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	<title>कला और साहित्य &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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	<title>कला और साहित्य &#8211; Patna Now &#8211; Local News Patna and Bihar | Breaking News Patna | Patna News</title>
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		<title>बच्चों की पेंटिंग्स में दिखी भविष्य के समृद्ध और स्वच्छ भारत की सुंदर झलक</title>
		<link>https://www.patnanow.com/painting-competition/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 03 May 2026 17:40:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना।। &#8216;हरिसागर सृजन संगम द्वारा रविवार को पटना के त्रिपोलिया स्थित कोयरी टोला में &#8216;सृजन चित्रकला प्रतियोगिता&#8217; का आयोजन किया गया. कला और संस्कृति के विकास के माध्यम से नई पीढ़ी को बेहतर नागरिक बनाने के उ‌द्देश्य से समर्पित इस संस्था ने &#8216;विकसित भारत&#8217; की थीम पर इस प्रतियोगिता का सफल संचालन किया. इस प्रतियोगिता में कक्षा 1 से 8 तक के लगभग 125 बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. बच्चों की कल्पनाशीलता को नई उड़ान देने के लिए प्रतियोगिता को दो श्रेणियों में बांटा गया था. प्रथम श्रेणी (कक्षा 1 से 5): इस वर्ग के लिए विषय हमारा पर्यावरण&#8217; रखा गया था‌. द्वितीय श्रेणी (कक्षा 6 से 8): इस वर्ग के छात्र-छात्राओं ने स्वच्छ भारत अभियान&#8217; विषय पर अपनी कला का प्रदर्शन किया. प्रतियोगिता के अंत में कुल 14 पुरस्कार वितरित किए गए, जिनमें दोनों श्रेणियों के शीर्ष तीन विजेता और चार-चार सांत्वना पुरस्कार शामिल थे. विजेताओं को ट्राफी, पदक, नकद और पुस्तकें देकर सम्मानित किया गया. आयोजन के संयोजक जयप्रकाश दास ने बताया कि इस प्रतियोगिता का मुख्य विचार अगली पीढ़ी के माध्यम से &#8216;विकसित भारत&#8217; की भावना को जागृत करना और उनकी कल्पना शक्ति को विकसित करना है. उन्होंने कहा कि बच्चों द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स में भविष्य के समृद्ध और स्वच्छ भारत की एक सुंदर झलक देखने को मिली‌. pncb]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पटना।। &#8216;हरिसागर सृजन संगम द्वारा रविवार को पटना के त्रिपोलिया स्थित कोयरी टोला में &#8216;सृजन चित्रकला प्रतियोगिता&#8217; का आयोजन किया गया. कला और संस्कृति के विकास के माध्यम से नई पीढ़ी को बेहतर नागरिक बनाने के उ‌द्देश्य से समर्पित इस संस्था ने &#8216;विकसित भारत&#8217; की थीम पर इस प्रतियोगिता का सफल संचालन किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="804" height="588" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1000899969.jpg" alt="" class="wp-image-96562" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1000899969.jpg 804w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1000899969-650x475.jpg 650w" sizes="(max-width: 804px) 100vw, 804px" /></figure>



<p>इस प्रतियोगिता में कक्षा 1 से 8 तक के लगभग 125 बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. बच्चों की कल्पनाशीलता को नई उड़ान देने के लिए प्रतियोगिता को दो श्रेणियों में बांटा गया था.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1024" height="558" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/IMG_20260505_150811-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96563" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/IMG_20260505_150811-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/IMG_20260505_150811-650x354.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>प्रथम श्रेणी (कक्षा 1 से 5): इस वर्ग के लिए विषय हमारा पर्यावरण&#8217; रखा गया था‌.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1024" height="558" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1000899968-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96564" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1000899968-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1000899968-650x354.jpg 650w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>द्वितीय श्रेणी (कक्षा 6 से 8): इस वर्ग के छात्र-छात्राओं ने स्वच्छ भारत अभियान&#8217; विषय पर अपनी कला का प्रदर्शन किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="900" height="932" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1000899965.jpg" alt="" class="wp-image-96565" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1000899965.jpg 900w, https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1000899965-628x650.jpg 628w" sizes="auto, (max-width: 900px) 100vw, 900px" /></figure>



<p>प्रतियोगिता के अंत में कुल 14 पुरस्कार वितरित किए गए, जिनमें दोनों श्रेणियों के शीर्ष तीन विजेता और चार-चार सांत्वना पुरस्कार शामिल थे. विजेताओं को ट्राफी, पदक, नकद और पुस्तकें देकर सम्मानित किया गया.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="602" height="436" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/05/1000899977.jpg" alt="" class="wp-image-96570"/></figure>



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<p>आयोजन के संयोजक जयप्रकाश दास ने बताया कि इस प्रतियोगिता का मुख्य विचार अगली पीढ़ी के माध्यम से &#8216;विकसित भारत&#8217; की भावना को जागृत करना और उनकी कल्पना शक्ति को विकसित करना है. उन्होंने कहा कि बच्चों द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स में भविष्य के समृद्ध और स्वच्छ भारत की एक सुंदर झलक देखने को मिली‌.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
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		<item>
		<title>&#8216;बापू टावर दुनिया का सबसे प्रभावशाली गांधी म्यूजियम&#8217;</title>
		<link>https://www.patnanow.com/bapu-tower-pahuche-jawed-akhtar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Apr 2026 16:26:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
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		<category><![CDATA[Jawed Akhtar]]></category>
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		<category><![CDATA[patna news]]></category>
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					<description><![CDATA[गीतकार जावेद अख्तर ने किया बापू टावर का भ्रमण- ऑडियो-विजुअल, म्यूरल और लघु फिल्मों से सजीव हुई स्वतंत्रता संग्राम की झलक पटना, 07 अप्रैल।। प्रसिद्ध गीतकार, कवि और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने मंगलवार को बापू टावर संग्रहालय का अवलोकन किया.इस अवसर पर उन्होंने संग्रहालय की आधुनिकता और गांधी जी के विचारों के जीवंत प्रदर्शन की प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक संग्रहालय विश्व का सबसे प्रभावशाली संग्रहालय है. बापू टावर संग्रहालय पहुंचने पर संस्थान के निदेशक विनय कुमार ने जावेद अख्तर का हार्दिक स्वागत किया.निदेशक ने उन्हें पुष्पगुच्छ, शॉल तथा स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका अभिनंदन किया. साथ ही, उन्होंने अख्तर को बापू टावर के निर्माण, इसके उद्देश्यों तथा यहां मौजूद विभिन्न प्रदर्शों के बारे में विस्तार से जानकारी दी. दुनिया में ऐसा प्रभावशाली म्यूजियम नहीं देखा: अख्तरसंग्रहालय भ्रमण के दौरान जावेद अख्तर ने संग्रहालय की विभिन्न दीर्घाओं का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने रैम्प, ऐतिहासिक चित्रों, म्यूरल्स, ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियों तथा लघु फिल्मों के माध्यम से महात्मा गांधी के जीवन, उनके आदर्शों और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों को गहराई से जाना और महसूस किया. संग्रहालय की भव्यता और तकनीक से प्रभावित होकर बापू टावर की प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि “मैं पूरी दुनिया घूम चुका हूं और अनेक प्रसिद्ध म्यूजियम देखे हैं, लेकिन गांधी जी की स्मृतियों और विचारों से जुड़ा ऐसा प्रभावशाली, जीवंत और आधुनिक संग्रहालय कहीं नहीं देखा. बापू टावर वाकई बहुत खास है. यहां आने का मौका मिला, यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है। मुझे गांधी जी के बारे में बहुत कुछ नया [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>गीतकार जावेद अख्तर ने किया बापू टावर का भ्रमण- ऑडियो-विजुअल, म्यूरल और लघु फिल्मों से सजीव हुई स्वतंत्रता संग्राम की झलक</strong></p>



