जानिए अब इडली-डोसा, चटनी और चश्मा-दूरबीन पर कितना लगेगा GST

GST काउंसिल की 23वीं बैठक के बाद आम लोगों के साथ व्यापारियों के चेहरे पर मुस्कुराहट देखने की उम्मीद जगी है. BIA यानि बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष के पी एस केशरी ने इसपर खुशी जताई है. केशरी ने कहा कि कंपोजीशन स्कीम की सीमा मौजूदा एक करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ करने से काफी राहत मिलेगी. वित्त सचिव हसमुख अढिया ने स्पष्ट किया कि कंपोजीशन स्कीम लेने वाले व्यापारियों को सिर्फ करयोग्य वस्तुओं के टर्नओवर पर ही एक फीसद जीएसटी देना होगा. बता दें कि आम लोगों और व्यापारियों की तकलीफ दूर करने के लिए GST काउंसिल ने शुक्रवार को डिटर्जेंट, फर्नीचर, शैंपू सहित 215 वस्तुओं पर GST घटाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया. साथ ही AC व गैर-AC रेस्तरां में खाने पर जीएसटी 18 से घटाकर पांच फीसदी कर दिया गया. GST की नई दरें 15 नवंबर से प्रभावी होंगी. हालांकि GST दरें घटाने से करीब 20 हजार करोड़ रुपये की राजस्व हानि होने का अनुमान है. देखिए कौन सी चीजें हो गईं सस्ती- इन वस्तुओं पर अब 18 की बजाय 5% GST लगेगा- पफ्ड राइस चिक्की, पी नट चिक्की, सीसम चिक्की, रेवड़ी, तिलरेवड़ी, खाजा, काजू कतली, ग्राउंडनट स्वीट गट्टा और कुलिया. चटनी पाउडर. फ्लाई एश इन वस्तुओं पर अब 12 की बजाय 5% GST लगेगा- नारियल का बुरादा. कपास के बुने हुए कपड़े. इडली और डोसा. तैयार चमड़ा और चमड़े से बने सामान. फिशिंग नेट और फिशिंग हुक. इन वस्तुओं पर अब 18 की बजाय 12% GST लगेगा- गाढ़ा किया हुआ दूध रिफाइंड सुगर और सुगर

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च्युइंग गम, चॉकलेट के साथ मेकअप किट भी हुआ सस्ता

आपने सही पढ़ा. GST दरों में आम लोगों को बड़ी राहत मिली है. गुवाहाटी में जीएसटी काउंसिल की 23वीं बैठक में 178 वस्तुओं को 28 फीसदी जीएसटी की श्रेणी से हटाकर 18 फीसदी की श्रेणी में लाने का फैसला हुआ. यानि अब केवल 50 वस्तुएं ही 28 % GST की कैटेगरी में बच गई हैं. इतना ही नहीं, कारोबारियों को भी कई तरह के तोहफे गुवाहाटी में हुई इस बैठक में मिल गए. जिनकी कोई कर देनदारी नहीं बनती थी, उन्हें देर से रिटर्न दाखिल करने पर अभी तक 200 रुपये जुर्माना देना पड़ता था. लेकिन सरकार ने अब उसे घटाकर केवल 20 रुपये प्रतिदिन कर दिया है. परिषद की बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि रोजमर्रा की करीब 178 वस्तुओं पर कर 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है. साथ ही AC और Non AC  दोनों रेस्तरां के लिए जीएसटी बराबर कर दिया गया है. दोनों को ही केवल 5 फीसदी जीएसटी देना होगा. इस समय गैर-वातानुकलित रेस्तरांओं में बिल पर 12 फीसदी और वातानुकूलित रेस्तरां में 18 फीसदी जीएसटी लगता है. सितारा होटलों पर 18 फीसदी जीएसटी लगेगा और इन्हें इनपुट क्रेडिट टैक्स का भी लाभ मिलेगा. GST परिषद ने वेट ग्राइंडर और बख्तरबंद गाडिय़ों पर भी कर 28 से घटाकर 12 फीसदी कर दिया है. जेटली ने कहा कि छह वस्तुओं पर GST 18 से घटाकर 5 फीसदी किया गया है जबकि 8 वस्तुओं पर इसे 12 से कम कर 5 फीसदी किया गया है. छह वस्तुओं पर इसे 5 फीसदी से

