पटना की काजल ने रेखा के अंदाज में डांस कर धमाल कर दिया 

काजल ने किया कमाल चर्चित भोजपुरी गायन प्रतियोगिता में मचाई धूम  पटना की बेटी ने मुंबई में जबरदस्त परफॉरमेंस देकर कमाल कर दिया.  टीवी कार्यक्रम “ सारे गा  मा पा रंग पुरवईया ” चर्चित भोजपुरी गायन प्रतियोगिता में खगौल (पटना) की मंथन कला परिषद की कलाकार काजल कुमारी ने अपना स्थान बना कर राज्य का नाम रौशन किया है . इस प्रतियोगियता की निर्णायक मालिनी अवस्थी ने अपने कॉमेंट में कहा कि फिल्म अभिनेत्री रेखा की डांस और अदा का जवाब नहीं, इसी अंदाज में तुम ने अपनी गायकी और अभिनय का परिचय देकर कमाल कर दिया. पिछले दिनों बिग गंगा चैनल पर जारी सा रे गा मा एवं रंग पुरवईया भोजपुरी के मेगा शो में अपना स्थान बनाने के बाद काजल टॉप टेन तक पहुँचने में कामयाब रही. काजल ने बताया कि इस कार्यक्रम के दौरान सा रे गा मा के सेट पर जब इस के प्रतियोगियों के साथ सबों का दिल जीतने वाले छोटे भगवान जैश से मिला तो मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था, इस से मेरा हौसला भी बढ़ा. पटना सिटी निवासी उपेन्द्र ठाकुर की बेटी है काजल. उपेन्द्र ठाकुर हेयर सैलून चलाते हैं. इस से पहले काजल ने पटना दूरदर्शन के स्वर झंकार कार्यक्रम,बिहार युवा महोत्सव के अलावा पुरी, कटक,मुंबई सहित कई राज्यों के महोत्सव और प्रतियोगिताओं में शामिल हो कर पुरस्कार अर्जित करने के साथ दर्शकों का दिल जीतने में कामयाबी हासिल की है . आगे भी चाहती है कि पढाई और शादी के बाद भी यह सिलसिला टूटे नहीं . इस काम में

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आप कहां हैं?

आरा रंगमंच द्वारा स्थानीय वीर कुँवर सिह मैदान में संध्या 5 बजे नुक्कड नाटक “आप कहां हैं ?” की प्रस्तुति हुई. इस नाटक में केन्द्र व राज्य सरकार की कार्य शैली पर व्यंग्य व समसामयिक घटना बाबा राम रहीम की करतूतों की पोल खोल जनता के बीच प्रदर्शित किया गया. नाटक में कई भूमिकाओं में अशोक मानव, अनिल सिंह, जितेंद्र कुमार लड्डू, भरत आर्य और सुधीर शर्मा ने जीवंत रोल किया. नाटक का लेखन सुधीर शर्मा ने किया था. संयोजक अनिल कुमार तिवारी और मनोज श्रीवास्तव ने किया था. आरा रंगमंच ने प्रत्येक रविवार को कई महीनों से नुक्क्ड़ नाटक का एक सिलसिला प्रारम्भ किया है.   आरा से ओपी पांडे

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PM को ये बेहतरीन चीजें गिफ्ट करेंगे युवा डिजायनर