<p>पटना, 07 अप्रैल।। प्रसिद्ध गीतकार, कवि और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने मंगलवार को बापू टावर संग्रहालय का अवलोकन किया.इस अवसर पर उन्होंने संग्रहालय की आधुनिकता और गांधी जी के विचारों के जीवंत प्रदर्शन की प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक संग्रहालय विश्व का सबसे प्रभावशाली संग्रहालय है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="682" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/04/pnc-jawed-Akhtar-visits-bapu-tower-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96102" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/04/pnc-jawed-Akhtar-visits-bapu-tower-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/04/pnc-jawed-Akhtar-visits-bapu-tower-650x433.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>बापू टावर संग्रहालय पहुंचने पर संस्थान के निदेशक विनय कुमार ने जावेद अख्तर का हार्दिक स्वागत किया.निदेशक ने उन्हें पुष्पगुच्छ, शॉल तथा स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका अभिनंदन किया. साथ ही, उन्होंने अख्तर को बापू टावर के निर्माण, इसके उद्देश्यों तथा यहां मौजूद विभिन्न प्रदर्शों के बारे में विस्तार से जानकारी दी.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="682" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/04/pnc-bapu-tower-pahuche-jawed-Akhtar-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96104" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/04/pnc-bapu-tower-pahuche-jawed-Akhtar-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/04/pnc-bapu-tower-pahuche-jawed-Akhtar-650x433.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><strong>दुनिया में ऐसा प्रभावशाली म्यूजियम नहीं देखा: अख्तर</strong><br>संग्रहालय भ्रमण के दौरान जावेद अख्तर ने संग्रहालय की विभिन्न दीर्घाओं का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने रैम्प, ऐतिहासिक चित्रों, म्यूरल्स, ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियों तथा लघु फिल्मों के माध्यम से महात्मा गांधी के जीवन, उनके आदर्शों और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों को गहराई से जाना और महसूस किया. संग्रहालय की भव्यता और तकनीक से प्रभावित होकर बापू टावर की प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि “मैं पूरी दुनिया घूम चुका हूं और अनेक प्रसिद्ध म्यूजियम देखे हैं, लेकिन गांधी जी की स्मृतियों और विचारों से जुड़ा ऐसा प्रभावशाली, जीवंत और आधुनिक संग्रहालय कहीं नहीं देखा. बापू टावर वाकई बहुत खास है. यहां आने का मौका मिला, यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है। मुझे गांधी जी के बारे में बहुत कुछ नया सीखने को मिला. मैं फिर से बापू टावर जरूर आऊंगा.”</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="688" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/04/pnc-jawed-Akhtar-in-bapu-tower-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96103" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/04/pnc-jawed-Akhtar-in-bapu-tower-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/04/pnc-jawed-Akhtar-in-bapu-tower-650x437.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><strong>संग्रहालय में गांधी जी के जीवन और विचारों का आधुनिक प्रदर्शन</strong><br>भवन निर्माण विभाग की ओर से पटना के गर्दनीबाग में निर्मित बापू टावर में गांधीजी की विरासत को ऑडियो-विजुअल्स, म्यूरल, मूर्तियों एवं लघु फिल्म के माध्यम से सजीव ढंग से दर्शाया गया है. महात्मा गांधी की जीवन यात्रा, सिद्धांतों और बिहार से उनके जुड़ाव को आधुनिक तकनीक के माध्यम से संग्रहालय में जीवंत रूप से प्रदर्शित किया गया है. बापू टावर न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र है बल्कि युवाओं और छात्रों के लिए शिक्षा का केंद्र भी है. यह संग्रहालय पर्यटन को नई ऊंचाई प्रदान कर रहा है. इस अवसर पर बापू टावर के पदाधिकारियों सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बापू टावर और बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय विश्वकर्मा अवॉर्ड्स के लिए चयनित</title>
		<link>https://www.patnanow.com/vishwakarma-awards-to-bapu-tower-and-buddha-smriti-museum/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 31 Mar 2026 09:38:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[CITY/OFFICE]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
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		<category><![CDATA[Buddha samyak darshan museum]]></category>
		<category><![CDATA[vishwakarma awards]]></category>
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					<description><![CDATA[भवन निर्माण विभाग की बड़ी उपलब्धि 17वें CIDC विश्वकर्मा अवॉर्ड्स- 2026 के लिए चयन पटना, 31 मार्च, 2026: भवन निर्माण विभाग द्वारा निर्मित बापू टावर, पटना और बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय एवं स्मृति स्तूप, वैशाली को 17वीं CIDC विश्वकर्मा अवॉर्ड्स- 2026 के लिए चयन किया गया है। यह चयन Best Construction Projects श्रेणी में हुआ है। यह विभाग की उत्कृष्ट निर्माण गुणवत्ता, इंजीनियरिंग कौशल और सांस्कृतिक महत्व की परियोजनाओं को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने वाली उपलब्धि है. भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, &#8220;यह विभाग के लिए अत्यंत गौरव का क्षण है कि बापू टावर और स्मृति स्तूप विश्वकर्मा अवॉर्ड के लिए चयनित हुई है.&#8221; यह उपलब्धि इंजीनियर्स, आर्किटेक्ट्स एवं निर्माण टीम की मेहनत, तकनीकी उत्कृष्टता एवं समर्पण का परिणाम है. उन्होंने कहा कि भवन निर्माण विभाग वास्तुकला व भवन निर्माण शैली में नित नए कीर्तिमान गढ़ देश-दुनिया के समक्ष बिहार की नई पहचान बना रहा है. पहले भी विभाग की महत्वपूर्ण निर्माण सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र, पटना एवं अंजुमन इस्लामिया हॉल को विश्वकर्मा अवॉर्ड मिल चुका है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सतत प्रयास रहा है कि बिहार अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास करे. विश्वकर्मा अवॉर्ड के लिए बापू टावर एवं स्मृति स्तूप का&#160;&#160;चयन उनकी दूरदर्शिता एवं कर्मनिष्ठा का उत्कृष्ट प्रमाण है. इन परियोजनाओं के माध्यम से बिहार के पर्यटन एवं सांस्कृतिक गौरव को नई ऊंचाई मिल रहा है. पटना के गर्दनीबाग में महात्मा गांधी को समर्पित बापू टावर में गांधीजी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>भवन निर्माण विभाग की बड़ी उपलब्धि</strong></p>



<p><strong>17वें CIDC विश्वकर्मा अवॉर्ड्स- 2026 के लिए चयन </strong></p>



<p>पटना, 31 मार्च, 2026: भवन निर्माण विभाग द्वारा निर्मित बापू टावर, पटना और बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय एवं स्मृति स्तूप, वैशाली को 17वीं CIDC विश्वकर्मा अवॉर्ड्स- 2026 के लिए चयन किया गया है। यह चयन Best Construction Projects श्रेणी में हुआ है। यह विभाग की उत्कृष्ट निर्माण गुणवत्ता, इंजीनियरिंग कौशल और सांस्कृतिक महत्व की परियोजनाओं को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने वाली उपलब्धि है.</p>



<p>भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, &#8220;यह विभाग के लिए अत्यंत गौरव का क्षण है कि बापू टावर और स्मृति स्तूप विश्वकर्मा अवॉर्ड के लिए चयनित हुई है.&#8221; यह उपलब्धि इंजीनियर्स, आर्किटेक्ट्स एवं निर्माण टीम की मेहनत, तकनीकी उत्कृष्टता एवं समर्पण का परिणाम है.</p>



<p>उन्होंने कहा कि भवन निर्माण विभाग वास्तुकला व भवन निर्माण शैली में नित नए कीर्तिमान गढ़ देश-दुनिया के समक्ष बिहार की नई पहचान बना रहा है. पहले भी विभाग की महत्वपूर्ण निर्माण सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र, पटना एवं अंजुमन इस्लामिया हॉल को विश्वकर्मा अवॉर्ड मिल चुका है.</p>