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GST काउंसिल से आ सकती है राहत की खबर

गुवाहाटी में GST काउंसिल की 23वीं बैठक का आज दूसरा दिन है. उम्मीद है कि रोजाना इस्तेमाल की कई चीजों पर टैक्स स्लैब 28 फीसदी से कम किया जा सकता है. GST  के खिलाफ सड़क पर कांग्रेस के प्रदर्शन-हंगामे के बीच मोदी सरकार GST पर कुछ बड़ी राहत का ऐलान कर सकती है.  गुवाहाटी की बैठक में 28 फीसदी टैक्स स्लैब में शामिल 200 से ज़्यादा आइटम्स में से 80 फीसदी आइटम्स पर टैक्स घटकर 18 फीसदी किए जाने की संभावना है. जानकारी के मुताबिक शैंपू, फर्नीचर, इलेक्ट्रिक स्वीच और प्लास्टिक पाइप पर टैक्स रेट कम किया जाएगा. इसके अलावा कंपोजीशन स्कीम के तहत 1 फीसदी छूट और नॉन एसी रेस्टोरेंट पर टैक्स घटाने पर भी फैसला संभव है. छोटे कारोबारियों को राहत देने के मकसद से कंपोजिशन स्कीम में भी बदलाव की तैयारी है. बता दें कि GST की दरें और नियमों पर अंतिम फैसला लेने की जिम्मेदारी GST  काउंसिल को दी गयी है. काउंसिल के अध्यक्ष वित्त मंत्री अरुण जेटली हैं जबकि वित्त राज्य मंत्री के साथ 29 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों, दिल्ली और पुडुडुचेरी के नामित मंत्री इसके सदस्य हैं. बिहार के डिप्टी सीएम सह वित्त मंत्री सुशील मोदी भी बैठक से पहले ही कई महत्वपूर्ण सामानों पर टैक्स की दर कम करने की संभावना जता चुके हैं.

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अब फास्टैग युक्त होंगे सभी चार पहिया मोटर वाहन

1 दिसंबर, 2017 से बेचे जाने वाले सभी चार पहिया मोटर वाहनों पर होगा फास्टैग आने वाले एक दिसंबर से सभी चार पहिया वाहनों के लिए अपने विंड स्क्रीन पर फास्टैग लगाना अनिवार्य कर दिया गया है. केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एक राजपत्र अधिसूचना जारी की है, जिसके अनुसार 1 दिसंबर, 2017 के बाद बेचे जाने वाले सभी चार पहिया मोटर वाहनों पर वाहन के विनिर्माता या उसके अधिकृत डीलर, जैसा भी मामला हो, द्वारा फास्टैग फिट किए जाएंगे. बिना विंड स्क्रीन के ड्राइव अवे चेसिस के रूप में बेचे जाने वाले वाहनों के मामले में फास्टैग वाहन मालिक द्वारा इसके पंजीकरण कराए जाने से पूर्व फिट किए जाएंगे. इस बारे में, केन्द्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के संबंधित खंड में आवश्यक संशोधन कर दिया गया है. क्या है फास्टैग फास्टैग दरअसल एक ऐसा सिस्टम है जिसके जरिए आप देशभर के किसी भी टोल प्लाजा पर बिना रुके यात्रा कर पाएंगे. क्योंकि इसके जरिए टोल प्लाजा पर आपके वाहन के गुजरते ही ऑटोमेटिक ऑनलाइन पेमेंट हो जाएगा.   यानि आपको टोल प्लाजा पर टैक्स देने के लिए रुकना नहीं होगा. इसमें आप ऑनलाइन या कैश के जरिए रिचार्ज कर सकेंगे जो देशभर में कही भी उपल्बध होगा. इस सिस्टम से यात्रा में समय कम लगेगा और पेट्रोल-डीजल की बचत भी होगी. इसके पहले की गाड़ियों पर भी लोग किसी भी टोलप्लाजा से फास्टैग लगवा सकते हैं. देशभर के टोलप्लाजा पर एक लेन फैस्टैग वाली गाड़ियों के लिए खोल दिया गया है.

