समय से आगे के रचयिता थे भिखारी ठाकुर

आरा. भोजपुरी संस्कृति के अग्रदूत और लोककलाकार भिखारी ठाकुर की 49 वीं पुण्यतिथि का आयोजन स्नातकोत्तर भोजपुरी विभाग, वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय के द्वारा कोरोना संकट के चलते ऑनलाइन व्याख्यान श्रृंखला के रूप में हुआ. इस व्याख्यान का सीधा प्रसारण भोजपुरी विभाग के फेसबुक पेज के माध्यम से किया गया.

सुबह के सत्र में प्रख्यात साहित्यकार और भिखारी साहित्य के मर्मज्ञ डॉ जीतेंद्र वर्मा ने सीवान से अपने वक्तव्य में भिखारी ठाकुर के उपर प्रकाशित पुस्तकों की चर्चा की. उन्होंने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शोधार्थियों का आह्वान किया कि वे भिखारी ठाकुर पर अकादमिक शोध कार्यों को पूरा करने की दिशा में प्रयास करें.




दोपहर के सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक और मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली के कार्यकारिणी सदस्य डॉ मुन्ना कुमार पाण्डेय ने बिदेसिया और गबरघिचोर नाटकों की विशद चर्चा करते हुए इन नाटकों के जरिये भोजपुरिया समाज से जुड़े स्त्री विमर्श के मुद्दों पर सवाल उठाया. उन्होंने इन नाटकों की तुलना कई विश्वप्रसिद्ध समकालीन नाटकों और रचनाओं से करते हुए भिखारी ठाकुर को समय की नब्ज़ पर हाथ रखने वाला और दूरद्रष्टा रचनाकार बताया.

बाद में विभागाध्यक्ष प्रो दिवाकर पाण्डेय ने वक्ताओं का धन्यवाद दिया तथा बताया कि वर्त्तमान कोरोना संकट में भी विभाग के द्वारा ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन जारी है तथा इन कक्षाओं में छात्रों की शत-प्रतिशत उपस्थिति रहती है और ऐसे कार्यक्रम भविष्य में भी आयोजित होते रहेंगे.

कार्यक्रम के आयोजन में विभाग के शोधार्थियों यशवंत कुमार सिंह, संजय कुमार सिंह, राजेश कुमार, रवि प्रकाश सूरज और सनोज कुमार की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही. ऑनलाइन व्याख्यान के दौरान विभाग के छात्र-छात्राओं के अलावा देश-विदेश के शिक्षण संस्थाओं के कई प्राध्यापक और छात्रों के साथ सुधी श्रोता भी उपस्थित रहे.

पटना नाउ ब्यूरो