राज्य-सभा चुनाव – एक चर्चा

पटना । बिहार में एनडीए की सरकार है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही बिहार की बदली हुई छवि देश-दुनिया के सामने आई है. जिस दृढ़ता से उन्होंने बिहार की बिगड़ी विधि-व्यवस्था पर प्रभावकारी अंकुश लगाया, उसका परिणाम यह हुआ कि यहां का मुख्य विपक्ष विधानसभा के एक कोने में सिमट कर रह गया. बातें तो बहुत सारी हैं और दिलचस्प कहानियां भी हैं, लेकिन राज्यसभा के लिए बिहार से छह सीटों पर 23 मार्च को होने वाले चुनाव में उन्होंने एक बार फिर जिस दृढ़ता का परिचय दिया, उसी का परिणाम है कि सभी छह सीटों के परिणाम 15 मार्च को ही घोषित हो सकते हैं. सभी माननीय सदस्य निर्विरोध चुन लिए जायेंगे. यह सब मुमकिन इसलिए हो पाया क्योंकि सातवें प्रत्याशी की सम्भावना को तलाशे जाने से साफ इंकार कर दिया गया. इससे खरीद-फरोख्त की बात फिर चर्चा में आती और तब एनडीए की सरकार होने के बावजूद इस पर रोक नहीं लगाए जाने की शिकायत सुनने में आ सकती थी, जिसकी सम्भावना ही समाप्त कर दी गई. मुख्यमंत्री इसके लिए धन्यवाद के पात्र हैं. इससे भ्रष्टाचार विरोधी उनका स्टैण्ड ही सामने आया है और यह बात एक बार फिर उन्होंने स्थापित की है.
(अनुभव सिन्हा की कलम से)