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कुछ मुश्किलें हुईं दूर, बाकी की उम्मीद जगी

व्यापारियों को परेशान कर रही GST की उलझनें कुछ हद तक दूर हुई हैं. 6 अक्टूबर को  22वीं बैठक में GST परिषद ने 1.5 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाली इकाइयों को हर महीने के बजाय तीन महीने में एक बार रिटर्न जमा करने की छूट दे दी है. छोटे कारोबारियों के लिए कंपोजिशन योजना की सीमा भी 75 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दी गई है. GST के लागू होने के बाद तीन महीने की अवधि में कारोबार जगत को पेश आ रही मुश्किलों पर चर्चा के लिए शुक्रवार को हुई GST परिषद की बैठक में ये फैसले लिए गए. बैठक में खास तौर पर छोटे एवं मझोले उद्योग और निर्यातकों को पेश आ रही समस्याओं पर गौर किया गया. केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि छोटे कारोबारियों और निर्यातकों को राहत देने के लिए कई रियायतें देने पर सहमति बनी है. उन्होंने बताया कि छोटे एवं मझोले कारोबारियों को अब मासिक रिटर्न नहीं भरना होगा. जिन इकाइयों का सालाना कारोबार 1.5 करोड़ रुपये तक है उन्हें अब तिमाही रिटर्न भरना होगा. अभी तक जीएसटी के तहत पंजीकृत हरेक कारोबारी को मासिक आधार पर अपना रिटर्न जमा करना होता था. लेकिन ऑनलाइन रिटर्न जमा करने के लिए बनाई गई व्यवस्था GST नेटवर्क पर भारी बोझ पडऩे और अनुपालन संबंधी अन्य शर्तों के चलते कारोबारी खासे परेशान होने लगे. इसका असर यह हुआ कि जुलाई की तुलना में अगस्त और सितंबर के महीनों में GST रिटर्न आंशिक रूप से कम हो गया. इसके अलावा कारोबार जगत के

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आप भी जानिए आज से लागू नए फॉरेऩ एक्सचेंज रेट

6 अक्टूबर से बदल रहे हैं भारतीय मुद्रा में इन विदेशी मुद्राओं के एक्सचेंज रेट आयातित एवं निर्यात वस्तुओं से संबंधित विदेशी मुद्रा विनिमय दर अधिसूचित  सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) की धारा 14  द्वारा प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBEC) ने अनुसूची-I और अनुसूची-II में दर्ज प्रत्येक विदेशी मुद्रा की नई विनिमय दर निर्धारित की है जो आयात और निर्यात वस्तुओं के संदर्भ में 6 अक्‍टूबर, 2017  से प्रभावी होंगी. अनुसूची- I क्रम संख्या. विदेशी मुद्रा भारतीय रुपये के समतुल्‍य  विदेशी मुद्रा की हर इकाई की विनिमय दर (1)     (2) (3) (ए)                 (बी)     (आयातित वस्तुओं के लिए) (निर्यात वस्तुओं के लिए) ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 51.95 50.15 बहरीन दीनार 178.60 166.90 कैनेडियन डॉलर 53.00 51.35 चाइनीज युआन 9.95 9.65 डैनिश क्रोनर 10.50 10.10 यूरो 77.85 75.20 हांगकांग डॉलर 8.45 8.20 कुवैत दीनार 223.10 208.45 न्यूजीलैंड डॉलर 47.50 45.80 नॉर्वेजियन क्रोनर 8.35 8.05 पौंड स्टर्लिंग 87.75 84.85 कतरी रियाल 18.40 17.40 सऊदी अरब रियाल 17.95 16.80 सिंगापुर डॉलर 48.50 47.00 दक्षिण अफ्रीकी रैंड 4.95 4.65 स्वीडिश क्रोनर 8.20 7.90 स्विस फ्रैंक 68.00 65.60 यूएई दिरहम 18.35 17.15 अमेरिकी डॉलर 65.95 64.30 अनुसूची- II क्रम संख्या विदेशी मुद्रा भारतीय रुपये के समतुल्‍य विदेशी मुद्रा की प्रति 100 इकाइयों की विनिमय दर (1)     (2) (3) (ए) (बी)     (आयातित वस्‍तुओं के लिए) (निर्यात वस्‍तुओं के लिए) 1. जापानी येन 58.75 56.80 2. केन्या शिलिंग 65.30 61.00  

