वाणिज्य-कर विभाग का “जीएसटी ई-वे बिल” व्यवस्था पर प्रशिक्षण कार्यक्रम

  पटना । बुधवार 10 जनवरी को वाणिज्य-कर विभाग द्वारा बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सहयोग से इसके सदस्यों तथा अन्य उद्यमियों को वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली में प्रस्तावित ई-वे बिल व्यवस्था से परिचित कराने के उद्देश्य से एक प्रशिक्षिण कार्यक्रम का आयोजन बीआईए प्रांगण में किया गया. इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विभिन्न औद्योगिक प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधि भाग लिये. इस प्रशिक्षण कार्यशाला में वाणिज्य कर विभाग से प्रमोद कुमार गुप्ता (संयुक्त आयुक्त, वाणिज्य-कर), शंकर कुमार मिश्रा (संयुक्त आयुक्त, पश्चिमी डिवीजन, वाणिज्य-कर) के अतिरिक्त विभाग के अन्य पदाधिकारियों ने भाग लिया. उन्होंने ई-वे बिल के विभिन्न आयामों पर पावर प्वांट प्रजेंटेशन के माध्यम से भाग ले रहे उद्यमियों को अवगत कराया तथा उनके द्वारा पूछे गये प्रश्नों का जवाब भी दिया.

प्रशिक्षण कार्यक्रम में बताया गया कि ई-वे बिल एक तरह से सेल्फ डिक्लेरेशन पद्धती पर कार्य करेगा जिसमें जेनरेट किए गये एक ही बिल पूरे देश भर में मान्य होगा. उसका उपयोग सामान लाने या भेजने दोनों में किया जा सकता है. इस व्यवस्था का एक उद्देश्य यह भी है कि कर वंचना को रोका जा सके. इस व्यवस्था का एक फायदा यह भी है कि व्यापारी को भौतिक रूप से बिल बनवाने या प्राप्त करने के लिए सरकारी दफ्तर में जाने की आवश्यकता नहीं होगी क्योंकि सारी प्रक्रिया ऑनलाईन है. चेक पोस्ट की भी कोई व्यवस्था इस प्रणाली में नहीं है. जहां रूक कर परिवहन हो रहे समानों का तथा उससे सम्बन्धित बिल का जांचा जा सके.




प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि ई-वे बिल व्यवस्था 1 फरवरी से पूरे भारत में लागू होने जा रही है. इस व्यवस्था में ई-वे बिल जेनरेट करना अनिवार्य होगा. लेकिन 16 जनवरी से ई-वे बिल जेनरेट करने की सिस्टम शुरू हो जायेंगे जिसके माध्यम से व्यापारी ट्रायल एवं प्रशिक्षण के रूप में ई-वे बिल जेनरेट कर सकेंगे. लेकिन 16 जनवरी से जेनरेट होने वाली ई-वे बिल ऐच्छिक होगी. पुनः ई-वे बिल जेनरेट करने के लिए यह निर्धारित किया गया है कि 50 हजार या उससे अधिक के मूल्य के समान का परिवहन हो रहा हो तब ई-वे बिल जेनरेट करना अनिवार्य होगा. 50 हजार रुपये से कम के मूल्य के समान के परिवहन के स्थिति में व्यापारी चाहें तो स्वेच्छिक रूप से ई-वे बिल जेनरेट कर सकते हैं.

प्रशिक्षण में यह भी जानकारी दी गयी कि जेनरेट किए जाते समय बिल में गाड़ी का नम्बर दिया जाना अनिवार्य नहीं है. गाड़ी नम्बर बाद में भी भरा जा सकता है. गाड़ी नम्बर दिए जाने के बाद भी किसी कारण से गाड़ी बदलने की दशा में गाड़ी संख्या को बदले जाने का व्यवस्था भी ई-वे बिल प्रणाली में उपलब्ध है. पुनः जेनरेट हो चुके ई-वे बिल को 24 घंटे के अन्दर निरस्त किए जाने का भी प्रावधान इस प्रणाली में है.

इस प्रशिक्षण कार्यशाला में बीआईए के अध्यक्ष के.पी.एस. केशरी, उपाध्यक्ष संजय भरतिया, पुरूषोत्तम अग्रवाल के साथ बड़ी संख्या में सदस्यगण उपस्थित थे.

(ब्यूरो रिपोर्ट)