मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने पर बल दिया

आईजीआईएमएस के विस्तार के साथ यहाँ 2500 बेड  एवं एमबीबीएस की 250 सीटों की आवश्यकता पर बल.
स्वास्थ्य के क्षेत्र में 3400 करोड़ रूपये के बजट का प्रावधान.
पटना के एम्स और आईजीआईएमएस में चिकित्सा क्वालिटी के संदर्भ में प्रतिर्स्पद्धा होनी चाहिए.
पीने के स्वच्छ पानी और खुले में शौच से मुक्ति से 90 प्रतिशत बीमारियों से छुटकारा.
दीक्षांत समारोह में अंग्रेजों के समय से चली आ रही लिबास पहनने की परम्परा में बदलाव करने की जरूरत.

पटना (ब्यूरो रिपोर्ट) । मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के चौथे वार्षिक दीक्षांत समारोह के अवसर पर नवीनीकृत गहन चिकित्सा इकाई का उद्घाटन शिलापट्ट का अनावरण किया. इस दौरान मुख्यमंत्री ने संस्थान के आईसीयू, एनआईसीयू और एडवांस कार्डियक सेंटर का निरीक्षण किया. संस्थान के निदेशक प्रो0 डॉ0 एन0आर0 विश्वास ने मुख्यमंत्री को शॉल और प्रतीक चिन्ह (जिसमें संस्थान के नव निर्माणाधीन भवन की 3-डी छवि है और जिसका शिलान्यास मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2011 में किया था) भेंटकर स्वागत किया. .
दीक्षांत समारोह के मौके पर मुख्यमंत्री ने आईजीआईएमएस के ऑडिटोरियम में संस्थान के 34 वर्षों की यात्रा में हासिल की गई उपलब्धियों से संबंधित कॉफी टेबुल बुक का लोकार्पण किया. इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के इस चौथे वार्षिक दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री ने छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया. इस दीक्षांत समारोह में 22 छात्र-छात्राओं को पदक और प्रशस्ति पत्र जबकि 122 छात्र-छात्राओं को उपाधि प्रदान की गयी. 26 जनवरी को सस्थान के छात्र-छात्राओं द्वारा दहेज प्रथा के खिलाफ नाटक का मंचन किया गया था, जिसके विडियो क्लिप का अवलोकन मुख्यमंत्री ने किया और इस नाटक की सराहना की.
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने सबसे पहले संस्थान के निदेशक मंडल, अध्यापकगण एवं छात्र-छात्राओं को बधाई दी. उन्होंने कहा कि इंदिरा गाँधी आयुर्विज्ञान संस्थान के चौथे वार्षिक दीक्षांत समारोह में शामिल होने पर उन्होंने खुशी व्यक्त की. मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1984 में इस संस्थान की स्थापना के बाद 1985-86 में विधायक के रूप में उन्हें यहाँ आने का मौका मिला था. शुरू में दिल्ली से विशेषज्ञ चिकित्सक यहाँ इलाज करने आते थे लेकिन कुछ वर्षों बाद इसकी हालत बिगडती गयी. मुख्यमंत्री ने कहा कि नवम्बर 2005 में कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने इस संस्थान की पूरी जानकारी ली जिसके आधार पर सुधार के लिए कई निर्णय लिए गए. पहले यह संस्थान मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में चलती थी लेकिन नियमित बैठक संभव नहीं था, जिसकों देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री को शासी निकाय का अध्यक्ष बनाया गया ताकि नियमित बैठक हो सके. उसके बाद इस संस्थान में एमबीबीएस और पीजी की पढाई शुरू की गयी. बाद के दिनों में बेतिया, नालन्दा (पावापुरी), मधेपुरा, छपरा, पूर्णिया और समस्तीपुर में भी मेडिकल कॉलेज खोलने का निर्णय लिया गया. अब और 5 नए मेडिकल कॉलेज खोलने का फैसला लिया गया है, जिसमें नर्सिंग कॉलेज की भी स्थापना हो रही है ताकि नर्सेज और पारा मेडिकल स्टाफ की कमी को दूर किया जा सके. इन कार्यों में केंद्र भी अब रूचि ले रही है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग इंदिरा गाँधी को आदर्श मानते थे, उन्हीं के द्वारा इस संस्थान में उनकी छोटी मूर्ति लगाई गयी क्योंकि उन दिनों उन्ही लोगों की सरकार थी. उसके बाद राज्य सरकार द्वारा भव्य और आकर्षक प्रतिमा यहाँ लगाई गयी. उन्होंने कहा कि पता नहीं किन कारणों से पहले काफी लोग इस संस्थान को छोडकर चले गए लेकिन कहीं न कहीं इक्विपमेंट की खरीददारी में विजिलेंस इनक्वायरी एक कारण रही होगी. संस्थान के निदेशक प्रो0 डॉक्टर एन0आर0 विश्वास की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके नेतृत्व में काफी अच्छा काम हो रहा है और बहुत तेजी से प्रगति भी हुई है.
दीक्षांत समारोह में अंग्रेजों के समय से चली आ रही लिबास पहनने की परम्परा में बदलाव करने का भी उन्होंने सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि बिहार ज्ञान की भूमि रही है. भगवान बुद्ध को इसी धरती पर ज्ञान प्राप्त हुआ है. भगवान महावीर का जन्म, ज्ञान और निर्वाण की यह भूमि रही है. गुरु गोविन्द सिंह जी महाराज का जन्म भी यहीं हुआ है. चाणक्य जिन्होंने चन्द्रगुप्त को सम्राट बनाने में अपनी अहम भूमिका निभाई, उन्होंने इसी पाटलिपुत्र की धरती पर अर्थशास्त्र की रचना की. आर्यभट्ट ने दुनिया को शून्य इसी धरती से दिया, इसलिए नये आईडिया से काम करने पर मुख्यमंत्री ने जोर दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि आईजीआईएम्एस में मेडिकल कॉलेज फंक्शनल हो गया है इसलिए इस संस्थान का विस्तार होना चाहिए जिसमें 2500 बेड हो.
