आरा मंडल कारा में हिंसक झड़प, 7 पुलिसकर्मी समेत कई कैदी घायल

 

फ्रस्टेट कैदी ने की आत्म हत्या की कोशिश
इलाज में देर होने को ले भड़के कैदियों ने 7 पुलिसकर्मियों को किया जख्मी, कई कैदियो को भी आयी चोटें
जेल के गेट तोड़ने की भी हुई नाकाम कोशिश




आरा, 10 मार्च. आरा मंडल कारा में शनिवार हंगामेदार रहा. सुबह होते ही कैदियों द्वारा जेल के अंदर जमकर मारपीट व पथराव की घटना से अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया. ओस हिंसक मारपीट व पथराव  में कई पुलिसकर्मी व बंदी भी घायल हो गए. सुत्रों की माने तो बंदी इतने उग्र हो गए थे कि मंडलकारा के मेन गेट को भी तोड़ने का असफल प्रयास किया. हंगामे के बाद मंडलकारा प्रशासन ने सभी जख्मी पुलिसकर्मी व बंदियों को इलाज के लिए मंडलकारा व सदर अस्पताल में भर्ती कराया. जहां उनका इलाज चल रहा है.

बताया जा रहा है एक वर्ष पहले नगर थाना क्षेत्र की चँदवा हाउसिंग में हुए हत्या के मामले में बंद छोटू मिश्रा कई दिनों से फ्रस्ट्रेट था. जिसको लेकर आज उसने जेल के अंदर अपने वार्ड में गले मे फांसी लगा कर आत्महत्या करने की कोशिश की. जिससे उसके गले पर रस्सी के निशान पड़ गए. लेकिन मौके पर कैदी साथियो ने समय रहते उसे बचा लिया. इस घटना के बाद आत्महत्या की कोशिश करने वाले बंदी की तबियत खराब होता देख पुलिस कर्मियों से अस्पताल ले जाने की बात कही लेकिन कारा में मौजूद पुलिसकर्मी जब इलाज के लिए अस्पताल ले जाने में देरी कर रहे थे तभी कैदियों का आक्रोश भड़क उठा और पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट व उन पर पथराव शुरू कर दिया. इस दौरान जेल में बंद बंदियों ने मंडलकारा के  मुख्यमार्ग द्वारा को भी तोड़ने का प्रयास किया. मामले की सुचना मिलते ही सदर एसडीओ अरूण प्रकाश व एसडीपीओ संजय कुमार मंडलकारा पहुंच स्थिति को नियंत्रण करने में लग गए. इस बाबत सदर एसडीओ अरूण प्रकाश से पूछा गया तो इस मामले में पल्ला झाड़ते हुए कैमरे पर कुछ भी बोलने से परहेज किया. आरा मंडलकारा में बंदियों के साथ मारपीट व हंगामे की घटना पहली बार नहीं बल्कि कई बार हो चुकी है.

आरा मंडल कारा में पिछले दो दिनों से विवाद रुकने का नाम नहीं ले रहा है. जेल के अंदर कैदियों के फोन से बात करने और मादक पादर्थो के सेवन के वीडियो वायरल होने के बाद आज तडके जेल में कैदियों के बीच घमासान मच गया. दूसरी ओर सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दो गुटों के बीच हिंसक झड़प दरअसल इस बात को लेकर हो गयी कि जेल के अंदर का विडियो किसने भेजा? एक दूसरे पर दोषारोपण से शुरू हुआ यह सिलसिला हिंसक रूप ले लिया. पुलिस इससे पहले की कुछ समझ पाती की मामले ने तूल पकड़ लिया. इस बीच जब पुलिस ने मारपीट कर रहे कैदियों  को समझाने की कोशिश की तो कैदियों ने उनपर हमला कर दिया. कैदियों के दोनों गुटों ने मिलकर प्रशासन के खिलाफ हो गये और जेल का गेट तोड़ने की कोशिश करने लगे. इस हिंसक झड़प में कई कैदियों समेत 7 पुलिसकर्मी घायल हो गए जिन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया गया. घटना के बाद जिलाधिकारी और कई आलाधिकारी मंडल कारा में कैम्प कर रहे हैं. आज की घटना की सुचना मिलने के बाद कवरेज के लिए पहुची मिडिया को भी जेल के बाहरी परिसर से भी दूर रखा गया.

बताते चलें की विडियो वायरल के मामले ने ऐसा तुल पकड़ा कि शुक्रवार को विधानसभा के बजट सत्र में भी यह मामला गूंजा. जेल के अंदर शुक्रवार को वीडियो वायरल होने के खबर के बाद छापेमारी की, जिसके बाद से ही कैदियों में अफरा-तफरी का माहौल है. ज्ञात सूत्रों की मानें, तो जेल के अंदर कैदियों का दो गुट जहाँ वीडियो वायरल होने को लेकर आपस में भीड़ गये, वहीं जेल प्रशासन यह सोचने में लगा है कि कैदियों को कैसे ज्ञात हुआ की जेल में छापेमारी, वीडियो वायरल होने के कारण की गयी थी. मंडल कारा में इससे पूर्व भी कई बार हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं. विश्वस्त सूत्रों की माने तो कैदियों के पास जेल पुलिस की अच्छी सांठगांठ की वजह से ही जेल के अंदर कोई भी सामग्री पहुंचती है

बताते चलें की शुक्रवार को कई समाचार चैनलों पर जेल के अंदर मोबाइल पर बात करने और मादक पदार्थों के सेवन करते वीडियो फुटेज दिखाये जाने के बाद छापेमारी की गयी थी. जेल के भीतर सभी वार्डों को खंगाला गया. जेल अधीक्षक निरंजन पंडित और जेलर मृत्युंजय कुमार दल-बल के साथ मौजूद थे. छापेमारी देर शाम तक चलती रही,जिसके कारण कैदियों के बीच हड़कंप मचा रहा.

छापेमारी में कई आपत्तिजनक सामान मिले, जिसे नगर थाना में कारा अधीक्षक द्वारा प्राथमिकी दर्ज कर रखा गया. जांच शुरू होने के बाद अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (मुख्यालय) एस के सिंघल ने संवाददाताओं को बताया कि पुलिस वीडियो फुटेज की जांच कर रही हैं. आरा जेल में sdo अरुण प्रकाश और sdpo संजय कुमार के नेतृत्व में देर तक सघन छापेमारी की गयी. इससे पूर्व भी हाल के दिनों मेंआरा मंडल कारा में मोबाईल को लेकर कई बार छापेमारी हुयी है. शुक्रवार को आरा मंडल कारा में एसडीओ और एसडीपीओ के नेतृत्वमें छापेमारी की गयी. हालांकि वायरल तस्वीर के आधार पर छानबीन की गयी, लेकिन कोई क्लू हाथ नहीं लगा. इस दौरान वायरल करनेवाले बंदी की पहचान तो नहीं हो पायी

बता दें की कई कैदियों के जेल में होने के बावजूद उनका व्हाट्सएप और फेसबुक चलता है. जिसकी शिकायत लगातार जेल प्रशासन को मिलती रही है. अभी पिछले हफ्ते ही कोर्ट में पेशी के दौरान एक कैदी के पास से मोबाइल बरामद हुआ था.

आरा से ओ पी पांडेय की रिपोर्ट