<p>मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सतत प्रयास रहा है कि बिहार अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास करे. विश्वकर्मा अवॉर्ड के लिए बापू टावर एवं स्मृति स्तूप का&nbsp;&nbsp;चयन उनकी दूरदर्शिता एवं कर्मनिष्ठा का उत्कृष्ट प्रमाण है. इन परियोजनाओं के माध्यम से बिहार के पर्यटन एवं सांस्कृतिक गौरव को नई ऊंचाई मिल रहा है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/bapu-tower-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96054" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/bapu-tower-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/bapu-tower-650x366.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/bapu-tower-1536x864.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/bapu-tower-2048x1152.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>पटना के गर्दनीबाग में महात्मा गांधी को समर्पित बापू टावर में गांधीजी की विरासत को ऑडियो-विजुअल्स, म्यूरल, मूर्तियों एवं लघु फिल्म के माध्यम से सजीव ढंग से दर्शाया गया है. महात्मा गांधी की जीवन यात्रा, सिद्धांतों और बिहार से उनके जुड़ाव को आधुनिक तकनीक के माध्यम से संग्रहालय में जीवंत रूप से प्रदर्शित किया गया है. बापू टावर न केवल पर्यटकों का आकर्षण है बल्कि युवाओं और छात्रों के लिए शिक्षा का केंद्र भी है. यह संग्रहालय पर्यटन को नई उंचाई प्रदान कर रहा है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/buddh-samyak-darshan-museum-vaishali-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-96055" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/buddh-samyak-darshan-museum-vaishali-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/buddh-samyak-darshan-museum-vaishali-650x488.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>वैशाली में भगवान बुद्ध के स्मृति अवशेष को सुरक्षित रखने एवं बौद्ध धर्मावलंबियों के दर्शन हेतु 72 एकड़ भूखण्ड में निर्मित बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय एवं स्मृति स्तूप भवन निर्माण विभाग की एक शानदार उपलब्धि है. वैशाली की प्राचीन बौद्ध विरासत को संरक्षित एवं प्रचारित करने वाला यह भव्य स्तूप देश-विदेश के बौद्ध तीर्थयात्रियों के लिए एक नया केंद्र बन गया है.&nbsp; राजस्थान के वंशी पहाड़पुर की बलुआ पत्थरों से यह स्तूप निर्मित है. भूकंप-रोधक क्षमता को ध्यान में रखते हुए स्मृति स्तूप को भूकंपरोधी बनाने में कई मॉडर्न तकनीकों का उपयोग किया गया है. स्तूप की मूलभूत संरचना हजारों वर्षों तक सुरक्षित रहेंगी. यहां संग्रहालय ब्लॉक, लाइब्रेरी, विजिटर सेंटर, एम्फीथिएटर और अन्य आधुनिक सुविधाएं भी शामिल हैं. जुलाई 2025 में उद्घाटित यह परियोजना पर्यटन विकास और बौद्ध संस्कृतिक को बढ़ावा दे रही है.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>बिहार दिवस में दिखेगी इकोटूरिज्म की झलक</title>
		<link>https://www.patnanow.com/bihar-diwas-2026/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pnc Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 22 Mar 2026 04:26:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[Bihar diwas]]></category>
		<category><![CDATA[bihar news]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना।। आज बिहार दिवस है. इस मौके पर पटना में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है. इस बार के बिहार दिवस में पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के उदेश्य से बेहद खास है. पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से खास तरह के स्टॉल लगाए गए हैं. इस स्टॉल को खासतौर से जंगल थीम पर तैयार किया गया है. प्रवेश द्वार पर पहाड़नुमा आकृति बनाई गई है, जिससे अंदर प्रवेश करते ही लोगों को जंगल जैसा अनुभव होगा. पूरे परिसर को हरियाली, पेड़-पौधों, वन्य जीवों और प्राकृतिक वातावरण के मॉडल से सजाया गया है, जो लोगों को प्रकृति के करीब होने का एहसास कराएगा. इस प्रदर्शनी में बिहार के विभिन्न ईको टूरिज्म स्थलों का समेकित रूप प्रस्तुत किया गया है. अलग-अलग मॉडलों के माध्यम से राज्य के पहाड़, जंगल, झरने और प्राकृतिक स्थलों की झलक एक ही स्थान पर देखने को मिल रही है. यह मॉडल न केवल लोगों को पर्यटन स्थलों की जानकारी दे रहे हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक भी कर रहे हैं. प्रदर्शनी में कई जागरूकता आधारित मॉडल भी प्रदर्शित किए गए हैं. इनमें वायु प्रदूषण मुक्त बिहार, जल-जीवन-हरियाली मिशन और प्लास्टिक बैन से संबंधित मॉडल प्रमुख हैं. वायु प्रदूषण मुक्त बिहार के मॉडल में हरियाली, स्वच्छ वातावरण और प्रदूषण रहित परिवहन के साधनों को दर्शाया गया है. वहीं जल-जीवन-हरियाली मिशन के मॉडल में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और पौधारोपण को दिखाया गया है. प्लास्टिक बैन मॉडल के माध्यम से लोगों को कपड़े और जूट के थैलों का [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<ul class="wp-block-list">
<li><strong>जंगल थीम पर बने प्रवेश द्वार से हरियाली का संदेश</strong></li>



<li><strong>⁠ईको टूरिज्म स्थलों की झलक</strong></li>
</ul>



<p>पटना।। आज बिहार दिवस है. इस मौके पर पटना में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है. इस बार के बिहार दिवस में पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के उदेश्य से बेहद खास है. पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से खास तरह के स्टॉल लगाए गए हैं. इस स्टॉल को खासतौर से जंगल थीम पर तैयार किया गया है. प्रवेश द्वार पर पहाड़नुमा आकृति बनाई गई है, जिससे अंदर प्रवेश करते ही लोगों को जंगल जैसा अनुभव होगा. पूरे परिसर को हरियाली, पेड़-पौधों, वन्य जीवों और प्राकृतिक वातावरण के मॉडल से सजाया गया है, जो लोगों को प्रकृति के करीब होने का एहसास कराएगा.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="366" src="https://www.patnanow.com/assets/2017/03/PNC-BIHAR-DIWAS-650x366.jpg" alt="" class="wp-image-15433" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2017/03/PNC-BIHAR-DIWAS.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2017/03/PNC-BIHAR-DIWAS-350x197.jpg 350w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>इस प्रदर्शनी में बिहार के विभिन्न ईको टूरिज्म स्थलों का समेकित रूप प्रस्तुत किया गया है. अलग-अलग मॉडलों के माध्यम से राज्य के पहाड़, जंगल, झरने और प्राकृतिक स्थलों की झलक एक ही स्थान पर देखने को मिल रही है. यह मॉडल न केवल लोगों को पर्यटन स्थलों की जानकारी दे रहे हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक भी कर रहे हैं.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="948" height="556" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/pnc-bihar-diwas-karyakram.jpg" alt="" class="wp-image-95804" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/pnc-bihar-diwas-karyakram.jpg 948w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/pnc-bihar-diwas-karyakram-650x381.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 948px) 100vw, 948px" /></figure>



<p>प्रदर्शनी में कई जागरूकता आधारित मॉडल भी प्रदर्शित किए गए हैं. इनमें वायु प्रदूषण मुक्त बिहार, जल-जीवन-हरियाली मिशन और प्लास्टिक बैन से संबंधित मॉडल प्रमुख हैं. वायु प्रदूषण मुक्त बिहार के मॉडल में हरियाली, स्वच्छ वातावरण और प्रदूषण रहित परिवहन के साधनों को दर्शाया गया है. वहीं जल-जीवन-हरियाली मिशन के मॉडल में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और पौधारोपण को दिखाया गया है. प्लास्टिक बैन मॉडल के माध्यम से लोगों को कपड़े और जूट के थैलों का उपयोग करने तथा प्लास्टिक का उपयोग बंद करने का संदेश दिया जा रहा है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="466" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/pnc-bihar-diwas-dance-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95805" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/pnc-bihar-diwas-dance-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/pnc-bihar-diwas-dance-650x296.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/pnc-bihar-diwas-dance-1536x699.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>कार्यक्रम के दौरान नुक्कड़ नाटक का भी आयोजन किया जा रहा है. इसके माध्यम से लोगों को हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है. नाटक के जरिए कलाकार पेड़-पौधों की महत्ता, जल संरक्षण और प्लास्टिक के दुष्प्रभाव को सरल और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करेंगे. इस तरह के आयोजन का उद्देश्य लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना और अधिक से अधिक पेड़ लगाने, जल संरक्षण करने तथा प्लास्टिक का उपयोग कम करने के लिए प्रेरित करना है.</p>