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जल्द ही सड़कों पर दिखेंगी इलेक्ट्रिक कारें

EESL 10,000 इलेक्ट्रिक वाहन टाटा मोटर्स से खरीदेगी  अंतरराष्‍ट्रीय प्रतिस्‍पर्धी बोली के जरिये ठेका दिया गया  इलेक्ट्रिक वाहन दो चरणों में खरीदे जाएंगे, प्रथम 500 कारें नवंबर, 2017 तक सड़कों पर दौड़ने लगेंगी केन्द्र सरकार का उपक्रम एनर्जी एफिसिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (EESL) 10,000 इलेक्ट्रिक वाहन टाटा मोटर्स लिमिटेड से खरीदेगा. इस कंपनी का चयन एक अंतरराष्‍ट्रीय प्रतिस्‍पर्धी बोली के जरिये किया गया जिसका उद्देश्‍य भागीदारी में वृद्धि करना था. यह ठेका टाटा मोटर्स को मिला है और टाटा मोटर्स अब दो चरणों में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की आपूर्ति करेगा. EESL को प्रथम 500 E-कारों की आपूर्ति नवंबर 2017 में की जाएगी और शेष 9500 EV की आपूर्ति दूसरे चरण में की जाएगी. EESL आर्थिक विकास और पर्यावरणीय स्‍थायित्‍व में संतुलन बैठाते हुए उत्‍कृष्‍ट तकनीकी सोल्‍यूशंस को तेजी से अपनाने के उद्देश्‍य के साथ काम कर रहा है. अपनी इस विशिष्‍ट पहल के जरिये EESL मांग और बल्क खरीद के एकत्रीकरण के अपने अनूठे बिजनेस मॉडल के माध्‍यम से इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार सृजित करना चाहता है. यह एक ऐसी तकनीक है जिससे देश में E-मोबिलिटी का तेजी से बढ़ना तय है. टाटा मोटर्स लिमिटेड ने प्रतिस्‍पर्धी बोली में 10.16 लाख रुपये की न्‍यूनतम कीमत का उल्‍लेख किया जिसमें वस्‍तु एवं सेवा कर (GST) शामिल नहीं है. EESL द्वारा यह वाहन 11.2 लाख रुपये में मुहैया कराया जाएगा जिसमें जीएसटी और 5 साल की व्‍यापक वारंटी शामिल होगी. यह कीमत 3 साल की वारंटी वाली समान E-कार के वर्तमान खुदरा मूल्‍य से 25 फीसदी कम है. अंतरराष्‍ट्रीय प्रतिस्‍पर्धी बोली के जरिये 10,000 EV की

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तीन रूपए प्रति लीटर महंगा हुआ सुधा दूध

हर घर और हर आदमी की जिंदगी से सीधे जुड़ा दूध महंगा हो गया है.  कॉम्फेड ने शनिवार से सुधा दूध के दाम बढ़ाने की घोषणा की है. इसी के साथ किसानों के दूध के दामों में भी वृद्धि की गई है. अब किसानों को दूध के पेमेंट में एक से चार रूपये और सभी क्वालिटी के दूध की कीमतों में एक से तीन रूपये प्रति लीटर ज्यादा मिलेगा. नवरात्रि के पहले ही दिन  राज्य सरकार के सहकारिता विभाग के नए  निर्णय के बाद अब बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (कॉम्फेड)  ने सभी क्वालिटी के दूध के कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है. अब सुधा दूध खरीदने वालों को प्रतिलीटर एक से तीन रूपये ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे . एक तरफ कॉम्फेड  ने सभी क्वालिटी के  सुधा दूध की कीमतों में एक रूपये से तीन रूपये तक प्रति लीटर वृद्धि कर दी है वहीँ किसनो को दूध के पेमेंट में एक रुपये से चार रूपये तक की बढ़ोतरी भी किया गया है . एक तरह से देखा जाये तो  कॉम्फेड  ने किसानो को दूध के पेमेंट में वृद्धि कर दूध के बाजार मूल्यों को बैलेंस करने का काम किया है . हालाँकि फ़िलहाल कॉम्फेड ने सिर्फ दूध की कीमतों में ही बढोत्तरी की है वहीँ अन्य दुग्ध उत्पादों के दम अभी यथावत ही रखा है. कॉम्फेड के जनरल मैनेजर राजीव वर्मा ने बताया कि किसानो को उनके दूध के पेमेंट में  एक रुपये से चार रूपये तक वृद्धि की गयी है और इसके साथ ही सुधा के सभी तरह के दूध

