवन है तब तक संघर्ष है. हर पल, हर कदम. लेखन ने तमाम कलाकारों के जीवन संघर्ष के एक एक पहलू को इस पुस्तक में छूने और कुरेदने का प्रयास किया है. इसमें उन्होंने कितनी सफलता पाई है यह तो पुस्तक के पाठक तय करेंगे.</p>



<p><strong>बिहार का एक और बहुचर्चित और लोकप्रिय कला है टिकुली आर्ट. बिहार में इसके कई नामी गिरामी कलाकार हुए हैं. इनमें से ही एक अशोक कुमार विश्वास हैं. इन्होंने न सिर्फ कला को समृद्ध किया है बल्कि कलाकारों की नई पौध का भी पोषण किया है. इस साल 2024 में ही अशोक कुमार विश्वास को पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है. </strong>जीवन के इक्यावन साल इस कला को समर्पित कर चुके हैं. बारह हजार से ज्यादा लोगों, ज्यादातर महिलाओं, को इस कला का प्रशिक्षण दे चुके अशोक कुमार विश्वास सही मायने में महिला सशक्तिकरण के सूत्रधार की भूमिका निभाई है. इस पुस्तक के लेखक ने अशोक कुमार विश्वास के बारे में बहुत ही सटीक टिप्पणी की है कि टिकुली कला इनकी जीवन दृष्टि बन गई है और कला की पूर्णता इनका पैशन.</p>



<p>बिहार के एक दिग्गज कलाकार हैं ब्रह्मदेव राम पंडित. स्टूडियो पॉटरी में एक ख्यातनाम. मूलतः बिहार के नवादा जिले से ताल्लुक रखते हैं. पिता और दादा गांव में कुंभकारी करते रहे और इन्होंने जेपी के सोखोदेवरा आश्रम से जुड़कर खानापुर, बेलगांव के विलेज पॉटरी इंस्टीट्यूट जाने और वहां अपनी कला को परिमार्जित करने का अवसर पाया और फिर पीछे मुड़ने की कभी नौबत नहीं आई. देश-विदेश में आर्ट शो, वर्क शॉप करते रहे. अपनी कला से कला संग्राहकों की नजर में कुछ इस तरह बस गए कि हमेशा के लिए न सिर्फ उनके कलेक्शन में बल्कि उनके दिलों में भी अपनी जगह बना ली. आज मुंबई में पत्नी, पुत्र और पुत्र-वधु के साथ पौत्र भी स्टूडियो पॉटरी में अपनी पहचान बना चुके हैं. पुत्र और पुत्र-वधु को विदेशों में सीखने का मौका मिला. मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज विमानपत्तन के टर्मिनल टू पर इनका आर्ट इंस्टालेशन इतिहास रचने वाला सृजन है.</p>



<p>ब्रह्मदेव जी कला जगत में पंडित जी के नाम से जाने जाते हैं. पंडित जी का जीवन संघर्ष जन-सामान्य के लिए किसी प्रेरक गाथा से कम नहीं. संघर्ष की पूरी कहानी तो आप पुस्तक पढ़कर ही आप जान पाएंगे. <strong>क्या आप &#8216;बावन बूटी&#8217; कला से परिचित हैं? ज्यादातर लोगों को इसकी जानकारी नहीं होगी. यह बिहार में फली फूली कला है फिर भी पता नहीं क्यों मुझे लगता है कि बिहारवासियों को भी पता नहीं इसकी कोई जानकारी होगी भी या नहीं. अगर इस कला के बारे में नहीं सुना है तो आप कपिल देव प्रसाद को भी नहीं जानते होंगे. यकीनन. और अगर आपने &#8216;बावन बूटी&#8217; कला के बारे में सुन रखा होगा तो मुझे पक्का विश्वास है कि आप कपिल देव प्रसाद के नाम से अवश्य परिचित होंगे. दोनों एक दूसरे के पर्याय रहे हैं.</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="767" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/bawan-buti-saree-history-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-85319" style="width:475px;height:auto" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2024/07/bawan-buti-saree-history-scaled.jpg 767w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/bawan-buti-saree-history-487x650.jpg 487w, https://www.patnanow.com/assets/2024/07/bawan-buti-saree-history-1151x1536.jpg 1151w" sizes="auto, (max-width: 767px) 100vw, 767px" /></figure>