फैशन डिजाइनर अमरेश का नया प्रयोग योजनाओं को बनाया फैशन का डिजाइन अजमेर से पटना नाउ की स्पेशल लाइव रिपोर्टिंग       अजमेर के पंचशील के वैशाली नगर में है एक छोटा सा फैशन स्कूल- EF THE SCHOOL. पिछले पांच सालों से फैशन के क्षेत्र में काम कर रहे युवा फैशन डिजाइनर अमरेश सिंह इसे चलाते हैं. यह फैशन स्कूल इसी साल खुला है और यहां युवाओं का एक दल असीम ऊर्जा के साथ काम करता है. देखने मे सभी कम उम्र के जरूर दिखते हैं पर काम उम्र से ज्यादा परिपक्वता के साथ दिखता है. यहाँ काम करने वाले युवा डिजाइनरो और छात्रों ने मिलकर प्रधानमंत्री मोदी के लिए खादी के रुमाल तैयार किया है. अब आप यह सोच रहे होंगे कि खादी के इस रुमाल में ऐसा क्या है जो फैशन डिजाइनर इसे बना रहे हैं. जी हां यह खास इसलिए है क्योंकि यह रुमाल आम रुमाल से भिन्न है. एक तो PM के पसंदीदा कपड़े खादी का है और 12 महीने के लिए 12 अलग-अलग रंगों में यह बनाया गया है. रंगों का चयन मोदी के पहनने वाले परिधानों के रंगों को ध्यान में रखकर किया गया है. इन सभी रूमालों पर भारत सरकार के कई योजनाओं को अंकित किया गया है. बेटी पढ़ाओ,बेटी बचाओ, स्वच्छ भारत मिशन, कौशल विकास योजना, मुद्रा योजना, सहित कई अन्य योजनाओं को अंकित किया गया है. ये है तैयार करने वाले युवा डिजाईनर रुमाल को तैयार करने में अमरेश कुमार सिंह फैशन डिजाइनर(MSc फैशन टेक्नोलॉजी), चंचल वर्मा फैशन डिजाइनर(MSc फैशन टेक्नोलॉजी),

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‘अश्लील गायिका’ ने खुले मंच से मांगी माफी

संस्कार भारती के संस्कार की खुली पोल कृष्ण रूप सज्जा में अतिथि बनी अश्लील गायिका “खुशबू उत्तम” अम्बा ने किया विरोध, खुले मंच से मांगी माफी कहा-‘आज के बाद नही गाऊँगी अश्लील गाना’ लेकिन दर्शक भी बंद करें अश्लील गाना सुनना भाजपा की सांस्कृतिक इकाई कहे जाने वाली संस्कार भारती ने संस्कारों की जैसे होली ही जला दी. भारतीय संस्कृति और संस्कारों की बात करने वाली संस्कार भारती ने आरा नागरी प्रचारिणी में होने वाले बाल श्रीकृष्ण रूप सज्जा, नृत्य एवं गायन प्रतियोगिता में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में अश्लीलता की महारानी कहे जाने वाली भोजपुरी गायिका खुश्बू उत्तम को बुला अपने संस्कारो को मटीयापलीत कर दिया. गौरतलब है कि श्रीकृष्ण रूप सज्जा का यह प्रतियोगिता हर वर्ष पूरे देश मे इसकी हर शाखाएं आयोजित करती हैं. लेकिन इस वर्ष संस्कार भारती ने अश्लील गायिका को बुला संस्कार भारती को कलंकित कर दिया. खुश्बू उत्तम जैसे गायक को ऐसे कार्यक्रम में बुलाने का विरोध करते हुए अम्बा और भोजपुरी बचाओ अभियान के सदस्यों ने खुश्बू उत्तम हाय हाय और वापस जाओ के नारों से कार्यक्रम को बीच मे ही रोक दिया. इस दौरान आयोजको के काफी मान-मनौवल के बाद भी कार्यकर्ता विरोध करते हुए अड़े रहे. कर्यक्रम के बीच मे इस तरह के विरोध के बाद वहाँ हड़कम्प मच गया और प्रतिभागियों के परिजन और दर्शको के बीच भागमभाग का माहौल कायम हो गया. भोजपुर में अपना विरोध देखते हुए बचाव करते हुए गायिका ने मंच से सार्वजनिक रूप से अश्लील गाये हुए गानो के लिए माफी मांगा. क्या

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कमाल है… इसने तो रुला ही दिया