<p><strong><em>pncb</em></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>कश्मीर की नींव भी बिहार के सम्राट ने रखी थी !</title>
		<link>https://www.patnanow.com/bold-words-by-kshama-kaul-from-the-stage-of-rajgir/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Mar 2026 05:19:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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		<category><![CDATA[क्षमा कौल]]></category>
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					<description><![CDATA[राजगीर के मंच से क्षमा कौल का इतिहास और वर्तमान पर बेबाक बयान संवाद और लोकतंत्र पर बोलते हुए मंच से छलका कश्मीरी लेखिका का दर्द कश्मीर से विस्थापन का दर्द भी साझा किया, बोलीं &#8211; मातृभूमि छिन जाए तो संवाद खोखला लगता है राजगीर, 16 मार्च (ओ पी पांडेय)। राजगीर में आयोजित नालंदा अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव के एक सत्र में कश्मीरी लेखिका क्षमा कौल ने कश्मीर के इतिहास, लोकतंत्र और विस्थापन के दर्द पर बेहद बेबाक तरीके से अपनी बात रखी। “संवाद और लोकतंत्र” विषय पर चर्चा के दौरान उन्होंने एक ऐतिहासिक तथ्य की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि कश्मीर के श्रीनगर शहर की स्थापना सम्राट अशोक ने की थी, जिनकी राजधानी पाटलिपुत्र यानी आज का पटना था। उन्होंने कहा कि कश्मीर और बिहार का रिश्ता हजारों वर्ष पुराना है। सम्राट अशोक ने अपने पुत्र जालोक को कश्मीर का शासन सौंपा था, जिसने वहां शैव और बौद्ध दोनों परंपराओं को समान सम्मान दिया। उनके अनुसार यह इतिहास में धार्मिक सहिष्णुता और लोकतांत्रिक भावना का एक अद्भुत उदाहरण था, जिसे आज की पीढ़ी लगभग भूल चुकी है। लेखिका ने आदि शंकराचार्य, अभिनवगुप्त और जयंत भट्ट जैसे विद्वानों का उल्लेख करते हुए कश्मीर की गौरवशाली बौद्धिक परंपरा को भी याद किया। उन्होंने कहा कि कभी ज्ञान और दर्शन की भूमि रहा कश्मीर आज विस्थापन और पीड़ा की कहानी बन गया है। लोकतंत्र और संवाद की वर्तमान स्थिति पर बोलते हुए क्षमा कौल का दर्द साफ झलक रहा था। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति से उसकी मातृभूमि और पहचान छिन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>राजगीर के मंच से क्षमा कौल का इतिहास और वर्तमान पर बेबाक बयान</strong></p>



<p><strong>संवाद और लोकतंत्र पर बोलते हुए मंच से छलका कश्मीरी लेखिका का दर्द</strong></p>



<p><strong>कश्मीर से विस्थापन का दर्द भी साझा किया, बोलीं &#8211; मातृभूमि छिन जाए तो संवाद खोखला लगता है</strong></p>



<p>राजगीर, 16 मार्च <strong>(ओ पी पांडेय</strong>)। राजगीर में आयोजित नालंदा अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव के एक सत्र में कश्मीरी लेखिका क्षमा कौल ने कश्मीर के इतिहास, लोकतंत्र और विस्थापन के दर्द पर बेहद बेबाक तरीके से अपनी बात रखी। “संवाद और लोकतंत्र” विषय पर चर्चा के दौरान उन्होंने एक ऐतिहासिक तथ्य की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि कश्मीर के श्रीनगर शहर की स्थापना सम्राट अशोक ने की थी, जिनकी राजधानी पाटलिपुत्र यानी आज का पटना था।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1020" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110586-scaled.png" alt="" class="wp-image-95733" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110586-scaled.png 1020w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110586-647x650.png 647w" sizes="auto, (max-width: 1020px) 100vw, 1020px" /></figure>



<p>उन्होंने कहा कि कश्मीर और बिहार का रिश्ता हजारों वर्ष पुराना है। सम्राट अशोक ने अपने पुत्र जालोक को कश्मीर का शासन सौंपा था, जिसने वहां शैव और बौद्ध दोनों परंपराओं को समान सम्मान दिया। उनके अनुसार यह इतिहास में धार्मिक सहिष्णुता और लोकतांत्रिक भावना का एक अद्भुत उदाहरण था, जिसे आज की पीढ़ी लगभग भूल चुकी है।</p>



<p>लेखिका ने आदि शंकराचार्य, अभिनवगुप्त और जयंत भट्ट जैसे विद्वानों का उल्लेख करते हुए कश्मीर की गौरवशाली बौद्धिक परंपरा को भी याद किया। उन्होंने कहा कि कभी ज्ञान और दर्शन की भूमि रहा कश्मीर आज विस्थापन और पीड़ा की कहानी बन गया है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="768" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110527-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95734" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110527-scaled.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110527-488x650.jpg 488w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110527-1152x1536.jpg 1152w" sizes="auto, (max-width: 768px) 100vw, 768px" /></figure>



<p><br>लोकतंत्र और संवाद की वर्तमान स्थिति पर बोलते हुए क्षमा कौल का दर्द साफ झलक रहा था। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति से उसकी मातृभूमि और पहचान छिन जाती है तो केवल कागजी संवाद से न्याय नहीं मिलता। कश्मीर में हुए नरसंहार और विस्थापन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज कई कश्मीरी अपने ही देश में शरणार्थी की तरह जीवन जीने को मजबूर हैं और उनके दर्द पर राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर बहस तक नहीं हुई।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="768" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110526-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95735" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110526-scaled.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110526-488x650.jpg 488w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110526-1152x1536.jpg 1152w" sizes="auto, (max-width: 768px) 100vw, 768px" /></figure>



<p>इस दौरान उन्होंने बिहार की धरती को नमन करते हुए कहा कि यह भूमि ज्ञान, चिंतन और विमर्श की अनमोल धरोहर रही है। उनके अनुसार बिहारियों में बौद्धिक क्षमता और श्रम दोनों का अद्भुत संगम है।</p>



<p><br>इतिहास के संदर्भ में बताया गया कि सम्राट अशोक (268–232 ईसा पूर्व) के समय मगध साम्राज्य का केंद्र आज का बिहार था। उनकी राजधानी पाटलिपुत्र से संचालित यह विशाल साम्राज्य उत्तर में हिमालय की तराई, पूर्व में बंगाल क्षेत्र, पश्चिम में सोन नदी और दक्षिण में विंध्य पर्वतमाला तक फैला हुआ था। मौर्य काल में चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक के शासन में मगध का विस्तार उत्तर-पश्चिम में हिंदुकुश पर्वतों तक था, जिसमें आज के अफगानिस्तान के काबुल, कंधार और हेरात जैसे क्षेत्र भी शामिल थे।</p>



<p>इतिहासकारों के अनुसार कभी इतना विशाल और प्रभावशाली रहा मगध साम्राज्य आज कई प्रशासनिक हिस्सों में बंट चुका है। समय के साथ बिहार के भूभाग से अलग होकर कई नए राज्य और क्षेत्र बने।</p>