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मेयर के सगुन ने कर दिया भावुक

जब मेयर ने दिया सगुन तो मॉल ओनर हुए भावुक आरा में ross & rock मार्ट का हुआ भव्य उद्घाटन अक्सर आपने सुना होगा कि मुख्य अतिथि को कुछ पसन्द आये तो आयोजक उसे उपहार स्वरूप भेंट दे देते हैं लेकिन आज आरा की मेयर प्रियम ने उसे उपहार स्वरूप न लेकर उसे खरीद कर आयोजक को भावुक कर दिया. मामला एक कपड़े के मॉल के उद्घाटन का है. बाजारवाद के दौर में नित नए प्रतिष्ठानों के बीच शुक्रवार को आरा के बाबू बाजार में Ross & Rock मार्ट भी बाजार में उतर गया. बाबू बाजार स्थित इस इस मार्ट का उद्घाटन आरा की मेयर श्रीमती पियम,उपमेयर और पूर्व मेयर सुनील यादव ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया. कपडे के इस मार्ट में किड्स, लेडिज, और जेंट्स के कई रेंज के कपड़े उपलब्ध है. मार्ट के ओनर रविशंकर प्रसाद और शम्भू प्रसाद ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि उनके इस मार्ट का मुख्य लक्ष्य साधारण और गरीब परिवार को भी कम दाम में क्वालिटी के कपड़े उपलब्ध कराना है. किड्स और जेंट्स के कपड़े यहां 100-2000 रुपये तक उपलब्ध हैं. जबकि महिलाओं के कपड़ो का रेंज 200 से 10,000 रुपये तक का है. आज ओपनिंग की वजह से अभी मार्ट में कोई ग्राहकों के लिए ऑफर नही है, जबकि अमूमन ग्राहक पर्व-त्योहारों के मौके पर ऑफर खोजते हैं. शभु प्रसाद ने कहा कि कल से ही हम दशहरे में ही ऑफर लागू कर देंगे जो आने वाले दीपावली और छठ पर भी अलग-अलग रूप में ग्राहकों को

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सरकार के रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा मिलता है पेट्रोल-डीजल से

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर केन्द्र सरकार के खिलाफ लोगों की नाराजगी बढ़ती जा रही है. इधर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है पेट्रोल और डीजल की कीमतें ओपन मार्केट से तय होती है. यानि मुख्यमंत्री इसपर साफ-साफ कुछ भी बोलने से बचते दिखे. पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे में लाने के सवाल पर सीएम नीतीश ने कहा कि हमलोगों को यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि सरकार के रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा इससे प्राप्त होता है जो कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च होता है, जहां तक पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के तहत लाने का प्रश्न है वो केंद्र सरकार और जीएटसी काउंसिल को तय करना है. सीएम की बातों से ये भी साफ हो गया कि वे राज्य सरकार को पेट्रो प्रोडक्ट्स से मिलने वाले वैट के कारण भी इसमें कोई परिवर्तन नहीं चाहते. बता दें कि पेट्रोल-डीजल फिलहाल GST के दायरे से बाहर हैं. इसकी मुख्य वजह सरकार को होने वाली मोटी कमाई है. पेट्रोल-डीजल की कीमत में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन से लेकर राज्यों का वैट तक शामिल है जिसके कारण इनकी प्रति लीटर कीमत लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है.

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