आसाढ़ का एक दिन नाटक ने किया भावुक बलिया के कलाकारों ने किया ‘आसाढ़ का एक दिन’ का मंचन कालिदास के प्रति मल्लिका के समर्पण की कहानी कहता आषाढ़ का एक दिन नाटक आसाढ़ का एक दिन के एक दृश्य में कलाकार बक्सर में आचार्य शिवपूजन सहाय की स्मृति में आयोजित सम्मान समारोह व सांस्कृतिक संध्या पर आषाढ़ का एक दिन नाट्य का मंचन किया गया. शहर के वृंदावन वाटिका के हॉल में आयोजित नाटक को देखने के लिए लोग जुटे रहे. हॉल में संकल्प की ओर से मोहन राकेश द्वारा लिखित और आशीष त्रिवेदी द्वारा निर्देशित नाटक का मंचन शनिवार को देर शाम शुरू हुए नाटक में कालीदास व मल्लिका की अद्भूत प्रेमकथा के मंचन से माहौल ऐसा बना कि कला व नाटक प्रेमियों के लिए आषाढ़ का एक दिन यादगार बन गया. मल्लिका का यह संवाद ‘मैंने भावना से एक भावना का वरण किया है, वास्तव में मैं अपनी भावना से प्रेम करती हूं…’ जब दर्शकों तक पहुंचा तो अंतर्मन तक भींग गया. मंचन के दौरान कई बार दर्शक भावुक हो गए. नाटक में कालिदास के जीवन को सार्थक करने और उन्हें बुलंदियों पर ले जाने के लिए मल्लिका ने काफी त्याग किया. नाटक ‘आसाढ़ का एक दिन’ प्रस्तुत करते कलाकार मल्लिका का जीवन पीड़ा के चरमोत्कर्ष पर पहुंच जाता है और कालिदास यह कहते हुए कि समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता उसे छोड़कर चल देता है. इस समय मल्लिका की विलख ने दर्शकों को भावुक कर दिया. कालिदास की भूमिका में अमित पांडेय तथा मल्लिका की

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‘बाबूजी का पासबुक’

कला जागरण ने शनिवार को पटना के कालिदास रंगालय में मधुकर सिंह लिखित हास्य नाटक “बाबूजी का पासबुक” का मंचन किया. जिसकी परिकल्पना और निर्देशन सुमन कुमार ने की. यह नाटक ताम्र पत्र से सम्मानित एक स्वतन्त्रता सेनानी के परिवार के इर्द-गिर्द घूमता है, जिसे उन्हीं की जुबानी कहा भी गया है. नौकरी के बाद अवकाश प्राप्त व्यक्ति किस तरह वॉलीबॉल की तरह मारा फिरता है यह नाटक बखूबी दर्शाता है. बाबूजी के तीन बेटे और बहुएं हैं जो उनके पासबुक पर निगाह टिकाये रखते हैं और तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर उसे पाने की नित जुगाड़ में रहते हैं. यही नहीं, बाबूजी की बेटियाँ और दामाद भी एक सूत्री काम की तरह इसी जुगाड़ में रहते है. परिवार के किसी सदस्य को उनकी हेल्थ और बीमारी की फ़िक्र नहीं रहती. समाज में व्याप्त इस हैवानियत और नीच सोंच को हास्य-व्यंग्य के जरिये नाटक अपने सफल प्रस्तुति के साथ कह जाता है और वह भी सहजता से छूकर तब और गुजरता है जब सुमन कुमार जैसे सधे निर्देशक इसकी कमान संभालते हैं. संवेदनाओं को हास्य-व्यंग्य के जरिये दर्शकों में पिरोने का यह श्रेय निर्देशक को जाता है. कालकारो ने भी अपने अभिनय से निर्देशक को निराश नहीं किया. विभिन्न भूमिकाओं में अखिलेश्वर प्रसाद सिन्हा, सरविंद कुमार, नितीश कुमार, नितेश कुमार चार्ली,तृप्ति कुमारी, सृष्टि मंडल, मिथलेश कुमार सिन्हा,गुंजन कुमार,विभा सिन्हा और रंगोली पाण्डेय ने अपने अभिनय से नाटक के पात्रों को जीवंत कर दिया. वही मंच के पीछे उपेंद्र कुमार और हीरालाल ने मेकअप, रोहित कुमार ने प्रस्तुति संयोजन, गुंजन कुमार और

