दूल्हे ने कहा ‘दुल्हन चाहिए दहेज नही’

दूल्हे ने लौटाया दहेज
दूल्हे ने कहा ‘दुल्हन चाहिए दहेज नही’
आरा, 6 मार्च (ओ0पी0पांडेय की रिपोर्ट) । भोजपुर जिले का नाम एक बार फिर से दहेज विरोधी विवाह के आयोजन से सुर्खियों में है. जिले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दहेज विरोधी अभियान को सफलता मिलने लगी है. उनकी इस मुहिम को भोजपुर के युवा जोश के साथ आगे बढ़ा रहे हैं. वर्तमान घटना आरा नगर थाना क्षेत्र के आनन्द नगर मुहल्ले की है जहां एक साफ्टवेयर इंजीनियर ने बीती रात तिलकोत्सव में वधू पक्ष द्वारा लाये गए दहेज के सामान को लेने से इनकार कर दिया.
शहर के प्रतिष्ठित जैन स्कूल के अवकाश प्राप्त शिक्षक माहेश्वरी उपाध्याय के बेटे मयंक की शादी सोनवर्षा, बक्सर निवासी मनोज कुमार की बेटी अमृता से हो रही है. माहेश्वरी उपाध्याय बेटे मयंक की शादी बिना दहेज के कर रहे हैं. उनको पूरे परिवार से सहयोग मिल रहा है. इसलिए बीती रात उनके बेटे के तिलक समारोह में चढ़ाने के लिए जब टीवी, फ्रीज, वाशिंग मशीन एवं अन्य कीमती सामान लाया गया तो मयंक ने विनम्रता से उसे लौटा दिया. इस विवाह में आने के लिए उसने भोजपुर के आलाधिकारियों से लेकर प्रभारी मंत्री और मुख्यमंत्री तक को आमंत्रण-पत्र भेजा है. मयंक की शादी 8 मार्च को है. सोमवार को तिलकोत्सव बहुत ही साधारण तरीके से सत्यनारायण भगवान की पूजा कर की गयी.
मयंक के पिता माहेश्वरी उपाध्याय ने बताया कि उनकी दो पुत्रियों की शादी के दौरान दहेज के चलन के चलते आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा था. तभी से उन्होंने यह ठाना था कि पुत्र की शादी में दहेज नहीं लेंगे. उन्होंने बताया कि नीतीश कुमार की मुहिम की वजह से परिवार में भी एक माहौल बन गया जिससे निर्णय पर कायम रहने में उन्हें सहयोग मिला.
उधर वधु पक्ष से आये वधु के पिता मनोज कुमार से तिलक लौटाने पर उनकी प्रतिकिया ली गयी तो उन्होंने कहा कि वे सौभाग्यशाली हैं जो उनको मयंक जैसा दामाद मिला है. उन्होंने मीडिया से कहा कि वो खुशी पूर्वक अपने होने वाले दामाद को आशीर्वाद के रूप में परम्परा के तहत कुछ सामान लाये थे पर मयंक ने लौटा दिया, इसका उन्हें जरा भी दुःख नही है बल्कि बहुत खुश हैं. उन्होंने कहा कि समाज मे हर युवा को इस सोच से बदलाव लाना चाहिए.
वही दूल्हे मयंक से जब पटना नाउ ने पटना नाउ ने पूछा कि तिलक का आयोजन क्यो? मयंक ने कहा कि तिलकोत्सव में बस सत्यनारायण पूजा से वो शुभ कार्य शुरू कर रहे हैं, तिलक में कोई दहेज के समान वो नही ले रहे हैं. वही तिलक समारोह में पूजा करा रहे पंडित जी कहा कि तिलकोत्सव टीका लगा आशीर्वाद देने की रिवाज है इसलिए यह आयोजन होता है.
अब देखना है कि बिन दहेज की इस शादी में वर-वधु को आशीर्वाद देने कौन-कौन लोग या अधिकारी आते हैं. क्योंकि अगर ऐसे लोगों को प्रोत्साहन नही मिला तो फिर दहेज मुक्त विवाह के नारों और उसे बढ़ाने के लिए नये लोग सामने नही आएंगे.

 




 

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