<p>दरअसल <strong>&#8216;बावन बूटी&#8217; बुनकरी कला है और नालंदा जिला का बासवन बिगहा इसका केंद्र हुआ करता था. बौद्ध देशों में &#8216;बावन बूटी&#8217; वस्त्रों की बेहद मांग थी. &#8216;बावन बूटी&#8217; बुनकरी कला ने तमाम उतार चढ़ाव देखे हैं. आज इसकी मांग पुनः बढ़ रही है लेकिन संरक्षण के अभाव में यह कला दम तोड़ रही है. इस कला को वैश्विक पहचान दिलाने वाले कपिलदेव प्रसाद भी आजीवन संघर्ष ही करते रह गए और आखिरकार इसी साल मार्च में पटना के एक अस्पताल में परलोक सिधार गए. किसी ने &#8216;बावन बूटी&#8217; बुनकरी कला की सुधि नहीं ली. &#8216;बावन बूटी&#8217; बुनकरी कला के उत्थान-पतन की कहानी का लेखक ने जितना बेहतरीन वर्णन किया है, आप पढ़ेंगे तो आपका जिज्ञासु मन इस कला के बारे जानने को और भी अधीर हो उठेगा.</strong></p>



<p>प्रो. श्याम शर्मा की मूल पहचान तो एक छापा कलाकार और पटना कला महाविद्यालय के प्राध्यापक और प्राचार्य की रही है लेकिन वास्तव में प्रोफेसर साहब बहुआयामी प्रतिभा संपन्न कलाकार हैं. चित्र, रेखांकन, मूर्तिकला, रंगमंच, साहित्य सृजन हर विधा में सिद्धहस्त और निष्णात शख्सियत. इस पुस्तक के जरिए उनकी जीवन यात्रा से गुजरना आपके लिए बेहद रोचक और प्रेरक रहेगा. श्याम शर्मा जी श्याम की ही भूमि से ताल्लुक रखते हैं. जन्म से बृजवासी हैं. मथुरा में जन्म हुआ. लेकिन कर्मक्षेत्र मगध की भूमि रही. आज शर्मा जी जीवन के आठवें दशक को पार कर नवमें दशक के सफर पर हैं और दैव योग से ऊर्जा से ओत प्रोत और सक्रिय हैं, यह कला जगत के लिए हर्ष की बात है.</p>



<p><strong>बिहार कला समृद्ध सूबा है. और मिथिला कला समृद्ध अंचल. मधुबनी पेंटिंग से इतर भी कई कलाएं हैं जिनमें अपार संभावनाएं हैं. अंग प्रदेश की मंजूषा पेंटिंग, मिथिला की सिक्की कला, सुजनी कला, पेपरमेशी कला, बटन कला और भी कई कलाएं. सुभद्रा देवी पेपरमेशी कला की सशक्त हस्ताक्षर हैं जिन्हें पद्मश्री प्राप्त हो चुका है. कहते हैं, जिद के आगे जीत है. सुभद्रा देवी ने भी जिद ठान लिया था कि बचपन में मां से सीखी कला को वाह आगे ले जाएंगी. उसे जीवन यापन का जरिया बनाएंगी. इस जिद ने उनके हुनर को परिमार्जित किया और उनकी कृतियों से कीर्ति भी उत्तरोत्तर बढ़ती चली गई. इतनी की भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया.</strong></p>



<p>और अंत में बात उपेंद्र महारथी की. पुस्तक में इनका उल्लेख प्रथम अध्याय में ही है. मैं इन्हें नमन कर अपनी बात समाप्त करूंगा. मुमकिन है <strong>उपेंद्र महारथी के नाम से कई लोग परिचित हों लेकिन उनके नाम से परिचित रहने वाले भी उनके जीवन से परिचित होंगे, मुझे ऐसा नहीं लगता. दरअसल लोग उन्हें और उनके कामों को जान पाएं, इसकी कोई सार्थक कोशिश ही नहीं हुई है. उपेंद्र महारथी जन्म से उड़ीसा प्रांत के थे. हालांकि जब से वह पटना शहर से जुड़े हैं तब बंगाल से तो हम अलग हो चुके थे लेकिन उन दिनों उड़ीसा और बिहार एक ही प्रांत था. बात 1936 से पूर्व की है. 1931 में कलकत्ता के स्कूल ऑफ आर्ट्स से पांच वर्षीय शिक्षा प्राप्त कर प्रथम श्रेणी में उपाधि प्राप्त की और स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े.</strong></p>



<p>1932 में महारथी पटना आए और यहां की सरजमीं उन्हें इतनी रास आई कि फिर यहीं के होकर रह गए. तब लहेरियासराय (दरभंगा) का पुस्तक भंडार बिहार में साहित्यिक गतिविधियों का केंद्र हुआ करता था. बतौर चित्रकार वहां से जुड़े और फिर तो आगे जो हुआ, जो हासिल किया वह सब कला इतिहास के पन्नों पर दर्ज है और उसकी एक झलक आपको यहां उल्लेखित पुस्तक में भी मिल जाएगी. उनके नाम पर पटना में उपेंद्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान स्थापित है. सुखद संयोग है कि पुस्तक के लेखक उक्त संस्थान की बतौर निदेशक लंबी अवधि तक सेवा की है साथ ही कला और कलाकार के प्रति अपनी संवेदना और सरोकार को जाग्रत करने में सफलता पाई है.</p>



<p><strong>विमलेन्दु सिंह</strong> के फेसबुक वाल से साभार </p>
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