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मिथिला में शास्त्रार्थ परंपरा की पुनर्वापसी

बिहार के मधुबनी में चल रहे नौ दिवसीय सौराठ सभा में मिथिलालोक फाउंडेशन द्वारा मिथिला की प्राचीन शास्त्रार्थ परंपरा को पुनर्जीवित करते हुए एक संगोष्ठी के जरिए बौद्धिक-विमर्श की शुरुआत की गई. इस विमर्श में मिथिला क्षेत्र के अनेक लब्धप्रतिष्ठित विद्वानों ने विभिन्न समसामयिक विषयों पर न केवल विचार-विमर्श किया बल्कि इस परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प भी लिया. इस साल सौराठ सभा के उद्घाटन कार्यक्रम में ही मिथिलालोक फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ. बीरबल झा ने शास्त्रार्थ परंपरा को पुनः शुरू करने का आह्वान किया था. उल्लेखनीय है कि मिथिला में शास्त्रार्थ की परंपरा हज़ारों साल पुरानी है जब देश के विभिन्न क्षेत्रों के विद्वान धर्म, न्याय, नीति, समाज व अन्य प्रासंगिक विषयों पर एकजुट होकर विचार-विमर्श किया करते थे और इस संगोष्ठी से निकले निष्कर्ष को समूचे देश में स्वीकार किया जाता था. इसी परंपरा के तहत यहाँ 8 वीं सदी में हुआ मंडन मिश्र के साथ आदि शंकराचार्य का शास्त्रार्थ बहुत प्रसिद्ध है जिसने न केवल भारतीय चिंतनधारा को बदलकर रख दिया था बल्कि इस शास्त्रार्थ में शंकराचार्य की विजय ने भारत को कर्मकांड से ज्ञानकांड की तरफ मोड़ दिया. यह शास्त्रार्थ कितना महत्वपूर्ण था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज भी भारतीय जनमानस में इसकी स्मृति बनी हुई है. असल में, इस देश में वैचारिक मतभेद कभी संघर्ष या टकराहट में नहीं तबदील हो सके, तो इसका बड़ा कारण यही था कि लोग विचार-विमर्श करने और एक दूसरे के पक्षों को समझने के लिए तत्पर रहते थे. आज देश में जब

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प्रधानमंत्री से मिले उस्ताद अमजद अली खान

मशहूर सरोद वादक अमजद अली खान ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की. उन्होंने भारतीय शास्‍त्रीय संगीत की 20 महान हस्तियों के जीवन और योगदान पर लिखी अपनी पुस्‍तक “मास्‍टर ऑन मास्‍टर्स” की प्रति प्रधानमंत्री को भेट की.

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आरा में प्रतिभाओं का सम्मान समारोह