<p><br>मंच से यह भी संदेश दिया गया कि इतिहास के वैभव को केवल खंडहरों में बदलने देना किसी भी समाज के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। आज भी प्राचीन विश्वविद्यालयों और सभ्यताओं के अवशेष मानो अपने गौरव की कहानी सुना रहे हैं, लेकिन उनके पुनरुद्धार और संरक्षण के बजाय अक्सर उन्हें केवल राजनीतिक बहस का विषय बना दिया जाता है।</p>



<p>वक्ताओं ने कहा कि जब तक साहित्य और चिंतन की परंपरा मजबूत नहीं होगी, तब तक इतिहास के गौरव को पुनर्जीवित करना कठिन है। साहित्य में समाज की सोच को बदलने और नई दिशा देने की ताकत होती है, इसलिए इतिहास और संस्कृति को पुनर्स्मरण कराने में साहित्य की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>साहित्यिक महोत्सव में रैप का रंग, स्लो चीता ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध</title>
		<link>https://www.patnanow.com/sahitya-ke-manch-per-rap-ka-jalwa/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Mar 2026 04:14:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
		<category><![CDATA[We Care]]></category>
		<category><![CDATA[अपना शहर]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
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					<description><![CDATA[नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल में स्लो चीता का रैप, संगीत की लय में झूमे दर्शक नालंदा, 16मार्च।(ओ पी पाण्डेय) नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में उस समय माहौल पूरी तरह संगीतमय हो उठा, जब ‘स्लो चीता’ के नाम से मशहूर रैपर चैतन्य शर्मा ने अपनी दमदार प्रस्तुति से मंच पर ऊर्जा की लहर दौड़ा दी। साहित्य के इस प्रतिष्ठित मंच पर रैप संगीत की आधुनिक धुनों ने ऐसा रंग जमाया कि दर्शक देर तक तालियों और उत्साह के साथ झूमते नजर आए। अपनी अनोखी शैली और तेज़ लय वाले रैप के लिए पहचाने जाने वाले चैतन्य शर्मा ने शुरुआत अपने लोकप्रिय गीत “चीता” से की। जैसे ही यह गीत गूंजा, पूरे सभागार में जोश का माहौल बन गया। इसके बाद “ऑल आई नीड” की प्रस्तुति ने दर्शकों को और भी रोमांचित कर दिया। कार्यक्रम के दौरान जब उन्होंने “मिर्जापुर” गीत प्रस्तुत किया, तो पूरा सभागार मानो उनकी लय के साथ थिरकने लगा। दर्शकों ने तालियों और उत्साह के साथ उनका भरपूर स्वागत किया। चैतन्य शर्मा की प्रस्तुति ने यह भी दिखाया कि रैप केवल युवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा अभिव्यक्ति का माध्यम बन चुका है जो हर पीढ़ी को जोड़ने की क्षमता रखता है। उनकी ऊर्जावान परफॉर्मेंस ने कुछ समय के लिए पूरे माहौल को संगीत और लय में डुबो दिया। नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में यह प्रस्तुति साहित्य और आधुनिक संगीत के अद्भुत मेल का उदाहरण बनकर सामने आई, जिसे दर्शकों ने लंबे समय तक यादगार बताया।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल में स्लो चीता का रैप, संगीत की लय में झूमे दर्शक</strong></p>



<p>नालंदा, 16मार्च।(<strong>ओ पी पाण्डेय</strong>) नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में उस समय माहौल पूरी तरह संगीतमय हो उठा, जब ‘स्लो चीता’ के नाम से मशहूर रैपर चैतन्य शर्मा ने अपनी दमदार प्रस्तुति से मंच पर ऊर्जा की लहर दौड़ा दी। साहित्य के इस प्रतिष्ठित मंच पर रैप संगीत की आधुनिक धुनों ने ऐसा रंग जमाया कि दर्शक देर तक तालियों और उत्साह के साथ झूमते नजर आए।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="435" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097308-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95615" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097308-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097308-650x276.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097308-1536x652.jpg 1536w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001097308-2048x870.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>अपनी अनोखी शैली और तेज़ लय वाले रैप के लिए पहचाने जाने वाले चैतन्य शर्मा ने शुरुआत अपने लोकप्रिय गीत “चीता” से की। जैसे ही यह गीत गूंजा, पूरे सभागार में जोश का माहौल बन गया। इसके बाद “ऑल आई नीड” की प्रस्तुति ने दर्शकों को और भी रोमांचित कर दिया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="620" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001112698-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95737" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001112698-scaled.jpg 620w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001112698-393x650.jpg 393w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001112698-930x1536.jpg 930w" sizes="auto, (max-width: 620px) 100vw, 620px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104973-1-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95691" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104973-1-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104973-1-650x488.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>कार्यक्रम के दौरान जब उन्होंने “मिर्जापुर” गीत प्रस्तुत किया, तो पूरा सभागार मानो उनकी लय के साथ थिरकने लगा। दर्शकों ने तालियों और उत्साह के साथ उनका भरपूर स्वागत किया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="700" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001112700-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95738" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001112700-scaled.jpg 700w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001112700-444x650.jpg 444w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001112700-1050x1536.jpg 1050w" sizes="auto, (max-width: 700px) 100vw, 700px" /></figure>



<p>चैतन्य शर्मा की प्रस्तुति ने यह भी दिखाया कि रैप केवल युवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा अभिव्यक्ति का माध्यम बन चुका है जो हर पीढ़ी को जोड़ने की क्षमता रखता है। उनकी ऊर्जावान परफॉर्मेंस ने कुछ समय के लिए पूरे माहौल को संगीत और लय में डुबो दिया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="825" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001112699-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95739" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001112699-scaled.jpg 825w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001112699-524x650.jpg 524w" sizes="auto, (max-width: 825px) 100vw, 825px" /></figure>



<p>नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में यह प्रस्तुति साहित्य और आधुनिक संगीत के अद्भुत मेल का उदाहरण बनकर सामने आई, जिसे दर्शकों ने लंबे समय तक यादगार बताया।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>कविताओं में जीवंत हुआ नालंदा का गौरव, कवि सम्मेलन में गूंजा ‘ज्ञान’ का स्वर</title>
		<link>https://www.patnanow.com/kavitao-me-jiwant-hua-nalanda/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Mar 2026 04:05:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शब्दों की सरगम में डूबा नालंदा, कवियों की आवाज़ में झलकी मिट्टी की महक कविता, विरासत और भावनाओं का संगम: नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल में सजी काव्य संध्या नालंदा,16 मार्च(ओ पी पाण्डेय)। इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल के अंतिम दिन एम्फीथियेटर में सजी काव्य संध्या ने साहित्य और संवेदना का ऐसा वातावरण रचा कि देर शाम तक श्रोता शब्दों की उस मधुर धारा में डूबे रहे। देश के प्रतिष्ठित युवा कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से नालंदा की विरासत, मिट्टी और मानवीय भावनाओं को स्वर दिया। साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित और डार्क हॉर्स, औघड़ तथा विश्वगुरु जैसी चर्चित पुस्तकों के लेखक कवि नीलोत्पल मृणाल ने अपनी संवेदनशील कविता से श्रोताओं को गहराई से छू लिया। उनकी पंक्तियाँ &#8211;“थोड़ा सा नदी का पानी,मुट्ठी भर रेत रख लो,धान-गेहूं-सरसों वालेपीले-हरे खेत रख लो…आने वाली पीढ़ियों कोचल कर दिखाएंगे-दुनिया ऐसी हुआ करती थी।” -ने बदलते समय के बीच स्मृतियों और प्रकृति को बचाए रखने का भाव जगाया। नई दिल्ली में रहकर भी अपनी मिट्टी से जुड़े रहने वाले नालंदा के कवि संजीव कुमार मुकेश ने अपनी कविताओं में राजगीर, मगध और बिहार की गौरवशाली पहचान को स्वर दिया। उनकी पंक्तियाँ-“मगध का, राष्ट्र का, जन-जन का है अभिमान नालंदा,विरासत, संस्कृति, जन-मन का गौरव गान नालंदा…पुनः फैला रहा है विश्व भर में ‘ज्ञान’ नालंदा।” &#8211; सुनते ही सभागार तालियों से गूंज उठा। उन्होंने राजगीर की आध्यात्मिकता को भी शब्द दिए-“जब मोह मनुज के ज्ञान को रुद्ध कर देता है,तब मगध का रज गौतम को बुद्ध कर देता है।” कवि सम्मेलन का संचालन मेरठ के चर्चित हास्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शब्दों की सरगम में डूबा नालंदा, कवियों की आवाज़ में झलकी मिट्टी की महक</strong></p>



