“ख्वाबों की शहजादी”….. ‘ख्वाबों’ में ही गुम हो गयी

..और तारों में विलीन हो गयी ….”चाँदनी”

Photo curtsey: ANI

मुम्बई, 1मार्च. चाँद की रोशनी जिस तरह अंधेरे को रोशन कर देता है ठीक उसी तरह बॉलीवुड की अदाकारा श्रीदेवी चाँदनी बन ऐसी आयी, जिसने अपनी रौशनी से बॉलीवुड को ही रौशन कर दिया. “चांदनी” पहली महिला सुपरस्टार बन नारी सशक्तिकरण का उदाहरण बन गयी. पदम् विभूषण जैसे गौरवशाली सम्मान भी उसे भारत सरकार ने दे दिया. लेकिन अपने अंतिम दर्शन देने के साथ ही वो सितारों में विलीन हो गयी और छोड़ गई अपना एक भरा-पूरा परिवार जिसमे उनकी दो बेटियां खुशियां और जाह्नवी हैं.




बॉलीवुड की “चांदनी” का पार्थिव शरीर मुम्बई आने के बाद बुधवार को उनके अंतिम दर्शन के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा. अंधेरी के सेलिब्रेशन पार्क में उनका पार्थिव शरीर रखा गया जहाँ फ़िल्म इंडस्ट्रीज के तमाम दिग्गजों ने पहुँच उन्हें श्रद्धांजलि दी. बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, ऐश्वर्या राय, अजय देवगन, संजय लीला भंसाली, सलमान खान, दीपिका पादुकोण, अनुपम खेर, इम्तियाज अली, शबाना आजमी,माधुरी दीक्षित, करिश्मा कपूर,जैकी श्रॉफ और रेखा सहित तमाम लोगों ने नम आंखों से उनका दीदार कर उन्हें अंतिम विदाई दी. श्रीदेवी को सुहागन की तरह बनारसी साड़ी में सजाया गया था और पार्थिव शरीर को एक कांच के बक्से में रखा गया था. पदम् विभूषण से सम्मानित श्रीदेवी को भारतीय सेना के जवानों ने भी सलामी दिया. उन्होंने शव को तिरंगे में लपेटा और फिर तिरंगे में लपेटी श्रीदेवी के शव को विले-पार्ले श्मशान के लिए प्रस्थान किया गया.

सफेद रँगों को पसंद करने वाली श्रीदेवी का शव जिस गाड़ी से ले जाया गया उसे उजले मोगरे के फूलों से सजाया गया था और उसपर आगे की तरफ श्रीदेवी की एक फोटो लगाई गई थी.

सड़क पर उनके दीदार के लिए देर रात से ही जगह-जगह से लोग इकट्ठे हुए थे जो सड़को पर खड़े अंतिम दर्शन के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. भीड़ को कंट्रोल करने में पुलिस को काफी दिक्कतें आयीं तो उसे बल प्रयोग भी करना पड़ा.  अबतक टीवी और रुपहले पर्दे पर देखने वालों को अंतिम दर्शन सामने से करने की बेकरारी सता रही थी. कईयों के आंसू आंखों से सागर बनकर छलक रहे थे कईयों ने आंसुओ पर बांध बना रखे थे. लाइव कवरेज कर रही कई टीवी जर्नलिस्टों ने तो रो-रो कर रिपोर्टिंग की. उनके गले रह रह कर भर उठता था.

शव को विले-पार्ले श्मशान तक जाने में लगभग 2.30 घण्टे लगे. श्रीदेवी के पति ने उन्हें मुखाग्नि दी. मुंबई की सड़कों पर हजारों फैन्स शव यात्रा में साथ-साथ चल रहे थे जिससे सड़को पर भारी भीड़ हो गयी थी. जो इस अंतिम यात्रा में शामिल नही हो पाए वे सभी टीवी पर दिनभर अंतिम दर्शन के लिए चाँदनी को टीवी स्क्रीन पर ढूंढते रहे.

जो सबके ख्वाबो की शहजादी थी और जिसने
फ़िल्म इंडस्ट्री पर 30 सालों तक एकछत्र राज करने वाली चाँदनी ने जिस रोशनी से इंडस्ट्री को रौशन किया था वह अब कम होता सजेया प्रतीत हो रहा है. हवा हवाई चाँदनी सबके ख्वाबों की शहजादी तो जरूर बन गयी लेकिन चाहने वालों के लिए ख्वाब की तरह ही ओझल हो गई.

पटना नाउ ब्यूरो रिपोर्ट