patnanow रिपोर्टर ओ पी पाण्डेय को मिला भोजपुर का “नाट्य-पुत्र” सम्मान मनोज सिंह को भोजपुरी सम्मान से नवाजा गया मंगलेश तिवारी को साहसिक पत्रकारिता के लिए सृजन-सम्मान नेशनल साइंटिफिक रिसर्च एंड सोशल एनालिसिस ट्रस्ट के 45 दिवसीय कार्यशाला का रविवार को आरा के बड़ी मठिया स्थित कार्यालय में समापन हुआ. इसके साथ ही समर कैम्प का शुभारम्भ किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत दीप प्रज्ज्वलित कर मुख्य अतिथि विधान पार्षद राधाचरण साह, संस्था के अध्यक्ष श्याम कुमार, राज्य पुरस्कार प्राप्त रुमा वर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता हरेंद्र सिंह ने संयुक्त रूप से किया. मुख्य अतिथि ने कहा कि समाज में महिलाओं को सशक्त करने की इस संस्थान के प्रति कृत संकल्पित हैं और इस सकरात्मक कार्य के लिए वे सरकारी अनुदानों को भी संस्था को उपलब्ध कराने की कोशिश करेंगे. समापन समारोह रंगारंग कार्यक्रम के साथ सम्पन्न हुआ. प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि ने सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया. संस्था की ओर से पिछले 45 दिनों से कशीदाकारी और ब्यूटीशियन की ट्रेनिग दी जा रही थी. जिसमे 120 लड़िकयों और महिलाओं ने भाग लिया था. यह प्रशिक्षण महिलाओं को स्वावलंबन और महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से दिया जा रहा है. मंच संचालन करते हुए पत्रकार मंगलेश तिवारी ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐसे प्रशिक्षण उपलब्ध कराना अच्छी पहल है. साथ ही उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने के नाम पर सरकारें खर्च तो कर रही हैं. लेकिन फिर भी महिलाएं अभी कमजोर है. लेकिन यह एक ऐसी संस्था है जो किसी भी सरकारी सहयोग के बिना चलती

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इप्टा के 75वें साल के आग़ाज़ पर जनगीतों का उत्सव

इप्टा के 75वें वर्ष की शुरूआत के मौके पर पटना इप्टा ने विषेष कार्यक्रम ‘‘आग़ाजः जनगीतों का उत्सव़’’ का आयोजन किया गया है. यह विशेष कार्यक्रम 25 मई, 2017 को पटना के प्रेमचंद रंगशाला परिसर, राजेन्द्र नगर में किया जायेगा. ‘आग़ाज़ः जनगीतों का उत्सव’ कार्यक्रम के अंतर्गत इप्टा के कलाकार जनवादी गीतों की प्रस्तुति करेंगे और इप्टा के 74 साल के सांस्कृतिक संघर्ष से दर्शकों को रू-ब-रू करायेंगे. इसके तहत वरिष्ठ संगीतकार सीताराम सिंह के संयोजन में दस दिवसीय ‘इप्टा संगीत कार्यशाला’ में तैयार किये गये चुनिन्दा जनगीतों की प्रस्तुति की जायेगी. नाटक, गीत, संगीत, नृत्य आदि माध्यमों से आम आदमी तक जुड़ाव के मकसद से 25 मई 1943 को इप्टा की स्थापना हुई थी. अपने स्थापना काल से ही इप्टा ने रंगमंच, संगीत, सिनेमा, साहित्य आदि को आम आदमी के सरोकार से जोड़ने का काम किया है. अपने 74 सालों के इतिहास में इप्टा ने यह साबित किया है संगीत अक्सर हमें आज़ाद करता है, हदें तोड़ता है, लोगों को साथ लाता है, हारे को उठने की ताकत देता है और संघर्ष का जज़्बा जगाता है. इप्टा के गीतों की खासियत रही है कि ये जोशीले हैं, लोगों को प्रेरित करते हैं. इप्टा के जनसंगीत में ग्रामीणता का पुट है तो शहरी नफासत भी. इप्टा सांस्कृतिक आन्दोलन के पहले भारतीय संगीत में कोरस यानि सामूहिक गान का महत्व कम था. ‘‘आग़ाज़ः जनगीतों का उत्सव’’ इप्टा की इसी परंपरा को दशकों के बीच प्रस्तुत करने का एक प्रयास है. कार्यक्रम में मुंबई इप्टा से जुड़े संगीत निर्देशक कुलदीप सिंह मुख्य अतिथि होंगे.

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