<p><strong>कविता, विरासत और भावनाओं का संगम: नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल में सजी काव्य संध्या</strong></p>



<p>नालंदा,16 मार्च(ओ पी पाण्डेय)। इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल के अंतिम दिन एम्फीथियेटर में सजी काव्य संध्या ने साहित्य और संवेदना का ऐसा वातावरण रचा कि देर शाम तक श्रोता शब्दों की उस मधुर धारा में डूबे रहे। देश के प्रतिष्ठित युवा कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से नालंदा की विरासत, मिट्टी और मानवीय भावनाओं को स्वर दिया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="683" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001107950-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95721" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001107950-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001107950-650x434.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित और डार्क हॉर्स, औघड़ तथा विश्वगुरु जैसी चर्चित पुस्तकों के लेखक कवि नीलोत्पल मृणाल ने अपनी संवेदनशील कविता से श्रोताओं को गहराई से छू लिया। उनकी पंक्तियाँ &#8211;<br>“थोड़ा सा नदी का पानी,<br>मुट्ठी भर रेत रख लो,<br>धान-गेहूं-सरसों वाले<br>पीले-हरे खेत रख लो…<br>आने वाली पीढ़ियों को<br>चल कर दिखाएंगे-<br>दुनिया ऐसी हुआ करती थी।”</p>



<p>-ने बदलते समय के बीच स्मृतियों और प्रकृति को बचाए रखने का भाव जगाया।</p>



<figure class="wp-block-gallery has-nested-images columns-default is-cropped wp-block-gallery-1 is-layout-flex wp-block-gallery-is-layout-flex">
<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="682" data-id="95722" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001107922-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95722" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001107922-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001107922-650x433.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>
</figure>



<p>नई दिल्ली में रहकर भी अपनी मिट्टी से जुड़े रहने वाले नालंदा के कवि संजीव कुमार मुकेश ने अपनी कविताओं में राजगीर, मगध और बिहार की गौरवशाली पहचान को स्वर दिया। उनकी पंक्तियाँ-<br>“मगध का, राष्ट्र का, जन-जन का है अभिमान नालंदा,<br>विरासत, संस्कृति, जन-मन का गौरव गान नालंदा…<br>पुनः फैला रहा है विश्व भर में ‘ज्ञान’ नालंदा।”</p>



<p>&#8211; सुनते ही सभागार तालियों से गूंज उठा।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="851" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001107942-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95723" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001107942-scaled.jpg 851w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001107942-540x650.jpg 540w" sizes="auto, (max-width: 851px) 100vw, 851px" /></figure>



<p>उन्होंने राजगीर की आध्यात्मिकता को भी शब्द दिए-<br>“जब मोह मनुज के ज्ञान को रुद्ध कर देता है,<br>तब मगध का रज गौतम को बुद्ध कर देता है।”</p>



<p>कवि सम्मेलन का संचालन मेरठ के चर्चित हास्य कवि डॉ. प्रतीक गुप्ता ने अपने चुटीले अंदाज में किया। उन्होंने श्रोताओं से संवाद करते हुए कहा-<br>“साहित्यिक उत्सव मनाकर खुश हो ना,<br>ऊँची हस्तियाँ यहाँ बुलाकर खुश हो ना,<br>पूछ रहा हूँ राजगीर में मैं-<br>नालंदा की माटी को माथे से लगाकर खुश हो ना।”</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="682" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001107939-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95724" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001107939-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001107939-650x433.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>दरभंगा से आईं चर्चित कवयित्री डॉ. तिष्या श्री ने अपनी सुरीली आवाज़ और भावपूर्ण प्रस्तुति से काव्य संध्या को और भी मधुर बना दिया। उनकी पंक्तियाँ-<br>“बड़े आसान लफ़्ज़ों में उसे सरेआम लिखती हूँ,<br>सुनो तो गीत लगता है मगर पैग़ाम लिखती हूँ…<br>मुहब्बत जब कहे कोई, उसी का नाम लिखती हूँ।”</p>



<p>&#8211; ने श्रोताओं के दिलों को छू लिया।</p>



<p>कवियों की रचनाओं, शब्दों की लय और भावनाओं की गर्माहट ने ऐसा समां बाँधा कि देर शाम तक लोग काव्य-रस में डूबे रहे।</p>



<p>कार्यक्रम के अंत में सभी कवियों को अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ और प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेष का प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान आयोजक वैशाली सेता और अदिति नंदन द्वारा प्रदान किया गया।</p>



<p>कुल मिलाकर, यह काव्य संध्या केवल कविताओं का पाठ नहीं थी, बल्कि नालंदा की मिट्टी, उसकी स्मृति और उसके ज्ञान की उस परंपरा का उत्सव थी, जो आज भी शब्दों के माध्यम से दुनिया भर में फैल रही है।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>बॉक्स ऑफिस पर क्या कह गए अमोल पालेकर !</title>
		<link>https://www.patnanow.com/what-amol-palekar-said-about-the-box-office/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Mar 2026 03:51:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Big News]]></category>
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					<description><![CDATA[नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल में अमोल पालेकर का सिनेमा पर बेबाक संवाद सिनेमा की असली सफलता दर्शकों के दिल में होती है, बॉक्स ऑफिस में नहीं : अमोल पालेकर नालंदा, 16 मार्च (ओ पी पाण्डेय)। नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में आयोजित एक विशेष सत्र में हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अमोल पालेकर केंद्र में रहे। इस अवसर पर उन्होंने सिनेमा, फिल्म आलोचना और अपने रचनात्मक अनुभवों पर खुलकर विचार साझा किए। सत्र में उनकी धर्मपत्नी और लेखिका संध्या गोखले तथा वरिष्ठ फिल्म पत्रकार अजय ब्रह्मात्मज भी उनके साथ संवाद में शामिल रहे। बातचीत के दौरान अमोल पालेकर ने अपने लंबे फिल्मी अनुभव और अपनी लिखी पुस्तक का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी फिल्म की सफलता या असफलता का आकलन केवल उसके बॉक्स ऑफिस कलेक्शन से नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, किसी फिल्म का वास्तविक मूल्य उसके विषय, संवेदनशीलता, सामाजिक प्रभाव और दर्शकों के मन पर पड़ने वाले स्थायी असर से तय होता है। उन्होंने यह भी कहा कि एक फिल्म समीक्षक की भूमिका सिर्फ यह बताने तक सीमित नहीं होनी चाहिए कि फिल्म हिट है या फ्लॉप। बल्कि उसका काम यह समझना और समझाना भी है कि कोई फिल्म अपने समय और समाज से किस तरह संवाद स्थापित करती है। इस दौरान अमोल पालेकर ने अपनी फिल्मों और अभिनय यात्रा से जुड़े कई रोचक अनुभव भी साझा किए। उनकी सहज और आत्मीय बातचीत ने दर्शकों को लंबे समय तक बांधे रखा और पूरे माहौल को जीवंत बना दिया। कार्यक्रम के अंत में पटना कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल में अमोल पालेकर का सिनेमा पर बेबाक संवाद</strong></p>



<p><strong>सिनेमा की असली सफलता दर्शकों के दिल में होती है, बॉक्स ऑफिस में नहीं : अमोल पालेकर</strong></p>