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले जहाँ प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में औसतन 39 मरीज महीने में आते थे वही इलाज की व्यवस्था और सुविधा का पुख्ता प्रबंध होने के बाद अब उनकी संख्या दस हजार से ज्यादा हो गयी है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले सरकारी अस्पतालों में बेड खाली रहता था लेकिन मरीजों की स्वास्थ्य के प्रति कंससनेस, बेहतर चिकित्सा और सुविधा मुहैया होने के बाद अब बेड खाली नहीं रह रहा है.
स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पाण्डेय की सक्रियता और उनके कामों की तारीफ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल को वर्ल्ड क्लास जबकि नालंदा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल को 2500 बेड का हॉस्पिटल बनाने का हमारा लक्ष्य है. मुख्यमंत्री ने कहा कि अगस्त 2006 में हमने तत्कालीन उप राष्ट्रपति भैरो सिंह शेखावत से सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवा मुहैया कराने की शुरुआत की और हर स्तर पर सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केन्द्रों में 24 घंटे सातों दिन इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित कराई, इसके बाद सरकारी अस्पतालों के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ा. उन्होंने कहा कि यहाँ का इंतजाम काफी अच्छा है, जहाँ 175 के करीब फैकल्टी हैं. मुख्यमत्री ने इस संस्थान के 100 एमबीबीएस की सीटों को 250 तक बढ़ाने की वकालत की. मुख्यमंत्री ने कहा कि एम्स पटना से इस संस्थान का चिकित्सा क्वालिटी के संदर्भ में प्रतिर्स्पद्धा होनी चाहिए कि कौन बेहतर है. उन्होंने कहा कि पहले लोग इलाज कराने के लिए बाहर जाने को विवश थे लेकिन अब ऐसी नौबत नहीं है. स्वेच्छा और सुविधा के ख्याल से अगर कोई बाहर इलाज कराने जाना चाहता है तो वह स्वतंत्र है. उन्होंने कहा की इस संस्थान का विस्तार हो रहा है और अब कई बीमारियों का यहाँ इलाज भी हो रहा है लेकिन लीवर वाले में देरी हो रही है, इस दिशा में तेजी से काम करने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग कॉलेज की स्थापना के साथ हर जिले में जीएनएम और पारा मेडिकल संस्थान और हर सब डिविजन में एएनएम स्कूल की स्थापना की जा रही है. मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में 3400 करोड़ रूपये के बजट का प्रावधान किया गया है इसलिए पैसे की कोई कमी नहीं है और स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना हमारा संकल्प है.
इस दीक्षांत समारोह में पदक और उपाधि हासिल करने वाले छात्रों से मुख्यमंत्री ने अपील की कि लोग भगवान के बाद डॉक्टर को ही दूसरा भगवान मानते हैं इसलिए पैसे के पीछे न भागकर वे मन में सेवा का भाव रखते हुए काम करें. उन्होंने कहा कि इस भावना से जो काम करेगा, उसकी प्रतिष्ठा काफी बढ़ेगी.
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस साल हमलोग चम्पारण सत्याग्रह का शताब्दी वर्ष मना रहे हैं. महात्मा गाँधी कहा करते थे कि यह धरती जरूरत को पूरा कर सकती है लेकिन लालच को नहीं, इसलिए जरूरत को ही प्रमुखता देनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर लोगों को पीने का स्वच्छ पानी और खुले में शौच से मुक्ति मिल जाए तो 90 प्रतिशत बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है. उन्होंने कहा कि समाजवादी चिंतक और नेता डॉ0 राम मनोहर लोहिया 50 के दशक में ही महिलाओं के लिए शौचालय निर्माण को लेकर आवाज उठाई थी और कहा था कि अगर महिलाओं के लिए शौचालय का निर्माण करा दे तो वे नेहरु जी का विरोध करना ही बंद कर देंगे. मुख्यमंत्री ने कहा कि आईजीआईएमएस नई ऊँचाइयों को प्राप्त करे, यही हमारी शुभकामना है.
समारोह को उप मुख्यमंत्री श्री सुशील कुमार मोदी, स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पाण्डेय, आईजीआईएमएस के निदेषक प्रो0 डॉ0 एन0आर0 विष्वास ने भी संबोधित किया. इस अवसर पर प्रधान सचिव स्वास्थ्य संजय कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष वर्मा, आरएमआरआई के निदेशक डॉ0 पी0के0 दास, आईजीआईएमएस के पूर्व निदेषक ए0के0 चौहान, डॉ0 दिलीप कुमार यादव, डॉ0 ए0के0 लाल, सेवानिवृत न्यायाधीश धर्मपाल सिंह, आईजीआईएम्एस के डीन डॉ0 एस0के0 शाही, डॉ0 एस0एन0 आर्या, डॉ0 ए0 हई, डॉ0 बसंत सिंह सहित कई प्रख्यात चिकित्सक एवं मेडिकल की उपाधी प्राप्त करने वाले छात्र-छात्रायें उपस्थित थीं.