<p>नालंदा, 16 मार्च <strong>(ओ पी पाण्डेय</strong>)। नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में आयोजित एक विशेष सत्र में हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अमोल पालेकर केंद्र में रहे। इस अवसर पर उन्होंने सिनेमा, फिल्म आलोचना और अपने रचनात्मक अनुभवों पर खुलकर विचार साझा किए। सत्र में उनकी धर्मपत्नी और लेखिका संध्या गोखले तथा वरिष्ठ फिल्म पत्रकार अजय ब्रह्मात्मज भी उनके साथ संवाद में शामिल रहे।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="683" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110404-scaled.png" alt="" class="wp-image-95730" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110404-scaled.png 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001110404-650x434.png 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001108348-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95715" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001108348-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001108348-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001108348-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><br>बातचीत के दौरान अमोल पालेकर ने अपने लंबे फिल्मी अनुभव और अपनी लिखी पुस्तक का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी फिल्म की सफलता या असफलता का आकलन केवल उसके बॉक्स ऑफिस कलेक्शन से नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, किसी फिल्म का वास्तविक मूल्य उसके विषय, संवेदनशीलता, सामाजिक प्रभाव और दर्शकों के मन पर पड़ने वाले स्थायी असर से तय होता है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001108353-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95716" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001108353-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001108353-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001108353-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>उन्होंने यह भी कहा कि एक फिल्म समीक्षक की भूमिका सिर्फ यह बताने तक सीमित नहीं होनी चाहिए कि फिल्म हिट है या फ्लॉप। बल्कि उसका काम यह समझना और समझाना भी है कि कोई फिल्म अपने समय और समाज से किस तरह संवाद स्थापित करती है।</p>



<p>इस दौरान अमोल पालेकर ने अपनी फिल्मों और अभिनय यात्रा से जुड़े कई रोचक अनुभव भी साझा किए। उनकी सहज और आत्मीय बातचीत ने दर्शकों को लंबे समय तक बांधे रखा और पूरे माहौल को जीवंत बना दिया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001108358-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95717" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001108358-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001108358-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001108358-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>कार्यक्रम के अंत में पटना कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स के विद्यार्थियों द्वारा आयोजित लाइव पेंटिंग सत्र में बनाई गई एक विशेष कलाकृति अमोल पालेकर को भेंट की गई। इसके साथ ही उन्हें पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और नालंदा की सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाती स्थानीय कलाकारों द्वारा मिट्टी से निर्मित एक प्रतिमा देकर सम्मानित किया गया।</p>



<p>यह सत्र सिनेमा, कला और समाज के गहरे संबंधों को रेखांकित करते हुए नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल को और भी सार्थक बना गया।</p>



<p></p>
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			</item>
		<item>
		<title>राजगीर में साहित्य का महाकुंभ: राष्ट्रवाद से क्षेत्रीय भाषाओं तक गूंजे विचार</title>
		<link>https://www.patnanow.com/rajgir-me-sahitya-ka-mahakumb/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 Mar 2026 05:01:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[देश दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[Journalist O P Pandey]]></category>
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		<category><![CDATA[PATNA]]></category>
		<category><![CDATA[PATNA NOW]]></category>
		<category><![CDATA[पटना नाउ]]></category>
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					<description><![CDATA[राष्ट्रवाद, सिनेमा, क्षेत्रीय साहित्य और संकट के समय लेखन पर गहन मंथन राजगीर में तीसरे दिन कई महत्वपूर्ण सत्र आयोजित, देशभर के लेखकों और विचारकों ने साहित्य, समाज और समकालीन चुनौतियों पर रखे विचार राजगीर, 15 मार्च। राजगीर स्थित अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर राजगीर में आयोजित नालंदा अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव के तीसरे दिन साहित्य, राष्ट्रवाद, सिनेमा, क्षेत्रीय भाषाओं और संकट के समय लेखन की भूमिका जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। देश के विभिन्न हिस्सों से आए लेखकों, विचारकों और विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा करते हुए समकालीन समाज और साहित्य के संबंधों पर महत्वपूर्ण विमर्श प्रस्तुत किया। राष्ट्रवाद पर गंभीर बहसदिन का पहला सत्र “क्या राष्ट्र को राष्ट्रवाद की आवश्यकता है या राष्ट्रवाद ही राष्ट्र को कमजोर बनाता है?” विषय पर आयोजित हुआ। इसमें लेखक-चिंतक उदय माहूरकर और लेखिका लिपिका भूषण ने राष्ट्रवाद की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रवाद केवल राजनीतिक विचार नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक पहचान, इतिहास और सामूहिक चेतना से जुड़ा व्यापक विषय है। चर्चा के दौरान महात्मा गांधी के सेवा मॉडल, अहिंसा और सामाजिक समरसता जैसे सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर स्वस्थ बहस की आवश्यकता पर बल दिया गया। साथ ही डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव और अश्लील सामग्री के दुष्प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए सामाजिक जागरूकता और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने की बात कही गई। कहानी केवल मनोरंजन नहीं, समाज का आईनादूसरे सत्र में “पर्दे पर कहानी कहने की कला: सिनेमा, डिजिटल मंच और साहित्य के माध्यम से बिहार की नई कल्पना” विषय [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>राष्ट्रवाद, सिनेमा, क्षेत्रीय साहित्य और संकट के समय लेखन पर गहन मंथन</strong></p>



<p><strong><em>राजगीर में तीसरे दिन कई महत्वपूर्ण सत्र आयोजित, देशभर के लेखकों और विचारकों ने साहित्य, समाज और समकालीन चुनौतियों पर रखे विचार</em></strong></p>



<p>राजगीर, 15 मार्च। राजगीर स्थित अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर राजगीर में आयोजित नालंदा अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव के तीसरे दिन साहित्य, राष्ट्रवाद, सिनेमा, क्षेत्रीय भाषाओं और संकट के समय लेखन की भूमिका जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। देश के विभिन्न हिस्सों से आए लेखकों, विचारकों और विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा करते हुए समकालीन समाज और साहित्य के संबंधों पर महत्वपूर्ण विमर्श प्रस्तुत किया।</p>



<p><strong>राष्ट्रवाद पर गंभीर बहस</strong><br>दिन का पहला सत्र “क्या राष्ट्र को राष्ट्रवाद की आवश्यकता है या राष्ट्रवाद ही राष्ट्र को कमजोर बनाता है?” विषय पर आयोजित हुआ। इसमें लेखक-चिंतक उदय माहूरकर और लेखिका लिपिका भूषण ने राष्ट्रवाद की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104180-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95687" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104180-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104180-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104180-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रवाद केवल राजनीतिक विचार नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक पहचान, इतिहास और सामूहिक चेतना से जुड़ा व्यापक विषय है। चर्चा के दौरान महात्मा गांधी के सेवा मॉडल, अहिंसा और सामाजिक समरसता जैसे सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर स्वस्थ बहस की आवश्यकता पर बल दिया गया। साथ ही डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव और अश्लील सामग्री के दुष्प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए सामाजिक जागरूकता और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने की बात कही गई।</p>



<p><strong>कहानी केवल मनोरंजन नहीं, समाज का आईना</strong><br>दूसरे सत्र में “पर्दे पर कहानी कहने की कला: सिनेमा, डिजिटल मंच और साहित्य के माध्यम से बिहार की नई कल्पना” विषय पर चर्चा हुई। इसमें अभिनेत्री और रंगमंच निर्देशक भाषा सुंभली तथा पटकथा लेखिका संध्या गोखले ने कहानी कहने की कला और उसकी सामाजिक जिम्मेदारी पर अपने विचार रखे।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104198-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95688" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104198-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104198-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104198-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>वक्ताओं ने कहा कि कहानी कहना केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज की वास्तविकताओं, विचारों और सच्चाइयों को सामने लाने का सशक्त साधन भी है। आज के दौर में चलचित्रों और डिजिटल मंचों का प्रभाव पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ गया है, इसलिए रचनाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी हो जाती है।</p>



<p><strong>साहित्य समाज को देता है दिशा</strong><br>तीसरे सत्र “साहित्य समाज को कैसे आकार देता है” में लेखक शांतनु गुप्ता और लेखिका अमी गणात्रा ने साहित्य की सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज की सोच, मूल्यों और चेतना को दिशा देने का महत्वपूर्ण माध्यम है। भारतीय ग्रंथों और परंपरागत ज्ञान में समाज को मार्गदर्शन देने की क्षमता निहित है, इसलिए नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना आवश्यक है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104536-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95690" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104536-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104536-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104536-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104539-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95689" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104539-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104539-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104539-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><strong>क्षेत्रीय साहित्य का बढ़ता विस्तार</strong><br>दोपहर के बाद आयोजित सत्र “समकालीन लेखन और क्षेत्रीय कथाओं का भविष्य” में ओड़िया लेखक, आलोचक और कवि मनोरंजन दास, लेखिका-इतिहासकार सुमेधा वर्मा और लेखक-कवि नीलोत्त्पल मृणाल ने अपने विचार साझा किए।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001105085-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95683" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001105085-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001105085-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001105085-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>वक्ताओं ने कहा कि प्रगतिशील होने का अर्थ अपनी जड़ों और स्थानीय अनुभवों से दूरी बनाना नहीं है। क्षेत्रीय साहित्य समाज की वास्तविकताओं, संस्कृति और लोक जीवन को सामने लाने का सशक्त माध्यम है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104998-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95693" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104998-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104998-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104998-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><br>चर्चा में यह भी कहा गया कि समय के साथ साहित्य की विषयवस्तु, पाठक वर्ग और उसे पढ़ने-समझने के तरीके बदल रहे हैं। अनुवाद और डिजिटल माध्यमों के कारण क्षेत्रीय साहित्य अब व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँच रहा है। नीलोत्पल मृणाल, जो अपने चर्चित उपन्यास डार्क हॉर्स, औघड़ और युवा जादूगर के लिए जाने जाते हैं, को साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।</p>



<p><strong>संकट के समय लेखन बना प्रतिरोध की आवाज</strong><br>अंतिम सत्र “संकट के समय लेखन: प्रतिरोध के रूप में साहित्य” विषय पर आयोजित हुआ। इसमें भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी नितेश्वर कुमार, लेखक मृत्युंजय शर्मा और लेखक-शिक्षाविद जितेंद्र कुमार शर्मा ने अपने विचार रखे।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104976-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95686" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104976-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104976-650x488.jpg 650w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104976-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>वक्ताओं ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में लेखन केवल व्यक्तिगत अनुभव तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह समाज के सामूहिक संघर्ष, पीड़ा और आकांक्षाओं की आवाज बन जाता है। साहित्य कई बार सामाजिक चेतना जगाने और परिवर्तन की दिशा देने का माध्यम बनता है।</p>



<p><strong>कवि सम्मेलन और सांस्कृतिक संध्या ने बांधा समां</strong><br>दिन के अंत में आयोजित कवि सम्मेलन और सांस्कृतिक संध्या ने पूरे वातावरण को साहित्यिक ऊर्जा से भर दिया। कवि संजीव कुमार मुकेश, नीलोत्त्पल मृणाल, श्रीपति गुप्ता और कवयित्री तिश्या श्री ने अपनी रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104973-1-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95691" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104973-1-scaled.jpg 1024w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001104973-1-650x488.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><br>इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त रैपर स्लो चीता की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में नई ऊर्जा भर दी। उनकी प्रस्तुति ने विशेष रूप से युवाओं को आकर्षित किया और साहित्य तथा संगीत के इस अनूठे संगम ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।</p>
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		<title>नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल में आज शब्दों की शाम, देश के चर्चित कवि देंगे प्रस्तुति</title>
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		<dc:creator><![CDATA[om prakash pandey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 14 Mar 2026 05:42:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एंटरटेनमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[कला और साहित्य]]></category>
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		<category><![CDATA[पटना नाउ]]></category>
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					<description><![CDATA[राजगीर, 14 मार्च। नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल के तीसरे दिन शनिवार को एम्पीथियेटर में संध्या 7 बजे अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इस काव्य संध्या में देश के चर्चित और युवा कवि अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे। कार्यक्रम में बेस्टसेलर पुस्तकों डार्क हॉर्स, औघड़ और विश्वगुरु के लेखक तथा साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित कवि नीलोत्पल मृणाल अपनी काव्य प्रस्तुति देंगे। इसके साथ ही नालंदा के मूल निवासी और “गाँव का लड़का” नाम से चर्चित कवि एवं गीतकार संजीव कुमार मुकेश भी मंच से अपनी कविताएँ सुनाएंगे। मेरठ के प्रसिद्ध हास्य कवि डॉ. प्रतीक गुप्ता, जो “सब कुछ ऑरिजनल है” के लिए जाने जाते हैं, अपने व्यंग्य और हास्य से श्रोताओं को गुदगुदाएंगे। वहीं दरभंगा की चर्चित कवयित्री डॉ. तिष्या श्री, जिन्हें “बिहार की बेटी” के नाम से पहचान मिली है, अपनी संवेदनशील कविताओं से श्रोताओं को भावुक करेंगी। राजगीर की पंच पहाड़ियों के बीच आयोजित इस कवि सम्मेलन में कविता के विविध रंग देखने को मिलेंगे। यहाँ गाँव की सोंधी खुशबू के साथ हास्य और व्यंग्य की शीतल फुहार भी होगी। गीतों की मिठास, प्रेम और मनुहार के साथ यह काव्य संध्या श्रोताओं को शब्दों की दुनिया में डुबो देगी। PNCB]]></description>
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<p>राजगीर, 14 मार्च। नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल के तीसरे दिन शनिवार को एम्पीथियेटर में संध्या 7 बजे अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इस काव्य संध्या में देश के चर्चित और युवा कवि अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे।</p>



<p><br>कार्यक्रम में बेस्टसेलर पुस्तकों डार्क हॉर्स, औघड़ और विश्वगुरु के लेखक तथा साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित कवि नीलोत्पल मृणाल अपनी काव्य प्रस्तुति देंगे। इसके साथ ही नालंदा के मूल निवासी और “गाँव का लड़का” नाम से चर्चित कवि एवं गीतकार संजीव कुमार मुकेश भी मंच से अपनी कविताएँ सुनाएंगे।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="768" height="1024" src="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001103848-scaled.jpg" alt="" class="wp-image-95677" srcset="https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001103848-scaled.jpg 768w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001103848-488x650.jpg 488w, https://www.patnanow.com/assets/2026/03/1001103848-1152x1536.jpg 1152w" sizes="auto, (max-width: 768px) 100vw, 768px" /></figure>



<p><br>मेरठ के प्रसिद्ध हास्य कवि डॉ. प्रतीक गुप्ता, जो “सब कुछ ऑरिजनल है” के लिए जाने जाते हैं, अपने व्यंग्य और हास्य से श्रोताओं को गुदगुदाएंगे। वहीं दरभंगा की चर्चित कवयित्री डॉ. तिष्या श्री, जिन्हें “बिहार की बेटी” के नाम से पहचान मिली है, अपनी संवेदनशील कविताओं से श्रोताओं को भावुक करेंगी।</p>



<p><br>राजगीर की पंच पहाड़ियों के बीच आयोजित इस कवि सम्मेलन में कविता के विविध रंग देखने को मिलेंगे। यहाँ गाँव की सोंधी खुशबू के साथ हास्य और व्यंग्य की शीतल फुहार भी होगी। गीतों की मिठास, प्रेम और मनुहार के साथ यह काव्य संध्या श्रोताओं को शब्दों की दुनिया में डुबो देगी।</p>



<p><strong>PNCB</strong> </p>
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